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जी-20 में पीएम मोदी की अपील का जबरदस्त असर, WHO सहित 96 देशों ने दी कोवैक्सीन और कोविशील्ड को मान्यता

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भारत को अद्भुत सफलता मिली है। भारत में बने दो हथियार- कोवैक्सीन और कोविशील्ड आज कोरोना के खिलाफ जंग में काफी कारगर साबित हो रहे हैं। वहीं रोम में आयोजित जी-20 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत द्वारा तैयार की गई कोरोना वैक्‍सीन को मान्‍यता देने का भी मुद्दा उठाया। उन्‍होंने बेहद स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि भारत दुनिया को कोरोना महामारी से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए ये जरूरी है कि विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन भारत द्वारा विकसित की गई कोरोना वैक्‍सीन को जल्‍द मान्‍यता प्रदान करे। कोरोना से लड़ने के लिए हम दुनिया के समक्ष ‘एक धरती-एक स्‍वास्‍थ्‍य’ का विजन रख रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की इस अपील का जबरदस्त असर हुआ है। भारत में बनी कोवैक्सीन और कोविशील्ड को अब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित दुनिया के 96 देश मान्यता दे चुके हैं। देश के लिए गर्व की बात यह है कि डब्ल्यूएचओ ने अब तक आठ कोरोना टीकों को मान्यता दी है, इनमें ये दो भारतीय टीके भी शामिल हैं। इन दोनों टीकों को आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल किया गया है। इससे भारतीय टीकों को मान्यता देने वाले देशों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इनमें कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूके, जर्मनी, फ्रांस, रूस, बेल्जियम और स्विट्जरलैंड जैसे देश भी शामिल हैं। गौरतलब है कि कोवैक्सीन को जहां भारत बायोटेक ने बनाया है, वहीं कोविशील्ड का उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट ने किया है।

मान्यता मिलने से विदेश यात्रा में होगी आसानी

मोदी सरकार भारतीय वैक्सीन और टीकाकरण प्रमाणपत्र को पारस्परिक मान्यता के लिए काफी प्रयास कर रही है। इसके तहत सरकार दुनिया के बाकी देशों के साथ संपर्क साध रही है। इसमें काफी सफलता मिली है। कई देश मान्यता देने को तैयार हो गए हैं। डब्ल्यूएचओ और राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत टीके के प्रमाणपत्र से बिना किसी परेशानी के इन देशों की यात्रा की सुविधा होगी। जो लोग विदेश यात्रा करना चाहते हैं, वे को-विन पोर्टल से टीकाकरण प्रमाणपत्र डाउनलोड कर सकते हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रव्यापी कोविड टीकाकरण अभियान के तहत अब तक देश में वैक्सीन की कुल 109.63 करोड़ से अधिक खुराक लगाई जा चुकी है। केंद्र सरकार के “हर घर दस्तक” मेगा टीकाकरण अभियान के तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर टीकाकरण कर रहे हैं।

विदेशों में बढ़ी भारतीय वैक्सीन की मांग

दूसरे देशों में भारतीय वैक्सीन को मान्यता मिलने से इनकी मांग में भी बढ़ोतरी हुई है। खासकर पड़ोसी देशों में कोवैक्सीन और कोविशील्ड की बहुत ज्यादा मांग है। इसको देखते हुए मोदी सरकार ने ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के तहत इस साल के अंत तक कोरोना वैक्सीन का निर्यात फिर शुरू करने का फैसला किया है। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी के मुताबिक साल के अंत तक पर्याप्त उत्पादन न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि निर्यात के लिए अतिरिक्त उत्पादन भी होने लगेगा। इससे पहले कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान देश में मामले बढ़ने पर भारत ने मई 2021 में कोरोना वैक्सीन के निर्यात पर रोक लगा दी थी।

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