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दिल्ली दंगों पर सुरक्षा एजेंसियों का खुलासा, पाकिस्तान के 1000 से ज्यादा हैंडल्स से हुए ट्वीट

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दिल्ली में हुए दंगों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया है। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली हिंसा के दौरान पाकिस्तान से 1000 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट संचालित किए गए। 

इस्लामाबाद, कराची, रावलपिंडी और लाहौर से चल रहा था काम

दिल्ली हिंसा पर सुरक्षा एजेंसिंयो की रिपोर्ट में 100 हैंडल्स की जानकारी है जिनमें # DelhiRiots2020, #DelhiBurning, #ShameonDelhiPolice, #DelhiPoliceTruth और #DelhiPoliceMurders के साथ कई ट्वीट साझा किए गए थे।

एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार सोशल मीडिया अकाउंट को इस्लामाबाद, कराची, रावलपिंडी और लाहौर से संचालित किया जा रहा था।

पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से भी हुए ट्वीट

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली हिंसा में पाकिस्तान से 1000 से ज्यादा अकाउंट संचालित किए गए थे। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी खुलास हुआ कि कुछ ट्वीट पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से भी किए गए थे।

गौरतलब है कि दिल्ली में हुई हिंसा में राजधानी में भीषण तबाही मची थी हिंसा में करीब 53 लोग मारे गए थे। जबकि 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। दिल्ली पुलिस ने दावा कर बताया था कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर अब तक 200 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने कहा था कि अब तक 712 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

सुनियोजित साजिश के तहत कराए गए दिल्ली दंगे, नहीं बख्शे जाएंगे दंगाई- अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली हिंसा को सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया और इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, वहीं किसी निर्दोष को तकलीफ नहीं होने दी जाएगी। लोकसभा में दिल्ली हिंसा पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा है कि दिल्ली दंगे एक सोची-समझी साजिश के तहत किए गए थे। उन्होने कहा कि दिल्ली पुलिस इतनी कठोर कार्यवाही करेगी कि दंगा करने वालों के लिए यह एक सबक होगा। उन्होंने कहा कि इस हिंसा में जिन लोगों की जान गई है उन सब के लिए हृदय की गहराइयों से दुख व्यक्त करता हूं । श्री शाह ने दंगों में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सदन के माध्यम से देश की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मोदी सरकार दंगों में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बक्शेगी। इतने कम समय में दंगे इतने बड़े स्तर पर फैलना यह जाहिर करता है कि कोई पूर्व नियोजित साजिश रही है। इस तरह के कामों में लिप्त संस्थाओं में कितनी राशि कहां से आई है इस पर भी जांच की जा रही है। श्री शाह ने बताया कि 3 लोग जो दिल्ली के दंगों में वित्तीय सहायता पहुंचा रहे थे उनकी शिनाख्त कर ली गई है। श्री शाह ने कहा कि जिन्होंने भी दंगा करने की हिमाकत की है वह कानून की गिरफ्त से भाग नहीं पाएंगे। श्री शाह ने बताया कि जांच के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी निर्दोष को परेशान न किया जाए।

गृह मंत्री ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को जिस तरह से रखने का प्रयास किया जा रहा है वह ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि 25 तारीख रात 11 बजे के बाद एक भी घटना घटित नहीं हुई। अमित शाह ने कहा कि दिल्ली के 4 प्रतिशत क्षेत्र और 13 प्रतिशत आबादी तक ही हिंसा सीमित रखने का काम दिल्ली पुलिस ने किया है और यह 12 थानों तक ही हिंसा रुकी रहे यह एक अच्छा प्रयास रहा । श्री शाह ने यह भी कहा कि 24 फरवरी 2020 को दंगों की पहली सूचना प्राप्त हुई और 25 फरवरी रात 11 बजे अंतिम सूचना प्राप्त हुई और दिल्ली पुलिस ने बहुत ही संयम से काम लेकर 36 घंटों के अंदर हिंसा को समेटने का काम किया है।

