प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित NXT शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए एलपीजी को लेकर फैल रही अफवाहों पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर घबराहट का माहौल बना रहे हैं ताकि उससे फायदा उठाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और सरकार आम लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं और युद्ध के कारण दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा संकट की स्थिति बनी हुई है। ऐसे समय में देश को शांति और धैर्य के साथ हालात का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट के समय सरकार, राजनीतिक दल, मीडिया, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों सभी की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब पूरा देश एकजुट होकर काम करता है तो बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है।
दुनिया भर की नजरों में भारत उम्मीदों से भरा समर्थ देश
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के इस कालखंड में कई विपरीत परिस्थितियों के बीच भी हमारा भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। 21वीं सदी का ये कालखंड…ना भूतो न भविष्यति जैसा है। एक तरफ युद्ध की विभिषिका है। सप्लाई चेन फिर से तहस-नहस हो रही है। संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं की प्रासंगिकता पर सवालिया निशान लग रहा है। और ऐसे कालखंड में हमारा भारत इन विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ रहा है। आज दुनिया इतिहास के जिस महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ी है। उस पड़ाव पर जिस देश के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है…वो है भारत। वर्तमान में इतने सारे संकटों के बीच दुनिया का हर गंभीर नेतृत्व हर जानकार भारत को लेकर बहुत उम्मीदों से भरा हुआ है। अभी हाल ही में फिनलैंड के प्रेसिडेंट एलेक्जेंडर स्टब भारत आए थे। उन्होंने कहा कि अब दुनिया की दिशा, ग्लोबल साउथ तय करेगा और उस दिशा को निर्धारित करने वाली सबसे बड़ी शक्ति भारत होगा। इससे पहले कनाडा के पीएम कार्नी ने भी कहा था कि अगले तीन दशकों में दुनिया की Economic Gravity जिस सेंटर की ओर शिफ्ट हो रही है, उसका नाम भारत है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भी मानते हैं कि भारत दुनिया के सबसे बड़े मुद्दों को सुलझाने वाला एक इन-एविटेबल पार्टनर बन चुका है। आज टेक वर्ल्ड और अर्थ जगत के ग्लोबल लीडर्स के बयानों का निचोड़ निकालें तो एक ही भाव सामने आता है कि अगर आप भविष्य का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको भारत से जुड़ना ही होगा। भारत में होना ही होगा।
रिफॉर्म्स एक्सप्रेस पर सवार भारत कर रहा है नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स
प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी भारत में जिस कार्य को Next to Impossible माना जाता था, आज का भारत उसे साकार करके दिखा रहा है। आज का भारत सिर्फ आगे नहीं बढ़ रहा है, बल्कि भारत खुद को Next Level पर ले जा रहा है। आज देश में Next Generation फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। हम नेक्स्ट जेनरेशन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहे हैं। रिफॉर्म्स एक्सप्रेस पर सवार भारत आज नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स भी कर रहा है। कभी भारत में कई काम कई निर्णय असंभव माने जाते थे। आज भारत वो निर्णय भी ले रहा है। कभी कहा जाता था कि Article 370 हटाना नामुमकिन है। लेकिन आज जम्मू-कश्मीर में Article 370 की दीवार गिर चुकी है। कभी लगता था कि देश में सबका बैंकिंग सिस्टम से जुड़ना असंभव है। लेकिन आज 50 करोड़ से ज्यादा जनधन खातों ने ये संभव कर दिखाया है। कभी लगता था कि ट्रिपल तलाक को खत्म करना असंभव है। लेकिन आज मुस्लिम बहनों को इस अन्याय से मुक्ति मिली है। कभी महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में तैंतीस परसेंट आरक्षण भी असंभव लगता था। लेकिन आज इसके लिए कानून बन चुका है। कभी अंतरिक्ष और advanced technology को लेकर भी भारत की लिमिट्स बताई जाती थीं। लेकिन आज मून मिशन, Semiconductor Mission, क्वांटम मिशन चल रहे हैं। ये सब भारत को Next फ्रंटियर of Technology की ओर ले जा रहे हैं।
