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Yellow Journalism : हिन्दुओं को बदनाम करने वाली टेलिग्राफ की कवरेज पढ़िए !

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मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है लेकिन टेलिग्राफ अखबार Yellow journalism के जरिए भारत में जहर फैलाने की लगातार कोशिश कर रहा है। टेलिग्राफ की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग का ताजा उदाहरण यह है कि दिल्ली के शाहीन बाग में घटना में गोलीबारी की घटना और उत्तर पूर्वी दिल्ली के मौजपूर इलाके में घटना को तस्वीर सहित प्रकाशित किया लेकिन अखबार ने अपनी रिपोर्ट में हकीकत को पूरी तरह छिपा कर हिन्दुओं को बदनाम करने की भरपूर कोशिश की। आइए बताते हैं कैसे?

‘हे राम भक्त’ लिखकर बदनाम किया! 

दिल्ली के शाहीन बाग में 31 जनवरी 2020 की घटना को बड़े पैमाने पर प्रकाशित कर टेलिग्राफ ने हिन्दुओं को बदनाम करने की भरपूर कोशिश की। अखबार ने ‘हे राम भक्त’ से हेडलाइन लगाई। हेडलाइन में पीएम को संबोधित करते हुए लिखा कि न्यू इंडिया के ठगों ने बापू के अमर शब्द हे राम शब्द को रे राम भक्त में तब्दील कर दिया। इसके साथ ही अखबार ने सब हेडर में गोली मारो…. बयान को प्रमुखता से छापा। अखबार ने शाहीन बाग के आरोपी की तस्वीर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर में गोली लगने वाले युवक शादाब फारूक की तस्वीर और उसके बयान को छापा गया। कुल मिलाकर इस खबर के जरिए टेलिग्राफ ने कहीं न कहीं हिन्दुओं को बदनाम करने की कोशिश की लेकिन दूसरी तरफ महीनों से धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं लिखा।

हिन्दुओं को बदनाम करने की कोशिश!

इसी तरह टेलिग्राफ ने 25 फरवरी 2020 की अपनी रिपोर्ट में भी हिन्दुओं को बदनाम करने की भरपूर कोशिश की। मीडिया में खबरों के मुताबिक दोनों पक्षों के द्वारा आगजनी और उपद्रव की घटना को अंजाम दिया गया है। लेकिन टेलिग्राफ ने अपनी पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट में उस तस्वीर को प्राथमिकता दी जिसमें एक समूह विशेष के व्यक्ति की पिटाई कर रहे हैं, जिससे हिन्दुओं को बदनाम किया जा सके। तस्वीर के नीचे लिखा कि नागरिकता संशोधन कानून के समर्थक एक व्यक्ति पर हमला करते हुए। प्रकाशित खबर में टेलिग्राफ ने The Real Beast से हेडलाइन लगाई जिसका अर्थ हुआ असली खतरनाक जानवर। सब हेडर के रूप में लिखा गया कि ट्रंप की कार नहीं बल्कि लेकिन संरक्षित ठग मेंशन किया गया। 4 लोग मारे गए और पुलिस मुकदर्शक बनी रही। रिपोर्ट में लिखा गया कि सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को ‘तथाकथित’ सीएए समर्थक लिखा गया। रिपोर्ट में लिखा गया कि जय श्रीराम का नारा लगाते हुए एक ग्रुप का वीडियो वायरल है। पूरी रिपोर्ट में दूसरे पक्ष की बातों और दूसरे वायरल वीडियो की बातों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है।

गोली चलाने वाले मोहम्मद शाहरुख को नहीं छापा

25 फरवरी 2020 को टेलिग्राफ की खबर में करीब आठ राउंड फायरिंग करने वाले मोहम्मद शाहरुख की तस्वीर को प्रकाशित नहीं किया। इसके अलावा दिल्ली के हेड कांस्टेबल की मौत को खबर में लगभग नजरअंदाज किया गया जबकि घायल डीसीपी अमर शर्मा के बारे में रिपोर्ट में कुछ भी लिखा गया। सवाल ये है कि आखिर 31 जनवरी 2020 को गोली चलाने वाले आरोपी की तस्वीर छापी गई तो फिर 25 फरवरी की रिपोर्ट में मोहम्मद शाहरुख की तस्वीर की बोत छोड़ दीजिए इस संबंध में अखबार ने अपनी रिपोर्ट में एक लाइन तक नहीं लिखी। मोहम्मद शाहरूख के गोली चलाते वीडियो को दूसरे मीडिया हाउस ने दिखाय लेकिन टेलिग्राफ ने पूरी तरह नजरअंदाज कर कहीं न कहीं हिन्दुओं को बदनाम करने की कोशिश की। 

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