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संसद का बजट सत्र: विकास और विश्वास के साथ राष्ट्रपति मुर्मु ने दिखाई विकसित भारत की पूरी तस्वीर

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संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के साथ हुई। आज 28 जनवरी को संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने एक आत्मविश्वास से भरे, तेजी से आगे बढ़ते विकसित भारत की तस्वीर रखी। उन्होंने कहा कि बीता वर्ष देश के लिए तेज विकास और विरासत के उत्सव का साल रहा है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत आज अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। वंदे मातरम् के 150 वर्ष, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष, बिरसा मुंडा और सरदार पटेल से जुड़े आयोजनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मौके नई पीढ़ी को आगे बढ़ने की ऊर्जा देते हैं।

उन्होंने कहा कि 2026 के साथ भारत इस सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। पिछले 10–11 वर्षों में रखी गई मजबूत नींव, 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने का आधार बनेगी। सामाजिक न्याय पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार का फोकस हर नागरिक को बिना भेदभाव उसका हक देने पर है। इसी का नतीजा है कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

उन्होंने बताया कि देश में चार करोड़ से ज्यादा पक्के घर बने हैं। जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों परिवारों को नल से जल मिला है और उज्ज्वला योजना के जरिए 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियां गिनाते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक 11 करोड़ से ज्यादा मुफ्त इलाज हो चुके हैं। वय वंदना कार्ड और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों ने बुजुर्गों और गरीबों के लिए इलाज को आसान बनाया है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन किया है। चावल, दूध और मछली उत्पादन में देश दुनिया में अग्रणी है, जिससे किसान, मछुआरे और पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। स्मार्टफोन एक्सपोर्ट नए रिकॉर्ड बना रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की रीढ़ बताते हुए उन्होंने ग्रामीण सड़कों, रेलवे के इलेक्ट्रिफिकेशन, वंदे भारत ट्रेनों, मेट्रो नेटवर्क और चिनाब व पंबन ब्रिज जैसी बड़ी परियोजनाओं का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने कहा कि स्पेस टूरिज्म अब भारत के लिए सपना नहीं रहा। भारतीय अंतरिक्ष यात्री की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक यात्रा और गगनयान मिशन देश की नई उड़ान का संकेत हैं।

आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को उन्होंने ऐतिहासिक कदम बताया।

टैक्स और जीएसटी सुधारों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स शून्य करने और जीएसटी रिफॉर्म से मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिली है। महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश अब Women Led Development के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और स्वयं सहायता समूहों से करोड़ों महिलाएं जुड़ चुकी हैं।

रक्षा और सुरक्षा के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की निर्णायक ताकत को दुनिया के सामने रखा है। माओवादी हिंसा अब सिमटकर कुछ जिलों तक रह गई है और कई इलाकों में शांति लौट रही है।
पूर्वोत्तर और पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर उन्होंने कहा कि अब ये इलाके देश की विकास यात्रा का केंद्र बन रहे हैं। सड़क, रेल और स्वास्थ्य ढांचे में बड़े निवेश किए जा रहे हैं। युवाओं और रोजगार पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया के 10 वर्षों में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। लाखों युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार मिला है।

डिजिटल इंडिया, एआई और नई तकनीकों के साथ-साथ डीपफेक और फेक कंटेंट के खतरे पर भी उन्होंने चिंता जताई और संसद से इस पर गंभीर चर्चा की अपील की। खेलों की उपलब्धियों पर खुशी जताते हुए राष्ट्रपति ने महिला क्रिकेट टीम और दिव्यांग खिलाड़ियों की तारीफ की। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी को उन्होंने देश के लिए गर्व का क्षण बताया।

विदेश नीति पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर सेतु की भूमिका निभा रहा है और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सांसदों से अपील की कि वे मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के मुद्दों पर एकजुट हों। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना सामूहिक प्रयास से ही पूरा होगा।

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