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CM Gehlot और सचिन पायलट में सियासी खींचतान फिर तेज, कांग्रेस की आजादी यात्रा से पायलट को किया ‘आजाद’…बड़े नेताओं को साथ लेकर डूंगरपुर गए सीएम

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राजस्थान कांग्रेस में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे के बीच अंदरुनी खींचतान एक बार फिर देखने को मिल रही है। कांग्रेस की आजादी यात्रा से सचिन पायलट की दूरी को इसी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। जयपुर में मौजूद होने के बावजूद सीएम ने पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को आजादी यात्रा से नहीं जोड़ा। सीएम गहलोत, प्रदेश प्रभारी अजय माकन और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा जयपुर से स्पेशल विमान से रतनपुर बॉर्डर के लिए रवाना हुए, लेकिन जयपुर में ही मौजूद सचिन पायलट को किसी ने पूछने की जरूरत ही नहीं समझी। पायलट की हालत सीएम ने ऐसी बना दी है कि जब उनकी जरूरत होती है, वो साथ ले लेते हैं, वरना उनको या उनके कार्यक्रमों को कोई तवज्जो नहीं देते। उल्टा जब भी मौका मिलता है पायलट गुट पर बगावत के बहाने तंज कस देते हैं।

उपचुनाव में गुर्जर वोटों की खातिर ‘दिखावे’ के लिए पायलट को लिया था साथ
इससे पहले उपचुनावों में जब पायलट की गुर्जर वोटों के लिए जरूरत थी, तब तो गहलोत-माकन- डोटासरा उनको लेकर सभाओं में गए थे। तब पायलट को साथ लेकर एकता के दिखावे के लिए हेलिकॉप्टर में सेल्फी लेकर उसे शेयर भी किया था। आज कांग्रेस की आजादी यात्रा में शामिल होने के लिए नेता जयपुर से गए, लेकिन प्लेन और हेलिकॉप्टर में पायलट साथ नहीं थे। आजादी यात्रा से पायलट की दूरी सियासी चर्चा का विषय बनी हुई है। गत छह अप्रैल को गुजरात से शुरू हुई यात्रा ने राजस्थान में प्रवेश कर लिया है। राजस्थान-गुजरात बॉर्डर पर डूंगरपुर में सीएम गहलोत, प्रदेश प्रभारी अजय माकन, मुकुल वासनिक और गुजरात प्रदेश प्रभारी डॉ रघु शर्मा यात्रा में शामिल होंगे। संबोधित करेंगे।

सीएम और पायलट दोनों एक-दूसरे के कार्यक्रमों में शामिल होने से बना रहे हैं दूरी
इस यात्रा में शामिल नहीं पर पायलट को लेकर सियासी अटकलों का बाजार एक बार फिर से गर्म हो गया है। वर्ष 2020 में पायलट कैंप की बगावत के बाद सीएम गहलोत और सचिन पायलट एक दूसरे के कार्यक्रमों शामिल होने से दूरी बनाकर चल रहे हैं। जिस कार्यक्रम में सचिन पायलट जाते हैं उसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नहीं पहुंचते और जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत होते हैं वहां से सचिन पायलट नदारद होते है। हाल में महंगाई को लेकर राजधानी जयपुर में आयोजित प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यक्रम में सीएम गहलोत शामिल नहीं हुए थे। जबकि सचिन पायलट समेत उनके गुट के अधिकांश मंत्री धरने में शामिल हुए थे। सिविल लाइंस फाटक पर दिए गए धरने में सचिन पायलट दिखे तो सीएम नहीं दिखे। इसके कुछ देर बाद सीएम पहुंचे तो सचिन पायलट वहां पर नजर नहीं आए।

साबरमती से शुरू यात्रा काे डूंगरपुर के रतनपुर बॉर्डर पर सीएम ने किया संबोधित
सीएम और पूर्व डिप्टी सीएम में तनातनी के हालात आज भी दिखाई दे रहे हैं। विधानसभा के बजट सत्र के समापन के दौरान सीएम गहलोत द्वारा सभी दलों के विधायकों को दिए गए डिनर में पायलट गुट के मंत्री तो शामिल हुए लेकिन पायलट शामिल नहीं हुए। डूंगरपुर के रतनपुर बॉर्डर पर राष्ट्रीय कांग्रेस के सेवादल के आजादी की गौरव यात्रा की सभा में राजस्थान के ज्यादातर प्रमुख नेता तो मौजूद रहेंगे, लेकिन उसमें सचिन पायलट नहीं रहेंगे। गुजरात के साबरमती से 6 अप्रैल को शुरू हुई यात्रा 15 अप्रैल को राजस्थान में प्रवेश कर गई। इसे कांग्रेस नेताओं ने संबोधित किया। यात्रा का दिल्ली के राजघाट पर समापन होगा। राजस्थान में 700 किलोमीटर तक ये यात्रा निकाली जाएगी।

