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सफल हो रहे मोदी सरकार के प्रयास: फ्रांस और ब्रिटेन को पीछे छोड़ क्लब 5 में शामिल होगा भारतीय बाजार

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भारतीय बाजार रॉकेट की तरह भाग रहा है। कोरोना महामारी के बाद भी भारतीय बाजार की इस तेजी के आगे दुनिया के बड़े-बड़े देशों के बाजार टिक नहीं पा रहे हैं। मार्केट कैप के मामले में पहले भारतीय बाजार ने फ्रांस को पछाड़ा और अब निशाने पर है ब्रिटेन। मोदी सरकार की कोशिशों ने भारत के कारोबार जगत में ऐसी जान फूंकी है कि विदेशी निवेशकों के साथ भारतीय निवेशकों का भी बाजार पर भरोसा बढ़ता जा रहा है।

मार्केट कैप के मामले में भारतीय बाजार ने फ्रांस को पछाड़ा 

• भारतीय बाजारों ने मार्केट कैप के मामले में पहले फ्रांस को पटखनी दी
• ब्रिटेन के बाजारों से भी जल्द ही आगे निकल सकता है भारत
• भारतीय बाजारों के मार्केंट कैप में 37 फीसदी का इजाफा
• 3.46 लाख करोड़ पहुंचा भारतीय बाजारों का मार्केंट कैप
• ब्रिटेन को पछाड़ भारत टॉप 5 बाजारों के क्लब में शामिल हो जाएगा

मार्केट कैप से हिसाब से भारतीय बाजार दुनिया में अभी छठे नंबर पर है। मोदी सरकार ने करोना माहामारी के बाद देश की इकोनॉमी को पटरी पर लाने के लिए कई बड़े फैसले लिए थे। जिसका काफी सकारात्मक असर भारतीय बाजारों पर पड़ा है। ब्याज दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। जिसका फायदा कारोबार जगत के साथ निवेशकों भी मिल रहा है। भारतीय बाजारों के जानकारों के मुताबिक

• भारत का घरेलू स्टॉक मार्केट बेहद आकर्षक लग रहा है
• सुधारवादी कदमों से देश के तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है
• बीएसई सेंसेक्स पिछले साल मार्च के मुकाबले 130 फीसदी बढ़ा है
• 5 साल में भारतीय निवेशकों को सालाना 15 फीसदी रिटर्न मिला है

क्लब 5 में शामिल हो सकता है भारतीय बाजार 

अमेरिका, चीन, जापान, हॉन्गकॉन्ग और ब्रिटेन जैसे देश ही मार्केट कैप के हिसाब से भारत से आगे हैं, लेकिन भारतीय बाजारों में छाई तेजी को देखते हुए दावा किया जा रहा है कि भारत जल्द ही ब्रिटेन को पीछे छोड़ सकता है। 2014 में शेयर बाजार ने तेजी के साथ ही नरेन्द्र मोदी सरकार का स्वागत किया।

साल 2014 में मोदी सरकार के आगमन का स्वागत

  • 16 मई 2014 को ही सेंसेक्स 25,364 के स्तर तक पहुंच गया था
  • सेसेंक्स को 25 हजार से 30 हजार तक पहुंचने में तीन साल और लगे
  • 17 जनवरी 2018 को सेंसेक्स 35081.82 पर बंद हुआ
  • 30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स 40051.87 के स्तर पर पहुंच गया
  • इसके बाद 15 महीने से कम समय में 40 से 50 हजार पहुंचा
  • 50 हजार से 60 हजार के आंकड़े तक पहुंचने में सिर्फ 8 महीने लगे

भारतीय बाजारों पर FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) का बढ़ता भरोसा

सेंसेक्स हर रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है। इसकी एक बड़ी वजह है विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर बढ़ता भरोसा। डिपॉजिटरी से मिले आंकड़ों के मुताबिक FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) ने 1 से 8 अक्तूबर तक

  • इक्विटी में 1530 करोड़ रूपए का निवेश किया
  • डेट सेगमेंट में 467 करोड़ रूपए का निवेश किया गया
  • सितंबर महीने में FPI की खरीददारी 26517 करोड़ रूपए थी
  • अगस्त में FPI ने 16459 करोड़ रूपयों की खरीददारी की थी
  • विदेशी मुद्रा भंडार 642 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर
  • अगस्त में निर्यात बढ़कर 33 अरब डॉलर हुआ
  • अगस्त में निर्यात में हुआ 46 फीसदी का इजाफा
  • अगस्त में व्यापार घाटा 14 अरब डॉलर पर आया

