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पीएम मोदी ने 30 साल पहले की थी कश्मीर एकता यात्रा, देखा था कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का सपना

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आठ साल के कार्यकाल में कई ऐसे बड़े फैसले लिए जिसने देश की छवि ही बदलकर रख दी। कई ऐसे विवादित फैसले जो दशकों तक अटके हुए थे, जिन्हें जानबूझकर लटकाया गया था। जिन विवादित मुद्दों को पिछली सरकारों ने छूने तक की हिम्मत नहीं दिखाई, उन्हें मोदी सरकार ने एक झटके में जड़ से खत्म कर दिया। मोदी सरकार ने जिस बड़े फैसले को लेकर सबको चौंका दिया इनमें सबसे अहम फैसला था जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना। मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर खंडों को समाप्त कर दिया था जो जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करते थे। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू कश्मीर और लद्दाख) में बांट दिया था। जम्मू कश्मीर 70 साल तक आर्टिकल 370 की जंजीरों में जकड़ा रहा। 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने कश्मीर को आर्टिकल 370 से मुक्ति दे दी। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर में देश के वो सभी कानून लागू हो गए, जिन्हें 70 साल तक लागू नहीं किया जा सका था। साथ ही जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा हटाकर अब वहां के सरकारी दफ्तरों में तिरंगा लहराने लगा। आर्टिकल 370 की बेड़ी टूटने के साथ ही जम्मू-कश्मीर के लोगों को अब केंद्र सरकार की लाभकारी योजनाओं का भी फायदा मिलने लगा, जिनसे कई सालों तक कश्मीर के लोगों को वंचित रखा गया।

पीएम मोदी ने 1991 में कश्मीर के लाल चौक पर फहराया था तिरंगा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का लक्ष्य बहुत साल पहले ही तय कर लिया था। यह इस बात से पता चलता है कि 1991 में उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक एकता यात्रा किया था और कश्मीर में तिरंगा झंडा लहराया था। 11 दिसंबर, 1991 को तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में यह ​एकता यात्रा शुरू हुई थी। उस समय नरेंद्र मोदी बीजेपी की नेशनल इलेक्शन कमेटी के मेंबर और इस यात्रा के कोऑर्डिनेटर थे। यह एकता यात्रा 26 जनवरी, 1992 को श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के साथ समाप्त हुई थी। श्रीनगर के लालचौक पर भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के साथ वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तिरंगा फहराया था। मोदी उस वक्त जोशी की उस टीम के सदस्य थे जो घनघोर आतंकवाद के उस दौर में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने पहुंची थी। हालात को भांपते हुए तत्कालीन प्रशासन ने मुरली मनोहर जोशी, नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं को हवाई जहाज के जरिए श्रीनगर पहुंचाया था। लालचौक पूरी तरह से युद्घक्षेत्र बना हुआ था। चारों तरफ सिर्फ सुरक्षाकर्मी ही थे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लगभग 15 मिनट में ही मुरली मनोहर जोशी व उनकी टीम के सदस्य के रूप में शामिल नरेंद्र मोदी व अन्य ने तिरंगा फहराया। इस दौरान आतंकियों ने रॉकेट भी दागे जो निशाने पर नहीं लगे। इसके बाद सभी नेता सुरक्षित वापस लौट गए थे।

जहां हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है

यही वजह है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए को 2019 के आम चुनाव में दूसरी बार जब प्रचंड बहुमत मिला तो उन्होंने सरकार गठन के 70 दिनों के भीतर अनुच्छेद 370 को खत्म करने का फैसला किया। जनता से मिली शक्ति ने पीएम मोदी को दूसरे कार्यकाल में अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। इससे एक राष्ट्र, एक विधान और एक निशान की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई। हम अक्सर एक नारा सुनते हुए या नारा लगाते हुए बड़े हुए हैं और वो नारा था- ”जहां हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है” लेकिन 5 अगस्त 2019 से पहले हमारा होते हुए भी कश्मीर पूरी तरह से हमारा नहीं था। इसका कारण था जम्मू कश्मीर राज्य में लगा हुआ आर्टिकल 370। इसे जम्मू कश्मीर का कलंक कहा जाए तो अतोश्योक्ति नहीं होगी। आर्टिकल 370 के कारण जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा होते हुए भी पूरी तरह से भारत का नहीं था।