आजादी यात्रा की सभा में गहलोत ने पायलट खेमे की बगावत को याद किया
आजादी यात्रा की सभा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट खेमे की बगावत को याद करते हुए अमित शाह और गजेंद्र सिंह पर हमले बोले। गहलोत ने शाह और शेखावत पर कांग्रेस पार्टी में तोड़फोड़ करने का बयान देकर नाम लिए बिना सचिन पायलट पर भी निशाना साधा। पिछले लंबे समय से गहलोत हर सभा में सरकार गिराने के षड्यंत्र के आरोप लगाते रहते हैं। उनके निशाने पर गाहे-बगाहे सचिन पायलट आ ही जाते हैं।

राहुल से पायलट की मुलाकात पर गहलोत कह चुके- मैंने कैमरे नहीं लगा रखे
सचिन पायलट ने हाल ही दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री से बीकानेर दौरे के दौरान जब पायलट राहुल की मुलाकात के बारे में पूछा तो गहलोत ने कहा था कि मैंने वहां कोई कैमरे नहीं लगा रखे हैं। कौन, किससे मिल रहा है, या नहीं मिल रहा है, किसको पता है ? गहलोत का यह बयान भी पायलट पर एक तरह से तंज माना गया। सचिन पायलट हर चुनाव में कांग्रेस के स्टार प्रचारक की भूमिका में रहे हैं। अब तक पार्टी के हर कार्यक्रम में प्रमुखता से भाग लेते रहे हैं। आजादी यात्रा की सभा में पायलट को साथ नहीं लेने पर सियासी हलकों में साफ तौर पर कहा जा रहा है कि गहलोत-पायलट में एक बार फिर खटक गई है। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस की खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं।

सीएम के बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर से मैंने टिकट दिलाई थी-सचिन 
इससे पहले भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सियासी खींचतान बाहर आई है। गहलोत और पायलट ग्रुप एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं।  पिछले दिनों सीएम गहलोत ने दावा किया कि यूपीए के दूसरे कार्यकाल में सचिन पायलट को केंद्र में मंत्री बनवाने के लिए उन्होंने सिफारिश की थी। अब पायलट ने इसका इसका ऐसा जवाब दिया है कि सीएम गहलोत के लिए तीर उल्टा ही पड़ गया है। पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा है कि सीएम के बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर से आलाकमान टिकट नहीं देना चाहता था, सोनिया-राहुल गांधी से बात कर उन्होंने टिकट दिलवाई थी।

गहलोत के सिटिंग चीफ मिनिस्टर होने के चलते जोधपुर से वैभव का सिंगल नाम आया
राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव है और कांग्रेस में गहलोत वर्सेज पायलट एक बार फिर शुरू है गया है। हालांकि इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ही की थी। वे जब भी मौका मिलता है पायलट और उनके करीबियों की चुटकी लेना नहीं भूलते। सीएम गहलोत ने पिछले दिनों पायलट के बारे में ऐसा ही एक बयान दिया था, जो सचिन को नागवार गुजरा। वे तब तो चुप रहे, लेकिन अब जैसे ही मौका मिला, पायलट ने जवाब दाग दिया।  पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने पहली बार खुलेआम कहा है कि पिता (अशोक गहलोत) के सिटिंग चीफ मिनिस्टर होने के चलते जोधपुर से सिंगल नाम आया था। आलाकमान वैभव गहलोत को लोकसभा चुनाव में जोधपुर से टिकट देना ही नहीं चाहता था। आलाकमान वैभव गहलोत को जोधपुर से चुनाव लड़ाने के बिल्कुल पक्ष में नहीं था।

सीएम कमलनाथ का बेटा तो जीता, गहलोत का बेटा बड़े मार्जिन से चुनाव हारा
पायलट ने दावा किया कि ऐसे में उस वक्त उन्होंने वैभव गहलोत की पैरवी की। उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलकर कहा कि वैभव ने उनकी कार्यकारिणी में काम किया है। पहले भी कई बार टिकट नहीं दे सके थे, वैभव को एक मौका मिलना चाहिए। पायलट ने कहा- ‘मैं नहीं चाहता था कि मेरे अध्यक्ष रहते हुए अशोक जी,  जो उस वक्त नए-नए मुख्यमंत्री बने थे,  के मनोबल को कोई ठेस पहुंचे।  इसलिए मैंने सीईसी  (सेंट्रल इलेक्शन कमेटी) और ऊपर तक वैभव गहलोत की पैरवी की। मैंने सीईसी में भी कहा कि वैभव को टिकट मिलना चाहिए। टिकट मिला और वैभव चुनाव नहीं जीत सके। वो काफी मार्जिन से चुनाव हारे। राजस्थान की तरह मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे को टिकट मिला था, लेकिन वो चुनाव जीत गए थे। पायलट महारानी कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

