प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि बदलती वैश्विक मांग के दौर में भारत की खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर भारत अपनी कृषि उत्पादन क्षमता को सही दिशा में इस्तेमाल करे तो यह सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने 6 मार्च को ‘एग्रीकल्चर एंड रूरल ट्रांसफॉर्मेशन’ विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया के बाजार तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में भारत के किसानों को भी ग्लोबल मार्केट के हिसाब से अपनी खेती को तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत के पास विविध जलवायु और अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन की बड़ी ताकत है। इस विविधता का इस्तेमाल करके देश कई तरह के कृषि उत्पादों का उत्पादन कर सकता है और उन्हें दुनिया के बाजार तक पहुंचा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल का बजट किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और कृषि निर्यात को मजबूत करने पर खास ध्यान देता है। बजट में हाई वैल्यू एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए कई नए अवसर दिए गए हैं।
आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं और ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को Export Oriented बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्यक है। हमारे पास Diverse Climate हैं और हमें इसका पूरा फायदा उठाना है।
– आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी pic.twitter.com/oiKLi2o8OJ
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) March 6, 2026
उन्होंने बताया कि नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसे उत्पादों के क्षेत्रीय स्तर पर विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा ज्यादा आय देने वाली फसलों की ओर बढ़ने का मौका मिलेगा। पीएम मोदी ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों में नारियल उत्पादन की बड़ी संभावनाएं हैं। लेकिन कई जगह पुराने पेड़ों के कारण उत्पादन क्षमता कम हो गई है। सरकार इस दिशा में नई पहल कर रही है ताकि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के किसानों को अधिक लाभ मिल सके।

उन्होंने उत्तर-पूर्व और हिमालयी क्षेत्रों की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगरवुड और टेम्परेट नट क्रॉप्स जैसे उत्पादों को बढ़ावा देकर इन क्षेत्रों के किसानों की आय में बड़ा इजाफा किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड खेती बढ़ेगी तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

उन्होंने कहा कि अगर हाई वैल्यू एग्रीकल्चर को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाए तो भारत का कृषि क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इसके लिए कृषि विशेषज्ञों, उद्योग और किसानों को मिलकर काम करना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में ऑर्गेनिक और केमिकल फ्री फूड की मांग भी लगातार बढ़ रही है। भारत के किसानों के लिए यह एक बड़ा अवसर है।
आज दुनिया health के संबंध में ज्यादा conscious है।
Holistic healthcare और उसमें organic diet पर बहुत रुचि है।
भारत में हमें कैमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें natural farming पर बल देना होगा।
Natural farming से कैमिकल फ्री product से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे… pic.twitter.com/cgDO8HqnEA
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) March 6, 2026
उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को केमिकल फ्री खेती और नेचुरल फार्मिंग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। इससे भारत के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान मिल सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नेचुरल फार्मिंग से तैयार उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए सरकार सर्टिफिकेशन और लैब जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है।

उन्होंने मछली पालन क्षेत्र की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह सेक्टर भी कृषि निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत पहले ही दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में मौजूद जलाशयों और तालाबों से अभी करीब 4 लाख टन मछली उत्पादन हो रहा है। जबकि इसमें करीब 20 लाख टन तक अतिरिक्त उत्पादन की क्षमता मौजूद है।
उन्होंने कहा कि अगर इस क्षमता का सही इस्तेमाल किया जाए तो लाखों मछुआरों की आय में बड़ा बदलाव आ सकता है। साथ ही यह सेक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फिशरीज सेक्टर में हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में नए बिजनेस मॉडल विकसित करने की जरूरत है। इससे किसानों और मछुआरों दोनों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आय को बढ़ाने के लिए कृषि के साथ-साथ पशुपालन और फिशरीज जैसे क्षेत्रों को भी आगे बढ़ाना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और अंडा उत्पादन में भी दूसरा स्थान रखता है। इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए बेहतर नस्ल, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पशुओं को फुट एंड माउथ डिजीज से बचाने के लिए अब तक 125 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज दी जा चुकी हैं। इससे पशुधन की सुरक्षा और उत्पादकता दोनों बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन की ओर बढ़ना चाहिए। इससे जोखिम कम होगा और आय के नए स्रोत भी बनेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स एंड पल्सेस और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग जैसे कार्यक्रमों के जरिए कृषि क्षेत्र को मजबूत कर रही है।
हम Crop diversification पर फोकस कर रहे हैं।
इसके अलावा National Mission on Edible Oil and Pulses और National Mission on Natural Farming ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं ।
– आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी pic.twitter.com/oZfYp61Ko8
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) March 6, 2026
प्रधानमंत्री ने कृषि में तकनीक के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ई-नाम प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को बाजार तक पहुंच आसान हुई है और उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ी है। उन्होंने बताया कि सरकार एग्रीस्टैक के जरिए कृषि क्षेत्र के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है। इसके तहत किसान आईडी बनाई जा रही है और जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
ये Technology की सदी है और सरकार का बहुत जोर Agriculture में Technology Culture लाने पर है।
भारत विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।
– आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी pic.twitter.com/rnWvsBvPoC
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प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक करीब 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है और 30 करोड़ से ज्यादा भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी तभी सफल होती है जब सिस्टम उसे अपनाता है और संस्थाएं उसे अपने काम में शामिल करती हैं। इसलिए कृषि क्षेत्र में टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने की जरूरत है।
ये technology की सदी है, और सरकार का बहुत जोर agriculture में Technology Culture लाने पर भी है।
आज e-NAM के माध्यम से market access का democratization हुआ है।
सरकार agri-stack के जरिए, agriculture के जरिए, digital public infrastructure विकसित कर रही है।
इसके तहत digital पहचान,… pic.twitter.com/OhLEoTGju8
— BJP (@BJP4India) March 6, 2026
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना जैसी योजनाओं ने गांवों की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत अब तक 3 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2029 तक 3 करोड़ और महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी। उन्होंने अंत में कहा कि कृषि प्रोसेसिंग, सप्लाई चेन, एग्री-टेक और एग्री-फिनटेक जैसे क्षेत्रों में नवाचार और निवेश बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वेबिनार से निकले सुझाव भारत की कृषि को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाने में मदद करेंगे।









