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हमारी विचारधारा राष्ट्रहित के विषयों में राष्ट्र के साथ नजर आनी चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “ मेरी कामना है कि JNU में लगी स्वामी जी की ये प्रतिमा, सभी को प्रेरित करे, ऊर्जा से भरे। ये प्रतिमा वो साहस दे, courage दे, जिसे स्वामी विवेकानंद प्रत्येक व्यक्ति में देखना चाहते थे। ये प्रतिमा वो करुणाभाव सिखाए, जो स्वामी जी के दर्शन का मुख्य आधार है। ये प्रतिमा हमें राष्ट्र के प्रति अगाध समर्पण सिखाए, प्रेम सिखाए, जो स्वामी जी के जीवन का सर्वोच्च संदेश है। ये प्रतिमा देश को vision of oneness के लिए प्रेरित करे, जो स्वामी जी के चिंतन की प्रेरणा रहा है। ये प्रतिमा देश को youth-led development के विजन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे, जो स्वामी जी की अपेक्षा रही है। ये प्रतिमा हमें स्वामी जी के सशक्त-समृद्ध भारत के सपने को साकार करने की प्रेरणा देती रहे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो एक जिसने हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है- वो है राष्ट्रहित से ज्यादा प्राथमिकता अपनी विचारधारा को देना। क्योंकि मेरी विचारधारा ये कहती है, इसलिए देशहित के मामलों में भी मैं इसी साँचे में सोचूंगा, इसी दायरे में काम करूंगा, ये गलत है। आज हर कोई अपनी विचारधारा पर गर्व करता है। ये स्वाभाविक भी है। लेकिन हमारी विचारधारा राष्ट्रहित के विषयों में राष्ट्र के साथ नजर आनी चाहिए, राष्ट्र के खिलाफ नहीं। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में देखिए, जब-जब देश के सामने कोई कठिन समय आया है, हर विचार हर विचारधारा के लोग राष्ट्रहित में एक साथ आए हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि शिकागो में स्वामी जी के ऐतिहासिक भाषण के बाद अमेरिकी विद्वानों ने कहा था 21वीं सदी भारत की है। इस भविष्यवाणी को सच करने की जिम्मेदारी हम सबकी है। आत्मनिर्भर बनने के लिए हम सभी जुट होकर काम करें। उन्होंने कहा, “आज हर सेक्टर में किए जा रहे अभूतपूर्व सुधार आत्मनिर्भरता की भावना से किए जा रहे हैं। देश की जनता ने वोट के माध्यम से इन रिफॉर्म्स को समर्थन भी दिया है। आज सिस्टम में जितने रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं, उनके पीछे भारत को हर प्रकार से बेहतर बनाने का संकल्प है। आज हो रहे रिफॉर्म्स के साथ नीयत और निष्ठा पवित्र है। आज जो रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं, उससे पहले एक सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है। इस कवच का सबसे बड़ा आधार है- विश्वास।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान दशकों तक सिर्फ राजनीतिक चर्चा का ही विषय रहा, ज़मीन पर उसके हित में कदम सीमित ही थे। बीते 5-6 सालों में हमने किसानों के लिए एक सुरक्षा तंत्र विकसित किया। सिंचाई का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर हो, मंडियों के आधुनिकीकरण पर निवेश हो, यूरिया की उपलब्धता हो, सॉयल हेल्थ कार्ड्स हों, बेहतर बीज हों, फसल बीमा हो, लागत का डेढ़ गुणा MSP हो और पीएम सम्मान निधि से सीधी मदद हो। बीते सालों में किसानों के इर्द-गिर्द जब ये सुरक्षा कवच बन गया, जब उनमें विश्वास जागा तब जाकर एग्रो रिफॉर्म्स को हमने आगे बढ़ाया।

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