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राहुल जी, ये वही लोग हैं जो कांग्रेस की ‘गरीबी हटाओ’ के नारे के बावजूद गरीब ही रह गए

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राहुल गांधी इन दिनों जिन मजदूरों और गरीबों के हक में आवाज बुलंद करने वाले नेता की अपनी छवि गढ़ना चाह रहे हैं, गरीबी की वह तस्वीर कांग्रेस पार्टी की ही बनाई हुई है। और यह कमाल भी कांग्रेस पार्टी ही कर सकती है कि किसी एक मुद्दे को 50 साल से ज्यादा तक खींच सके। चाहे मुद्दा कश्मीर में धारा 370 में बदलाव का हो या देश से गरीबी मिटाने का। साल 1971 के चुनावों में इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओ’ के नारे की बदौलत सत्ता हासिल की थी। 2019 के चुनाव के पहले कांग्रेस ने गरीबी को एक बार फिर हथियार बनाना चाहा। कांग्रेस ने न्यूनतम आय योजना के तहत गरीबों को साल में 72,000 रुपये की आर्थिक मदद देने का एलान किया। लेकिन, कांग्रेस के इस जुमले पर जनता को भरोसा नहीं हुआ। और कांग्रेस फिर बुरी तरह पराजित हुई।

दरअसल, 1971 से 2019 तक के करीब पचास वर्षों में कांग्रेस की राजनीति में कोई बदलाव नहीं आया। छद्म धर्मनिरपेक्षता, एक खास संप्रदाय को प्राथमिकता देने की कांग्रेस की नीति और गरीबों को महज वोट बैंक समझने की उसकी नीयत में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। इस बीच, खुद को गरीबों के लिए काम करने वाली कथित सामाजिक न्याय की पार्टियों ने भी देश पर करीब दो दशक तक राज किया, लेकिन गरीबों का भला करने की बजाय उन्होंने देश को जाति के दलदल में धकेल दिया। इनमें उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और बिहार की राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियां शामिल हैं। खुद को गरीबों का नेता कहने वाले मुलायम सिंह यादव, मायावती और लालू प्रसाद जैसे लोगों ने गरीबों को भला तो नहीं ही किया, अपने शासन के दौरान भ्रष्टाचार और अपराध के नए रिकॉर्ड जरूर बनाए।

बहरहाल, वक्त ने करवट ली और देश में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आते ही गरीबों के लिए एक के बाद एक कई योजनाओं का न सिर्फ ऐलान किया, बल्कि पूरी पारदर्शिता के साथ उन्हें जमीन पर उतार कर दिखाया। आजादी के सत्तर साल बाद तक देश की एक तिहाई से ज्यादा आबादी के पास अपना बैंक अकाउंट तक नहीं था। जनधन योजना के माध्यम से 38 करोड़ से ज्यादा लोगों के बैंक खाते खोले गए। कांग्रेस के जमाने में केंद्र द्वारा भेजे गए 100 पैसे का 16 पैसा गांवों तक पहुंचता था। अब मोदी सरकार में शत-प्रतिशत पैसा गरीबों के खातों मे सीधे ट्रांसफर किए जाने लगे। राशन प्रणाली में सुधार कर देश में वन नेशन, वन राशन कार्ड यानी ONORC को 1 जून से लागू किया जा रहा है। इस स्कीम को प्रवासी मजदूरों के लिए गेम चेंजर स्कीम माना जा रहा है। देश के 12 राज्यों में इस योजना की शुरुआत 1 जनवरी 2020 से ही हो गई है। कोरोना महामारी के इस दौर में यह योजना बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

दरअसल, कांग्रेस पार्टी कोरोना संकट के इस दौर में भी ओछी राजनीति कर रही है, जबकि मोदी सरकार प्रवासी मजदूरों को तात्कालिक राहत देने के साथ ही उनका भविष्य सुरक्षित करने में जुटी है। आइए एक नजर डालते हैं गरीबों और मजदूरों के लिए किए गए मोदी सरकार के कामकाज पर।

18 मई 2020
40 हजार करोड़ रुपए मनरेगा पर खर्च होंगे
कोरोना की वजह से विश्व भर में छाई आर्थिक मंदी से निपटने के लिए मोदी सरकार ने भारत के इतिहास में 20 लाख करोड़ रुपये के सबसे बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान किया। इसमें से मनरेगा पर 40 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। यह अतिरिक्त फंड होगा, जो पहले से तय की गई राशि से अलग होगी। सरकार का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी मजदूर जब अपने घर लौटेंगे तो उनके पास काम की कमी नहीं रहने दी जाएगी। मानसून के सीजन में भी मनरेगा के तहत उन्हें काम दिया जाएगा। पानी सहेजने वाले कामों में मजदूरों को रोजगार मिलेगा। सरकार मनरेगा का यह फंड तत्काल रिलीज करेगी।