यूपीए के दूसरे टर्म में मंत्री के लिए पायलट की पैरवी की : गहलोत
इससे पहले सीएम अशोक गहलोत ने देवनाराण बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए विधायक जोगिन्द्र सिंह अवाना के समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था कि यूपीए के दूसरे टर्म में मैंने पार्टी से सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाने की सिफारिश की थी। अगले दिन पायलट ने फोन करके मंत्री बनवाने में सहयोग का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि मैं पहले ही हाईकमान को आपका नाम दे चुका हूं। उस समय यह बात किसी को नहीं बताई थी।

मीणा, गुर्जर और बाह्मण कोटे से मंत्री पद के लिए दिए नाम
सीएम गहलोत ने कहा कि हाईकमान ने उनके कहने पर ही पायलट को मंत्री बनाया था। सीएम ने यह भी दावा किया कि सिर्फ पायलट ही नहीं, उन्होंने दूसरे सांसदों को भी पैरवी की थी। गहलोत ने कहा कि लोकसभा चुनाव में हम 20 सीट जीत गए थे। पार्टी नेतृत्व ने मुझसे पूछा था कि किन नेताओं को मंत्री बनाना चाहिए। तब मैंने मीणा समाज से नमोनारायण मीणा का नाम दिया।  मुझे लगा कि एक गुर्जर मंत्री बनना जरूरी है, मैंने ही वहां पर सचिन पायलट का नाम दिया।  उस समय ब्राहृमण के तौर पर भीलवाड़ा सांसद सीपी जोशी का मंत्री पद के लिए नाम दिया था।

पायलट के बयान के बाद वैभव गहलोत एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इससे पहले हाल ही में वैभव गहलोत का नाम राजस्थान में ई-टॉयलेट बनाने का टेंडर दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र के कारोबारी से करोड़ों रुपये ठगने के केस में सामने आया था। इस करोड़ों की धोखाधड़ी में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के पुत्र एवं राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वैभव गहलोत और गुजरात कांग्रेस के सचिव सचिन पुरुषोत्तम वालेरा हैं समेत 15 लोग शामिल हैं। महाराष्ट्र के नासिक में इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री के पुत्र समेत इन लोगों के खिलाफ इस्तगासे के जरिये प्राथमिकी भी दर्ज हो गई है। यह मामला सामने आते ही बीजेपी सीएम गहलोत पर हमलावर हो गई है और बीजेपी ने गहलोत से जबाब मांगा है।सीएम के खिलाफ बीजेपी हमलावर, शेखावत, पूनिया और कटारिया ने मांगा जवाब
प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत पर ई- टॉयलेट टेंडर के जरिए धोखाधड़ी करने के आरोप के बाद राजस्थान में सियासी पारा चढ़ गया है। राजनीति गर्माने के बीच केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस खुलासे के बाद सीएम गहलोत पर पुत्रमोह का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने इसे लेकर ट्वीट करते हुए सीएम गहलोत से सफाई मांगी है। विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने मुख्यमंत्री गहलोत से इस बारे में जवाब मांगा है। कटारिया ने सीधे सीएम पर हमला बोलते हुए तंज कसा कि राजस्थान के गांधी बताएं कि उनके बेटे पर टेंडर दिलाने में ठगी का करोड़ों का केस कैसे दर्ज हुआ है? बीजेपी नेताओं की ओर से पूरे मामले में सरकार और सीएम को घेरने के लिए एक के बाद एक ट्वीट किए जा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस- बीजेपी के बीच अब राजस्थान में यह प्रकरण बड़े सियासी मुद्दे के तौर पर उभर कर सामने आएगा।

सरकारी विभागों में टेंडर दिलाने के नाम पर 6.80 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के खिलाफ महाराष्ट्र में दर्ज एफआईआर में वैभव पर नासिक के कारोबारी सुशील भालचंद्र पाटिल ने ई-टॉयलेट सहित सरकारी विभागों में टेंडर दिलाने के नाम पर 6 करोड़ 80 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। सुशील ने नासिक के गंगापुर थाने में वैभव गहलोत सहित 14 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज हुआ है। मुख्य आरोपी गुजरात कांग्रेस के सचिव सचिन पुरुषोत्तम वालेरा हैं। वालेरा के पिता पुरुषोत्तम भाई वालेरा भी वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे हैं।