GST कलेक्शन के मोर्चे पर देश के लिए अच्छी खबर

जीएसटी कलेक्शन लगातार तीसरे महीने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हुआ है।

  • सितंबर महीने में करीब 1.17 लाख करोड़ का GST कलेक्शन 
  • पिछले साल की तुलना में 23 फीसदी का इजाफा हुआ है
  • पिछले साल सितंबर में 95,480 करोड़ रुपये का जीएसटी क्लेक्शन
  • 2019 में कोरोना के अटैक के बाद 27 फीसदी का इजाफा
  • साल 2019 के सितंबर में 91,916 करोड़ रुपये का GST कलेक्शन

चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में एफडीआई में 62 प्रतिशत की वृद्धि

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में भारत निवेश के लिए वैश्विक निवेशकों का पसंदीदा देश बना हुआ है। मोदी सरकार बनने के बाद एफडीआई नीति में सुधार, निवेश के लिए बेहतर माहौल और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे कदम उठाने का परिणाम है कि वे कोरोना काल में भी भारत में जमकर निवेश कर रहे हैं। मोदी सरकार की नीतियों का ही परिणाम है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 के पहले चार महीनों के दौरान भारत ने कुल 27.37 बिलियन अमेरिकी डॉलर का विदेशी निवेश भारत में आया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2020-21 में इसी अवधि की 16.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की तुलना में यह 62 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही पिछले साल की इसी अवधि में 9.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के पहले चार महीनों में 20.42 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 112 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2021-22 के पहले चार महीनों के दौरान ‘ऑटोमोबाइल उद्योग’ शीर्ष क्षेत्र के रूप में उभरा है। इसका कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में योगदान 23 प्रतिशत रहा है, इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का 18 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र का 10 प्रतिशत योगदान रहा है। वित्त वर्ष 2021-22 में जुलाई, 2021 तक कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 45 प्रतिशत हिस्से के साथ कर्नाटक शीर्ष पर है, इसके बाद महाराष्ट्र 23 प्रतिशत के दूसरे और 12 प्रतिशत के साथ दिल्ली तीसरे स्थान पर रहा।

विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने सितंबर में किया 16,305 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना संकट काल में भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। विदेशी निवेशकों ने कोरोना काल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है। मोदी सरकार बनने के बाद एफडीआई नीति में सुधार, निवेश के लिए बेहतर माहौल और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे कदम उठाने का परिणाम है कि वे कोरोना काल में भी भारत में जमकर निवेश कर रहे हैं। विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने सितम्‍बर महीने में अभी तक भारतीय पूंजी बाजार में 16,305 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किए हैं। बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने 11,287 करोड रुपये इक्विटी और 5,018 करोड़ रुपये ऋण सेगमेंट में निवेश किए हैं। इस महीने की 17 तारीख तक कुल मिलाकर 16,305 करोड रुपये भारतीय पूंजी बाजार में निवेश किये गए। पिछले महीने अगस्त में विदेशी निवेशकों ने 16,459 करोड़ रुपये भारतीय पूंजी बाजार में डाले थे।

 

आइए देखते हैं देश की अर्थव्यवस्था और विकास पर विभिन्न रेटिंग एजेंसियों का क्या कहना है…

वित्त वर्ष 2021-22 में 10 प्रतिशत की ग्रोथ की उम्मीद- NCAER
इकोनॉमिक थिंक टैंक NCAER ने देश की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। एनसीएईआर की महानिदेशक पूनम गुप्ता के अनुसार देश में सप्लाई सामान्य होने लगी है। सेवाओं में मांग बढ़ने के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था भी पटरी पर है। इससे वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 10 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। पूनम गुप्ता के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था में उछाल और कोविड-19 की वजह से आपूर्ति संबंधी दिक्कतें कम होने से चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छी वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है।

9.5 प्रतिशत रहेगी देश की विकास दर- आरबीआई
कोरोना काल में भी भारत ने मजबूत वृद्धि दर हासिल की है और सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनने के रास्ते पर है। भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि चालू वित्त वर्ष 2021-22 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। रिजर्व बैक के गवर्नर शक्तिकांत दास के अनुसार आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत सुधार को दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में कोरोना की दूसरी लहर का असर कम हो गया और दूसरी तिमाही से आर्थिक विकास और बेहतर होगा। दास ने कहा कि रिजर्व बैंक ने महामारी के चलते आर्थिक वृद्धि पर ज्यादा जोर देने का फैसला किया। बैंक ने सरकार द्वारा निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत तक मुद्रास्फीति दर के लक्ष्य को ध्यान में रखकर कदम उठाए हैं। इससे वैश्विक बाजार में तरलता की आसान स्थिति के कारण घरेलू बाजार में तेजी दिखाई दे रही है। 

