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मोदी राज में कामयाबी की राह पर डिजिटल इंडिया: यूपीआई लेनदेन 90 प्रतिशत बढ़कर 26.19 लाख करोड़ रुपये पर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया अभियान को जबरदस्त कामयाबी मिली है। यूक्रेन संकट और कोरोना महामारी के दौरान रुपये के ऑनलाइन लेनदेन और पेमेंट में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2022 के शुरुआती तीन महीने जनवरी से मार्च के बीच यूपीआई के माध्यम से 26.19 लाख करोड़ रुपये के कुल 14.55 अरब से ज्यादा लेनदेन हुए। ट्रांजेक्शन का यह आंकड़ा 2021 की समान अवधि से करीब 99 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 90 प्रतिशत ज्यादा है।

वर्ल्डलाइन की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से मार्च के बीच डेबिट-क्रेडिट कार्ड, मोबाइल वॉलेट, प्रीपेड कार्ड और यूपीआई पी2एम (पर्सन टु मर्चेंट) जैसे भुगतान माध्यमों से 10.25 लाख करोड़ रुपये के कुल 9.36 अरब लेनदेन हुए। इसमें यूपीआई पी2एम लेनदेन उपभोक्ताओं के बीच सबसे पसंदीदा भुगतान माध्यम के रूप में उभरा है। इसकी बाजार हिस्सेदारी मात्रा के हिसाब से 64 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 50 प्रतिशत है।

यूपीआई से लेनदेन के लिए मात्रा के हिसाब से फोनपे, गूगलपे, पेटीएम पेमेंट्स बैंक, अमेजन पे, एक्सिस बैंक के एप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ। मात्रा के हिसाब से फोनपे, गूगल पे, पेटीएम की हिस्सेदारी 94.8 प्रतिशत, जबकि मूल्य के हिसाब से तीनों एप का हिस्सा 93 प्रतिशत रहा।

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने डिजिटल पेमेंट के बढ़ावे और डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए कई प्रयास किए हैं। डालते हैं एक नजर-

अब UPI से ऑटोमैटिक रेकरिंग पेमेंट की सुविधा
रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के मद्देनजर अब यूपीआई के जरिए भी रेकरिंग भुगतान करने की सुविधा प्रदान कर दी है। इस सुविधा के तहत उपभोक्ता और मर्चेंट निकायों के बीच एक सहमति बनती है और महीने की तयशुदा तारीख पर निश्चित बकाया राशि का खुद भुगतान हो जाता है। 

सुरक्षित पैमेंट के लिए ई-मैंडेट को मिली मंजूरी
अभी तक यह सुविधा डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, प्रीपेड भुगतान इंस्ट्रूमेंट और वॉलेट के जरिए भुगतान पर उपलब्ध थी। रिजर्व बैंक ने एक अधिसूचना में कहा कि अब रेकरिंग भुगतान की सुविधा यूपीआई के लिए भी उपलब्ध होगी। रिजर्व बैंक ने कहा, ‘यूपीआई के जरिए रेकरिंग भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिये ई-मैंडेट की मंजूरी दी जाती है।’

यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क खत्म
मोदी सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए रुपे कार्ड और यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर एमडीआर शुल्क (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) को खत्म कर दिया है। इससे लोगों को यह फायदा होगा कि उन्हें ट्रांजेक्शन करते समय कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। इस कार्ड पर ग्राहकों को मुफ्त में 10 लाख रुपये की कीमत का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर दिया जाता है।

RTGS और NEFT के माध्यम से लेनदेन पर अब नहीं लगेगा कोई चार्ज
प्रधानमंत्री मोदी बैंकिंग सिस्टम में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसी मुहिम के तहत मोदी सरकार ने नेट बैंकिंग में RTGS और NEFT के माध्यम से भुगतान करने पर या पैसों के लेनदेन पर शुल्क खत्म करने का फैसला किया है। मोदी सरकार के फैसले के बाद आरबीआई RTGS और NEFT पर बैंकों से अब प्रोसेसिंग और टाइम वैरिंग चार्ज नहीं वसूलेगा। हालांकि बैंक ग्राहकों से इस फीस से ज्यादा शुल्क वसूलते हैं। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के मुताबिक आरबीआई की प्रोसेसिंग फीस और टाइम वैरिंग चार्ज खत्म होने के बाद बैंक भी ग्राहकों से कम शुल्क लेंगे। RTGS से बड़ी धनराशि एक से दूसरे खाते में तत्काल स्थानांतरित करने की सुविधा है, वहीं NEFT के जरिये अधिकतम दो लाख रुपये तत्काल किसी भी खाते में डाले जा सकते हैं। इन दोनों पर इंटरनेट बैंकिंग और बैंक शाखा का शुल्क लगता है।

अब छोटे सेविंग एकाउंट्स पर चेक जैसी सुविधाएं मुफ्त
मोदी सरकार ने छोटे खाताधारकों के हित में एक और बड़ा फैसला किया है। अब प्राथमिक बचत खाताधारकों यानी जीरो बैलेंस एकाउंट वालों को चेकबुक और अन्य सुविधाएं मुफ्त में मिलेंगी। पहले सामान्य बचत खातों को ही चेक जैसी सुविधाएं निशुल्क मिलती थीं और इन खातों में न्यूनतम राशि रखने की जरूरत होती है। छोटे खाताधारकों को बैंक अब रुपे कार्ड और अन्य सुविधाएं देने से भी इनकार नहीं कर सकते हैं।

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