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बाधाओं के बावजूद, यह दशक भारत के लिए अभूतपूर्व विकास का दशक रहा है- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित ET Now Global Business Summit 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि बीता दशक दुनिया के लिए व्यवधानों से भरा रहा, लेकिन भारत ने इस दौर में भी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि 21वीं शताब्दी के पिछले दशक में कई व्यवधान देखने को मिले, जिनमें वैश्विक महामारी, विभिन्न क्षेत्रों में तनाव और युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला में आईं बाधाएं शामिल हैं, इन चुनौतियों ने वैश्विक संतुलन को हिला कर रख दिया। लेकिन इन व्यवधानों के बावजूद, भारत का यह दशक उल्लेखनीय विकास, उत्कृष्ट प्रदर्शन और लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण से भरा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि एक दशक पहले भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। उस समय गिरावट की आशंकाएं जताई जा रही थीं, लेकिन आज भारत तेजी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है और वैश्विक विकास में 16 प्रतिशत से ज्यादा योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था अब बदल रही है। ‘एक जैसा मॉडल सब पर लागू’ करने की सोच अब टिकाऊ नहीं है। हर देश अब अपने हितों और क्षमताओं के अनुसार आगे बढ़ना चाहता है।

प्रधानमंत्री ने 2015 में गठित नीति आयोग का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह किसी विदेशी विकास मॉडल की नकल नहीं करेगा। देश अपनी जरूरतों के मुताबिक नीति बनाएगा और फैसले करेगा। उन्होंने कहा कि पहले सुधार संकट आने पर होते थे। 1991 में आर्थिक संकट के बाद बड़े सुधार हुए, लेकिन उनकी सरकार ने सुधारों को मजबूरी नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता से जोड़ा है। निर्णय प्रक्रिया को समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाया गया है।

प्रधानमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले रेलवे ओवरब्रिज की मंजूरी में सालों लग जाते थे। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए भी दिल्ली से अनुमति लेनी पड़ती थी। अब राज्यों और स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास तेज हुआ है। डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए उन्होंने यूपीआई को बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भुगतान का माध्यम नहीं, बल्कि शासन और व्यवस्था में सुधार का प्रतीक है। जन धन-आधार-मोबाइल मॉडल से करोड़ों लोग पहली बार बैंकिंग प्रणाली से जुड़े।

बजट को लेकर उन्होंने कहा कि अब चर्चा सिर्फ खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि नतीजों पर भी फोकस है। योजना आयोग की जगह नीति आयोग का गठन, जीएसटी, अनुच्छेद 370 हटाना और महिला आरक्षण जैसे फैसले बड़े संरचनात्मक सुधार हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पूंजीगत व्यय करीब 17 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप, नए शहरी आर्थिक क्षेत्र और सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर युवाओं और भविष्य के भारत में निवेश हैं।

मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले भारत को कमजोर अर्थव्यवस्था माना जाता था, लेकिन अब मजबूत विनिर्माण आधार और स्पष्ट नीति के कारण 38 देशों के साथ समझौते हुए हैं। दुनिया का भरोसा भारत पर बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने सामाजिक संवेदनशीलता पर भी जोर दिया। दिव्यांगजनों के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा को संस्थागत रूप देना, ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की रक्षा और तीन तलाक से महिलाओं को मुक्ति जैसे कदम बदलाव की मिसाल हैं।

उन्होंने कहा कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं और मुफ्त राशन जैसी योजनाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि नया मध्यम वर्ग फिर से गरीबी में न जाए। 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य पर उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत नींव रखना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है। राष्ट्र सर्वोपरि है और हर नीति का उद्देश्य देश को विकसित बनाना है।

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