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मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रॉक होगा Uniform Civil Code, बीजेपी शासित राज्यों में बन रही सहमति, उत्तराखंड, गुजरात के बाद मध्यप्रदेश भी तैयार, क्या है यह यूसीसी और देश को क्या होगा इससे फायदा

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संविधान के भाग चार में जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किया गया है, उसे अब लागू करने के लिए बीजेपी कटिबद्ध है। इसी दिशा में भाजपा शासित कुछ राज्य सरकारों ने कदम बढ़ा दिए हैं। उत्तराखंड की पहल के बाद गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक की सरकारों ने यूनिफॉर्म सिविल कोड अपने राज्यों में लागू करने के लिए एक्सपर्ट कमेटियों का गठन करके ड्राफ्ट की तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीजेपी के कोर इश्यूज में शामिल यूनिफॉर्म सिविल कोड के लागू होने से देश में लैंगिक समानता कायम होगी। इस कोड के जरिए देश में सभी जाति और धर्म की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हो सकती है। पीएम मोदी के नेतृत्व में 2014 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद बीजेपी संवैधानिक प्रक्रिया को अपनाते हुए अनुच्छेद 370 को हटाने और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के वादे को पूरा कर चुकी है। अब उसके लिए तीन बड़े वादों में से सिर्फ यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा ही बचा है, जिसे लागू करने के लिए राज्यों के साथ केंद्र भी गंभीरता से मंथन कर रहा है।

तीन तलाक पर कानून बनने के बाद समान नागरिक संहिता को लागू करने पर तेज हुई बहस
भारतीय जनता पार्टी काफी वर्षों से समान नागरिक संहिता को लागू करने के पक्ष में है। पहली बार 1989 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता को जगह दी थी। तभी से इस पर बहस हो रही है। 2014 और 2019 के घोषणापत्र में भी बीजेपी ने इसे शामिल किया। बीजेपी ने दिल्ली में अप्रैल 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में पार्टी मुख्यालय में इस संकल्प पत्र को जारी किया। ऐसे में पिछले पांच साल से देश का एक बड़ा तबका समान नागरिक संहिता को लागू करने की मांग कर रहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2017 में मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक बोल कर शादी को खत्म करने की परंपरा (तलाक-ए-बिद्दत) पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए इसे असंवैधानिक बताया। इसके बाद जुलाई 2019 में संसद से तीन तलाक के दंश से छुटकारा देने के लिए मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) कानून बना। इसके जरिए तीन तलाक को अवैध मानते हुए अपराध माना गया। तीन तलाक पर संसद से कानून के बनने के बाद सियासी हल्कों से लेकर आम लोगों के बीच यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने पर बहस तेज हो गई।उत्तराखंड: सीएम की पहल पर कोड पर मसौदा बनाने के लिए तीन लाख से अधिक सुझाव मिले
केंद्र सरकार की ओर से तो समान नागरिक संहिता लाने की कवायद के बीच बीजेपी शासित कुछ राज्यों में इस साल यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की पहल पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। सबसे पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कोड का मसौदा बनाने के लिए 27 मई 2022 को रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया। ये समिति इस पर तेजी के काम करते हुए राज्य के लोगों से जनसंवाद करते हुए राय ले रही है। समिति ने तीन लाख से अधिक सुझाव प्राप्त कर लिए हैं और इसके बाद वह इन सुझावों पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने का काम करेगी। उत्तराखंड में अगले साल मई तक समान नागरिक संहिता की ड्राफ्ट रिपोर्ट आने की उम्मीद है।

गुजरात: विधानसभा चुनाव से पहले सीएम भूपेंद्र पटेल ने विशेषज्ञ समिति बनाई
गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेल ने अक्टूबर में यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्णय लिया। बीजेपी शासित राज्यों में उत्तराखंड के बाद गुजरात दूसरा राज्य है, जिसने यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया है। बीजेपी ने 26 नवंबर को गुजरात चुनाव के लिए संकल्प पत्र जारी किया था। उसमें भी बीजेपी ने गुजरात में जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का वादा किया है। नवंबर में हिमाचल प्रदेश में हुए चुनाव के लिए जारी संकल्प पत्र में भी बीजेपी ने समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रचार के दौरान कहा था कि राज्य में सत्ता वापसी पर बीजेपी इसे लागू करेगी।मध्य प्रदेश: सीएम शिवराज बोले कि एक देश में दो विधान क्यों चलें, लागू करेंगे कोड
मध्य प्रदेश में भी बीजेपी यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने की तैयारी में है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक दिसंबर को समान नागरिक संहिता के लिए कमेटी बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने सेंधवा में कहा कि वे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के पक्ष में हैं। मध्यप्रदेश में इसके लिए कमेटी बनाई जा रही है। उन्होंने कहा, अब समय आ गया है कि भारत में एक समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए। एक से ज्यादा शादी क्यों करे कोई, एक देश में दो विधान क्यों चलें, एक ही होना चाहिए। समान नागरिक संहिता में एक पत्नी रखने का अधिकार है तो एक ही पत्नी होनी चाहिए। इससे पहले इसी वर्ष अप्रेल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भोपाल दौरे के समय समान नागरिक संहिता पर बात की थी। तब उन्होंने कहा था कि भाजपा शासित राज्यों में सामान नागरिक संहिता कानून लाएंगे।हरियाणा और कर्नाटक में भी कोड लागू करने की तैयारी, भाजपा शासित सरकारों में मंथन
इससे पहले बीजेपी शासित कर्नाटक में भी मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इस कोड को लागू करने के संकेत दे दिए थे। पिछले महीने संविधान दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा था कि कर्नाटक सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है। बीजेपी शासित इन राज्यों की तर्ज पर अब हरियाणा भी इस कोड को लागू करने पर विचार कर रहा है। हरियाणा के गृह मंत्री अनिज विज ने कहा है कि जिन प्रदेशों में नागरिक समान संहिता लागू करने की योजना पर काम हो रहा है, उनसे हम सुझाव ले रहे हैं। ताकि राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू किया जा सके। उत्तराखंड चुनाव से ठीक पहले समान नागरिक संहिता कानून लाने का ऐलान करने वाला पहला राज्य बना था।देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के पक्ष में है सर्वोच्च न्यायालय
देश की शीर्ष अदालत भी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के पक्ष में है। कोर्ट ने कहा गया है कि देश में अलग-अलग पर्सनल लॉ की वजह से भ्रम की स्थिति बन जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2019 में भी कहा कि देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए ठोस कोशिश की जानी चाहिए। इससे पहले अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था केंद्र सरकार एक समान कानून बनाकर पर्सनल लॉ की विसंगतियों को दूर कर सकती है। इसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था।

