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करोड़ों रुपये लेकर चुनाव प्रचार करने वाले प्रशांत किशोर ने शुरू की देश बांटने की राजनीति!

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करोड़ों रुपये लेकर राजनीतिक पार्टियों का चुनाव प्रचार करने वाले प्रशांत किशोर और इंडियन पॉलिटिकल ऐक्शन कमिटी (I-PAC) के कर्ताधर्ता प्रशांत किशोर का असली चेहरा लोगोंं के सामने आने लगा है। मंगलवार को प्रशांत किशोर ने पटना में एक प्रेस कांफ्रेस कर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पिछलग्गू नेता बताया। उन्होंने ये भी कहा कि नीतीश कुमार गोडसे विचारधारा वाले लोगों के साथ हैं। साथ ही पिछले 15 वर्षों में बिहार के विकास पर भी सवाल उठाए। प्रशांत किशोर की इन सारी बातो में राजनीति और विश्वासघात की बू आ रही है। हम आपको बता रहे हैं कि आखिर प्रशांत किशोर की मंशा क्या है और इस तरह के बयान क्यों दे रहे हैं? 

गोडसे विचारधारा पर उठाये सवाल 

प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार गोडसे विचारधारा के साथ खड़े हैं। सवाल ये है कि जब उन्होंने 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के साथ काम किया तो क्या उन्हें गोडसे विचारधारा से प्यार था या नफरत। लोग सवाल ये पूछ रहे हैं कि आखिर तब उन्होंने भाजपा के लिए काम क्यों किया। इसके साथ ही जब वे गोडसे विचारधारा पर सवाल उठा रहे हैं तो उन्हें ये भी बताना चाहिए कि नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल से गठबंधन तोड़ कर भारतीय जनता पार्टी के साथ सरकार बनाई तो उस समय प्रशांत किशोर जदयू के उपाध्यक्ष थे तो उन्होंने नीतीश कुमार के इस फैसले पर सवाल क्यों नहीं उठाए। भाजपा और जदयू ने मिलकर लोकसभा 2019 का चुनाव लड़ा और दोनों पार्टियों के बीच सीट बंटवारे में प्रशांत किशोर ने अहम भूमिका निभाई तब गोडसे विचारधारा वाली बात उनके दिमाग में बात क्यों नहीं आई। 

देश को बांटने चाहते हैं प्रशांत किशोर 

प्रशांत किशोर ने कहा कि गुजरात के लोगों को सिखाने वाले लोग बिहार से ही हैं। हमारा राज्य मूर्ख लोगों का राज्य नहीं है। सवाल ये है कि गुजरात के लोगों को सिखाने वाले बिहार के लोग ही है। क्या गुजरात के लोग बिहार के लोगों को नही सीखा सकते हैं या फिर सीखा रहे है। क्या इसे उनका देश को बांटने वाला बयान नहीं है।  

PK का व्यासायिक हित सर्वोपरि 

प्रशांत किशोर ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश में भ्रम फैलाने की कोशिश की और अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर बयान दिए। बिहार सरकार में मंत्री और जदयू नेता संजय झा ने इशारों इशारों में कहा कि वह इसमें व्यावसियक हित साध रहे हैं। ज्ञात हो कि प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाल रहे हैं। ममता बनर्जी खुलकर सीएए का विरोध कर रही हैं। 

प्रशांत किशोर की कोई विचारधारा नहीं 

प्रशांत किशोर की विचारधारा पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं। क्या प्रशांत किशोर की कोई वाकई विचारधारा है या फिर सिर्फ और सिर्फ वे एक बिजनेसमैन हैं। 2012 और 2014 में भाजपा के साथ, पंजाब और यूपी चुनाव में 2017 प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के लिए बैटिंग की, जिसके लिए उन्हें काफी पैसे मिले। इसके बाद फिर उन्होंने आंध्र प्रदेश में वाई एस जगनमोहन रेड्डी के लिए काम किया, फिर वे ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल से जुड़े। उन्हें ये बताना चाहिए कि आखिर उनकी विचाराधारा क्या है या सिर्फ पैसा ही उनकी विचारधारा है। 

PK बनना चाहते हैं किंग मेकर ?

प्रशांत किशोर ने मंगलवार को पटना में कहा कि वे पार्टी नहीं बनाने जा रहे हैं लेकिन बिहार में बदलाव के लिए काम करना चाहते हैं। वो 20 फरवरी से “बात बिहार की” नाम से एक कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं। इसके तहत राज्य के 8,800 पंचायतों में से लड़कों की एक टीम बनाएंगे। 2 लाख 93 हजार लड़के पहले ही जुड़ चुके हैं। 20 मार्च तक हम राज्य के 10 लाख लड़कों को शामिल करने की योजना है। हमारी योजना है कि राज्य में 10 हजार अच्छे मुखिया जीतकर आएं।   

लालू की पार्टी के साथ जाने की चर्चा 

राजनीतिक हलकों में ये भी चर्चा है कि जदयू से निकाले जाने के बाद प्रशांत किशोर आगामी विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद की पार्टी राष्ट्रीय जनता पार्टी और कांग्रेस वाले गठबंधन के लिए काम कर सकते हैं। लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए न्यौता तक दे दिया है।  

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