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कानून वापस होते ही संयुक्त किसान मोर्चा मे मचा घमासान, राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढ़ूनी के बीच बढ़ीं दूरियां

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेकर किसान नेताओं की एकजुटता का सबसे बड़ा मुद्दा ही छीन लिया है। अब उनके बीच खींचतान शुरू हो गई है। अंतर्विरोध के कारण किसान संगठनों में दरार भी चौड़ी होती जा रही है। इसकी झलक शनिवार (20 नवंबर, 2021) को संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं की बैठक में देखने को मिली। जहां एक ओर राकेश टिकैत बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे ही नहीं, तो हरियाणा के दिग्गज किसान नेताओं में शुमार गुरनाम सिंह चढ़ूनी बीच बैठक से ही बाहर आ गए। 

सूत्रों के मुताबिक भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक से दूरी बना ली है। शनिवार को हुई बैठक में टिकैत नहीं आए थे। लेकिन रविवार (21 नवंबर, 2021) को गाजीपुर से सूचना आ रही थी कि वह कुंडली बार्डर पर बैठक में शामिल होंगे, लेकिन वहां भी नहीं पहुंचे। वहीं बैठक में शामिल होने पहुंचे गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी बीच में ही बाहर आ गए। उनके बारे में कहा गया था कि उन्हें किसी अन्य कार्यक्रम में पहुंचना है। गौरतलब है कि पिछली बैठक के दौरान गुरनाम सिंह चढ़ूनी और राकेश टिकैत गुट में तनातनी हो गई थी। 

इससे पहले भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्‍यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने 25 नवंबर को अंबाला से प्रस्तावित किसान यात्रा रद्द कर दिया। उन्‍होंने आरोप लगाया कि संयुक्‍त किसान मोर्चा के कुछ नेता उनकी अनदेखी कर रहे हैं। उन्‍होंने किसान आंदोलन के नेतृत्‍व पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्‍होंने कहा कि आपसी मतभेद की वजह से किसान आंदोलन की एकजुटता पर भी असर पड़ रहा है। 15 नवंबर को राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढ़ूनी करनाल में थे। लेकिन दोनों एक साथ नजर नहीं आए।

भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने साफ शब्दों में आरोप लगाया कि संयुक्त किसान मोर्चा के कुछ नेता उन्हें बाइपास करना चाहते हैं। करनाल के बसताड़ा टोल प्‍लाजा में लाठीचार्ज के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्‍यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसान महांपचायत का आह्वान किया था। इसमें राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव को नहीं आना था। बाद में दोनों पहुंच गए थे। पंचायत के दौरान भी दोनों किसान नेताओं में दूरियां दिखी थीं।

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