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भारतीय किसान यूनियन ने अपने किसान घोषणा पत्र-2019 में की थी एपीएमसी एक्ट और आढ़तियों से मुक्ति के साथ व्यापार की स्वतंत्रता की मांग

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किसानों के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन ने नए कृषि सुधार कानूनों को रद्द करने की मांग की है। लेकिन भारतीय किसान यूनियन ने 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले ‘किसानों का घोषणापत्र: आज़ादी की मांग’ नाम से अपना घोषणा पत्र जारी किया था। इसमें नए कृषि कानूनों से जुड़े तमाम प्रावधान शामिल थे। कृषि से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया था। एपीएमसी एक्ट और आढ़तियों से मुक्ति के साथ ही कृषि व्यापार की अधिक स्वतंत्रता की मांग की गई थी।

कृषि क्षेत्र में उदारीकरण/आजादी की जरूरत- यूनियन

भारतीय किसान यूनियन ने 3 अप्रैल, 2019 को ट्वीट कर किसान घोषणा पत्र के मुख्य प्रावधानों के बारे में जानकारी दी थी। इस ट्ववीट में लिखा गया था,’किसान घोषणापत्र केसीसी द्वारा तैयार किया गया है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो कृषि से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधानों के बारे में महत्वपूर्ण ब्यौरा देता है। कृषि क्षेत्र में उदारीकरण/आजादी की जरूरत है। सभी राजनीतिक दलों को इन सुझावों को अपनाना चाहिए।

मनमाने प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग

दूसरे ट्वीट में एपीएमसी एक्ट, आवश्यक वस्तु अधिनियम और व्यापार पर तदर्थ और मनमाने प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग की गई थी, जो कर्ज मुक्ति, न्यायबंदी, धन मुक्ति, धन वापसी, व्यापार की स्वतंत्रता, वायदा व्यापार (futures trading), विज्ञान और तकनीक का उपयोग करने की स्वतंत्रता को बाधित करते हैं।

किसान बाजार तक पहुंच की कमी के कारण पीड़ित- यूनियन

किसान घोषणा पत्र में लिखा गया है कि कानूनी और नियामक प्रतिबंधों के द्वारा किसानों को गरीबी की जंजीरों से जकड़कर रखे जाने से समस्त नागरिकों की आजादी और समृद्धि क्षीण हुई है। किसान अपनी उपज की कीमतों और बाजार तक पहुंच की कमी के कारण पीड़ित है, जबकि उपभोक्ताओं को बहुत अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

मुक्त और प्रतिस्पर्धी बाजार, व्यापार की स्वतंत्रता

किसान घोषणा पत्र के पेज 7 पर लिखा गया है,  ‘संपत्ति के अधिकार की मान्यता और सम्मान पर आधारित मुक्त और प्रतिस्पर्धी बाजार, व्यापार की स्वतंत्रता की सुविधा प्रदान करते हैं और ये किसी भी जीवंत और बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक शर्तें हैं। लेकिन किसानों पर तमाम तरह के प्रतिबंध हैं, जैसे वे अपनी उपज को कहां, कैसे और किस कीमत पर बेचे। ये सभी प्रतिबंध उनके संपत्ति अधिकारों के उल्लंघन के स्वरूप है।’

एपीएमसी किसानों के लिए गले का फंदा- यूनियन

किसान घोषणा पत्र के पेज 7 पर लिखा गया है, ‘कृषि उपज विपणन समितियां (एपीएमसी), जो किसानों को उनकी पैदावार का उचित मूल्य सुनिश्चित करने औऱ बिचौलियों द्वारा उन्हें शोषण से बचाने के लिए बनाई गयी थी, अब इसके बजाय चुनिंदा लाइसेंस धारी व्यापारियों को लिए कानूनी रूप से एकाधिकार का माहौल तैयार कर दिया है, जो अब किसानों और अन्य व्यापारियों के लिए गले का फंदा बन गए हैं।’

आवश्यक वस्तु अधिनियम ने किसानों के लिए बढ़ाया जोखिम-यूनियन

किसान घोषणा पत्र के पेज 7 पर लिखा गया है, ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मूल्य नियंत्रण, कीमतों को स्थिर करने के बजाय कई कृषि उत्पादों की कीमतों में लगातार और अनियंत्रित उतार-चाढ़ाव में योगदान करते हैं। इन कानूनों ने किसानों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है, उन्हें खेती में निवेश करने के प्रति सशंकित कर दिया है। व्यापारियों के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है, आपूर्ति बाधित कर दी है और उपभोक्ता के लिए परिहार्य संकट पैदा कर दिया है।’

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