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कोरोना काल में पीएम मोदी ने देश को बढ़ाया आत्मनिर्भरता की ओर

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किसी वैश्विक संकट को भी अपने देश के लिए एक बेहतर अवसर के रूप में कैसे बदला जा सकता है यह शायद ही कोई बता पाए। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश को बताया ही नहीं बल्कि कर के दिखा दिया है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से निपटने के लिए जहां बड़े से बड़े देश को पानी मांगना पड़ रहा है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस भीषण संकट के दौर में भी देश को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में सफल रहे हैं। इस भीषण संकट में भी कोई देश कैसे आत्मनिर्भर की राह पकड़ सकता है यह कर दिखाया है हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। उनके नेतृत्व का ही कमाल है कि जो देश कुछ समय पहले तक स्वास्थ्य क्षेत्र की कई चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था, वहीं आज न केवल आत्मनिर्भर हो चुका है बल्कि अब दूसरे देश हम पर निर्भर हो गए हैं। कोरोना संक्रमण फैलने के बाद देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चला है। संकट के इस दौर में भारत ने बहुत कुछ ऐसा किया है जो पहले देश में नहीं हुआ। उसमें सबसे अहम है आत्मनिर्भरता। फिर चाहे दवा हो, डॉक्टरों के लिए पीपीई किट हो या फिर वेंटिलेटर का देश में उत्पादन हो। देश में एक से बढ़ कर एक कौशल आगे आए और अपना हुनर दिखाया। इसी का नतीजा है कि इस गंभीर वायरस के समय में भारत न सिर्फ मज़बूती के साथ खड़ा है बल्कि अन्य देशों की मदद भी कर रहा है।

स्वदेशी वेटिंलेटर का निर्माण बड़े स्तर पर हुआ शुरू

दरअसल कुछ महीने पहले तक भारत में कई चिकित्सा के पकरण दूसरे देशों ने मंगाए जाते थे, जबकि आज पीपीई किट से लेकर वेंटिलेटर तक का भारत में निर्माण शुरू हो गया है। इस बारे में बताते हुए एम्स के डॉ. प्रसून चटर्जी ने बताया कि कोरोना वायरस को भारत में आए एक महीने से ज्यादा हो गया है। सबसे अच्छी बात यह है कि हमारे यहां वेंटिलेटर की जरूरत बहुत कम मरीजों को पड़ रही है। ज्यादातर लोग खुद से ठीक हो जा रहे हैं। फिर भी अगर आगे जरूरत पड़ी तो कोई कमी न रहे इसलिए स्वदेशी वेंटिलेटर का भी निर्माण बड़े स्तर पर हो रहा है। इसके अलावा डीआरडीओ, रेलवे समेत तमाम संस्थाएं पीपीई किट का निर्माण भी कर रही हैं। यही नहीं, भारत में वैक्सीन पर भी शोध चल रहा है।

‘मेक इन इंडिया’ बना निर्माण का बड़ा माध्यम 

कोरोना संकट के दौरान सामने आईं चुनौतियों को मोदी सरकार ने एक बेहतर अवसर के रूप में बदल दिया। ऐसा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया का विजन सबसे बड़ा माध्यम बना है, या फिर यू कहें कि एक बेहतर अवसर लेकर सामने आया है। इसी मेक इन इंडिया के तहत भारतीय कंपनियों और संस्थानों ने कोरोना से मिली चुनौती को एक अवसर के रूप में बदल दिया है। पीपीई, मास्क और वेंटिलेटर की अपनी जरूरतें पूरी करने को भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बड़ी छलांग लगाई है। भारत पीपीई निर्माण में चीन के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। उम्मीद है कि अगले छह महीने में भारत चीन को भी पीछे छोड़ सकता है।

पीपीई निर्माण में हम चीन को भी पीछे छोड़ देंगे

हालांकि यह ड़सच्च है कि भारत इससे पहले कभी पीपीई निर्माण के क्षेत्र में था ही नहीं। लेकिन जैसे ही देश को इसकी आवश्यकता पड़ी, इसका निर्माण भी शुरू हो गया है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का कहना है कि हमने अभी इसका निर्माण करना शुरू किया है लेकिन इतने कम दिनों में ही हमने चीन के बाद सबसे अधिक पीपीई का निर्माण करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि पीपीई निर्माण में हम अगले छह महीने में ही चीन को भी पीछे छोड़ देंगे। क्योंकि हमने 250 निर्माताओं के साथ मिलकर इसका निर्माण करना शुरू कर दिया है। हमारा उद्देश्य न केवल घरेलू मांग की आपूर्ति करनी है बल्कि निर्यात कर एक वैश्विक किरदार भी बनना है। आज पूरी दुनिया को पीपीई चाहिए और भारत अब उसे पूरा करेगा।

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