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चीन को उसी की भाषा में जवाब दे रहे हैं पीएम मोदी, दलाई लामा को बधाई देने के बाद लद्दाख में जी-20 मीटिंग की तैयारी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीन के साथ जारी सीमा विवाद को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाना चाहते हैं। लेकिन चीन इसे प्रधानमंत्री मोदी और भारत की कमजोरी समझने लगा था। प्रधानमंत्री मोदी ने चीन की इस गलतफहमी को दूर करने के साथ ही उसे उसकी ही भाषा में जवाब देकर उसका गुरुर तोड़ना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी का दलाई लामा को जन्म दिन की बधाई देना इसी जवाब का हिस्सा माना जा रहा है। इसके अलावा भारत अगले साल जी-20 की मीटिंग के एक हिस्सा का आयोजन लद्दाख में करने की तैयारी कर रहा है। 

दलाई लामा को बधाई देकर चीन की दुखती रग पर रखा हाथ

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार (6 जुलाई, 2022) को तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा को फोन पर जन्मदिन की बधाई देकर चीन की दुखती रग पर हाथ रख दिया। हालांकि यह बधाई प्रधानमंत्री की तरफ से सामान्य शिष्टाचार का हिस्सा था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इसके माध्यम से चीन को कड़ा संदेश दिया। दरअसल चीन दलाई लामा को अलगाववादी मानता है। इस कारण एलएसी पर तनाव के बाद से भारत सरकार दलाई लामा से सार्वजनिक संपर्क साधने से बचती रही है। लेकिन चीन अपने पुराने हथकंडे अपना कर भारत के हितों के खिलाफ लगातर साजिश करता रहा। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने चीन की संवेदनाओं की भी परवाह नहीं करते हुए दलाई लामा को बधाई देने का फैसला किया।

लद्दाख में G-20 शिखर सम्मेलन से चीन को लगी मिर्ची 

चीन को सबक सीखाने के क्रम में भारत वर्ष 2023 में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन की बैठक लद्दाख में आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने राज्यों को पत्र लिखकर जी-20 के कार्यक्रमों की तैयारियों के संबंध में जानकारी मांगी है। भारत सरकार के इस प्रस्ताव को मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है। वहीं इस प्रस्ताव से पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान को मिर्ची लग गई है। चीन ने जम्मू-कश्मीर में जी-20 मीटिंग कराए जाने पर अपना विरोध जताया है। गौरतलब है कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के तौर पर बंटवारे के बाद यहां पहली बार कोई अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन आयोजित करने की बात हो रही है।

चीन ने जी-20 शिखर सम्मेलन पर जताया विरोध

पाकिस्तान की तरह चीन ने भी जम्मू-कश्मीर में जी-20 बैठक कराए जाने का विरोध किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने लद्दाख में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन करने के सवाल पर कहा था, ‘हमने प्रासंगिक सूचना का संज्ञान लिया है। कश्मीर पर चीन का रुख सतत और बिल्कुल स्पष्ट है। यह भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से चला आ रहा मुद्दा है। संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों और द्विपक्षीय सहमतियों के अनुरूप इसका उचित समाधान निकालना चाहिए।’ 

भारत ने दूर की चीन की गलतफहमी

लद्दाख में एलएसी पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच पिछले करीब दो सालों से तनाव का माहौल है। कुछ जगहों पर दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं लेकिन गतिरोध अभी बरकरार है। इसके बावजूद चीन चाहता है कि भारत सीमा विवाद को किनारे रखकर उससे दोस्ती गांठता रहे। एलएसी पर बिना ठोस कदम उठाए चीन ने इस वर्ष अपने विदेश मंत्री वांग यी को दिल्ली दौरे पर भेज दिया। उसे लगा कि इससे भारत पसीज जाएगा, लेकिन उसकी गलतफहमी दूर करने के लिए भारत ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि सीमा पर टकराव जारी रखकर द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर नहीं किया जा सकता।

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