आर्थिक वृद्धि दर 9.5 फीसदी रहने का अनुमान-एसएंडपी
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2022-23 में यह 7 प्रतिशत रह सकती है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के निदेशक (सॉवरेन) एंड्रयू वुड ने कहा कि महामारी के संदर्भ में भारत की बाह्य स्थिति मजबूत हुई है। देश ने रिकॉर्ड गति से विदेशी मुद्रा भंडार जुटाया है।

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत- मूडीज
अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था की राह पर लौट रहा है। पहली तिमाही में तेज विकास दर से यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि 2021 में भारत 9.6 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल कर लेगा। यह दुनिया के अन्य बड़े देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है। भारत के बाद चीन की विकास दर 8.5 प्रतिशत का अनुमान है। मूडीज के अनुसार जी-20 देशों की विकास दर 6.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। अन्य उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों की औसत विकास दर इस साल 7.2 प्रतिशत रहेगी।

एनसीएईआर का अनुमान- 8.4 से 10.1 प्रतिशत तक रह सकती है जीडीपी ग्रोथ
मोदी सरकार की नीतियों की वजह से अर्थव्यवस्था इस संकट काल में भी काफी मजबूत है। आर्थिक थिंक टैंक नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) को उम्मीद है कि भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्तीय वर्ष में 8.4 से 10.1 प्रतिशथ की वृद्धि हासिल कर सकती है। एनसीएईआर ने अर्थव्यवस्था की तिमाही समीक्षा जारी करते हुए आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए मजबूत वित्तीय समर्थन पर जोर दिया। एनसीएईआर ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में 11.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष में 8.4 से 10.1 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

एशियाई देशों में भारत की विकास दर सबसे बेहतर रहने की संभावना
 कोरोना महामारी और तमाम विपरीत परिस्थियों के बावजूद मोदी सरकार की नीतियों के चलते देश की इकोनॉमी वृद्धि कर रही है। मोदी राज में एशियाई देशों में भारत की विकास दर सबसे बेहतर रहने की संभावना है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने कहा है कि साल 2021 में देश की विकास दर 12.8 प्रतिशत हो सकती है। नोमुरा की भारत और एशिया पूर्व जापान एमडी और मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने कहा है कि हमने भारतीय बाजार में एक महत्वपूर्ण रैली देखी है। अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार सोनल वर्मा ने कहा कि हमें लगता है कि भारत की वृद्धि इस वर्ष एशिया के अन्य देशों को पीछे छोड़ देगी और हम कैलेंडर वर्ष 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 12.8 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।

इक्रा का अनुमान- 8.5 प्रतिशत रह सकती है जीडीपी ग्रोथ
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा है कि कोरोना के घटते मामले और लॉकडाउन में ढील से वित्त वर्ष 2021-22 में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रह सकती है। इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि हमारा अनुमान है कि देश की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2021-22 में 8.5 प्रतिशत रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर टीकाकरण अभियान में तेजी आती है, तो तीसरी और चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अच्छा रहेगा। इससे जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 9.5 प्रतिशत तक जा सकती है। इक्रा ने कहा कि इस साल मानसून सामान्य रहने के साथ खाद्यान्न उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है।

संयुक्त राष्ट्र ने 2022 के लिए जताया 10.1 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान
संयुक्त राष्ट्र ने साल 2021 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया है। यूएन ने इसमें जनवरी के अपने अनुमान से 0.2 फीसद की बढ़ोत्तरी की है। इसके साथ ही यूएन ने साल 2022 में भारत की जीडीपी ग्रोथ का पूर्वानुमान 10.1 प्रतिशत लगाया है। यूएन ने वर्ल्ड इकोनॉमिक सिचुएशन एंड प्रोस्पेक्ट्स रिपोर्ट में कहा है कि कई देशों में बढ़ते कोरोना संक्रमण और टीकाकरण में कमी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था की रिकवरी पर असर पड़ा है।

