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अय्याशजीवियों और देह व्यापार का अड्डा बना टिकरी बॉर्डर, फर्जी किसानों की अय्याशी के सारे इंतजाम

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तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर धरना दे रहे फर्जी किसानों के चेहरे बेनकाब होते जा रहे हैं। दरअसल ये किसान ना होकर अय्याशजीवी है, जो पैसे, शराब और शबाब का प्रलोभन देकर बुलाए गए हैं। ये अय्याशजीवी अब फर्जी किसान नेताओं की मजबूरी बन चुके हैं, क्योकि तथाकथित किसान आंदोलन से असली किसानों का कोई लेनादेना नहीं है। ऐसे में इस आंदोलन को जिंदा रखने के लिए बेतहाशा पैसा खर्च किया जा रहा है। इसके लिए विदेशों से फंडिंग के साथ ही राजनीतिक हित साधने वाली पार्टियों से भी इनको आर्थिक मदद मिल रही है। इससे फर्जी किसान अय्याशी पर खुलकर पैसे लूटा रहे हैं। इसका खुलासा जी हिंदुस्तान के अंडर कवर रिपोर्टर ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए किया है।

जी हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे टिकरी बॉर्डर पर जब से फर्जी किसानों ने डेरा डाला है, तब से इस इलाके में देह व्यापार की एक अलग तरह की मंडी शुरू हो गई है। यहीं पास में एक गंदा नाला बहता है और उसी के आसपास की झाड़ियां इन फर्जी किसानों की अय्याशी का अड्डा बन गई हैं। इन झाड़ियों के पीछे पैसे देकर लाए गए सेक्स वर्करों के साथ फर्जी किसान अय्याशी करते देखे जा सकते हैं। स्टिंग के दौरान रिपोर्टर ने सेक्स वर्कर समेत कई लोगों से बात की। जब रिपोर्टर ने एक सेक्स वर्कर से बात की तो उसने चौकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि फर्जी किसान उनके पास आते हैं और 100 से लेकर 500 रुपये प्रति व्यक्ति देकर जाते हैं। 

एक फर्जी किसान रिपोर्टर को टिकरी बॉर्डर पर गंदे नाले के पास स्थित फैक्ट्रियों में ले गया। उसने बताया कि जब से ये कथित किसान यहां आंदोलन के लिए आए हैं तब से सेक्स वर्कर की तादाद भी बढ़ गई है। फर्जी किसान के मुताबिक, आंदोलन साइट पर रुकने के लिए उसे प्रतिदिन 300 रुपये मिलते हैं। अगर दो लोग आंदोलन में शामिल होते हैं तो उन्हें संयुक्त रूप से 500 रुपये दिए जाते हैं। उन्हें ये पैसे आंदोलन में शामिल होने के लिए टेंट का मालिक देता है। रिपोर्टर ने जब फर्जी किसान से पूछा कि अगर वो भी आंदोलन में शामिल होता है तो उसका क्या फायदा होगा? इस पर फर्जी किसान ने कहा कि यहां शराब और शबाब दोनों उपलब्ध है। आंदोलन के नाम पर इसका आनंद लिया जा सकता है।

धरना स्थल पर मौजूद एक चश्मदीद ने रिपोर्टर को बताया कि किसान आंदोलन के बहाने लोग अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए आते हैं। यहां तक कि आंदोलन के नाम पर लोगों को बहकाकर आसपास के राज्यों से यहां लाया जाता है। धरना स्थल पर लगाए गए टेंटों के भीतर पूरा खुलापन है। लोग नहाने के बाद टेंट में ऐसे ही नंगे ही रहते हैं। शरीर पर कपड़े के नाम पर कुछ भी नहीं होता। टिकरी बॉर्डर पर खुलेआम शराब पीकर लोग झूमते देखे जा सकते हैं। एक फर्जी किसान सड़क पर पड़ा दिखा। चश्मदीद के मुताबिक उसने अफीम या डोडापोस्त खाया हुआ था। 

इससे पहले आंदोलन के नाम पर महिलाओं को धरने में शामिल कर उनका शारीरिक शोषण करने की खबरें सामने आ चुकी हैं। पश्चिम बंगाल से किसान आंदोलन में भाग लेने आई एक युवती से गैंगरेप किया गया था। दुष्कर्म के बाद कोरोना के चलते युवती की मौत हो गई थी। युवती के पिता ने दो महिलाओं समेत 6 लोगों पर केस दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस का कहना था कि आरोपी अनिल मलिक ने दुष्कर्म की वीडियो बनाकर पीड़िता को ब्लैकमेल किया था, उसके साथ ट्रेन और फिर किसान आंदोलन की झोपड़ी में भी दुष्कर्म हुआ था। अनूप चनौत ने भी दुष्कर्म किया था और अंकुर सांगवान ने छेड़खानी की थी। दुष्कर्म के आरोपी अनिल मलिक और अनूप चनौत आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए थे।

बंगाल की युवती से गैंगरेप का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि टिकरी बॉर्डर पर एक और युवती ने शारीरिक उत्‍पीड़न का आरोप लगा दिया। सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले एक जाने माने वकील ने टिकरी बॉर्डर पर एक और युवती के साथ दुष्कर्म किए जाने की जानकारी ट्वीट की तो हरियाणा पुलिस के अधिकारियों और आंदोलनकारी किसान नेताओं में खलबली मच गई। वैसे यह सूचना ट्विटर पर सबसे पहले एक न्यूज एजेंसी के पत्रकार ने ट्वीट की, जिसे वकील ने रीट्वीट किया। दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद किसान नेताओं ने युवती को टिकरी बॉर्डर से सिंघू बॉर्डर भेज दिया। 

जनवरी 2021 में आई दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि जैसे-जैसे शाम ढलती जाती है, टिकरी बॉर्डर पर शराब के ठेकों पर भीड़ बढ़ती जाती है। शराब खरीदने वालों में युवा, अधेड़ और बुजुर्ग सभी होते हैं। शराब खरीदने के बाद डिब्बा वहीं फेंक देते हैं और बोतल को कपड़ों में रखकर अपनी ट्रॉलियों की तरफ बढ़ जाते हैं। कुछ युवा तो कोल्डड्रिंक की बोतल में शराब भरकर पीने लगते हैं। पास में ही एक नॉन-वेज बेचने वाले ढाबे की किस्मत खुल गई। ढाबे पर खूब भीड़ लग रही है। किसानों को तंदूरी चिकन के साथ शराब के पैग लगाते देखा जा सकता है।

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