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तिरंगे का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण, नए कृषि कानून से छोटे किसानों को लाभ मिलना हुआ शुरू- राष्ट्रपति कोविंद

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ शुक्रवार, 29 जनवरी को नए दशक में संसद का पहला बजट सत्र शुरू हुआ। राष्ट्रपति कोविंद ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने नए किसान कानून, किसान आंदोलन और 26 जनवरी को लाल किले पर हुई हिंसा का जिक्र किया। उन्होंने साफ कहा कि तिरंगे और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले साल पास हुए तीनों कृषि बिलों का कई राजनीतिक दलों ने समय-समय पर समर्थन किया था। इन कानूनों की दो दशकों से मांग हो रही थी। उन्होंने भरोसा जताया कि इन कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सरकार पालन करेगी। उन्होंने कहा, ‘व्यापक विमर्श के बाद संसद ने सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषि (सशक्‍तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं। इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शुरू हुआ। छोटे किसानों को होने वाले इन लाभों को समझते हुए ही अनेक राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इन सुधारों को अपना भरपूर समर्थन दिया था। देश में अलग-अलग फोरम पर, देश के हर क्षेत्र में दो दशकों से जिन सुधारों की चर्चा चल रही थी और जो मांग हो रही थी, वह सदन में चर्चा के दौरान भी परिलक्षित हुई।’

उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा को सर्वोपरि रखने वाली मेरी सरकार, इन कानूनों के संदर्भ में पैदा किए गए भ्रम को दूर करने का निरंतर प्रयास कर रही है। मेरी सरकार ने लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण आंदोलनों का हमेशा सम्मान किया है। लेकिन पिछले दिनों हुआ तिरंगे और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए। मेरी सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएं थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है। बल्कि इन कृषि बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं।’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए मेरी सरकार आधुनिक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए एक लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरुआत की गई है। देश भर में शुरू की गईं किसान रेल, भारत के किसानों को नया बाजार उपलब्ध कराने में नया अध्याय लिख रही हैं। यह किसान रेल एक तरह से चलता फिरता कोल्ड स्टोरेज है। अब तक 100 से ज्यादा किसान रेलें चलाई जा चुकी हैं जिनके माध्यम से 38 हजार टन से ज्यादा अनाज और फल-सब्जियां, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक किसानों द्वारा भेजी गई हैं।’

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए मेरी सरकार अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने का भी अभियान चला रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को 20 लाख सोलर पंप दिए जा रहे हैं। सरकार द्वारा गन्ने के सीरे, मक्का, धान इत्यादि से एथनॉल के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले 6 वर्षों में सरकार की सकारात्मक नीतियों के कारण एथनॉल का उत्पादन 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 190 करोड़ लीटर हुआ है। यह उत्पादन, इस वर्ष, बढ़कर 320 करोड़ लीटर तक हो जाएगा, ऐसी उम्मीद है। एथनॉल, देश के किसानों की आय बढ़ाने का एक बड़ा जरिया बनकर उभर रहा है।’

उन्होंने कहा, ‘सरकार आज गांवों के बहुआयामी विकास के लिए लगातार काम कर रही है। गांव के लोगों का जीवन स्तर सुधरे, यह मेरी सरकार की प्राथमिकता है। इसका उत्तम उदाहरण 2014 से गरीब ग्रामीण परिवारों के लिए बनाए गए 2 करोड़ घर हैं। वर्ष 2022 तक हर गरीब को पक्की छत देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की गति भी तेज की गई है। सरकार द्वारा शुरू की गई स्वामित्व योजना से अब ग्रामीणों को उनकी संपत्ति पर कानूनी हक मिल रहा है। स्वामित्व के इस अधिकार से अब गांवों में भी संपत्तियों पर बैंक लोन लेना, हाउस लोन लेना आसान बनेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। इस योजना का भी विशेष लाभ गांवों के छोटे उद्यमियों और कुटीर उद्योग से जुड़े लोगों तथा छोटे किसानों को होगा।’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमियों की विशेष भूमिका है। मेरी सरकार ने महिलाओं को स्वरोज़गार के नए अवसर देने के लिए कई कदम उठाए हैं। मुद्रा योजना के तहत अब तक 25 करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं, जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं।’

