Home विपक्ष विशेष ‘न्यू इंडिया’ के खिलाफ कौन रच रहा साजिश

‘न्यू इंडिया’ के खिलाफ कौन रच रहा साजिश

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आज देश स्वच्छ हो रहा है। सड़क, रेल और बंदरगाहों का देश भर में विश्वस्तरीय जाल फैल रहा है, जिस पर बिना किसी रुकावट के सामानों की आवाजाही, जीएसटी नेटवर्क के जरिए संभव हो रही है। हर गरीब परिवार को बिजली, पानी की सुविधा वाला पक्का मकान मिल रहा है। सबको रोजगार के लिए केन्द्रों में कौशल सीखने की व्यवस्था है। हर जिले में संसाधनों के अनुरूप उद्योग स्थापित हो रहे हैं। नये रोजगार के अवसर बन रहे हैं। पूरा देश डिजिटल हाई-वे से जुड़ रहा है। देश की सैन्य और आर्थिक ताकत के कारण पूरी दुनिया भारत को अपना बनाने के लिए आतुर है। भारत की संस्कृति और योग को पूरी दुनिया में सम्मान मिल रहा है।

क्या ऐसी कल्पना देश के बारे में 2014 से पहले कोई कर सकता था, जो आज हकीकत के रूप में हमारे सामने आ रहा है। इस सपने को सच करने के लिए पिछले चार साल से एक व्यक्ति बिना रुके, थके लगातार काम कर है। वह व्यक्ति है देश का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के भारत यज्ञ में बाधा डालने वाली आसुरी शक्तियां भी पूरा तांडव कर रही हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के विरोध का पैटर्न- नरेन्द्र मोदी के 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री का पद ग्रहण करते ही देश की तमाम धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक बड़ा झटका लगा और उनके गले के नीचे से बात नीचे नहीं उतर रही थी कि कैसे गुजरात का मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बन गया, वह भी लगातार बारह साल तक विरोध करने के बावजूद। मजबूरी में, जनता के आदेश को इन ताकतों को मानना ही था, लेकिन इन ताकतों ने हर एक छोटी घटना को खौफनाक तरीके से पेश करने और प्रधानमंत्री मोदी के विरोध का रास्ता नहीं छोड़ा। पिछले चार साल में इन ताकतों ने जिन मुद्दों को उठाया है, आइये उन पर एक नजर डालते हैं-

दिसंबर 2014- फरवरी 2015– देश के शहरों में चर्चों के जलाए जाने की झूठी खबरों को मुद्दा बनाना।

मई-जून 2015– योग दिवस मनाने को लेकर हंगामा किया।

अक्टूबर 2015- अखलाक और गौमांस खाने पर प्रतिबंध की झूठी खबर पर अवार्ड वापसी से लेकर धरना-प्रदर्शन।

जनवरी 2016– वेमुल्ला की मौत पर जवाहर लाल नेहरू और हैदराबाद विश्वविद्यालय में झूठी दलीलों को आधार बनाकर आंदोलन।

नवंबर 2016 -मार्च 2017- नोटबंदी पर पूरे देश में धरना -प्रदर्शन।

अप्रैल-मई 2017 – गौ मांस खाने की पाबंदी की झूठी खबर को लेकर पूरे देश में विरोध की हवा खड़ी करना।

जून-2017- हरियाणा में ट्रेन में एक मुस्लिम युवक जुनैद की कुछ लोगों से सीट को लेकर मारपीट होने और बाद में जूनैद की मौत हो जाने को गौमांस से जोड़कर बवाल मचा दिया।

मई-जुलाई 2017- जम्मू कश्मीर मे पत्थरबाजी की घटनाओं पर पूरे देश में बवाल करना।

जून-2017- राष्ट्रपति के चुनाव को धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे का चुनाव बनाकर विरोध की हवा बनाना।

जुलाई-नवंबर 2017– जीएसटी पर पूरे देश में हंगामा करना।

सितंबर 2017– बुलेट ट्रेन को लेकर विरोध खड़ा करना।

सिंतबर 2017- बीएचयू में छात्रों और पुलिस के बीच हुई मारपीट में झूठी खबरों को आधार बनाकर हंगामे का माहौल बनाना।