अमित शाह ने कहा कि कहा कि दिल्ली के दंगों पर पूरी नजर थी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को पुलिस का मनोबल बढ़ाने के लिए वहां भेजा गया था। उन्होंने यह भी बताया कि तुरंत ही स्पेशल सीपी अपॉइंट किए गए और शीघ्रता के आधार पर इस को काबू करने का प्रयास किया गया। अमित शाह ने बताया कि वर्तमान में 80 से ज्यादा कंपनियां वहां तैनात हैं और गुनहगारों को पकड़ने की व्यवस्था शुरू की जा चुकी है। श्री शाह ने सदन को बताया कि 26 तारीख के बाद से 700 से ज्यादा प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, 26 सौ से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं। सीसीटीवी और वीडियो फुटेज का डिटेल एनालिसिस किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आम लोगों से भी हिंसा से संबंधित वीडियो फुटेज मंगाए गए हैं और बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस को फुटेज प्राप्त भी हुए हैं। फेस आईडेंटिफिकेशन सॉफ्टवेयर द्वारा चेहरों की पहचान की जा रही है जिसके आधार पर यह भी तथ्य प्राप्त हुए हैं कि 300 से ज्यादा लोग उत्तर प्रदेश से आकर यहां हिंसा करने के लिए जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि सीएए पर पूरे देश के अल्पसंख्यकों को गुमराह किया जा रहा है। सीएएए में किसी की भी नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है इसमें केवल पीड़ित लोगों को नागरिकता देने का काम किया जा रहा है। अमित शाह ने कहा कि पूरे देश में सीएए के समर्थन में रैलियां निकली हैं और बड़ी संख्या में लोग उनमें शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी पार्टी के नेता लोगों को उकसा रहे थे और 14 दिसंबर की हेट स्पीच के बाद शाहीन बाग का धरना शुरू हुआ। श्री शाह ने बताया कि इस तरह भड़काऊ भाषण 24 तारीख को दंगों की शक्ल में परिवर्तित हो गए।

अमित शाह ने कहा कि दिल्ली दंगों में पैसा पहुंचा है, सोशल मीडिया में भड़काया गया है इन सब की जांच चल रही है और कोई बच नहीं पाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट को क्लेम सबमिशन समिति के गठन से संबंधित पत्र लिखा जा चुका है।

दिल्ली दंगों पर में खुलासा, पीएफआई के संपर्क में थे ‘आप’ और कांग्रेस नेता

जिस तरह से दिल्ली में दंगों को अंजाम दिया गया, उससे आशंका जतायी जाने लगी थी कि यह किसी बड़ी साजिश का नतीजा है। जैसे-जैसे पुलिस और ईडी की जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आशंका हकीकत में बदलती जा रही है और साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने कट्टरपंथी संगठन पीएफआई के सरगना परवेज़ और सेक्रेटरी इलियास को गिरफ्तार किया है। दोनों पर शाहीन बाग प्रदर्शन की फंडिंग और दिल्ली में हुए दंगों को भड़काने का आरोप है। इन दोनों का संबंध आईएसआईएस से जुड़ी दंपत्ति से था, वहीं इनकी पहुंच आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं तक थी, जो कॉल, मैसेज और व्हाट्सएप के जरिए जुड़े हुए थे।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट के मुताबिक आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के तार भी पीएफआई से जुड़े हुए थे। इसमें कहा गया है कि संजय सिंह पीएफआई के अध्यक्ष मोहम्मद परवेज अहमद से लगातार संपर्क में थे। ईडी ने कहा है कि संजय सिंह और परवेज के बीच व्हाट्सएप चैट भी की गई है। इसके अलावा दोनों ने एक-दूसरे से मुलाकात भी की थी।

ईडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भीम आर्मी और कांग्रेस के नेता उदिज राज के भी PFI से संबंध थे। ईडी अधिकारियों का कहना है कि जिन-जिन का नाम सामने आया है उन्हें आने वाले समय में नोटिस भेजा जाएगा और इस संबंध में जवाब तलब किया जाएगा।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया है कि मोहम्मद परवेज़ कांग्रेस के कई नेताओं से संपर्क में था। मोहम्मद परवेज़ कई भड़काऊ व्हाट्सएप ग्रुप्स से भी जुड़ा हुआ है, जो दंगा फैलाने का काम करते हैं। कपिल मिश्रा कई बार कहते रहे हैं कि अगर दंगाई ताहिर हुसैन के कॉल डिटेल की जांच हो तो ये साफ़ हो जाएगा कि दंगों के समय वो आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह से लगातार संपर्क में था।

दंगों के दौरान आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा को दंगाइयों ने मारकर नाले में फेंक दिया था। अंकित का शव 26 फरवरी को बरामद किया गया। कई लोगों की गवाही और स्थानीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अंकित की हत्या में आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व पार्षद मुहम्मद ताहिर हुसैन का हाथ है। जब ताहिर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ और उस पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी, तो कई लोग उसके बचाव में सामने आए। इसमें पीएफआई के साथ संजय सिंह और AAP के विधायक अमानतुल्लाह खान भी शामिल थे।  

