पश्चिम एशिया में गहराते संकट और भारत पर उसके पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार, 27 मार्च को एक बड़ी बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल शामिल हुए। बैठक का मकसद था—बदलते हालात में देश की तैयारियों की समीक्षा करना और आगे की रणनीति तय करना। प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि टीम इंडिया की भावना से मिलकर काम करते हुए देश हर चुनौती से सफलतापूर्वक निपट लेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा जताया कि भारत पहले भी ऐसे वैश्विक संकटों का सामना कर चुका है। उन्होंने कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय केंद्र और राज्यों ने मिलकर ‘टीम इंडिया’ के रूप में काम किया था, जिससे देश बड़े संकट से उबर पाया। उन्होंने कहा कि आज भी वही भावना सबसे बड़ी ताकत है। अगर केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे, तो किसी भी चुनौती से निपटना आसान होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समय मिलकर फैसले लेने और तेजी से उन्हें लागू करने का है।
बैठक में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से मिले सुझावों की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि राज्यों से मिले ये इनपुट जमीनी हालात को समझने और सही फैसले लेने में बहुत मददगार होंगे। साथ ही उन्होंने साफ कहा कि आने वाले समय में सतर्कता और बेहतर तालमेल सबसे जरूरी होगा। सरकार की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और आम लोगों के हितों की रक्षा करना सबसे अहम है। इसके साथ ही उन्होंने उद्योगों और सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने पर भी खास जोर दिया।

उन्होंने बताया कि 3 मार्च से एक अंतर-मंत्रालयी समूह लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। यह समूह रोजाना समीक्षा कर रहा है और जरूरत के मुताबिक फैसले ले रहा है। यानी सरकार स्तर पर हर पल स्थिति को मॉनिटर किया जा रहा है।
राज्यों की भूमिका पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि असली काम जमीन पर होता है और इसके लिए राज्यों की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच लगातार संवाद बनाए रखने और समय पर जानकारी साझा करने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री ने राज्यों को साफ निर्देश दिए कि जरूरी सामानों की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। उन्होंने जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर सख्त कार्रवाई करने को कहा, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
इसके साथ ही उन्होंने राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय करने की बात कही। उनका मानना है कि अगर प्रशासन सतर्क रहेगा, तो किसी भी तरह की गड़बड़ी को समय रहते रोका जा सकता है। कृषि क्षेत्र को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखना जरूरी है, ताकि आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को कोई दिक्कत न हो।

प्रधानमंत्री ने फर्जी खबरों और अफवाहों को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि गलत जानकारी लोगों में डर पैदा करती है, इसलिए जरूरी है कि सही और भरोसेमंद सूचना समय पर लोगों तक पहुंचे। उन्होंने ऑनलाइन धोखाधड़ी और नकली एजेंटों से सावधान रहने की सलाह भी दी। खासकर ऐसे समय में जब लोग अनिश्चितता में रहते हैं, तब धोखाधड़ी के मामले बढ़ सकते हैं।
समुद्री और सीमावर्ती राज्यों के लिए पीएम मोदी ने अलग से सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने नौवहन और जरूरी आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने पर जोर दिया। जनता के भरोसे को सबसे अहम बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर लोगों को जरूरी चीजों की उपलब्धता का भरोसा रहेगा, तो घबराहट नहीं फैलेगी। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे अपने नागरिकों को लगातार अपडेट देते रहें।
पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने राज्यों से कहा कि वे हेल्पलाइन शुरू करें, नोडल अधिकारी नियुक्त करें और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सिस्टम तैयार रखें। आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार पूरी तरह सक्रिय नजर आई। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ सालों में सप्लाई चेन और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने के जो प्रयास हुए हैं, उनका फायदा अब मिल रहा है। उन्होंने उद्योग और MSME सेक्टर के साथ लगातार संवाद बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि उत्पादन और रोजगार पर किसी तरह का असर न पड़े।

बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सरकार की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार लगातार कदम उठा रही है, जिसमें एलपीजी की उपलब्धता और पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती जैसे फैसले शामिल हैं।
मुख्यमंत्रियों ने भी केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने भरोसा जताया कि देश में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और जरूरी सामानों की सप्लाई भी सुचारु रूप से जारी है। ईंधन पर टैक्स में कटौती को लेकर राज्यों ने इसे राहत भरा कदम बताया। उनका कहना था कि इससे आम लोगों को वैश्विक अनिश्चितता के बीच काफी मदद मिलेगी।
बैठक में यह भी सामने आया कि वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन बढ़ाया गया है, जिससे बाजार में सप्लाई बेहतर बनी रहेगी। अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह चुनौती सिर्फ केंद्र या राज्यों की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ मिलकर काम करते हुए भारत इस संकट से सफलतापूर्वक निपट लेगा।