अक्टूबर 2017अप्रैल 2018– आधार संख्या को पूरे देश में लागू करने को लेकर हर जगह विरोध करना।

दिसंबर 2017– मुस्लिम तीन तलाक विधेयक पर विरोध और हंगामा।

जनवरी 2018– भीमा कोरेगांव की झूठी खबर से हिंसा करने के लिए उकसाना।

जून 2017-जनवरी 2018- चीन से डोकलाम विवाद पर  विरोध करना।

मार्च-अप्रैल 2018– अनुसूचित जाति जनजाति के कानून में बदलाव की झूठी खबर पर 2 अप्रैल को भारत बंद और हिंसा।

अप्रैल 2018– 7 साल की एक बच्ची की जम्मू में 14 जनवरी को रेप और हत्या की आधी सच्ची और आधी झूठी खबर पर देश में हंगामा।

प्रधानमंत्री मोदी के चार साल के शासनकाल के दौरान हर कुछ महीनों पर झूठी खबरों को या किसी चुनिंदा कानून व्यवस्था की घटना को तूल देकर विरोध में हवा बनाने का प्रयास किया जाता रहा है। यही पैटर्न 2 अप्रैल को आयोजित भारत बंद और वर्तमान में जम्मू कांड पर हो रहे विरोध में भी नजर आता है।

इन विरोधों के पीछे कौन हैं- यह बात किसी से छुपी नहीं है कि प्रधानमंत्री का विरोध केवल देश के राजनीतिक दल ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि देश के बाहर से भी संचालित होने वाली तमाम शक्तियां कर रही हैं।  देश के विपक्ष की राजनीतिक शक्तियों के साथ-साथ देश की प्रगति और विकास को कमजोर करने वाली शक्तियां भी काम कर रही हैं। बहुत हद तक यह भी संभावना हो सकती है कि चीन और पाकिस्तान इनमें से कुछ शक्तियों को प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के लिए हर प्रकार से सहयोग कर रहे हों। आज ही Sunday Gurdian में छपी एक रिपोर्ट इस बात का खुलासा करती है-

यह बात जगजाहिर है कि डोकलाम विवाद के दौरान चीनी मीडिया और सरकारी संस्थाओं ने जमकर सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ विष वमन किया था।

विडंबना की बात यह है कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी भी उन शक्तियों का साथ दे रही है जो इस देश को राजनैतिक, आर्थिक और सामरिक रुप से कमजोर करना चाहते हैं।

विरोध कैसे किया जा रहा है- सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, GIS आदि के दौर में किसी बड़े संगठन की जरुरत नहीं है। लोगों की व्यक्तिगत सूचनाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए विश्लेषित करके, लोगों को भ्रमित करके विरोध को उकसाया जा सकता है। इस बात के सबूत कैब्रिज एनालिटीका से तो मिले ही हैं और 2 अप्रैल को भारत बंद के लिए किस तरह से देश के बाहर के संगठनों ने देश के राजनीतिक दलों का साथ दिया, इसका खुलासा इकोनामिक टाइम्स के रिपोर्ट से होता है।


विरोध के चेहरे- प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के लिए पीछे से तमाम शक्तियां लगी हुई हैं, लेकिन इनके चेहरे देश के नेता और पत्रकार हैं। इनमें कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर पार्टी के सभी नेता शामिल हैं और इनका शाथ देते हैं देश के कुछ एजेंडा पत्रकार। इन एजेंडा पत्रकारों में राजदीप सरदेसाई, सागरिका घोष, पुण्य प्रसून वाजपेयी, रविश कुमार, स्वाती चतुर्वेदी, शिवम् विज, मृणाल पांडे आदि तमाम लोग हैं। इनके साथ कुछ साहित्यकार, इतिहासकार जैसे जावेद अख्तर, रामचंद्र गुहा, नयनतारा सहगल, रोमिला थापर, अमर्त्य सेन आदि भी हां में हां मिलाते हुए नजर आते हैं। विरोध करने वाले ये सभी चेहरे उँचे-उँचे आर्दशों और मापदंडों की बातें तो करते हैं लेकिन समाज में गुस्से की अग्नि को हवा देने का काम हर समय करते रहते हैं।

 

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