ताहिर हुसैन को घिरते देखकर आम आदमी पार्टी ने उससे किनारा कर लिया और पार्टी से निलंबित कर दिया। वहीं आतंकी संगठन पीएफआई का दर्द सामने आया। दिल्ली हिंसा में संलिप्त संगठन पीएफआई ने कहा कि ताहिर हुसैन की कोई गलती नहीं थी, वह गंदी राजनीति का शिकार बना है। इसके साथ ही पीएफआई ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी की केजरीवाल सरकार पर भी जमकर हमला बोला।

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान बार बार ताहिर हुसैन का बचाव कर रहा है। पुलिस की गिरफ्त में ताहिर हुसैन के आने के बाद अमानतुल्लाह ने ट्वीट किया और पुलिस जांच से पहले ही ताहिर को बेकसूर बता दिया। अमानतुल्लाह खान ने कहा कि पूरा मुल्क जानता है कि ताहिर हुसैन बेक़सूर है। बीजेपी उसको फंसा रही है । अगर बीजेपी में हिम्मत है तो ताहिर हुसैन, कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा, अमित शाह और अमूल्य पटनायक का नार्को टेस्ट पब्लिक के सामने कराए। सच सबके सामने आ जायेगा कि दिल्ली फसादात किसने कराये।

इससे पहले अमानतुल्लाह खान ने एक ट्वीट में धर्म को आधार बनाकर ताहिर का बचाव किया था। अमानतुल्लाह खान ने कहा था कि आज ताहिर हुसैन सिर्फ़ इस बात की सज़ा काट रहा है कि वो एक मुस्लिम है। शायद आज हिंदुस्तान में सबसे बड़ा गुनाह मुस्लिम होना है, ये भी हो सकता है आने वाले वक्त में ये भी साबित कर दिया जाए कि दिल्ली तशद्दुद ताहिर हुसैन ने कराया है।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ताहिर हुसैन के बचाव में कहा कि ताहिर हुसैन पहले ही इस पर अपना बयान दे चुके हैं। उन्होंने मदद के लिए पुलिस को फोन किया था। पुलिस आठ घंटे बाद उनके आवास पर पहुंची और उन्हें उनके घर से निकाला गया। संजय सिंह ने कहा, ‘ताहिर हुसैन के बयान को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है। इसे जांच का हिस्सा क्यों नहीं बनाया जा रहा है। उन्होंने अपने घर पर हमले की सूचना देने के लिए 100 नंबर पर कॉल किया। पुलिस को पता है कि उन्होंने हुसैन और उनके परिवार को निकाला। वह पिछले दो दिनों से अपने घर में नहीं हैं।’

ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी से निलंबित एक पार्षद है, जो एक मजदूर से एक रसूखदार नेता बन गया। उसकी पहुंच सीधे आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं तक है। बीजेपी संवाद ने एक ट्वीट किया, जिसमें बताया कि हिंसा के तीन दिन पहले तक ताहिर हुसैन ने अमानतुल्लाह खान को 56 बार, मनीष सिसोदिया को 18 बार और सीएम अरविंद केजरीवाल को 9 बार फोन किया था।

बीजेपी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने सवाल किया है कि आम आदमी पार्टी ताहिर हुसैन को बचाने की पुरजोर कोशिश क्यों कर रही है।संजय सिंह कई बार ताहिर हुसैन का बचाव कर चुके हैं। तिवारी ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि ताहिर और अन्य आरोपियों से पूछताछ के बाद आम आदमी पार्टी के कई और बड़े नेताओं के नाम सामने आएंगे। इसी डर और घबराहट का सबूत आम आदमी पार्टी के नेता अपने बयानों के जरिए दे रहे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा, “मैं सदन को और सदन के माध्यम से देश को विश्वास दिलाता हूँ कि दंगों के लिए जिम्मेदार लोग और दंगों का षड्यंत्र करने वाले लोग, चाहे वे किसी भी जाति, मजहब या पार्टी के हो, उन्हें किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा।” मोदी सरकार की सख्ती और ताबड़तोड़ हुई गिरफ़्तारियों के बाद और भी राज़ खुलेंगे। अब देखना है कितने सफेदपोशों की पोल खुलती है। ये तो स्पष्ट हो गया है कि इन दंगों के पीछे एक बहुत बड़ा राजनीतिक संरक्षण था, जो सीएए विरोध से उपजा था।

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