एलपीजी को लेकर पैनिक क्रिएटर चाहते हैं अपना एजेंडा चलाना
पीएम मोदी ने कहा कि आजकल LPG को लेकर बहुत चर्चा हो रही है। कुछ लोग हैं जो पैनिक क्रिएट करने का प्रयास कर रहे हैं, अपना एजेंडा चलाना चाहते हैं। मैं इस समय उन पर राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि ऐसा करके वो जनता के समक्ष खुद तो एक्सपोज़ हो ही रहे हैं और देश का भी बड़ा नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज युद्ध से जो ये वैश्विक संकट आया है, उसके प्रभाव से कोई देश अछूता नहीं है। कम अधिक मात्रा में हर कोई इस संकट के शिकार हैं। भारत भी इस संकट से निपटने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है। हम कोरोना की तरह इस संकट से भी उबारेंगे। इसके लिए हम अलग-अलग स्तरों पर प्रयास कर रहे हैं। बीते दिनों दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं से मेरी इसको लेकर बातचीत हुई है। सप्लाई चेन में जो बाधाएं आई हैं, उससे हम कैसे पार पाएं, इसके लिए भी निरंतर प्रयास चल रहे हैं।
बीते एक दशक में भारत की क्षमता में हुई कई गुना बढ़ोतरी
भारत के तेज विकास का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके लिए अलग-अलग एनर्जी सोर्सेस को बढ़ावा देना निरंतर जरूरी रहा है। इसको मजबूत करने के लिए हमने दो स्तरों पर एक साथ काम किया है। पहला- देश में एनर्जी एक्सेस बढ़े, इसके लिए हमने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है। और दूसरा एनर्जी के लिए हमें सिर्फ विदेशों पर निर्भर ना रहना पड़े, इसके लिए एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भरता पर बल दिया। अब मैं आपको गैस सेक्टर के ही कुछ आंकड़े देता हूं। साल 2014 तक देश में सिर्फ 14 करोड़ LPG कनेक्शन थे। यानि देश के करीब-करीब आधे परिवारों के पास ही LPG कनेक्शन था। आज दोगुने से भी अधिक यानि करीब 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं। बीते 11 वर्षों में हमने अपनी बॉटलिंग कैपेसिटी को दोगुना किया है। डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर भी 13 हज़ार से बढ़कर 25 हज़ार से अधिक हो गए हैं। 2014 में देश में सिर्फ 4 LNG टर्मिनल्स थे। आज इनकी संख्या भी बढ़कर दोगुनी हो गई है। गैस पाइपलाइन जो करीब साढ़े तीन हज़ार किलोमीटर होती थी, उसको 10 हज़ार किलोमीटर तक विस्तार दिया है। क्योंकि करीब 60 परसेंट LPG विदेशों से आती है। इसलिए देश के बड़े पोर्ट्स पर इंपोर्ट टर्मिनल कैपैसिटी भी बहुत बढ़ाई गई है।
वैश्विक संकट ने दिखाया कि आत्मनिर्भर होना क्यों इतना जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साल 2014 से पहले तक देश में सिर्फ 25-26 लाख घरों में ही, पाइप से सस्ती गैस यानि PNG की सुविधा थी। आज ये संख्या भी सवा करोड़ से अधिक पहुंच गई है। 2014 में देश में CNG पर चलने वाली गाड़ियां भी 10 लाख से ज्यादा नहीं थी। आज ये संख्या, 70 लाख से अधिक है। और ये तभी संभव हो पा रहा है, क्योंकि बीते दशक में देश के 600 से अधिक जिलों में City Gas Distribution network स्थापित किए गए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध के बाद इस वैश्विक संकट ने एक बार फिर दिखाया है कि किसी भी देश का आत्मनिर्भर होना इतना अधिक जरूरी क्यों है। इसलिए ही बीते वर्षों में हमने भारत को एनर्जी सेक्टर्स में आत्मनिर्भर बनाने के लिए होलिस्टिक तरीके से काम किया है। पेट्रोलियम पर निर्भरता को कम करने के लिए हमने इथेनॉल पर, बायोफ्यूल पर बल दिया। 