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दुनिया को कोरोना मुक्त करने में टेक्नोलॉजी की भूमिका अहम : मोदी

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आज पूरा देश राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मना रहा है। 1998 में आज ही के दिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल और सशक्त नेतृत्व में पोखरण विस्फोट किया गया था। देश के वैज्ञानिकों की अप्रतिम उपलब्धि के रूप में यह दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे विश्व में कोरोना को खत्म करने में टेक्नोलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की है। उन्होंने कहा है कि पूरी दुनिया को कोरोना से मुक्त करने में टेक्नोलॉजी की भूमिका काफी अहम है। लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि टेक्नोलॉजी की इस भूमिका को अहम बनाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका भी कम अहम नहीं है। टेक्नोलॉजी के उपयोग को सामन्य मानवी के जीवन से लेकर प्रशासन और आर्थिक क्षेत्र तक में विस्तार देने के लिए अगर अब तक के किसी एक प्रधानमंत्री की भूमिका सबसे अधिक रेखांकित की जाएगी तो पहले पायदान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे। उन्होंने टेक्नोलॉजी के उपयोग के माध्यम से न केवल लोगों के जीवन में बल्कि देश के सामाजिक, प्रशासनिक और आर्थिक क्षेत्र में नई क्रांति लाने में अहम भूमिका निभाई है।

पीएम मोदी ने टेक्नोलॉजी को बनाया जन उपयोगी

इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती है कि देश के विकास में प्रौद्योगिकी का अहम भूमिका रही है। लेकिन टेक्नोल़ॉजी को ग्रामीण स्तर पर ले जाने और उसके उपयोग को विस्तृत करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे अधिक जोर दिया। यह मानने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए कि अगर आज इंटरनेट के उपयोग में ग्रामीण क्षेत्र शहरी क्षेत्र को पछाड़ कर आगे बढ़ गया है तो इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जाता है। अगर आज देश में डिजिटल ट्रांजेक्सन बढ़ा है तो इसका श्रेय भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जाता है। अगर आज केंद्र से भेजा गया एक रुपया पूरे एक रुपये के रूप में लाभार्थी की जेब तक पहुंच रहा है तो इसका श्रेय पीएम मोदी के टेक्नोलॉजी विजन को ही जाता है।

कोरोना को हराने के लिए तकनीकी के उपयोग पर जोर  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर देश के सक्षम वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को याद करते हुए उनकी सराहना की है। साथ ही उन्होंने आज वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में खड़े योद्धाओं को भी सलाम किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि आज भी दुनिया को कोरोना से मुक्त करने में तकनीक मददगार साबित हो रहा है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने उन्हें सलाम किया है जो आज इस संकट की घड़ी में तकनीक के माध्यम से दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में जुटे हुए हैं।

कोरोना के खिलाफ धोने योग्य मास्क विकसित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टेक्नोलॉजी विजन का ही प्रताप है कि आज दिल्ली आईआईटी के एक स्टार्टअप कंपनी नैनोसेफ सॉल्यूशन ने काफी सस्ता और और धोनेवाला फेस मास्क विकसित कर पाया है। यह फेस मास्क कोरोना के खिलाफ जंग में काफी कारगर है, खास बात है कि इस मास्क को धोकर 50 या उससे अधिक बार इस्तेमाल किया जा सकता है। मालूम हो कि आईआईटी दिल्ली के एक पूर्व छात्र अनुसुइया रॉय और उनकी टीम ने एन-सेफ नाम का एक एंटी-माइक्रोबियल और धोने वाला फेस मास्क बनाया है। खास बात है कि इस मास्क को इस्तेमाल करने के बाद धोकर दुबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। दो एन सेफ मास्क के पैक की कीमत 299 रुपये है जबकि चार के पैक के लिए यह 589 रुपये हैं।

 आईआईटी के छात्रों ने बनाया कोरोना ‘कवच’

कोरोना से लड़ने के लिए आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने फेस मास्क के रूप में जो कवच तैयार किया है वह न केवल सुरक्षित है बल्कि बाजार में मिलने वाले मास्क से कहीं बेहतर और सस्ता भी है। आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप के तहत टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के छात्रों ने जो कवच बनाया है वह काफी चुस्त है। इसमें वायरस के किसी कोने से घुसने की संभावना नहीं है, इसके साथ ही इसकी कीमत महज 45 रुपये है। आईआईटी दिल्ली में टेक्सटाइल एंड फाइबर इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर बिपिन कुमार ने कहा, ‘भारत के समक्ष कई चुनौतियां आने वाली हैं जैसे एक बार यूज करने के बाद पीपीई (मास्क समेत) का निस्तारण हो। इसके लिए ऐसी चीजें बनाया जाना चाहिए जिसका एक से अधिक बार यूज किया जा सके। जिसका निस्तारण भी आसान हो और जिसे आम आदमी खरीद भी सके। उन्होंने कहा कि आज अपने देशवासियों के लिए  यही समय की भी मांग है। इटेक्स नामक स्टार्टअप से जुड़े छात्र ने इस कवच को दोबारा इस्तेमाल करने लायक और धोने लायक भी बना रहे हैं ताकि कम से कम दस बार इसका फिर से इस्तेमाल हो सके।

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