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जल जीवन मिशन ने कुदरती चुनौतियों के बावजूद लेह में घर-घर पहुंचाया पानी, माइनस 30 डिग्री तापमान में जलापूर्ति को बनाया सदाबहार

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कहते हैं जब इरादे नेक हो और कुछ बेहतर कर गुजरने का हौसला हो तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। मोदी सरकार में ऐसा ही देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हर घर में नल से जल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन के तहत लेह जैसे माइनस 30 डिग्री तापमान वाले और जल संसाधन जम जाने वाले इलाकों में भी नल से जल पहुंचाने में सफलता मिली है। 

घर-घर में नियमित पेयजल आपूर्ति हुआ सुनिश्चित

समुद्रतल से करीब तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख में पानी के पाइप जम जाने से आबादी का एक बड़ा हिस्सा जलापूर्ति ठप हो जाने से प्रभावित हो जाता था। लेकिन जल जीवन मिशन ने कुदरत की रुकावटों को पार कर नल के जरिए लोगों के घर में नियमित पेयजल सुनिश्चित कर जीवन को सरल बना दिया है। लद्दाख के लेह जिले का स्टोक गांव जल जीवन मिशन की कामयाबी की कहानी सुना रहा है।

सर्दियों में जलापूर्ति ठप होने से मिली निजात

सर्दियों में पूरे लद्दाख में पेयजल की आपूर्ति लगभग ठप रहती थी। 348 परिवारों पर आधारित स्टोक गांव के लोग भी यह समस्या सालों से झेल रहे थे। गांव में पेयजल के लिए 35 नलकूप थे, लेकिन सर्दी में नदी-नालों में पानी कम हो जाने और पाइप जम जाने से जलापूर्ति बाधित रहती थी। स्टोक में जलापूर्ति को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी। जल जीवन मिशन लेह के अधिकारियों ने इस चुनौती से निपटने का बीड़ा उठाया और तस्वीर बदल गई।

इंफिल्ट्रेशन गैलरी तकनीक का इस्तेमाल

जल जीवन मिशन के अधिकारियों के मुताबिक नियमित जलापूर्ति के लिए इंफिल्ट्रेशन गैलरी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक में सब-सरफेस वाटर (जमी बर्फ के नीचे का पानी) को एक निश्चित जगह तक पानी को लाया जाता है। इसी में फिल्‍टर के लिए सिस्‍टम लगा होता है। इसके तहत जलाशय या नदी के निचले हिस्‍से से यह पाइप जोड़ा जाता है और पानी साफ करके आपूर्ति स्‍थल तक पहुंचाया जाता है।

सौर ऊर्जा की मदद से गर्म होता है पानी 

जलजीवन मिशन के इंजीनियरों ने पानी को जमने से बचाने के लिए सब-सरफेस वाटर (जमी बर्फ के नीचे का पानी) ओवरहेड टैंक में जमा किया। नदी-नालों के भूमिगत जल को सौर ऊर्जा की मदद से ओवरहेड टैंक में पहुंचाया गया। सौर ऊर्जा की मदद से पानी गर्म रखा जाता है।

इंसुले‍टेड पाइप का इस्‍तेमाल

गांव में सप्लाई वाले पानी के पाइप को ठंड में जमने व फटने से बचाने के लिए जमीन के तीन से चार फुट नीचे पाइप बिछाए गए। विशेष तौर पर इंसुले‍टेड पाइप इस्‍तेमाल किए गए। इससे पाइप जल्दी ठंडे नहीं होते। इसके बाद निर्धारित समय पर ओवरहेड टैंक में जमा पानी की गांव में आपूर्ति की गई, ताकि ठंड में पानी पाइप में चलता रहे और जमने से बच जाए। स्टोक, नंग और फ्यांग गांवों में इसी तरह से जलापूर्ति की जा रही है।

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