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत देश में आज 7 करोड़ से अधिक महिला उद्यमी करीब 66 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। बैंकों के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले 6 वर्षों में 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपए का ऋण दिया गया है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार एक रुपए में ‘सुविधा’ सैनिटरी नैपकिन देने की योजना भी चला रही है। सरकार गर्भवती महिलाओं के मुफ्त चेक-अप की मुहिम एवं राष्ट्रीय पोषण अभियान चलाकर, उन्हें आर्थिक मदद देकर, गर्भवती माताओं एवं शिशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। इसी का परिणाम है कि देश में मातृ मृत्यु दर 2014 में प्रति लाख 130 से कम होकर 113 तक आ गयी है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर भी पहली बार घटकर 36 तक आ गई है, जो वैश्विक दर 39 से कम है।’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘महिलाओं की समान भागीदारी को आवश्यक मानने वाली मेरी सरकार नए-नए क्षेत्रों में बहनों-बेटियों के लिए नए अवसर बना रही है। भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम हो, मिलिट्री पुलिस में महिलाओं की नियुक्ति हो, या फिर अंडर ग्राउंड माइन्स में तथा ओपन कास्ट माइन्स में महिलाओं को रात्रि में कार्य करने की अनुमति, ये सभी निर्णय पहली बार मेरी सरकार ने ही लिए हैं। महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन स्टॉप सेंटर, अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम और देश भर में फास्ट ट्रैक कोर्ट पर तेज़ी से काम किया गया है।’

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ मिशन’ के जरिए चिकित्सा सेवाओं को डिजिटल बनाने की शुरुआत भी की गई है। इसके माध्यम से आने वाले समय में देश के नागरिक डिजिटल अपाइंटमेंट, डिजिटल रिपोर्ट के साथ साथ डिजिटल हेल्थ रिकार्ड जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘सरकार, भारत में बने सामान के उपयोग के लिए जन-भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है। आज वोकल फॉर लोकल देश में जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। भारत में बने सामान के प्रति भावनात्मक लगाव के साथ ही गुणवत्ता में भी वे श्रेष्ठ हों, इस दिशा में काम किया जा रहा है। देश में ईज ऑउ डूइंग बिजनेस में सुधार के लिए भी निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। कोरोना के इस काल में, प्रत्येक भारतीय का जीवन बचाने के प्रयासों के बीच अर्थव्यवस्था को जो हानि हुई थी, उससे भी अब देश उबरने लगा है। यह आज अनेक इंडिकेटर्स के माध्यम से स्पष्ट हो रहा है। इस मुश्किल समय में भी भारत दुनिया के निवेशकों के लिए आकर्षक स्थान बनकर उभरा है। अप्रैल से अगस्त, 2020 के बीच लगभग 36 अरब डॉलर का रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारत में हुआ है।’

उन्होंने कहा, ‘देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक रूप देने के लिए मेरी सरकार 110 लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। साथ ही, भारतमाला परियोजना के पहले चरण में छह नए एक्सप्रेस-वे और 18 नए एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर्स का निर्माण चल रहा है। गुजरात के हजीरा और घोघा के बीच शुरू की गई रो-पैक्स फेरी सेवा हो या फिर केवड़िया और साबरमती रिवर फ्रंट के बीच सी-प्लेन सेवा, ये भारत में वॉटर ट्रांसपोर्ट को नया आयाम दे रहे हैं। दुनिया की सबसे ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा का गौरव अपने साथ रखने वाले केवड़िया से अब देश के अनेक शहरों से सीधे ट्रेनें भी चलने लगी हैं।’