पटेल, अंबेडकर और मुखर्जी का सपना किया साकार

अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘एक राष्ट्र के तौर पर, एक परिवार के तौर पर, आपने, हमने, पूरे देश ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। एक ऐसी व्यवस्था, जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहन अनेक अधिकारों से वंचित थे, जो उनके विकास में बड़ी बाधा थी, वो अब दूर हो गई है। जो सपना सरदार वल्लभभाई पटेल का था, बाबा साहेब अंबेडकर का था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का था, अटल जी और करोड़ों देशभक्तों का था, वो सपना अब पूरा हुआ है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में एक नए युग की शुरुआत हुई है। अब देश के सभी नागरिकों के हक भी समान हैं, और दायित्व भी समान हैं। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को, लद्दाख के लोगों को और प्रत्येक देशवासी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।’

“जो काम 70 साल में नहीं हुआ, वो 70 दिन के भीतर पूरा हुआ”

15 अगस्त, 2019 को लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम समस्याओं को टालते भी नहीं हैं और न ही हम समस्याओं को पालते हैं। अब समस्याओं को टालने का भी वक्त नहीं है, अब समस्याओं का पालने का भी वक्त नहीं है। जो काम पिछले 70 साल में नहीं हुआ, नई सरकार बनने के बाद, 70 दिन के भीतर-भीतर अनुच्‍छेद 370 और 35A को हटाने का काम भारत के दोनों सदनों ने, राज्यसभा और लोकसभा ने, दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दिया। इसका मतलब यह हुआ कि हर किसी के दिल में यह बात थी, लेकिन प्रारंभ कौन करे, आगे कौन आये, शायद उसी का इंतजार था और देशवासियों ने मुझे यह काम दिया और जो काम आपने मुझे दिया मैं वही करने के लिए आया हूं। मेरा अपना कुछ नहीं है।

एक देश, एक विधान और एक निशान

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लाल किले से मैं जब देश को संबोधित कर रहा हूं, मैं यह गर्व के साथ कहता हूं कि आज हर हिन्‍दुस्तानी कह सकता है- One Nation, One Constitution और हम सरदार साहब का एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत, इसी सपने को चरितार्थ करने में लगे हुए हैं। तब ये साफ-साफ बनता है कि हम ऐसी व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करें जो देश की एकता को बल दें, देश को जोड़ने के लिए cementing force के रूप में उभर करके आएं और यह प्रक्रिया निरंतर चलनी चाहिए। वह एक समय के लिए नहीं होती है, अविरल होनी चाहिए।

मोदी सरकार के फैसले को मिला अंतर्राष्ट्रीय समर्थन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के ऐतिहासिक फैसले का समर्थन दुनिया भर में किया गया। अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, इजरायल समेत विश्व के तमाम छोटे बड़े देश इसे भारत के अंदरूनी मामला बताकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़े दिखे और उनके साहसिक फैसले की सराहना की। यूरोपियन आयोग के पूर्व निदेशक ब्रायन टोल ने जिनेवा में अनुच्छेद 370 पर भारत का समर्थन करते हुए कहा कि इसे हटाए जाने से कश्मीर में लोगों को सामान्य रूप से आर्थिक अवसर मिलेगा।

जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में 90 प्रतिशत की कमी

अनुच्छेद-370 और 35ए हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में स्पष्ट तौर पर बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां केंद्र शासित प्रदेश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं, वहीं आतंकियों और पत्थरबाजों की कमर टूटी है। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने 2021 में कहा कि पत्थरबाजी की घटनाओं में 90 प्रतिशत की गिरवाट दर्ज की गई है। पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह के मुताबिक 2020 में सिर्फ 255 पथराव की घटनाएं हुईं, जो 2019 की तुलना में 87.13 प्रतिशत कम है। जबकि 2016 की तुलना में 2020 में पत्थरबाजी की घटनाओं में 90 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। दिलबाग सिंह ने कहा कि कानून और व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है। 2021 के लिए हमारा संकल्प जम्मू और कश्मीर में शांति बनाए रखना और स्थिति को नियंत्रित एवं मजबूत करना है। दिलबाग सिंह के अनुसार, 2019 में पत्थरबाजी की 1,999 घटनाएं हुईं, जिनमें से 1,193 केंद्र द्वारा उस साल अगस्त में जम्मू और कश्मीर की तत्कालीन राज्य की विशेष स्थिति को रद्द करने की घोषणा के बाद हुई थी। वर्ष 2018 में 1,458 और 2017 में 1,412 बार पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं थीं। जबकि वर्ष 2016 में 2,653 पत्थरबाज़ी के मामलों की सूचना मिली थी। 2016 में सबसे अधिक पत्थरबाजी की घटनाएं हुई, जब आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के एक कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद पूरे कश्मीर में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। जबकि, 2015 में, जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की 730 घटनाएं हुईं थीं। सेना ने बताया था कि नोटबंदी के बाद भी पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी कमी आई थी। गौरतलब है कि घाटी में आतंकियों पर शिकंजा कसने और उग्रवादी घटनाओं में कमी आने के बाद पाकिस्तान परस्त अलगाववादियों ने पत्थर को एक ‘लोकप्रिय’ हथियार का विकल्प बना दिया। पत्थरबाजी का हथियार जम्मू-कश्मीर में 2008 के अमरनाथ-भूमि आंदोलन के बाद से प्रचलित हुआ। इसके बाद से देशभर के कई हिस्सों में समुदाय विशेष ने पत्थरबाजी को अपने विरोध का एक सुलभ जरिया बनाया है। यही नहीं, दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में पत्थरों का भारी मात्रा में इस्तेमाल किया गया।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कम हुई आतंकी हिंसा

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने के ऐतिहासिक फैसले का असर अब दिखाई दे रहा है। अगस्त 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकी हिसा में उल्लेखनीय रूप से कमी आई है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने 9 मार्च, 2021 को लोकसभा में बताया कि 2019 की तुलना में केंद्र शासित प्रदेश में 2020 में आतंकी घटनाओं में गिरावट दर्ज की गई। अलगाववादियों, ओवर ग्राउंड कार्यकर्ताओं, पथराव करने वालों समेत करीब 173 लोग अभी तक हिरासत में हैं। एक लिखित उत्तर में रेड्डी ने कहा कि 2020 में जम्मू एवं कश्मीर में 244 आतंकी घटनाएं हुई। इससे पहले 2019 में 594 ऐसी घटनाएं हुई थीं। 2020 में 221 आतंकी ढेर किए गए जबकि एक साल पहले 2019 में 157 आतंकी मारे गए थे। उन्होंने कहा कि 2020 में 33 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और छह नागरिकों की मौत हुई थी जबकि 2019 में 27 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे और पांच नागरिकों की जान गई। केंद्र शासित प्रदेश में इस साल फरवरी में 15 आतंकी घटनाएं हुई जिसमें आठ आतंकी मारे गए।

अनुच्छेद 370 खत्म होते ही आतंक के अंत के साथ जम्मू-कश्मीर में बही विकास की बयार

भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर के लिए अनुचित रूप से थोपा गया अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में जहां आतंकवादी गतिविधियों में काफी कमी आई है वहीं चहुंमुखी विकास हुआ है। अनुच्छेद 370 के खत्म होते ही जम्मू-कश्मीर में जहां आतंकवादियों के आतंक का अंत हुआ है वहीं विकास की बयार बहने लगी है। जम्मू-कश्मीर में चलाए गए कल्याणकारी योजनाओं, सुधारों और विकास का लाभ लोगों तक पहुंचने लगा है।

