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बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर का इंडिया गेट पर ज्ञान देखकर दंग रह जाएंगे, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से लेते हैं जातिवाद और मुस्लिम तुष्टिकरण की शिक्षा

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बिहार के शिक्षा मंत्री और आरजेडी विधायक चंद्रशेखर यादव के रामचरितमानस पर दिए विवादास्पद बयान से पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। उनके बयान को लेकर हिन्दुओं में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। बिहार के अलावा देश के अन्य भागों में भी चंद्रशेखर यादव के खिलाफ केस दर्ज कराया जा रहा है। इससे चंद्रशेखर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस बीच बिहार के शिक्षा मंत्री के पुराने बयान भी सामने आने लगे हैं, जो काफी हैरान करने वाले हैं। जातिवाद और मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से अंधे हो चुके शिक्षा मंत्री ने दिल्ली के इंडिया गेट पर जो ज्ञान दिया है, उससे उनकी शिक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं। 

इंडिया गेट पर बिहार के शिक्षा मंत्री का फर्जी ज्ञान

दरअसल, चंद्रशेखर यादव का एक पुराना ट्वीट सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने इंडिया गेट पर अंकित शहीद सैनिक के आंकड़े को जाति और धर्म में बांटकर पेश किया है। यह आंकड़ा पूरी तरह फर्जी है। 20 अप्रैल, 2020 में किए गए ट्वीट में उन्होंने लिखा, “संघियों एवं मनुवादियों का देश में योगदान की क्रोनोलॉजी–इंडिया गेट दिल्ली के शिलापट पर फिरंगियों के खिलाफ जंग में आहूति देने वाले 95395 (पंचानवे हजार तीन सौ पंचानवे) अमर शहीदों में- मुसलमान-61395, सिख-8050, पिछड़े-14480, दलित-10777, सवर्ण 598, संघी-00(शून्य)- मनुवादी संघियो को ढूंढें ?”

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से ज्ञान अर्जित करते हैं बिहार के शिक्षा मंत्री

चंद्रशेखर यादव के इस ट्वीट को देखकर लगता है कि वे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के शिक्षा मंत्री और उनके ज्ञान का प्रमुख स्रोत सोशल मीडिया है। चंद्रशेखर यादव ने अपने ट्विटर हैंडल से जो ज्ञान दिया है, दरअसल वो जुलाई 2019 में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुंबई के चांदीवली इलाक़े में 13 जुलाई, 2019 को एक भाषण दिया था जिसके कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर शेयर किए गए थे। ओवैसी ने रैली में दावा किया था कि इंडिया गेट पर 95,300 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत मुसलमान है।

 

इंडिया गेट पर पर 13,516 भारतीय सैनिकों के नाम

गौरतलब है कि इंडिया गेट एक वॉर मेमोरियल है। इसका निर्माण उन भारतीय सैनिकों की स्मृति में किया गया था जो ब्रिटिश सेना में भर्ती होकर पहले विश्व युद्ध और तीसरे अफगान युद्ध में शहीद हुए थे। दिल्ली में स्थित ‘इंडिया गेट’ साल 1931 में बनकर तैयार हो गया था। यानी भारत की आज़ादी से क़रीब 16 साल पहले। 42 मीटर ऊंचा इस स्मारक को अंग्रेज़ों के शासन के दौरान 1914 से 1919 के बीच ब्रिटिश आर्मी के लिए लड़ते हुए मारे गए भारतीयों की याद में बनाया गया था जिसे पहले ‘ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल’ कहा जाता था। दिल्ली सरकार की वेबसाइट के अनुसार इस स्मारक पर 13,516 भारतीय सैनिकों के नाम लिखे हुए हैं। इनमें 1919 के अफ़गान युद्ध में मारे गए भारतीय सौनिकों के नाम भी शामिल हैं। 

शिक्षा मंत्री को इस्लाम में मोहब्बत और रामचरितमानस में नफरत दिखाई देती है

इससे पहले शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो मोहब्बत का पाठ पढ़ाते नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो में चंद्रशेखर यादव को कहते सुना जा सकता है, ‘मोहब्बत और ईमान का पैगाम देने वाला ‘अकेला’ इस्लाम है।’ चंद्रशेखर यादव ने यह बयान मधेपुरा में ईद-उल-फितर 2022 के मौके पर ईद-मिलन के कार्यक्रम में दिया था। शिक्षा मंत्री को इस्लाम में मोहब्बत दिखाई दे रहा है और रामचरितमानस नफरत फैलाने वाली किताब दिखाई देती है। दरअसल चंद्रशेखर यादव ने आरजेडी के मुस्लिम तुष्टिकरण वाली राजनीति के एजेंडे के तहत मुसलमानों को खुश करने के लिए यह बयान दिया था। 

शिक्षा मंत्री का अंतरराष्ट्रीय ज्ञान देखकर दंग रह जाएंगे

एक अन्य ट्वीट में चंद्रशेखर यादव तुष्टिकरण में अपना अंतरराष्ट्रीय ज्ञान भी प्रदर्शित करते हुए नजर आते हैं। उन्होंने लिखा कि सदियों से वंचितों, बेवसों और गरीबों के रहनुमाओं को अपनी जान से धोना पड़ा है हाथ। सुकरात को जहर और यीशू को चढ़ाया सूली। अंबेडकर एवं लोहिया की हुई साजिशन हत्या, महात्मा फुले, पेरियार, जननायक कर्पूरी को गाली और शहीद जगदेव को गोली। आज उसी रक्तरंजित इतिहास को दोहराते हुए लालू जी को जेल में ही जान मारने की हो रही है तैयारी।

रामचरितमानस पर बिहार के शिक्षा मंत्री का अधूरा ज्ञान

गौरतलब है कि नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने कहा, ‘मनुस्मृति में समाज की 85 फीसदी आबादी वाले बड़े तबके के खिलाफ गालियां दी गई। रामचरितमानस के उत्तर कांड में लिखा है कि नीच जाति के लोग शिक्षा ग्रहण करने के बाद सांप की तरह जहरीले हो जाते हैं। यह नफरत को बोने वाले ग्रंथ हैं। एक युग में मनुस्मृति, दूसरे युग में रामचरितमानस, तीसरे युग में गुरु गोलवलकर का बंच ऑफ थॉट, ये सभी देश को, समाज को नफरत में बांटते हैं। नफरत देश को कभी महान नहीं बनाएगी। देश को महान केवल मोहब्बत ही बनाएगी।’

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