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पीएम मोदी के वोकल फॉर लोकल कर गई काम, आदिवासी हैंडीक्राफ्ट ने विदेशों में की 12 करोड़ डॉलर से अधिक की कमाई, 30 फीसदी की दर से बढ़ रहा निर्यात

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दो साल पहले ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा दिया था। उन्होंने कहा था कि जितना अधिक ‘वोकल फॉर लोकल’ होंगे, उतना ही हमारे परिवारों में खुशहाली आएगी। इसी क्रम में उन्होंने लोगों से कई अवसरों पर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी का आह्वान भी किया है। अब उनके इस आह्वान का असर कई क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। लोग तो अब उनके इस अभियान को सोशल मीडिया पर शेयर करने के साथ ही कई अन्य तरीके से समय-समय पर इसे बढ़ावा दे रहे हैं। पीएम मोदी के विजन के तहत भारत जहां अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निर्यात पर फोकस कर रहा है, वहीं देश में सबका साथ के साथ सबके विकास पर भी ध्यान दे रहा है। ऐसे में देश के निर्यात में हैंडीक्राफ्ट का हिस्सा बढ़ता जा रहा है। हैंडीक्राफ्ट का करीब 30 फीसदी की दर से निर्यात बढ़ रहा है। हैंडीक्राफ्ट में ट्राइफेड प्रोडक्ट्स की भी बड़ी हिस्सेदारी है, जिन्हें अब ग्लोबल मार्केट भी मिलने लगा है। यही वजह है कि आज आदिवासी समाज भी देश के विकास में अपना योगदान दे रहा है और भारत के आदिवासी समाज की अविश्वसनीय हस्तशिल्प एक वैश्विक पहचान बन रही है। हाल ही के आंकड़ों के मुताबिक आदिवासी हस्तशिल्प ने विदेशी बाजारों में 12 करोड़ डॉलर से अधिक की कमाई की है।

भारतीय हस्तशिल्प की 90 से अधिक देशों में हो रही खरीद

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में बताया कि भारत अब सबसे बड़े हस्तशिल्प निर्यातक देशों में से एक है, जिसमें आदिवासी हस्तशिल्प विदेशी बाजारों में 120 मिलियन डॉलर से अधिक की कमाई करते हैं। आज दुनिया के 90 से अधिक देश भारत के हस्तशिल्प उत्पादों को खरीदते हैं। आदिवासी उत्पादों को बेचने में ट्राइफेड इंडिया मंच प्रदान करता है और एक कनेक्टर की भूमिका निभाता है, जहां आदिवासी कारीगर और इकट्ठा करने वाले अपनी उत्कृष्ट कृतियों को रख सकते हैं और बिक्री के लिए उत्पादन कर सकते हैं। इसका उद्देश्य आदिवासी लोगों को उनके काम का एक आउटलेट देकर अधिक आय उत्पन्न करना है।

आदिवासी हस्तशिल्प देश में 100 से ज्यादा रिटेल स्टोर पर उपलब्ध

वर्तमान में ट्राइफेड के पूरे देश में 100 से ज्यादा रिटेल स्टोर हैं, करीब 28 राज्य इसमें पार्टनर हैं, जो जनजातीय समूह द्वारा बनाए उत्पादों बाजार की व्यवस्था करते थे। रिटेल स्टोर के अलावा ई-मार्केट प्लस के जरिए भी ट्राइफेड उत्पाद को प्लेटफॉर्म मिलता है। यह आदिवासियों को डिजिटल ई-कॉमर्स के तहत एक शॉप खुलवाने की योजना है। ई-मार्केट प्लस या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ये लोग अपने सभी उत्पादों को देश-विदेश में ई-मार्केट के जरिए बेच सकेंगे। उनकी हर एक सामग्री को पोर्टल के साथ लिंक कर दिया जाएगा। इसके अलावा देश में 85 स्थानों पर दुकान थी, उसे भी डिजिटल से लिंक किया जा रहा है। इससे जनजातीय लोगों की आजीविका को भी बल मिलेगा। आदिवासी समूह के उत्पाद आज ट्राइब्स इंडिया की वेबसाइट के अलावा अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, और सरकारी ई बाजार-जेम पर भी उपलब्ध हैं।