पीएम विकास पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर में विकास कार्य

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के खत्म होने के बाद पिछले दो सालों में प्रधानमंत्री मोदी के विकास पैकेज के तहत 56,261 करोड़ की लागत वाली 54 परियोजनाओं की शुरुआत की गई। इनमें से 13 से अधिक योजनाएं साल 2021-22 तक पूरी हो जाएगी जबकि शेष परियोजनाएं 2022-23 में पूरी हो जाएंगी। जबकि साल 2018 तक वहां महज 7 परियोजनाओं को ही मंजूरी मिल पाई थी। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री विकास परियोजनाओं के तहत जून 2018 में जहां एक्सपेंडिचर में 26% की वृद्धि की गई थी वहीं मई 2021 में इसे बढ़ाकर 60.36% कर दिया गया। इतना ही नहीं इस दौरान कई विकास कार्यों को पूरा किया गया वहीं कई विकास के कार्य शुरू किए गए। जैसे रामबाग फ्लाईओवर पूरा किया गया तो काजीगुंड-बनिहाल सुरंग का काम पूरा हुआ। वहीं झेलम बाढ़ शमन परियोजना का पहला चरण पूरा कर लिया गया है। आईआईटी जम्मू ने अपने परिसर से ही काम करना शुरू कर दिया है, इतना ही नहीं वहां एम्स का काम भी शुरू हो गया है। जम्मू में बन रहे रिंग रोड का काम भी साल 2022 तक पूरा हो जाएगा।

डेढ साल में पूरे हुए 1100 से अधिक प्रोजेक्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए वहां से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला किया है उसके बाद महज डेढ़ साल में ही 1100 से अधिक परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इनमें से 5 परियोजनाएं तो ऐसी हैं जो पिछले 20 साल से लटकी पड़ी थीं। पीएम मोदी ने 15 ऐसी परियोजनाओं को गति देकर उन्हें पूरा कराया है जो 15 सालों से लटकी पड़ी थी। 165 परियोजनाएं जो 10 सालों से लटकी थी उसे भी मोदी सरकार ने पूरा किया है।

चिनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊंचा ब्रिज बना 

उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत पहली बार कश्मीर को दिसंबर 2022 तक ट्रेन से जोड़ दिया जाएगा। मोदी सरकार ने चिनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊंचा ब्रिज बनाकर न केवल एक कीर्तिमान बनाया है बल्कि जम्मू-कश्मीर में विकास को एक नई पहचान दी है। मालूम हो कि विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल चिनाब नदी पर तल स्तर से 359 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। यह कुतुब मीनार और एफिल टावर से भी ऊँचा है। इतना ही नहीं मोदी सरकार ने जम्मू-श्रीनगर-लद्दाख ऱाष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने जा रही है। यह प्रोजेक्ट 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर में सौ प्रतिशत विद्युतीकरण का टार्गेट पूरा 

मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अपनी सौभाग्य योजना के तहत सौ प्रतिशत विद्युतीकरण का अपना टार्गेट समय से पहले पूरा कर लिया। 2018 तक जम्मू-कश्मीर में बिजली उत्पादन की क्षमता 3504 मेगावाट की थी वहीं साल 2025 तक इसकी अतिरिक्त क्षमता 3530 मेगावाट उत्पादन की हो जाएगी। मोदी सरकार के प्रयास से जम्मू-कश्मीर की बिजली उत्पादन की क्षमता जहां तीन सालों में दोगुनी हो जाएगी वहीं सात सालों में तीनगुनी हो जाएगी। जबकि स्वतंत्रता के बाद से अब तक इसकी क्षमता महज 3500 मेगावाट तक पहुंची।

मोदी सरकार की हर योजना से लाभान्वित हुआ जम्मू-कश्मीर

पहले केंद्र की किसी भी योजना के लिए जम्मू-कश्मीर की जनता तरस जाती थी। क्योंकि केंद्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य सरकार के हाथ में होती थी। लेकिन जब से मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया है तब से केंद्र की योजनाएं भी वहां की जनता को सहज सुलभ होने लगी है। पीएम मोदी की उजाला योजना हो, उज्ज्वला योजना या फिर जल जीवन मिशन योजना, जम्मू-कश्मीर की सौ प्रतिशत जनता तक उसकी पहुंच सुनिश्चित हुई है।

जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक विकास के लिए नई योजनाएं

मोदी सरकार ने अपनी इस नई योजनाओं के तहत औद्योगिक विकास को ब्लॉक स्तर तक बढ़ाएगा। इससे दूर-दराज के इलाके में विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना के तहत जम्मू-कश्मीर के करीब साढ़े चार लोग युवाओं को रोजगार मिलेगा। इससे हर क्षेत्र का समान, संतुलित और सतत सामाजिक और आर्थिक विकास होगा। इसके अलावा इस योजना से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के साथ ही सर्विस सेक्टर को भी लाभ होगा।

अर्थव्यवस्था और व्यापार सेक्टर के प्रोत्साहन के लिए पैकेज

पीएम मोदी ने दिया 1350 करोड़ का आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज दिया। केंद्र सरकार ने बाढ़ और COVID से प्रभावित अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र के उत्थान के लिए यह राहत राहत पैकेज दिया है। इतना ही नहीं मोदी सरकार ने एक साल के लिए पानी और बिजली के बिलों के फिक्स चार्ज में 50 फीसदी की छूट भी दी है।

पीएम पुनर्वास पैकेज से जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक बदलाव

1. प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत कश्मीरी प्रवासी युवाओं के लिए विशेष नौकरियों की व्यवस्था की गई। इस पैकेज के तहत नौकरी पाने के लिए कुछ ही वर्षों में 3,800 प्रवासी युवक कश्मीर लौट आए हैं।

2. अनुच्छेद 370 के खत्म होने के बाद जो 520 प्रवासी युवक कश्मीर लौट आए हैं उन्हें पुनर्वास पैकेज के तहत नौकरी दी गई है। इसी नीति के तहत वर्ष 2021 में लगभग 2,000 अन्य प्रवासी उम्मीदवारों के भी लौटने की संभावना है।

3. घाटी में जम्मू-कश्मीर सरकार में कार्यरत 6,000 कश्मीरी प्रवासियों को आवास प्रदान करने के लिए, कश्मीर घाटी के विभिन्न जिलों में कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों के लिए 920 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 6,000 ट्रांजिट आवास इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है।

4. कश्मीरी प्रवासियों को नकद राहत प्रदान की जा रही है, जिसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है। 1990 में प्रति परिवार 500 रुपये को बढ़ाकर 13,000 रुपये प्रति परिवार कर दिया गया है।

मोदी सरकार के प्रहार से घटी आतंकवाद की घटनाएं

1. अनुच्छेद 370 के खत्म होने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार ने आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। इसका नतीजा यह हुआ कि 2019 की तुलना में आतंकी घटनाओं में वहां 59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

2. अनुच्छेद 370 के खत्म होने के पहले करीब 13 महीने के दौरान जहां 443 आतंकी घटनाएं हुई थी वहीं इस अनुच्छेद के हटाने के बाद 13 महीने के दौरान 206 आतंकी घटनाएं दर्ज हुईं। इस दौरान आतंकी घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी हुई।

3. इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर में तो पत्थरबाजी की घटनाएं करीब-करीब बंद सी हो गई। इन घटनाओं में 97 प्रतिशत की कमी आई। अनुच्छेद 370 के खत्म होने से पहले जो पत्थरबाजी की घटना की संख्या हजारों तक पहुंच गई थी वह घटकर सैकड़ों में पहुंच गई। अनुच्छेद 370 के खत्म होने के पहले एक साल के दौरान दर्ज 703 पत्थरबाजी के मामले की तुलना में घटकर पिछले एक साल में महज 310 हो गए हैं। यानि पत्थरबाजी की घटना में 56 प्रतिशत की कमी आई है।

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