आखिर बीजेपी के प्रमुख मुद्दों में शामिल यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड का संबंध सिविल मामलों में कानून की एकरूपता से है। देश के हर व्यक्ति के लिए सिविल मामलों में एक समान कानून यूनिफॉर्म सिविल कोड की मूल भावना है। इस कोड के तहत देश के सभी नागरिकों पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, पैतृक संपत्तियों में हिस्सा, गोद लेने जैसे मसलों के लिए एक ही कानून होते हैं। इसमें धर्म, संप्रदाय, जेंडर के आधार पर भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं होती है। समान नागरिक संहिता होने पर धर्म के आधार पर कोई छूट नहीं मिलती। देश में फिलहाल धर्म के आधार पर इन मसलों पर अलग-अलग कानून हैं। हिंदुओं, मुस्लिमों और ईसाइयों के लिए भारत में संपत्ति, विवाह और तलाक के कानून अलग-अलग हैं। अलग-अलग धर्मों के लोग अपने पर्सनल लॉ का पालन करते हैं। मुस्लिम, ईसाई और पारसियों का अपना-अपना पर्सनल लॉ है. हिंदू सिविल लॉ के तहत हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध आते हैं।

यूनिफॉर्म सिविल कोड महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों कमजोर वर्गों को सुरक्षा देगा
दरअसल देश में जाति-धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून और मैरिज एक्ट हैं। इसके कारण सामाजिक ढ़ांचा बिगड़ा हुआ है। यही कारण है कि देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड की मांग उठती रही है जो सभी जाति, धर्म, वर्ग और संप्रदाय को एक ही सिस्टम में लेकर आए। एक कारण यह भी है कि अलग-अलग कानूनों के कारण न्यायिक प्रणाली पर भी असर पड़ता है। वर्तमान समय में लोग शादी, तलाक आदि मुद्दों के निपटारे के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड ही जाते हैं। इसका एक खास उद्देश्य महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों सहित डा. अम्बेडकर द्वारा परिकल्पित कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करना है, साथ ही एकता के माध्यम से राष्ट्रवादी उत्साह को बढ़ावा देना है। जब यह कोड बनाया जाएगा तो यह उन कानूनों को सरल बनाने का काम करेगा जो वर्तमान में धार्मिक मान्यताओं जैसे हिंदू कोड बिल, शरीयत कानून और अन्य के आधार पर अलग-अलग हैं।

संविधान में भी है यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रावधान, अब बीजेपी करेगी लागू
संविधान के भाग 4 में यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अनुच्छेद 36 से लेकर 51 तक राज्य के नीति निर्देशक तत्व को शामिल किया गया है। इसी हिस्से के अनुच्छेद 44 में नागरिकों के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रावधान है। इसमें कहा गया है “राज्य, भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।” सवाल उठता है कि जब संविधान में इसका जिक्र है ही, तो आजादी के बाद अब तक इस पर कोई कानून क्यों नहीं बना ? दरअसल संविधान के भाग 3 में देश के हर नागरिक के लिए मूल अधिकार की व्यवस्था की गई है, जिसे लागू करना सरकार के लिए बाध्यकारी है। वहीं संविधान के भाग 4 में जिन नीति निर्देशक तत्वों का जिक्र किया गया है, उसे लागू करना सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है। लेकिन सरकार चाहे तो इस दिशा में कदम उठा सकती है। आजादी के बाद की कांग्रेस सरकारों ने इस बेहत अहम मुद्दे पर ध्यान ही नहीं दिया। अब बीजेपी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

 

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