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जन औषधि दिवस 2026: हर नागरिक तक सस्ती और अच्छी दवाएं पहुंचाना हमारी प्रतिबद्धता- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन औषधि दिवस 2026 के अवसर पर इस योजना से लाभान्वित हुए लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पहल यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है कि देश के हर नागरिक को सस्ती कीमत पर अच्छी दवाएं मिल सकें। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “#JanAushadhiDiwas2026 पर, उन सभी को मेरी शुभकामनाएं जिन पर प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना का अच्छा असर हुआ है। यह पहल यह सुनिश्चित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाती है कि हर नागरिक को सस्ती कीमतों पर अच्छी दवाइयां मिलें। जन औषधि केंद्रों के जरिए, अनगिनत परिवार स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च बचा रहे हैं और सही उपचार करवा रहे हैं।”

हर साल 7 मार्च को पूरे देश में जन औषधि दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के बारे में जागरूक करना और उनके इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इसी के तहत 1 से 7 मार्च तक देशभर में जन औषधि सप्ताह मनाया जाता है, जिसमें कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह पहल प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के तहत चलाई जा रही है। इसके लिए देशभर में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (PMBJK) खोले गए हैं।

मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना की शुरुआत इस उद्देश्य से की कि आम लोगों को महंगी ब्रांडेड दवाओं का सस्ता विकल्प मिल सके। जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाएं आमतौर पर ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। आज इस योजना के तहत देशभर में 18,000 से ज्यादा जन औषधि केंद्र काम कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक इनकी संख्या बढ़ाकर 20,000 कर दी जाए, ताकि हर जिले और दूर-दराज के इलाकों में भी लोगों को सस्ती दवाएं मिल सकें।

इस योजना की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ सरकारी संस्थान ही नहीं बल्कि निजी उद्यमी, एनजीओ, ट्रस्ट और कंपनियां भी जन औषधि केंद्र खोल सकती हैं। इससे लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाएं भी मजबूत हो रही हैं। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत इस समय 2,110 से ज्यादा दवाएं और 315 सर्जिकल उत्पाद उपलब्ध हैं। इनमें हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी और पाचन से जुड़ी कई जरूरी दवाएं शामिल हैं। इसके अलावा कई पोषण संबंधी उत्पाद भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

महिलाओं की सेहत को ध्यान में रखते हुए योजना के तहत जन औषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन भी उपलब्ध कराए गए हैं। ये ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल नैपकिन सिर्फ 1 रुपये प्रति पैड की दर से मिलते हैं और देशभर के जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध हैं। लोगों की सुविधा के लिए जन औषधि सुगम मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है। इस ऐप के जरिए लोग अपने नजदीकी जन औषधि केंद्र का पता लगा सकते हैं, दवाओं की जानकारी ले सकते हैं और ब्रांडेड व जेनेरिक दवाओं की कीमतों की तुलना भी कर सकते हैं।

दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार ने सख्त व्यवस्था बनाई है। जन औषधि केंद्रों में वही दवाएं सप्लाई की जाती हैं जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस मानकों को पूरा करने वाले प्लांट में बनी होती हैं। इसके अलावा दवाओं के हर बैच को केंद्रों तक भेजने से पहले जांचा जाता है। सभी नमूनों की जांच NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में की जाती है, ताकि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

लोगों तक योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए सरकार लगातार जागरूकता अभियान भी चला रही है। प्रिंट मीडिया, टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया और आउटडोर होर्डिंग्स के जरिए जन औषधि दवाओं के फायदे बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही व्हाट्सएप चैटबॉट और फोन कॉल के जरिए भी लोगों को यह जानकारी दी जा रही है कि उन्हें जन औषधि केंद्रों से दवाएं खरीदने पर कितनी बचत हो सकती है।

ग्रामीण इलाकों में भी इस योजना के प्रचार के लिए स्वास्थ्य शिविर, नुक्कड़ नाटक और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्थानीय भाषाओं में लोगों को समझाया जाता है कि जेनेरिक दवाएं सुरक्षित और असरदार होती हैं। जन औषधि सप्ताह के दौरान देशभर में रैलियां, स्वास्थ्य शिविर, फार्मेसी कॉलेजों में सेमिनार और बच्चों की भागीदारी वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों के जरिए आम लोगों और स्वास्थ्य पेशेवरों को जेनेरिक दवाओं के फायदे समझाए जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं जितनी ही प्रभावी होती हैं, लेकिन उनकी कीमत काफी कम होती है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इलाज का बोझ कम होता है। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई है। इससे न सिर्फ लोगों को सस्ती दवाएं मिल रही हैं बल्कि छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। जैसे-जैसे सरकार जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, आने वाले समय में जन औषधि केंद्रों का नेटवर्क और भी मजबूत होने की उम्मीद है। इससे देश में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का सपना और ज्यादा साकार होता नजर आएगा।

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