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गांधी जी के जीवन आदर्श हर न्यायपालिका की नींव- अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 22 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन 2020 का उद्घाटन किया। न्यायपालिका और बदलता विश्व पर इस दो दिवसीय कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूज्य बापू का जीवन सत्य और सेवा को समर्पित था, जो किसी भी न्यायतंत्र की नींव माने जाते हैं। और हमारे बापू खुद भी तो वकील थे, बैरिस्टर थे। अपने जीवन का जो पहला मुकदमा उन्होंने लड़ा, उसके बारे में गांधी जी ने बहुत विस्तार से अपनी आत्मकथा में लिखा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधी जी तब बंबई, आज के मुंबई में थे। संघर्ष के दिन थे। किसी तरह पहला मुकदमा मिला था लेकिन उन्हें कहा गया कि उस केस के ऐवज में उन्हें किसी को कमीशन देना होगा। गांधी जी ने साफ कह दिया था कि केस मिले या न मिले, कमीशन नहीं दूंगा। सत्य के प्रति, अपने विचारों के प्रति गांधी जी के मन में इतनी स्पष्टता थी। और ये स्पष्टता आई कहां से? उनकी परवरिश, उनके संस्कार और भारतीय दर्शन के निरंतर अध्ययन से।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में ‘कानून के नियम’ सामाजिक संस्कारों के आधार रहे हैं। हमारे यहां कहा गया है- ‘क्षत्रयस्य क्षत्रम् यत धर्म:’। यानि ‘कानून राजाओं का राजा है, यानी कानून सर्वोपरि है।’ हजारों वर्षों से चले आ रहे ऐसे ही विचार ही हर भारतीय की न्यायपालिका पर अगाध आस्था की बड़ी वजह हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘ ये कॉन्फ्रेंस 21वीं सदी के तीसरे दशक के शुरुआत में हो रही है। ये दशक भारत सहित पूरी दुनिया में होने वाले बड़े बदलावों का है। ये बदलाव सामाजिक, आर्थिक, और तकनीकी हर क्षेत्र में होंगे। ये बदलाव तर्क संगत और न्याय संगत होने चाहिए। ये बदलाव सभी के हित में होने चाहिए। दुनिया के करोड़ों नागरिकों को न्याय और गरिमा सुनिश्चित करने वाले आप सभी दिग्गजों के बीच आना, अपने आप में बहुत सुखद अनुभव है। न्याय की जिस कुर्सी पर आप सभी बैठते हैं, वो सामाजिक जीवन में भरोसे और विश्वास का महत्वपूर्ण स्थान है।’

उन्होंने कहा कि हाल में कुछ ऐसे बड़े फैसले आए हैं, जिनको लेकर पूरी दुनिया में चर्चा थी। फैसले से पहले अनेक तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। लेकिन हुआ क्या? 130 करोड़ भारतवासियों ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘तमाम चुनौतियों के बीच, कई बार देश के लिए संविधान के तीनों पिलर्स ने उचित रास्ता ढूंढा है। और हमें गर्व है कि भारत में इस तरह की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई है। बीते पांच वर्षों में भारत की अलग-अलग संस्थाओं ने, इस परंपरा को और सशक्त किया है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि इस कॉन्फ्रेंस में ‘Gender Just World’ के विषय को भी रखा गया है। दुनिया का कोई भी देश, कोई भी समाज Gender Justice के बिना पूर्ण विकास नहीं कर सकता और ना ही न्यायप्रियता का दावा कर सकता है। भारत दुनिया के उन बहुत कम देशों में से एक है जिसने स्वतंत्रता के बाद से ही महिलाओं को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित किया है। आज 70 साल बाद अब चुनाव में महिलाओं की भागीदारी अपने सर्वोच्च स्तर पर है।’

उन्होंने कहा, ’21वीं सदी का भारत इस भागीदारी के दूसरे पहलुओं में भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं इन अभियानों के कारण ही पहली बार एजुकेशन एनरोलमेंट में गर्ल चाइल्ड का लड़कों से ज्यादा हो गया है। इसी तरह सैन्य सेवा में बेटियों की नियुक्ति हो, फाइटर पाइलट्स की चयन प्रक्रिया हो, माइन्स में रात में काम करने की स्वतंत्रता हो, सरकार द्वारा अनेक बदलाव किए गए हैं।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”मैं आज इस अवसर पर, भारत की न्यायपालिका का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिसने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की गंभीरता को समझा है, उसमें निरंतर मार्गदर्शन किया है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आपके सामने न्याय के साथ ही, शीघ्र न्याय की भी चुनौती हमेशा से रही है। इसका एक हद तक समाधान तकनीक के पास है। विशेष तौर पर अदालत के प्रक्रियागत प्रबंधन को लेकर इंटरनेट आधारित तकनीक से भारत की न्यायिक प्रणाली को बहुत लाभ होगा। सरकार का भी प्रयास है कि देश की हर कोर्ट को ई-अदालत एकीकरण मिशन मोड परियोजना से जोड़ा जाए। राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड की स्थापना से भी अदालत की प्रक्रियाएं आसान बनेंगी।’

उन्होंने कहा, ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मानवीय विवेक का तालमेल भी भारत में न्यायिक प्रक्रियाओं को और गति देगा। भारत में भी न्यायालयों द्वारा इस पर मंथन किया जा सकता है कि किस क्षेत्र में, किस स्तर पर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता लेनी है। इसके अलावा बदलते हुए समय में डाटा सुरक्षा, साइबर अपराध जैसे विषय भी अदालतों के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे अनेक विषयों पर इस सम्मेलन में गंभीर मंथन होगा, कुछ सकारात्मक सुझाव सामने आएंगे। मुझे विश्वास है कि इस सम्मेलन से भविष्य के लिए अनेक बेहतर समाधान भी निकलेंगे।’

 

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