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पार्टी कलह पर काबू पाने में विफल राहुल-सोनिया: पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक के बाद अब हरियाणा में हुड्डा-शैलजा की लड़ाई खुलकर आई सामने

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी पार्टी को सही नेतृत्व देने में विफल रहे हैं। इनके नेतृत्व में पार्टी का चुनावों में प्रदर्शन अब तक सा सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। लोकसभा चुनाव में पार्टी की हैसियत एक विपक्षी दल के लायक भी नहीं रही है। कई राज्यों में पार्टी का सफाया हो गया है। खुद को राष्ट्रीय पार्टी कहने वाली कांग्रेस कई राज्यों में क्षेत्रीय दल के भरोसे वैतरणी पार करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के अक्षम नेतृत्व के कारण राज्यों में आंतरिक कलह चरम पर है। दिल्ली में जहां पार्टी के कुछ पुराने दिग्गजों ने गांधी परिवार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, वहीं राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, कर्नाटक के साथ हरियाणा में नेताओं की आपसी लड़ाई ने पार्टी का बंटाधार कर दिया है।

शिवकुमार-सिद्धारमैया में वर्चस्व की लड़ाई
कर्नाटक में पार्टी के दो दिग्गज नेता आमने-सामने आ गए हैं। कर्नाटक में साल 2023 में विधानसभा के चुनाव में मुख्यमंत्री का उम्मीदवार कौन होगा इसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच खींचतान शुरू हो गई है। सिद्धारमैया गुट के विधायकों ने डीके शिवकुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच विवाद उन नेताओं को कांग्रेस में वापस लाने को लेकर है, जो कि पार्टी छोड़कर दूसरे दल में शामिल हो गए हैं। सिद्धारमैया का कहना है कि उनकी पार्टी में ऐसे नेताओं की वापसी नहीं होगी जो कांग्रेस को छोड़ दूसरे दल में शामिल हो गए हैं। जबकि शिवकुमार ऐसे नेताओं की पार्टी में वापसी चाहते हैं।

राजस्थान में गहलोत और पायलट के बीच मनमुटाव
राजस्थान में भी कांग्रेस में आपसी कलह और मनमुटाव का दायरा बढ़ता जा रहा है। राजस्थान कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच विवाद चरम पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद शुरू से ही सार्वजनिक है। दोनों के बीच पिछले 10 माह से न तो मुलाकात हुई और न ही फोन पर बात हुई। मंत्रियों में एक-दूसरे के काम नहीं करने और विभागीय मामलों को लेकर मतभेद है। हाल ही में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने मुख्यमंत्री के सामने मंत्रिपरिषद की बैठक में एक-दूसरे को देख लेने की धमकी दे दी।

पंजाब में कैप्टन और सिद्धू के बीच लड़ाई
पंजाब में भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी पिछले चार साल से कोई हल निकालने में फेल रहे हैं। अब अगले साल मार्च, 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव भी होने है, लेकिन पार्टी आलाकमान मामले को लटकाए हुए हैं। इसका असर पार्टी को भुगतना पड़ेगा। कोरोना संकट काल में आम लोगों पर ध्यान देने के बजाय मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू आपसी लड़ाई में ही बिजी रहे। कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाइकमान सिद्धू को उनकी मांग के अनुसार प्रदेश संगठन की कमान सौंपने के विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि यह फैसला ले पाना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि सिद्धू को मनाने के चक्कर में पार्टी के सामने न सिर्फ कैप्टन की नाराजगी बढ़ने का खतरा है, बल्कि पंजाब के तमाम नेता इसके विरोध में मुखर हो उठेंगे।

छत्तीसगढ़ में बघेल-सिंहदेव के बीच तकरार
छत्तीसगढ़ में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेसी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। दोनों के बीच कलह से पार्टी और सरकार की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है। लेकिन पार्टी आलाकमान हर राज्य की तरह यहां भी इस मुद्दे को लटकाए हुए हैं। पिछले दिनों मामला तब और बढ़ गया जब स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल के लिए सरकारी अनुदान देने की तैयारी पर कड़ा ऐतराज जताया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुझे इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है और न ही मुझसे कोई इस मसले पर चर्चा की गई है। मैं इसके सख्त खिलाफ हूं कि सरकारी पैसा निजी हाथों में दिया जाए। टीएस सिंहदेव के इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। मुख्यमंत्री के निर्देश से जारी की गई जानकारी पर स्वास्थ्य मंत्री ने न केवल अनभिज्ञता जताई, बल्कि सीएम के मंशा पर भी असहमति जता दी।

हरियाणा में हुड्डा-शैलजा की लड़ाई खुलकर आई सामने
कांग्रेस नेतृत्व पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में जारी विवाद में उलझा हुआ ही था कि अब हरियाणा ने एक अलग मुश्किल खड़ी कर दी है। अब हरियाणा कांग्रेस के भी आंतरिक मतभेद के स्वर उठने लगे हैं। हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक विधायकों ने प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा के साथ काम करने में असमर्थता जताई है। यहां हुड्डा समर्थक विधायकों ने कुमारी शैलजा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दो दिन पहले ही दिल्ली में पहले तो 21 हुड्डा समर्थक विधायकों ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ बैठक की फिर इनमें से पांच विधायकों का प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल से जा कर मिला। ये विधायक प्रदेश अध्यक्ष पद पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बैठाने की मांग की है। इस आंतरिक लड़ाई में पार्टी की रही-सही साख भी बर्बाद हो रही है।

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