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केजरीवाल ने पंजाब चुनाव में टंकी-टावर को बनाया था मुद्दा, किसानों पर लाठीचार्ज के बाद अब टंकी पर चढ़ने लगे बेरोजगार युवा, CM Maan बिना मिले गए तो हाइवे किया जाम

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आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को शायद 27 नवंबर 2021 याद हो…इस दिन केजरीवाल दिल्ली से मोहाली पहुंचे थे। मोहाली में पंजाब के आंदोलनरत शिक्षकों से मिले और कहा कि दिल्ली सरकार ट्रेनिंग के लिए अध्यापकों को विदेश भेजती है और पंजाब सरकार पानी की टंकी पर भेज रही है…तब केजरीवाल ने वादा किया कि उनकी सरकार आने पर दिल्ली की तरह पंजाब के अध्यापकों और भर्ती से जुड़े युवाओं के सारे मामले हल कर दिए जाएंगे। लेकिन वादे हैं, वादों का क्या की तर्ज पर केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान वादों को भूल गए और पंजाब के आंदोलनरत शिक्षकों को आप की सरकार बनाकर भी कुछ हासिल नहीं हुआ। एक बार फिर मांगें पूरी न होने पर शिक्षकों ने पानी की टंकी का सहारा लिया है।

मान सरकार आते ही किसानों पर लाठीचार्ज, टंकियों पर चढ़ने लगे युवा
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के साथ ही किसानों के बाद अब बेरोजगार युवकों का प्रदर्शन शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के विधानसभा क्षेत्र लांबी में तो विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों पर सरकार ने लाठीचार्ज ही करवा दिया। अब सीएम भगवंत मान की सरकार में पहली बार बेरोजगार टंकी पर चढ़े हैं। आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में पंजाब में पानी की टंकी पर होने वाले प्रदर्शनों को बड़ा मुद्दा बनाया था। पानी की टंकी पर चढ़े युवक करीब पुलिस भर्ती वाले हैं।

भगवंत चुनाव से पहले हाथ जोड़कर घर-घर आते थे, अब हाथ हिलाकर चले गए
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि चुनाव से पहले भगवंत मान घर-घर आते थे। हाथ जोड़कर सारी मांगों को पूरा करने का वादा करते थे। अब तो हमें मिलते ही नहीं हैं। आज भी सीएम भगवंत मान उन्हें मिलने के बजाय हाथ हिलाकर चले गए। इससे भड़के युवकों ने संगरूर-लुधियाना नेशनल हाइवे जाम कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सीएम मान के पास हमारे साथ बात करने के लिए पांच मिनट भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें नौकरी नहीं मिलती, वह घर नहीं जाएंगे। अब वह पढ़-लिखकर दिहाड़ी करने को मजबूर हो रहे हैं। चुनाव के वक्त तो भगवंत मान ने कहा था कि सरकार बनते ही उनका मसला हल कर देंगे।

आंदोलनकारियों को संगरूर से चंडीगढ़ तो बुला लिया पर सीएम से मुलाकात नहीं कराई
विरोध करने वालों ने बताया कि इससे पहले उन्होंने 22 मार्च को सीएम के गृह जिले संगरूर में धरना दिया था। वहां उन्हें सीएम के ओएसडी ही मिले। उन्हें 28 मार्च को चंडीगढ़ बुलाया गया। उन्हें भरोसा दिया गया था कि सीएम भगवंत मान से मिलवाएंगे। जब वह कल पहुंचे तो उन्होंने फिर मांग पत्र लेकर कहा कि इस बारे में सोचेंगे। उनकी सीएम भगवंत मान से मुलाकात नहीं कराई गई। प्रदर्शन कर रहे नवदीप सिंह और अमनदीप कौर ने कहा कि 2016 में 7416 पदों पर भर्ती हुई थी। भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आवेदकों की वैरिफिकेशन तक हो चुकी है। इसके बावजूद उन्हें जॉइनिंग नहीं कराई जा रही।

पंजाब विधानसभा चुनाव में आप ने बनाया था टंकी-टावर का मुद्दा
पंजाब में टंकी पर होने वाले प्रदर्शन को आम आदमी पार्टी ने बड़ा मुद्दा बनाया था। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पिछली 27 नवंबर को दिल्ली से मोहाली पहुंचे थे। जहां उन्होंने टंकी पर चढ़े बेरोजगार अध्यापकों से बात की थी। उन्होंने तत्कालीन चन्नी सरकार की इस पर खूब आलोचना की थी। केजरीवाल ने कहा था कि उनकी सरकार आई तो कोई टंकी-टावर पर नहीं चढ़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दावा करती है कि 36 हजार कर्मचारियों को पक्का कर दिया है लेकिन बेरोजगार अध्यापक छह महीने पानी की टंकियों पर चढ़े हैं। पंजाब सरकार झूठ बोलने की आदी है। साढ़े चार सालों में कुछ नहीं किया है। दिल्ली सरकार अध्यापकों को ट्रेनिंग के लिए विदेश भेज रही है और चन्नी सरकार पानी के टंकी पर भेज रही है।