तेरह राज्यों में पेट्रोल पंपों पर विज्ञापन के कॉन्ट्रैक्ट का झांसा दिया
नासिक में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, सचिन वालेरा ने खुद को एडवरटाइजिंग कारोबारी बताते हुए झांसा दिया कि उसके 13 राज्यों में पेट्रोल पंपों पर विज्ञापन का कॉन्ट्रैक्ट है। उसने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके बेटे वैभव से अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि वो राजस्थान के मुख्यमंत्री के आर्थिक मामले भी देखता है। सचिन ने उसके काम में निवेश करने पर करोड़ों के मुनाफे का भरोसा दिलाया और कहा कि आपको केवल नाम के लिए टेंडर में भाग लेना है। बाकी का काम वैभव गहलोत देखेंगे। सचिन ने इस निवेश के बारे में सारी जानकारी दी। राजस्थान सरकार द्वारा जारी किए गए सर्कुलर दिखाए, जो बाद में फर्जी पाए गए थे।

वैभव गहलोत ने बैंक खाते में निवेश पर मासिक रिटर्न ट्रांसफर किया था
एफआईआर के मुताबिक सुशील पाटिल ने सचिन वलेरा के उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में अलग-अलग समय पर पैसे ट्रांसफर कर दिए। यह रकम 6 करोड़ 80 लाख रुपए के आसपास थी। उस समय कई महीने तक सचिन वलेरा और वैभव गहलोत ने बैंक खाते में निवेश पर मासिक रिटर्न ट्रांसफर कर दिया था। इसे देखते हुए कई और सहयोगियों ने भी निवेश किया। आरोप है कि सचिन और वैभव ने अचानक मंथली भुगतान बंद कर दिया। एफआईआर में वैभव गहलोत पर जुआ खेलने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने कहा कि मुझे सूचना मिली कि वैभव गहलोत टी-20 क्रिकेट मैचों में ‘बैट’ लगाने के लिए अपना मासिक रिफंड इस पर खर्च करता है। इस बीच सचिन ने भुगतान करने के लिए समय मांगा। बाद में सचिन ने पैसा मांगने पर गालियां देनी शुरू कर दीं। उसने फोन उठाना भी बंद कर दिया।देश को लगातार लूटने के कारण ही कांग्रेस की आज ऐसी दुर्गति हो रही है
सीएम अशोक गहलोत के बेटे और आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत के खिलाफ महाराष्ट्र के नासिक में धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज होने पर सियासत गरमा गई है। राजस्थान बीजेपी के सीनियर लीडर और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया ने कहा है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अपने आप को महात्मा गांधी को मानने वाला और उनकी जैसे जिन्दगी जीने वाले बताते हैं। राजस्थान के गांधी के बच्चे वैभव गहलोत के खिलाफ धारा 156-3 में कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के लिए नासिक के गंगापुर थाने के लिए आदेश जारी किए हैं। कटारिया ने कहा आज कांग्रेस की जो दुर्गति हुई है, राजनीति में उसमें सबसे बड़ा कारण मुझे यह समझ आता है कि कांग्रेस पार्टी, इसके नेता और उनके परिवार वाले इस देश को लूटने में जिस तरह से जुटे रहे हैं। उसके कारण पार्टी की आज दुर्गति हुई है। उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में कांग्रेस के केवल 2 नमूने रह गए।वैभव गहलोत पर ई-टायलेट टेंडर घोटाले में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे
केन्द्रीय मंत्री और जोधपुर से सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी वैभव गहलोत का नाम ई-टॉयलेट टेंडर घोटाले में शामिल होने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा है। गजेन्द्र सिंह ने तंज कसा है कि पुत्रमोह धृतराष्ट्र बना देता है। ट्वीट कर शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव गहलोत पर राजस्थान में ई- टायलेट टेंडर घोटाले में शामिल होने का आरोप गंभीर है। गहलोत साहब को सफाई में ध्यान रखना होगा कि मामला कोर्ट के कहने पर दर्ज हुआ है। देखना होगा सीएम साहब बेटे को बचाने के लिए हमेशा की तरह पूरी सरकार लगा देंगे या सच कहेंगे। शेखावत ने कहा कि वैसे मुझे नहीं लगता वे सच कहेंगे। दूसरी तरफ वैभव गहलोत ने सफाई दी कि आरोप गलत है। इससे उनका कोई संबंध नहीं है।

 

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