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प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मत्स्य संपदा योजना’ का किया शुभारंभ, किसानों के लिए लॉन्च किया ‘ई-गोपाला ऐप’

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 20,050 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) का शुभारंभ किया। इस योजना का मकसद किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य के तहत मत्स्यपालन क्षेत्र का निर्यात बढ़ाना है। इसके अलावा पीएम मोदी ने आज ई-गोपाला मोबाइल ऐप का भी शुभारंभ किया। यह ऐप किसानों को पशुधन के लिए ई-मार्केटप्लस उपलब्ध कराएगी। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बिहार के पूर्णिया में अत्याधुनिक सुविधाओं वाले वीर्य केंद्र का भी उद्घाटन किया।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “आज जितनी भी ये योजनाएं शुरू हुई हैं उनके पीछे की सोच ही यही है कि हमारे गांव 21वीं सदी के भारत, आत्मनिर्भर भारत की ताकत और ऊर्जा बनें। कोशिश यह है कि अब इस सदी में ब्लू रिवोल्यूशन यानि मछली पालन से जुड़े काम, White Revolution यानि डेयरी से जुड़े काम, Sweet Revolution यानि शहद उत्पादन से जुड़े काम, हमारे गांवों को और समृद्ध और सशक्त करे। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है। आज देश के 21 राज्यों में इस योजना का शुभारंभ हो रहा है। अगले 4-5 वर्षों में इस पर 20 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। इसमें से आज 1700 करोड़ रुपए का काम शुरु हो रहा है। इसी के तहत ही बिहार के पटना, पूर्णियां, सीतामढ़ी, मधेपुरा, किशनगंज और समस्तीपुर में अनेक सुविधाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। इससे मछली उत्पादकों को नया इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, आधुनिक उपकरण मिलेंगे, नया मार्केट भी मिलेगा। इससे खेती के साथ ही अन्य माध्यमों से भी कमाई का अवसर बढ़ेगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि देश में मछली से जुड़े व्यापार-कारोबार को देखने के लिए अब अलग से मंत्रालय भी बनाया गया है। इससे भी हमारे मछुआरे साथियों को, मछली के पालन और व्यापार से जुड़े साथियों को सुविधा हो रही है। इसका लक्ष्य आने वाले 3-4 साल में मछली निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य है। इससे सिर्फ फिशरीज सेक्टर में ही रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि देश के हर हिस्से में विशेषतौर पर समंदर और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में मछली के व्यापार-कारोबार को ध्यान में रखते हुए, पहली बार देश में इतनी बड़ी व्‍यापक योजना बनाई गई है। आजादी के बाद इस पर जितना निवेश हुआ, उनसे भी कई गुना ज्यादा निवेश प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना पर किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि नीतीश जी के नेतृत्व में बिहार में गांव-गांव पानी पहुंचाने के लिए बहुत प्रशंसनीय काम हो रहा है। 4-5 साल पहले बिहार में सिर्फ 2 प्रतिशत घर पीने के साफ पानी की सप्लाई से जुड़े थे। आज ये आंकड़ा बढ़कर 70 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इस दौरान करीब-करीब डेढ़ करोड़ घरों को पानी की सप्लाई से जोड़ा गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि से भी देश के 10 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में सीधा पैसा पहुंचाया गया है। इसमें करीब-करीब 75 लाख किसान हमारे बिहार के भी हैं। उन्होंने कहा कि जब से ये योजना शुरु हुई है, तब से अब तक करीब 6 हजार करोड़ रुपए बिहार के किसानों के बैंक खाते में जमा हो चुके हैं। ऐसे ही अनेक प्रयासों के कारण गांव पर इस वैश्विक महामारी का प्रभाव हम कम से कम रखने में सफल हुए हैं। ये काम इसलिए भी प्रशंसनीय है क्योंकि बिहार कोरोना के साथ-साथ बाढ़ की विभीषिका का भी बहादुरी से सामना कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना संकट के कारण शहरों से लौटे जो श्रमिक साथी हैं, उनमें से अनेक साथी पशुपालन की तरफ बढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार और बिहार सरकार की अनेक योजनाओं से उनको प्रोत्साहन भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का ये निरंतर प्रयास है कि देश के डेयरी सेक्टर का विस्तार हो। नए प्रोडक्ट्स बनें, नए इनोवेशंस हों, जिससे किसान को, पशुपालकों को ज्यादा आय मिले। इसके साथ इस बात पर भी फोकस किया जा रहा है कि देश में ही उत्तम नस्ल के पशु तैयार हों, उनके स्वास्थ्य की बेहतर व्यवस्था हो और उनका खान-पान स्वच्छ हो, पोषक हो।

पीएम मोदी ने कहा कि आज देश के 50 करोड़ से ज्यादा पशुधन को खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियों से मुक्त करने के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान चल रहा है। पशुओं को बेहतर चारे के लिए भी अलग-अलग योजनाओं के तहत प्रावधान किए गए हैं। देश में बेहतर देसी नस्लों के विकास के लिए मिशन गोकुल चल रहा है। एक वर्ष पहले ही देशव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम शुरु किया गया था,जिसका एक चरण आज पूरा हो चुका है।

पीएम मोदी ने कहा,”कृषि क्षेत्र की आधुनिक जरूरतों को देखते हुए, पिछले 5-6 वर्षों से देश में एक बड़ा अभियान जारी है। 6 साल पहले जहां देश में सिर्फ एक केंद्रीय कृषि विश्विद्यालय था, वहीं आज देश में 3-3 सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज़ हैं। यहां बिहार में जो बाढ़ हर साल आती है उससे खेती-किसानी को कैसे बचाया जाए, इसके लिए महात्मा गांधी रिसर्च सेंटर भी बनाया गया है।”

पीएम मोदी ने इस असवर पर लोगों से कोरोना को लेकर सावधान रहने की भी अपील की। इस मौके पर बिहार के गवर्नर फागू चौहान, मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कैलाश चौधरी प्रताप चंद्र सारंगी, संजीव बालियान, बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी व अन्य लोग भी मौजूद रहे। 

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