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उद्धव ठाकरे ने दूसरों के खिलाफ अमर्यादित भाषा का किया इस्तेमाल, लेकिन अपने खिलाफ उठी हर आवाज को दबाने के लिए बन गए तानाशाह

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महाराष्‍ट्र में विवादित बयान को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे ने जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान एक विवादित बयान दे दिया था। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने की बात कही थी। उस पर शिवसेना इतनी भड़की कि राणे के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई। मंगलवार दोपहर उन्‍हें रत्‍नागिरी से अरेस्‍ट भी कर लिया गया। इसके बाद देर रात स्थानीय अदालत ने स्वास्थ्य के आधार पर राणे को जमानत दे दी। लेकिन हैरानी की बात है कि विवादित बयान देने के मामले में शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे किसी से पीछे नहीं है। 

ठाकरे ने सीएम योगी को चप्‍पलों से मारने की बात कही थी

उद्धव ठाकरे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को लेकर विवादित बयान दिया था।बात साल 2018 की है जब उद्धव ठाकरे ने शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माला चढ़ाते समय योगी आदित्‍यनाथ के खड़ाऊं पहनने पर ऐतराज किया था। उद्धव का मानना था कि ऐसा करके योगी ने शिवाजी महाराज का अपमान किया है। ठाकरे ने कहा था, ‘यह योगी तो गैस के गुब्‍बारे की तरह आया और सीधे चप्‍पल पहनकर महाराज के पास चला गया। मन कर रहा है कि उसी चप्‍पल से उसे मारूं।’

सोनिया गांधी को बताया था ‘इम्पोर्टेड लीडर’

सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कृपा से मुख्यमंत्री बने उद्धव ठाकरे ने इनके खिलाफ भी विवादित बयान दिया था। उद्धव ठाकरे ने 2013 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ आग उगली थी। उन्होंने सोनिया गांधी को इम्पोर्टेड नेता करार देते हुए कहा था कि सोनिया गांधी को इटली वापस भेज देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि सोनिया को देश में रहने का कोई अधिकार नहीं। बेहतर होगा अब वो अपने देश इटली वापस चली जाए। 

राहुल गाधी को बताया था ‘बेवकूफ’

उद्धाव ठाकरे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भाषा की मर्यादा खो दी थी। उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी को बेवकूफ नेता बताते हुए कहा था कि उन्हें प्रधानमंत्री बनने का प्रयास करने से पहले देश को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

मणिशंकर अय्यर को जूतों से पीटना चाहिए-ठाकरे

मणिशंकर अय्यर के द्वारा वीर सावरकर के खिलाफ बयान देने पर उद्धव ठाकरे खासे नाराज हो गए, उन्होंने कहा था कि मणिशंकर अय्यर को तो जूतों से पीटना चाहिए। इससे आगे उन्होंने कहा था कि जो लोग वीर सावरकर की विचारधारा को नहीं मानते हैं। उन्हें सार्वजनिक रूप से पीटा जाना चाहिए।

आइए देखते हैं दूसरों के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने वाले उद्धव ठाकरे अपने खिलाफ उठी हर आवाज को दबाने के लिए किस तरह तानाशाह बन जाते हैं और उनके शिवसैनिक कैसे तांडव करते हैं…

महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार बनने के बाद से राज्य में लोगों का जीना दूभर हो गया है। राज्य के लोग कोरोना संकट के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी से भी परेशान हैं। शिवसैनिकों की तानाशाही इतनी बढ़ गई है कि वे अपने नेताओं के बारे में कुछ भी आलोचना सुनना नहीं चाहते। शिवसेना के नेता या सरकार के बारे में कुछ भी कहने पर इनकी गुंडागर्दी का कहर सहना पड़ता है।

नारायण राणे के विवादित बयान के बाद शिवसैनिकों की गुंडागर्दी

केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बयान से नाराज ठाकरे की पार्टी शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने राज्य में कई जगहों पर बीजेपी दफ्तरों में तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की। शिवसैनिकों ने बीजेपी नेताओं के घर के बाहर प्रदर्शन कर बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट भी की। नासिक में बीजेपी के दफ्तर पर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने पत्थर भी फेंके।

ठाकरे सरकार की आलोचना करने पर एक बुजुर्ग बीजेपी नेता के साथ बदसलूकी

सोलापुर में उद्धव ठाकरे सरकार की आलोचना करने पर एक बुजुर्ग बीजेपी नेता के साथ बदसलूकी और मारपीट करने का मामला सामने आया। शिवसैनिकों ने न सिर्फ बीजेपी नेता को स्याही से नहला दिया, बल्कि साड़ी भी पहनाने की कोशिश की।

दरअसल सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कुछ लोग एक शख्स को काली स्याही से नहलाकर साड़ी पहनाने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि शिवसेना के गुंडों ने सबसे पहले बीजेपी कार्यकर्ता को पकड़ा और उसके साथ बदसलूकी की। साथ ही काली स्याही निकालकर उसके सिर पर उड़ेल दी। शिवसैनिक इतने से नहीं माने। उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में बीजेपी कार्यकर्ता के साथ मारपीट की और साड़ी पहनाने की कोशिश की।

ठाकरे सरकार की आलोचना करने पर पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी

अभिनेता सुशांत सिंह राजपुत आत्महत्या मामले में उद्धव ठाकरे और उनकी सरकार की आलोचना करने पर रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन चीफ अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार किया गया। 4 नवंबर, 2020 को उनकी गिरफ्तारी के जरिए पत्रकार बिरादरी में खौफ पैदा करने की कोशिश की गई, ताकि कोई उद्धव ठाकरे और उनकी सरकार की आलोचना का हिम्मत नहीं कर सके। महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों को ये संदेश देने की कोशिश की है कि खिलाफ जाने पर हर हाल में भुगतना पड़ेगा। किसी समाचार चैनल के प्रमुख को बिना किसी पूर्व नोटिस के सुबह-सुबह एक आतंकवादी की तरह गिरफ्तार कर घसीटकर ले जाया जाना कांग्रेसी फासिज्म का उदाहरण है। 

कंगना के ऑफिस पर चला बीएमसी का हथौड़ा

उद्धव ठाकरे और उनकी सरकार की आलोचना करने पर अभिनेत्री कंगना रनौत के ऑफिश में तोड़फोड़ की गई। बीएमसी ने पहले तो ऑफिस आकर लोगों को डराने-धमकाने का काम किया, फिर ऑफिस के बाहर अवैध निर्माण का नोटिस लगा तुरंत तोड़ने का काम शुरू भी कर दिया। नोटिस लगाने के तुरंत बाद जिस तरह से बीएमसी ने तत्काल कार्रवाई की, उसपर भी कई तरह के सवाल उठे। कंगना ने इस कार्रवाई को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए बीएमसी की तुलना बाबर से की।

उद्धव का कार्टून शेयर करने पर नौसेना के पूर्व अधिकारी के साथ मारपीट

इसी तरह सितंबर 2020 में ही शिवसैनिकों ने नौसेना के पूर्व अधिकारी मदन शर्मा के साथ मारपीट की थी। मदन शर्मा की गलती ये थी कि उन्होंने उद्धव से संबंधित एक कार्टून किसी व्हाट्स एप ग्रुप पर शेयर कर दिया था इसके बाद शिवसैनिक उनके घर पहुंच गए और घर के बाहर उनको जमकर पीटा था। इस घटना के बाद सरकार की काफी आलोचना हुई थी।

उद्धव और आदित्य ठाकरे की आलोचना करने पर सुनयना होले गिरफ्तार

उद्धव सरकार की नेतृत्व वाली महाराष्ट्र पुलिस ने हिन्दू हितों की बात करने वाली एक ट्विटर यूजर सुनयना होले को गिरफ्तार किया। सुनयना होले को अगस्त 2020 में शिवसेना की युवा सेना के एक नेता रोहन चौहान की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया। रोहन चौहान ने अपनी शिकायत में सुनयना के खिलाफ ट्विटर पर उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट लिखने का आरोप लगाया था। सुनयना होले की गिरफ्तारी के खिलाफ सोशल मीडिया पर #IStandWithSunaina ट्रेंड किया। लोगों ने सुनयना के पक्ष में आवाज उठाते हुए गिरफ्तारी की आलोचना की थी। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने तो सुनयना को मदद की पेशकश भी की थी।

ठाकरे की आलोचना करने पर राहुल का सिर मुंडवा दिया

इसी तरह एक युवक ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की, जिससे शिवसैनिक भड़क गए। नाराज शिवसैनिकों ने राहुल तिवारी नाम के युवक की पहले पिटाई की थी और फिर जबर्दस्ती उसका सिर मुंडा दिया। ये घटना पिछले वर्ष दिसंबर महीने की थी।

ठाकरे की आलोचना करने पर यवतमाल के दो दुकानदारों पर FIR, दुकानों में तोड़फोड़

राज्य में कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर यवतमाल के दो दुकानदारों ने सोशल मीडिया पर सीएम उद्धव ठाकरे, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना की। इसमें इन्होंने लिखा कि राज्य सरकार कोरोना संकट पर काबू पाने में विफल रही है। इनका सोशल मीडिया पर इतना लिखना भर था कि शिव सेना ने गुंडो ने पहले तो इनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई फिर पुलिस की मौजूदगी में दुकान में जमकर तोड़फोड़ की। शिवसैनिकों के उत्पात से स्थानीय लोगों में खौफ का माहौल है।

शिवसैनिकों ने मंगलवार, 26 मई, 2020 को यवतमाल के दो दुकानों में तोड़फोड़ की। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि किस तरह से पुलिस के सामने दुकान में तोड़-फोड़ और उत्पात मचा रहे हैं।

मुख्यमंत्री उद्धव की आलोचना पर मुंडवा दिया सिर
वडाला टीटी के शांतिनगर में रहने वाले एक शख्स हीरामणि तिवारी को फेसबुक पर पोस्ट लिखना महंगा पड़ गया। उनके साथ न केवल मारपीट की गई बल्कि स्थानीय शिवसेना नेताओं ने जबरदस्ती हीरामणि का सिर भी मुंडवा डाला। जी न्यूज के अनुसार हीरामणि तिवारी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की गुंडागर्दी को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की टिप्पणी के खिलाफ फेसबुक पर टिप्पणी की थी। इसपर शिव सेना के गुंडों ने हीरामणि के साथ मारपीट, गाली गलौच किया और उनका सिर भी मुंडवा दिया।

ठाकरे की आलोचना करने वाले पर महिला ने उड़ेल दी स्याही
सोशल मीडिया पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की आलोचना करने पर बीड में पार्टी की एक महिला कार्यकर्ता ने एक शख्स के ऊपर स्याही उड़ेल दी। इसके बाद उसे सरेआम बेइज्जत किया।

 

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