2014 से पहले देश में सिर्फ एक-डेढ़ परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी ही थी। आज हम पेट्रोल में 20 परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। अगर ये काम न किया होता तो हमें बीते 11 वर्षों में करीब 18 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल विदेशों से खरीदना पड़ता। आज की स्थिति में देखें तो इथेनॉल के कारण हमें प्रतिवर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कम ऑयल इंपोर्ट करना पड़ रहा है। यानि करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की बचत तो देश को सिर्फ इसी से हुई है।
भारत में ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क का करीब 100 प्रतिशत बिजलीकरण
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में पेट्रोलियम का बहुत बड़ा कंज्यूमर हमारी रेलवे भी है। हमारे देश में रेलवे लाइनों के इलेक्ट्रिफिकेशन का काम 60 साल पहले शुरू हुआ था। बावजूद इसके 2014 तक सिर्फ 20 परसेंट रेलवे रूट का इलेक्ट्रिफिकेशन ही हो पाया था। बाकी रेलवे रूट्स पर हजारों डीजल इंजन चला करते थे। आज भारत में ब्रॉडगेज नेटवर्क का करीब-करीब 100 परशेंट बिजलीकरण हो चुका है। इससे साल 2024-25 में ही भारतीय रेलवे ने करीब 180 करोड़ लीटर डीज़ल की बचत की है। अगर इलेक्ट्रिफिकेशन न हुआ होता तो हर वर्ष इतना डीज़ल बनाने के लिए एक्स्ट्रा क्रूड ऑयल इंपोर्ट करना पड़ता। ऐसे ही, हमने मेट्रो का नेटवर्क बढ़ाया, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर फोकस किया। एक और बहुत बड़ा काम हमने रीन्युएबल एनर्जी को लेकर किया है। आज हमारी टोटल installed power generation capacity का आधा हिस्सा रीन्यूएबल सोर्स से आता है। हमारी कुल रिन्यूएबल क्षमता आज 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। आप सोचिए साल 2014 में भारत की सोलर पावर कैपेसिटी सिर्फ दो गीगावॉट थी। आज ये करीब चालीस गुणा बढ़कर hundred and thirty गीगावॉट हो चुकी है।
हमारी सरकार के प्रयासों से अंतिम सांसें गिन रहा है माओवादी आतंक
पीएम मोदी ने कहा कि बीता एक दशक, आत्मनिर्भरता के साथ-साथ संवेदनशील गवर्नेंस का भी रहा है। हमारे देश का एक बड़ा हिस्सा वहां रहने वाले लोग दिल्ली में बैठी कांग्रेस सरकारों की सोच से भी दूर रहे। लेकिन हमारी सरकार ने विकास की दौड़ में पीछे रह गए लोगों को गवर्नेंस की प्राथमिकताओं से जोड़ा। आज इन इलाकों में हाउसिंग हो, रोड्स हों, स्कूल-हॉस्पिटल हों ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए ही Aspirational District योजना, Aspirational Block योजना, पीएम जनमन योजना जैसी स्पेशल अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों का एक बहुत बड़ा पाप ये भी रहा कि उन्होंने देश के एक बड़े हिस्से को माओवादी आतंक की आग में जलने के लिए छोड़ दिया था। देश के करीब-करीब हर बड़े राज्य का बहुत बड़ा हिस्सा माओवादी आतंक की गिरफ्त में था। लेकिन बीते सालों में देश ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। हम बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़े और इसका नतीजा आज देश देख रहा है। साल 2013 में एक सौ अस्सी से अधिक जिले माओवादी आतंक से प्रभावित थे। आज माओवादी आतंक से प्रभावित जिलों की संख्या, सिंगल डिजिट में पहुंच चुकी है। बीते एक साल में ही 2100 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है 900 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं हैं। जो हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे, ऐसे 300 से अधिक कट्टर नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। इसका परिणाम ये हुआ कि जो इलाके कभी डर के साए में जीने को मजबूर थे, वहां आज विकास की नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।