वर्ष 2021-22 में हस्तशिल्प निर्यात में 30 फीसदी की वृद्धि

पीएम मोदी के विजन और केंद्र सरकार के प्रयास से हस्तशिल्प क्षेत्र नित नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। देश को 2021-22 में हस्तशिल्प निर्यात में 30 प्रतिशत की वृद्धि हासिल हुई है। 2020-21 में हस्तशिल्प निर्यात 25,680 करोड़ रुपए से बढ़कर 2021-22 में 33,253 करोड़ रुपए हो जाना इसकी सफलता का प्रमुख उदाहरण है। केंद्र सरकार इस क्षेत्र में अपने निर्यात लक्ष्यों को और बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए सरकार ऐसा परितंत्र बना रही है जिससे गुणवत्ता, निरंतरता, डिजाइन और ब्रांडिंग पर जोर देकर इस क्षेत्र में कई गुना वृद्धि संभव की जा सके। हस्तशिल्प कलाकारों और निर्यातकों से इस क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए सरकार ने नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है।

‘मेड इन इंडिया’ पहल से भारतीय हस्तशिल्प को मिल रहा वैश्विक बाजार

भारतीय कलाकार अपनी शानदार कलाकारी के लिए पूरे विश्व में जाने जाते हैं। यह बात जब हस्तशिल्प से जुड़ जाए तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार देने और मेड इन इंडिया पहल को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न प्रकार के आयोजन करती रहती है ताकि भारतीय हस्तशिल्प के विकास और विस्तार को और गति दी जा सके। केंद्र सरकार ने भारतीय मिशन के सहयोग से हस्तशिल्प के लिए निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) हस्तशिल्प उत्पादों पर एक मेड इन इंडिया- ट्रेड शो प्रदर्शनी का आयोजन किया। भारतीय कला और शिल्प और भारतीय हस्तशिल्प निर्माताओं और निर्यातकों के अन्य उत्पादों पर आधारित इस प्रदर्शनी का आयोजन ग्वाटेमाला सिटी, ग्वाटेमाला में हुआ।

ईपीसीएच दे रही हस्तशिल्प क्षेत्र को बढ़ावा

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) देश से विश्व के अन्य देशों में हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने और उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प वस्तुओं और सेवाओं के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में विदेश में भारत की छवि पेश करने के लिए एक नोडल एजेंसी है। ईपीसीएच की पहल से वर्ष 2021-22 के दौरान 33253.00 करोड़ रुपए (4459.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का हस्तशिल्प निर्यात दर्ज किया गया जो पिछले वर्ष की तुलना में रुपए के संदर्भ में 29.49 प्रतिशत और डॉलर के संदर्भ में 28.90 प्रतिशत की वृद्धि है। ईपीसीएच और भारतीय मिशनों के सहयोग से भारतीय कला और शिल्प पर ‘मेड इन इंडिया’- ट्रेड शो प्रदर्शनी लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में व्यापार और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत कर रहा पारंपरिक कौशल

पारंपरिक कौशल से जुड़े व्यवसाय पीएम मोदी के आत्मानिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो ग्रामीण स्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं की ताकत के निर्माण पर आधारित है। सरकार पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने और उनके प्रचार प्रसार के लिए किए जा रहे सहयोग से जहां कारीगरों को अपनी उत्पाद का बजार मिल रहा है वहीं क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था भी तेजी से मजबूत हो रही है। सरकार ने सभी हस्तशिल्प कारीगरों और उद्यमियों को भारत और दुनिया के ग्राहकों के साथ जुड़ने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है ताकि वे आसानी से लेनदेन कर सकें। इससे न केवल इस क्षेत्र में व्यापार में आसानी होगी बल्कि भारत से निर्यात को दोगुना करने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत और ’वोकल फॉर लोकल’ पर जोर

पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत पहल को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी वस्तुओं के बजाय भारतीय हस्तशिल्प, हथकरघा, खादी और कारीगरों द्वारा बनाये गये अन्य उत्पादों को खरीदने और बढ़ावा देने का आह्वान किया था। आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ की मुहिम को पीएम मोदी द्वारा शुरू किया गया ताकि क्षेत्रीय उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध हो सके। ‘वोकल फॉर लोकल’ मुहिम को सपोर्ट करने के लिए सरकार ने कई सहायक कार्यक्रम बनाया है। यह देश को आत्मनिर्भरता के मार्ग पर अग्रसर करने में सहायक होगा।