दिल्ली की तरह अध्यापकों के सारे मामले हल करने का किया था झूठा वादा
चुनाव से पहले मोहाली के फेज-आठ स्थित पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग के बाहर आंदोलनरत किसानों के धरने पर केजरीवाल पहुंचे। अध्यापकों के साथ बैठ उनकी समस्याओं को सुना। उनके साथ सांसद भगवंत मान, जरनैल सिह, हरपाल सिंह चीमा, विनीत वर्मा समेत कई नेता मौजूद थे। केजरीवाल ने इस दौरान बेरोजगारों अध्यापकों से नीचे उतरने की अपील की। एक महिला अध्यापक ने कहा कि जब तक उनका मामला हल नहीं होगा, तब तक वह नीचे नहीं आएंगे। इस पर केजरीवाल ने कहा कि उन्हें उनके परिवारों की चिंता है। उनकी सरकार आने पर दिल्ली की तरह अध्यापकों के सारे मामले हल कर दिए जाएंगे। महिला टीचर का कहना है कि उसकी शादी को छह महीने हुए हैं। उसने अपना करवा चौथ से लेकर दिवाली तक पानी की टंकी पर मनाई है।

पंजाब के किसानों ने खराब फसल का मुआवजा मांगा तो मिली लाठियां
बेरोजगार युवाओं के साथ इस वादाखिलाफी से दो दिन पहले मान सरकार किसानों के खिलाफ भी तानाशाह रवैया दिखा चुकी है। भगवंत मान को मुख्यमंत्री बने अभी कुछ ही दिन हुए हैं कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऑपरेशन लाठीचार्ज शुरू कर दिया है। किसानों से हमदर्दी का दिखावा करने वाली आप सरकार के एक्शन से उसकी पोल भी खुल गई है। जो किसान खराब हुई फसल का मुआवजा मांग रहे थे, उनपर आप सरकार ने मुआवजा देने के बजाए लाठियां बरसाईं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के विधानसभा क्षेत्र लांबी में हुए इस लाठीचार्ज में एक दर्जन से ज्यादा किसान चोटिल हो गए। इनमें से सात को गंभीर चोट आई हैं। किसानों में आप सरकार की बर्बर कार्रवाई के खिलाफ काफी रोष देखा जा रहा है।

किसानों से हमदर्दी की खुली पोल, सरकार बनते ही किसानों की समस्याएं नजरअंदाज
पंजाब में आप सरकार बनने के बाद से किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। कपास के मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के बैनर तले पंजाब में किसान आंदोलन हो रहा है। आंदोलन के दौरान किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर पंजाब की सियासत गरमा गई है। बीकेयू उगराहां की ओर से आरोप लगाया गया है कि लांबी में हुए लाठीचार्ज के दौरान सात किसान गंभीर घायल हुए हैं। मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का समूह लांबी में तहसील ऑफिस के बाहर धरना दे रहा था। किसानों ने तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों के बाहर जाने से रोका, तो उनको समझाने के बजाए पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया।

प्रकाश सिंह बादल के विधानसभा क्षेत्र में लाठीचार्ज में सात किसान गंभीर घायल
पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पैतृक विधानसभा क्षेत्र लांबी में नरमा की फसल के मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) के नेतृत्व में सोमवार देर रात तहसील कॉम्प्लेक्स के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने किसानों का आंदोलन समाप्त करने के लिए बर्बर रास्ता अपनाया और सोते हुए किसानों पर रात करीब बारह बजे के बाद लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज कर किसानों को खदेड़ने के बाद नायब तहसीलदार सहित स्टाफ दफ्तर से चला गया। लाठीचार्ज में सात किसान घायल हुए हैं जो लांबी के सिविल अस्पताल में उपचाराधीन हैं।सरकार की गिरदावरी में भेदभाव, 30 गांवों को शामिल ही नहीं किया
किसानों का आरोप है कि गुलाबी सुंडी से खराब हुई नरमा की फसल के मुआवजे के मामले में मुक्तसर जिले को नजरंदाज किया गया है। मुक्तसर जिले में अधिकतर नरमा की खेती लंबी ब्लाक में ही होती है। गिरदावरी में लंबी ब्लाक के केवल छह गांवों को ही शामिल किया गया है और उन्हें भी अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया। जबकि अन्य करीब 30 गांवों को शामिल ही नहीं किया गया। वहीं भाकियू द्वारा अभी भी तहसील दफ्तर के बाहर धरना प्रदर्शन जारी है।पंजाब के राजस्व अधिकारी और पटवारी भी हुए नाराज, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
लाठीचार्ज में हुए घायलों में किसानों में हरपाल सिंह किल्लियांवाली, निशान सिंह कख्खांवाली, जगदीप सिंह खुड्डियां, दविंदर सिंह मानांवाला, एमपी सिंह भुल्लरवाला, गुरलाभ सिंह कख्खांवाली, काला सिंह खुन्नण खुर्द आदि शामिल हैं। वहीं, इस घटनाक्रम में एक एएसआई भी घायल हुआ है। इस मामले के विरोध में पूरे पंजाब के राजस्व अधिकारी मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। दूसरी ओर देर रात को ही पटवारियों ने दफ्तर से बाहर आने के बाद नेशनल हाईवे पर धरना देकर रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी पटवारी किसानों पर कार्रवाई करने की मांग की।

 

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