एडीबी ने जताया 11 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 11 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। ‘एशियन डेवलपमेंट आउटलुक 2021’ में एडीबी ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था के इस वित्त वर्ष में एक मजबूत वैक्सीन ड्राइव के बीच 11 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सवादा ने कहा कि एशिया में विकास हो रहा है, लेकिन कोविड 19 के बढ़ते प्रकोप से इस रिकवरी को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अर्थव्यवस्थाएं परिवर्तन पर हैं। यह देखना होगा कि के समय उनके वैक्सीन रोलआउट की गति और वैश्विक रिकवरी से उन्हें कितना फायदा हो रहा है।

चीन से 4 प्रतिशत ज्यादा रहेगी विकास दर- IMF
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा है कि साल 2021 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 12.5 प्रतिशत रह सकती है। आईएमएफ ने कहा है कि यह वृद्धि दर चीन से 4 प्रतिशत ज्यादा होगी। आईएमएफ ने अपने सालाना वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा कि 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 8 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन इस साल वृद्धि दर 12.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो काफी बेहतर है। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि चीन की वृद्धि दर 2021 में 8.6 प्रतिशत और 2022 में 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

विश्व बैंक ने जीडीपी ग्रोथ अनुमान 5.4 से बढ़ाकर किया 10.1 प्रतिशत
अर्थव्यवस्था में मौजूदा सुधार को देखते हुए विश्व बैंक ने भी अपने अनुमानों में संशोधन किया है। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 4.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 10.1 प्रतिशत कर दिया है। इस अनुमान के पीछे निजी उपभोग में वृद्धि एवं निवेश को कारण बताया गया है। इससे पहले जनवरी में विश्व बैंक ने ही भारत की जीडीपी वृद्धि दर को 5.4 प्रतिशत बताया था।

अगले साल चीन को पीछे छोड़ देगा भारत- आईएमएफ
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने ‘विश्व आर्थिक परिदृश्य’ पर जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत अगले साल चीन को पीछे छोड़ देगा। आईएमएफ ने कहा कि कोरोना के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट का अंदेशा है, लेकिन अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था लंबी छलांग लगाने में सक्षम होगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.8 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज हो सकती है और यह चीन को पीछे छोड़ते हुए सबसे तेजी से बढ़ने वाली उभरती अर्थव्यवस्था का दर्जा फिर से हासिल कर लेगी। चीन के 2021 में 8.2 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल करने का अनुमान है।

आईएमएफ को भरोसा, वैश्विक अर्थव्यवस्था की अगुवाई करेगा भारत
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा कि भारत की अगुवाई में दक्षिण एशिया वैश्विक वृद्धि का केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है और 2040 तक वृद्धि में इसका अकेले एक-तिहाई योगदान हो सकता है। आईएमएफ के हालिया शोध दस्तावेज में कहा गया कि बुनियादी ढांचे में सुधार और युवा कार्यबल का सफलतापूर्वक लाभ उठाकर यह 2040 तक वैश्विक वृद्धि में एक तिहाई योगदान दे सकता है। आईएमएफ की एशिया एवं प्रशांत विभाग की उप निदेशक एनी मेरी गुलडे वोल्फ ने कहा कि हम दक्षिण एशिया को वैश्विक वृद्धि केंद्र के रूप में आगे बढ़ता हुए देख रहे हैं।

2021-22 में 9.5 प्रतिशत रह सकती है विकास दर-फिंच
रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की विकास दर 9.5 प्रतिशत रह सकती है। फिच रेटिंग्स ने हालांकि कोरोना संकट के कारण चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था के पांच प्रतिशत सिकुड़ने का अनुमान जताया है। लेकिन फिच ने कहा कि कोरोना संकट के बाद देश की जीडीपी वृद्धि दर के वापस पटरी पर लौटने की उम्मीद है। इसके अगले साल 9.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने की उम्मीद है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रिकॉर्ड 20.1 प्रतिशत GDP ग्रोथ
कोरोना काल में जीडीपी के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। केंद्र सरकार की ओर से 31 अगस्त, 2021 को जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 के पहली तिमाही में जीडीपी 32.38 लाख करोड़ रुपये रही है, जो 2020-21 की पहली तिमाही में 26.95 लाख करोड़ रुपये थी। यानि साल दर साल के आधार पर जीडीपी में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल 2020-21 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में 24.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जीडीपी ग्रोथ भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के बेहद करीब है। आरबीआई ने पहली तिमाही के लिए 21.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान जताया था। वहीं भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की इकोरैप रिपोर्ट में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान जीडीपी में 18.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। 

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