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पेगासस जासूसी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- सबूत कहां है ? दो साल बाद क्यों आए? फोन हैक हुआ तो एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई?

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पेगासस जासूसी विवाद को लेकर सड़क से लेकर संसद तक हंगामा जारी है। आज (05 अगस्त, 2021) उसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में पहली बार सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की तरफ से कई वरिष्ठ वकील जैसे कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, अरविंद दातार पेश हुए, जिन्होंने पेगासस जासूसी के आरोपों को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा और निजता के उल्लंघन का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद कहा कि जासूसी से प्रभावित व्यक्तियों द्वारा इस अदालत का दरवाजा खटखटाने से पहले पुलिस के पास आपराधिक शिकायत दर्ज करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।

पेगासस जासूसी मामले की जांच की मांग वाली नौ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कई सवाल उठाए। पीठ ने सुनवाई करते हुए पूछा कि अधिकांश याचिकाएं विदेशी समाचार पत्रों की रिपोर्ट पर आधारित हैं, लेकिन हमारे लिए जांच का आदेश देने के लिए सत्यापन योग्य सामग्री कहां है? निगरानी का मुद्दा दो साल पहले मई 2019 में प्रकाश में आया था। पता नहीं क्यों इस मुद्दे को उठाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया, अब अचानक से ये मामला क्यों आ गया? चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने रिट याचिकाएं दायर की हैं वे अधिक जानकार और साधन संपन्न हैं। उन्हें अधिक इस मामले में सामग्री जुटाने के लिए और अधिक मेहनत करनी चाहिए थी।

वरिष्ठ पत्रकार एन. राम की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि हमारे पास सूचना तक सीधी पहुंच नहीं है, इसलिए, हम सरकार से हमें यह तथ्य बताने के लिए कहते हैं – इसे किसने खरीदा और हार्डवेयर किस पर आधारित था। सरकार चुप क्यों रही, उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की? इस तकनीक का उपयोग भारत में नहीं किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।

प्रधान न्यायाधीश ने सवाल किया अगर याचिकाकर्ता को पता है कि आपका फोन हैक हो गया तो आपने एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई? कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को केंद्र सरकार को याचिकाओं की प्रतियां देने के लिए कहा और मामले को मंगलवार को आगे की सुनवाई के लिए टाल दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में केंद्र सरकार को औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है। कोर्ट की ओर से इस दौरान एमएल शर्मा को फटकार भी लगाई गई, जिन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य व्यक्तिगत लोगों के खिलाफ याचिका दायर की थी। अदालत ने कहा कि वह कोई फायदा उठाने की कोशिश ना करें। 

इस पूरी सुनवाई से पता चलता है कि याचिकाकर्ता सिर्फ विदेशी मीडिया की खबरों को आधार बनाकर इस मामले को तूल दे रहे हैं और उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से देश के दिग्गज और ज्यादातर कांग्रेसपरस्त वकीलों की फौज उतार कर सुप्रीम कोर्ट पर एक तरह से दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। जिस तरह से इस मामले में बिना आधार के विक्टिम कार्ड खेला जा रहा है वो किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। 

 

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