ट्राइफेड उत्पादों की हो रही MSP पर खरीदारी

ट्राइफेड आदिवासियों के सशक्तिकरण के लिए कई कार्यक्रमों को लागू कर चुका है। पिछले दो वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के माध्यम से लघु वनोपज (MFP-minor forest produce) का विपणन और एमएफपी के लिए मूल्य श्रृंखला के विकास” ने जनजातीय पारिस्थितिकी तंत्र को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। इस योजना के माध्यम से, योजना निधि का उपयोग करके 317.13 करोड़ रुपये के एमएफपी की खरीद की गई है और राज्य निधि का उपयोग करके 1542.88 करोड़ मूल्य के एमएफपी की खरीदी की गई है। इसी योजना का एक घटक, वन धन आदिवासी स्टार्ट-अप, आदिवासी संग्रहकर्ताओं और वनवासियों और घर में रहने वाले आदिवासी कारीगरों के लिए रोजगार सृजन के स्रोत के रूप में उभरा है।

वन धन सेल्फ हेल्प ग्रुप से 9.27 लाख लोगों को मिली आजीविका

दो साल से भी कम समय में, ट्राइफेड ने 25 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के, 3110 वन धन विकास केन्द्रों से बने 52,967 वन धन सेल्फ हेल्प ग्रुप को स्वीकृति दी है और जिससे 9.27 लाख लाभार्थियों को आजीविका प्राप्त हुई है। इस योजना के माध्यम से विकसित किए गए उत्पादों को ट्राइब्स इंडिया आउटलेट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (www.tribesindia.com) के माध्यम से बेचा जाता है और उन्हें अन्य मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी विपणन किया जाता है।

ट्राइफेड 119 आउटलेट के माध्यम से करता है आदिवासी उत्पादों का विपणन

वर्तमान में, एक आदर्श वन-स्टॉप गंतव्य, “ट्राइब्स इंडिया” के कैटलॉग जिसमें देश भर के प्राकृतिक उत्पाद, हस्तशिल्प और हथकरघा आदिवासी जीवन के तरीकों को दर्शाते हैं, को शामिल किया गया है। इसके अलावा, TRIFED जनजातीय उत्पादों को “ट्राइब्स इंडिया” नामक अपनी दुकानों के माध्यम से और फ्रेंचाइजी आउटलेट्स और राज्य एम्पोरिया के आउटलेट्स के माध्यम से विपणन कर रहा है। TRIFED ने 1999 में नई दिल्ली में एकल दुकान के साथ शुरुआत की और अब, TRIFED 119 ऐसे आउटलेट के माध्यम से इन आदिवासी उत्पादों का विपणन करता है।

वोकल फॉर लोकलः दिवाली पर देसी झालरों और लाइटिंग का बढ़ा दबदबा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी विजन से न सिर्फ देश चौतरफा विकास कर रहा है, बल्कि वोकल फॉर लोकल अभियान से आत्मनिर्भर भारत बनने की ओर बढ़ी तेजी से कदम बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री के इसी अभियान से युवाओं के जुड़ाव का नतीजा है कि दीपोत्सव के मौके पर कभी बाजारों में सौ फीसदी चाइनीज लाइटिंग का दबदबा अब ढलान की ओर है। चीन खुद भौंचक्का है कि आखिर कैसे भारतीयों ने उसके सस्ते और यूज एंड थ्रो उत्पादों को ठुकराना शुरू कर दिया है। इससे चीन की इकॉनामी को झटके लगने शुरू हुए हैं। अकेले दिवाली के मौके पर ही लाइटिंग के एक हजार करोड़ से ज्यादा के बाजार में चीनी दबदबा था। लेकिन पीएम मोदी के आह्वान के बाद अब भारतीय ग्राहक मेड इन इंडिया झालर पसंद कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के इरादों को मजबूती देने के लिए युवा पीढ़ी का किया आह्वान

पीएम मोदी ने वोकल फॉर लोकल अभियान को बढ़ावा देने के लिए युवाओं का आह्वान किया था कि वह घर में उपयोग होने वाली वस्तुओं की एक सूची बनाएं और देखें कि उनमें से कितने ऐसे उत्पाद हैं, जो भारत में नहीं बने हैं, बल्कि विदेशी हैं। उन्होंने कहा, ‘इसके बाद घर के लोगों से आप आग्रह करें कि भविष्य में जब वैसा ही कोई उत्पाद खरीदा जाए तो वह भारत में बना हो। इससे आत्मनिर्भर भारत के इरादों को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।’ पीएम ने कहा कि अगले 25 सालों में देश जिस ऊंचाई पर होगा और जो उसका सामर्थ्य बनेगा, उसमें बहुत बड़ी भूमिका युवा पीढ़ी की होगी। इसलिए युवाओं के देश में बनी वस्तुओं की खरीदारी को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि इन्हें बनाने में भारतीय श्रमिकों की मेहनत और पसीना लगा है।