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘सरकार पूर्वी भारत के संपूर्ण और संतुलित विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पूर्वोत्तर की भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषाई विशेषताओं और सामाजिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए तेज़ विकास की नीति पर काम किया जा रहा है। ब्रह्मपुत्र नदी असम सहित उत्तर-पूर्वी राज्यों की ‘जीबोनधारा’ है। इसी जीवनधारा को आर्थिक गतिविधियों का आधार बनाकर विभिन्न राष्ट्रीय जलमार्गों के आरंभ के लिए काम हो रहा है। इसका लाभ पूर्वोत्तर के किसानों, युवाओं और उद्यमियों, सभी को होगा। ‘अर्थ ब्रह्मपुत्र’ प्रोग्राम से ‘इंटीग्रेटेड नेशनल वाटरवेज’ का विकास कर, ब्रह्मपुत्र और बराक नदी को विकास की धारा बनाने का प्रयास जारी है। मेरी सरकार ने पूर्वोत्तर में स्थाई शांति के लिए संवेदनशीलता और सहभागिता की जिस नीति के साथ काम किया उसका लाभ आज साफ दिख रहा है। आज पूर्वोत्तर में उग्रवाद समाप्ति की ओर है और हिंसा की घटनाओं में बड़ी कमी आई है। हिंसा के रास्ते पर भटके युवा अब विकास और राष्ट्र-निर्माण की मुख्यधारा में लौट रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘आजादी के बाद पहली बार, जम्मू कश्मीर में जिला परिषद के चुनाव सफलता के साथ संपन्न हुए हैं। बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी ने दर्शाया है कि जम्मू कश्मीर नए लोकतांत्रिक भविष्य की तरफ तेज़ी से आगे बढ़ चला है। प्रदेश के लोगों को नए अधिकार मिलने से उनका सशक्तीकरण हुआ है। आयुष्मान भारत- सेहत योजना लागू होने के बाद जम्मू कश्मीर के हर परिवार को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का लाभ मिलना तय हुआ है। जम्मू में सेंट्रल एड्मिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की एक बेंच भी स्थापित की गई है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद, कुछ महीने पहले लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के चुनाव की प्रक्रिया भी सफलता-पूर्वक सम्पन्न हुई है। अब लद्दाख के लोग स्वयं, अपने प्रदेश के विकास से जुड़े निर्णय और तेज़ी से ले रहे हैं।’

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘इस कोरोनाकाल में हम जब देश के भीतर आपदाओं से निपट रहे थे, तब हमारी सीमा पर भी देश के सामर्थ्य को चुनौती देने के प्रयास किए गए। एलएसी पर द्विपक्षीय सम्बन्धों और समझौतों को दरकिनार करते हुए शांति भंग करने की कोशिशें हुईं। लेकिन हमारे सुरक्षाबलों ने न केवल पूरी सजगता, शक्ति और हौसले के साथ इन षड्यंत्रों का मुंहतोड़ जवाब दिया, बल्कि सीमा पर यथास्थिति बदलने के सभी प्रयासों को भी नाकाम किया। हमारे जांबाजों ने जिस संयम, शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया, उसकी जितनी भी सराहना की जाए, कम है। जून 2020 में हमारे 20 जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए गलवान घाटी में अपना सर्वोच्च बलिदान भी दिया। हर देशवासी इन शहीदों का कृतज्ञ है।’

उन्होंने कहा, ‘सरकार भविष्य के भारत की व्यापक भूमिका को देखते हुए अपनी सैन्य तैयारियों को सशक्त करने में जुटी है। आज अनेक आधुनिक साजो-सामान भारत की सैन्य क्षमता का हिस्सा बन रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर भी सरकार का जोर है। कुछ दिन पहले ही सरकार ने HAL को 83 स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के निर्माण का ऑर्डर दिया है। इस पर 48 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। सरकार द्वारा Make in India को बढ़ावा देने के लिए रक्षा से जुड़े 100 से अधिक सामानों के आयात पर रोक लगा दी गई है। इसी तरह सुपरसोनिक टॉरपीडो, क्विक रिएक्शन मिसाइल, टैंक और स्वदेशी रायफलों सहित अनेक अत्याधुनिक हथियार देश में ही बन रहे हैं। आज भारत रक्षा सामान के निर्यात के क्षेत्र में भी तेज़ी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘भारत अपनी वैश्विक जिम्मेदारियों को इस कोरोनाकाल में भी जिस गंभीरता से निभा रहा है उसे आज दुनिया देख रही है। ”वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को चरितार्थ करते हुए भारत ने देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ ही 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयों की आपूर्ति की। भारत, वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की उपलब्धता को सुनिश्चित करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह देश का गौरव बढ़ाने वाली बात है कि वंदे भारत मिशन, जो दुनिया में इस प्रकार का सबसे बड़ा अभियान है, उसकी सराहना हो रही है। भारत ने दुनिया के सभी हिस्सों से लगभग 50 लाख भारतीयों को स्वदेश वापस लाने के साथ ही एक लाख से अधिक विदेशी नागरिकों को भी उनके अपने देशों तक पहुंचाया है।’

दो हिस्सों में चलने वाला यह बजट सत्र 8 अप्रैल तक चलेगा। बजट सत्र पहला चरण आज से 15 फरवरी तक, और दूसरा चरण 8 मार्च से 8 अप्रैल तक चलेगा।

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