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सुप्रीम कोर्ट के जिस जज ने नूपुर शर्मा के बयान को बताया भड़काऊ, उनके खिलाफ कांग्रेस और वामपंथी सांसदों ने की थी महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला ने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को कड़ी फटकार लगाते हुए जो टिप्पणी की, उसने पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि जस्टिस पारदीवाला ने उदयपुर हत्याकांड के लिए नूपुर शर्मा को दोषी ठहराकर एक तरह से ईसनिंदा कानून का समर्थन किया है। इससे इस्लामिक कट्टरपंथियों का मनोबल और बढ़ेगा। वहीं जस्टिस पारदीवाला इससे पहले भी अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में आ चुके हैं। आरक्षण को लेकर बेतुका बयान देने पर 58 सांसदों ने राज्यसभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग की थी।

महाभियोग प्रस्ताव लाने के प्रयास के बाद बयान लिया वापस

जस्टिस जेबी पारदीवाला जब गुजरात हाई कोर्ट के न्यायाधीश थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि आरक्षण ने देश को बर्बाद किया है। उनके इस बयान को लेकर लोगों में काफी आक्रोश देखा गया था। दिसंबर 2015 में, राज्यसभा में 58 सांसदों ने सभापति हामिद अंसारी को एक याचिका सौंपी थी, जिसमें उन्होंने जेबी पारदीवाला के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग की थी। अपने खिलाफ बढ़ते आक्रोश और सांसदों की नाराजगी को देखते हुए जस्टिस जेबी पारदीवाला को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने अपनी टिप्पणी को ‘अप्रासंगिक और अनावश्यक’ बताते हुए वापस ले लिया था।

कांग्रेस, वामपंथी, एनसीपी ने की थी महाभियोग प्रस्ताव की मांग

जिन राज्यसभा सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव लाने की याचिका पर हस्ताक्षर किए थे उनमें आनंद शर्मा, दिग्विजय सिंह, अश्विनी कुमार, पीएल पूनिया, राजीव शुक्ला, ऑस्कर फर्नांडीज, अंबिका सोनी, बीके हरिप्रसाद (सभी कांग्रेस), डी. राजा (भाकपा), केएन बालगोपाल (माकपा), शरद यादव (जेडी-यू), एससी मिश्रा और नरेंद्र कुमार कश्यप (बीएसपी), तिरुचि शिवा (डीएमके), डीपी त्रिपाठी (एनसीपी) शामिल थे। राज्यसभा में ऐसी याचिका लगाने के लिए कम से कम 50 सांसदों की आवश्यकता होती है। 

आरक्षण ने देश को बर्बाद किया- पारदीवाला

गौरतलब है कि जस्टिस जेबी पारदीवाला ने हार्दिक पटेल के केस में कहा था,  “यदि कोई मुझसे दो ऐसी चीजें बताने को कहे जिसने देश को बर्बाद कर दिया है या जिसने देश को सही दिशा में प्रगति नहीं करने दी है, तो मैं कहूंगा कि ये आरक्षण और भ्रष्टाचार हैं।” उन्होंने कहा था, ‘देश की आजादी के 65 साल बाद किसी नागरिक का आरक्षण मांगना बहुत ही शर्मनाक है। जब हमारा संविधान बनाया गया था, तो माना गया था कि आरक्षण 10 साल के लिए रहेगा, लेकिन दुर्भाग्य से ये देश की आजादी के 65 सालों बाद भी जारी है।’ पारदीवाला के इस बयान पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए थे। 

 

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