कभी लाइटिंग में चाइनीज प्रोडक्ट्स का सौ फीसदी कब्जा, अब लोगों को देसी झालर आ रही पसंद

प्रधानमंत्री के अटल इरादों और गलवान में चीन की हिमाकत के बाद से भारतीयों ने चाइनीज सामान की खरीदारी को ठुकराना शुरू कर दिया। इसी का नतीजा है कि दिवाली पर लाइटिंग बाजार में चीन का हालत खस्ता है। दिवाली नजदीक आते ही रोशनी के इस त्योहार के लिए लाइटिंग का बाजार सज गया है। 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के इस बाजार पर कई साल से चाइनीज प्रोडक्ट्स का 100 प्रतिशत कब्जा था। पीएम मोदी के आह्वान और गलवान संघर्ष के बाद चीन के प्रति उठा गुस्सा लोगों में कायम है। इसीलिए ग्राहक सस्ती और सजावटी चाइनीज लाइटिंग को ठुकराकर मेड इन इंडिया झालर पसंद कर रहे हैं। खास बात यह है कि जहां चीनी झालर की वारंटी नहीं होती, वहीं भारतीय झालर पर 3-4 सीजन की वारंटी दी जा रही है।

फिनिश्ड प्रोडक्ट में चीन पर निर्भरता करीब-करीब खत्म, अब 85% असेंबलिंग देश में ही

इलेक्ट्रिक लैम्प एंड कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक देश में LED लाइटिंग कारोबार 23,000 करोड़ रु. का है। भारत में कुल लाइटिंग में LED की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत तक है। इसमें कंज्यूमर लाइटिंग की हिस्सेदारी करीब साठ फीसदी है। अब भारत में एलईडी के निर्माण में तेजी से लाइटिंग कारोबार में भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। ओरिएंट इलेक्ट्रिक के पुनीत धवन के मुताबिक मोदी सरकार की पीएलआई स्कीम के बाद लाइटिंग निर्माताओं के हौसले बुलंद हैं। फिनिश्ड प्रोडक्ट में चीन पर निर्भरता खत्म-सी हो गई है। अच्छी बात यह है कि 85% असेंबलिंग अब यहीं होने लगी है।

प्रधानमंत्री मोदी की अपील का असर: खादी ने किया 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खादी खरीदने की लगातार अपील के कारण खादी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। देश भर में बड़े पैमाने पर खादी की बिक्री हो रही है। लोकप्रियता का असर यह है कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए देश की सभी एफएमसीजी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। केवीआईसी ने पहली बार 1.15 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया है। वित्त वर्ष 2021-22 में केवीआईसी ने 1,15,415.22 करोड़ रुपये का कारोबार किया है जो पिछले वर्ष यानी 2020-21 में 95,741.74 करोड़ रुपये की तुलना में 20.54 प्रतिशत ज्यादा है। इसके साथ ही वर्ष 2014-15 की तुलना में 2021-22 में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्रों में कुल उत्पादन में 172 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि के दौरान सकल बिक्री में 248 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। अकेले ग्रामोद्योग क्षेत्र में कारोबार 2021-22 में 1,10,364 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 92,214 करोड़ रुपये था। पिछले 8 वर्षों में, 2021-22 में ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन में 172 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि बिक्री में 245 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

अर्थव्यवस्था से बहुत अच्छे से जुड़ा है वोकल फॉर लोकल: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने इसी साल मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कच्छ में वर्चुअल सेमिनार को संबोधित किया। महात्मा गांधी जी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वोकल फॉर लोकल अर्थव्यवस्था से जुड़ा बहुत अहम विषय बन गया है। आज दुनिया में वही देश चल सकता है जो अपने पैरों पर खड़ा हो, जो बाहर से चीजें लाकर के गुजारा करता है, वो कुछ नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वोकल फॉर लोकल का महिला सशक्तिकरण से बहुत गहरा संबंध है। ज़्यादातर स्थानीय उत्पादों की ताकत महिलाओं के हाथों में होती है। अपने जागरूकता अभियानों में आप स्थानीय उत्पादों के उपयोग के लिए लोगों को जरूर प्रोत्साहित करें।

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