पीएम गरीब कल्याण योजना
पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 20 करोड़ महिलाओं के जन-धन खातों में पैसे डाले गए। कुल 10,025 करोड़ रुपये खातों में भेजे गए।

कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को 3,950 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 2.2 करोड़ वर्कर्स को मदद पहुंचाई गई है।

प्रवासी श्रमिकों के लिए रेल यात्रा का 85 फीसद खर्च केंद्र ने उठाया। भोजन और पानी की व्यवस्था भी केंद्र सरकार ने की।

पीएम किसान निधि के तहत 8 करोड़ से ज्यादा गरीब किसानों को राहत

16 मई तक पीएम किसान निधि के तहत 8.19 करोड़ किसानों तक मदद पहुंचाई गई है। इसके तहत हर किसान को तिमाही 2,000 रुपये मिलते हैं।

उज्ज्वला गैस कनेक्शन में गरीब-दलितों को प्राथमिकता-
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत मोदी सरकार ने जो काम किया है, उसने गरीबों-दलितों के घरों में आमूलचूल बदलाव ला दिया है। 18 फरवरी 2020 तक देश के 712 जिलों में कुल 8 करोड़ 3 लाख से 40 हजार गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से आधे से भी अधिक कनेक्गशन गरीब-दलित परिवारों का दिए गए हैं।

शौच मुक्त हुए 6 लाख से ज्यादा गांव
6 लाख से अधिक गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली- तेजी से लागू किये जा रहे स्वच्छता मिशन का परिणाम है कि हर रोज हजारों की संख्या में दलित परिवारों के लिए शौचालयों का निर्माण हो रहा है। 18 फरवरी 2020 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में 6 लाख से अधिक गांवों में 10.89 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है।

आयुष्यमान योजना में दलित-गरीबों का मुफ्त इलाज
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 18 फरवरी 2020 तक 84 लाख से अधिक दलितों-गरीबों का मुफ्त इलाज किया जा चुका है। जाहिर है कि मोदी सरकार ने गरीबों को सालाना 5 लाख रुपये के मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान योजना शुरू की थी।

देश के सभी दलित गांवों में बिजली पहुंची-
दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत देश के लगभग सभी गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है। देश में 597,464 गांवों में से 597,265 गांवों बिजली रिकार्ड समय में पहुंच चुकी है।

50 प्रतिशत आदिवासी आबादी वाले हर क्षेत्र में एकलव्य स्कूल
मोदी सरकार ऐसे हर कदम उठा रही है जिससे SC और ST वर्ग के लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार को बढ़ावा मिले। इसके लिए सरकार ने एकलव्य आवासीय स्कूल योजना को लेकर नया लक्ष्य रखा है। अनुसूचित जनजाति की 50 प्रतिशत आबादी और उनकी कम से कम 20 हजार की संख्या वाले प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर एकलव्य स्कूल खोले जाएंगे। इस वक्त देश में 282 एकलव्य मॉडल स्कूल संचालित किए जा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ने देशबर में कुल 483 एकलव्य स्कूलों की स्वीकृति दी है।

जनजातीय आबादी के लिए बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने में तेजी
जनजातीय मंत्रालय ने जनजातियो के सामाजिक- आर्थिक विकास के लिए अपना प्रयास लगातार जारी रखा है। जनजातीय समाज की उचित शिक्षा, भवन, और अन्य जरूरी योजनाओं से समाज में व्याप्त अंतर को कम करने की कोशिश की जा रही है। इस वर्ग के स्टूडेंट्स की बेहतर शिक्षा के लिए प्रीमैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के मद में आर्थिक सहायता भी बढ़ाई जा चुकी है। इस छात्रवृत्ति को हासिल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा है। इसके साथ ही जनजातीय विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय अनुदान एवं छात्रवृत्ति योजना भी है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने अनुदान योजना को यूजीसी से अपने हाथो में ले लिया है ताकि विद्यार्थियों तक पैसा समय से पहुंचे । अनुदान में दिव्यांगों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद “अनुसूचित जाति उत्पीड़न क़ानून” को मजबूत किया।

श्रमयोगी मानधन योजना
लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार अभियान में किए गए एक महत्वपूर्ण वादे को BJP सरकार ने कैबिनेट की बैठक के पहले ही दिन पूरा कर दिया। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को प्रति माह तीन हजार रुपये पेंशन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। मोदी सरकार की यह योजना असंगठित क्षेत्र के कामगारों के भविष्य के लिए बहुत अहम है। इसके तहत रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा चालक, कूड़ा बीनने वाले, खेतिहर मजदूर, बीड़ी बनाने वाले जैसे असगंठित क्षेत्र से जुड़े कामगारों को 60 साल की उम्र के बाद 3000 रुपये प्रति महीने पेंशन दिया जाएगा। देश के करीब 42 करोड़ कामगारों को इससे फायदा मिलने की उम्मीद है।

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