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मोदी सरकार की नीतियों से ‘रॉकेट’ बने स्टार्टअप : 2021 मेें अब तक 33 स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल

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देश में स्टार्टअप कंपनियों की सफलता से दुनिया हैरान है। साल 2021 में भी भारत की स्टार्टअप कंपनियां सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। ये साल भी स्टार्टअप के लिहाज से बेहतरीन रहा है। इस साल अब तक भारत के 33 स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो चुके हैं। जानकारों का कहना है कि इस अगर देश में स्टार्टअप के सफलता की कहानी ऐसे ही आगे बढ़ती रही तो यूनिकॉर्न क्लब में साल के अंत तक देश के कई और स्टार्टअप शामिल हो सकते है।

साल 2021 में भी सफलता के झंडे गाड़ रहे स्टार्टअप

यूनिकॉर्न क्लब में शामिल स्टार्टअप का वैल्यूएशन एक अरब डॉलर होता है।10 अरब डॉलर के वैल्यूएशन से अधिक के स्टार्टअप को डेकाकॉर्न कहते हैं। जबकि 100 अरब डॉलर के वैल्यूएशन तक पहुंचने वाले स्टार्टअप को हेक्टोकॉर्न कहा जाता है। स्टार्टअप को लेकर मोदी सरकार की नीतियों का ही नतीजा है कि देश में स्टार्टअप की सफलता का सफर तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोरोना महामारी के बाद भी इस साल 28 स्टार्टअप कंपनियां को यूनिकॉर्न का दर्जा मिलना अपने आप में बड़ी सफलता है।

मोदी सरकार की नीतियों से तेजी से आगे बढ़ रहे स्टार्टअप

साल 2011 से 2014 के बीच महज 1 कंपनी ही यूनिकॉर्न बन पाई थी। लेकिन साल 2014 के बाद मोदी सरकार की नीतियों की वजह से स्टार्टअप की सफळता का सफर तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में तेजी से ऐसी कंपनियां तैयार हो रही हैं जो की दुनिया भर में नाम कमा रही हैं। आज देश में कुल 65 स्टार्टअप कंपनियां काम कर रही हैं, जिन्हें यूनिकॉर्न का दर्जा मिला है। स्टार्टअप को लेकर ये मोदी सरकार की सफल नीतियों का ही नतीजा है कि 2015 में यूनिकॉर्न का दर्जा पाने वाली स्टार्टअप कंपनियों की तादाद तेजी से बढ़ी है।

साल  यूनिकॉर्न की संख्या
2011-14 1
2015 4
2018 8
2019 9
2020 10
2021 33

भारत में स्टार्टअप की तरक्की से दुनिया हैरान 

देश में स्टार्टअप कंपनियों की इस हैरतअंगेज तरक्की ने दुनिया के कई देशों को हैरान कर दिया है, चीन की इकोनॉमी भारत के मुकाबले काफी बड़ी है , लेकिन वहां इस साल महज 28 स्टार्टअप कंपनियां ही यूनिकॉर्न बन पाई हैं । ब्रिटेन में केवल 9 कंपनियां ही स्टार्टअप बन पाई हैं,  वहीं ब्राजिल में 3 और इंडोनेशिया में केवल 1 स्टार्टअप ही यूनिकॉर्न बन पाया है। साल 2021 में स्टार्टअप कंपनियां के यूनिकॉर्न बनने के मामले में अमेरिका दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले बेहद आगे रहा है, वहां 188 स्टार्टअप कंपनियों को यूनिकॉर्न का दर्जा मिला है।

मोदी सरकार की कोशिशों की वजह से भारत ने तकनीक के मामले में तेज विकास किया है। जानकारों का कहना है कि भारत आने वाले 4-5 सालों में करीब 150 स्टार्टअप यूनिकॉर्न बाला देश बन सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हर क्षेत्र में सरकार स्टार्टअप की मदद कर रही है।

कृषि स्टार्टअप से आएंगे क्रांतिकारी बदलाव

देश में किसानों की कमाई दोगुनी करने के लिए भी मोदी सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देना शुरू किया है । युवा कारोबारियों को प्रोत्साहन देकर सरकार इस क्षेत्र में जान फूंकना चाहती है। कृषि स्टार्ट अप की मदद से कृषि के क्षेत्र में नई तकनीक और युवा जोश को साथ लाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव आ सके।

मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए जो कदम उठाए हैं, उससे कृषि क्षेत्र सुनहरे दौर से गुजर रहा है। कृषि स्टार्ट अप जैसे नवाचार को बढ़ावा देकर सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की कमाई दोगुनी करने के मिशन पर तेजी से आगे बढ़ रही है। कृषि क्षेत्र के विकास को लेकर पीएम मोदी की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कृषि मंत्रालय के अलावा, जल शक्ति मंत्रालय और कौशल विकास मंत्रालय कृषि क्षेत्र में विकास की नई लहर लाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।

स्टार्टअप से बदलेगी कृषि क्षेत्र की तस्वीर 

अन्नदाता को सरकार की योजनाओं का बेहतर फल मिले उसके लिए मोदी सरकार ने किसी तरह का समझौता नहीं किया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत कृषि क्षेत्र में innovation and Agro-Entepreneurship Development Program को अपनाया गया है। ताकि देश के किसानों तक तकनीक और कारोबार जगत में हो रहे बदलाव का लाभ तेजी से पहुंच सके। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के पहले चरण में 112 स्टार्टअप को 1186 लाख रुपये की रकम देने का एलान किया गया था, साथ ही इन स्टार्ट-अप को 29 एग्रीबिजनेस इंक्यूबेशन केंद्रों में 2-2 महीने की ट्रेनिंग दी गई

देश में स्टार्ट अप के लिए माहौल बनाने में मोदी सरकार के कई बड़े फैसलों के नतीजे सामने आ रहे हैं।

  • आज देश में 41 हजार से ज्यादा स्टार्ट अप हैं
  • इनमें से 5,700 से ज्यादा स्टार्ट अप आईटी के क्षेत्र में हैं
  • 3,600 से ज्यादा स्टार्ट अप स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे हैं
  • करीब 1,700 स्टार्टअप कृषि क्षेत्र में काम कर रहे हैं
  • 30 से ज्यादा स्टार्ट अप का मूल्यांकन 1 अरब से ज्यादा है
  • वर्ष 2014 में महज 4 स्टार्ट अप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल थे

कृषि स्टार्ट अप से बदलेगी युवाओं की किस्मत 

आज स्टार्ट-अप के मामले में भारत दुनिया का तीसरा बड़ा देश बन गया है। सबसे ज्यादा खुशी की बात है कि देश में फल फूल रहे 44 प्रतिशत स्टार्ट-अप की कमान महिलाओं के हाथ में है। इतना ही नहीं नए उभरते 40 प्रतिशत स्टार्ट-अप देश के दूसरी और तीसरी कैटेगरी के शहरों से सामने आ रहे हैं। स्टार्ट अप तेजी से बढ़ेंगे को किसानों की आमदनी के साथ उत्पादन भी बढेगा। ऐसे में मोदी सरकार कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है।

इस साल के शुरू में पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘प्रारंभ’ स्टार्टअप इंडिया इंटरनेशनल समिट को संबोधित किया था। इस अवसर पर उन्होंने कहा था कि , “भारत ने कोरोना महामारी के मुश्किल समय में ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान भी शुरू किया। इसमें भी हमारे startups आज बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। महामारी के दौरान जब दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियाँ अपने survival के लिए संघर्ष कर रही थीं, भारत में startups की एक नई फौज तैयार हो रही थी। देश में sanitizers से लेकर PPE किट्स की जरूरत थी, supply chains की जरूरत थी, उसमें हमारे startups ने बड़ी भूमिका निभाई। लोकल जरूरतों के लिए लोकल startups खड़े हुये। एक स्टार्ट अप ने ग्राहकों को रसोई का जरूरी सामान पहुंचाने का काम किया, तो किसी ने दवाओं की doorstep delivery शुरू करवाई। किसी startup ने frontline workers के लिए ट्रांसपोर्टेशन के संसाधन उपलब्ध करवाए, तो दूसरे ने online study material तैयार किए। यानि, इन स्टार्टअप्स ने ‘आपदा में अवसर’ भी खोजा, और विपदा में विश्वास भी बांधा।”

पीएम मोदी ने कहा कि पहले अगर कोई युवा स्टार्टअप शुरू करता था तो लोग कहते कि तुम नौकरी क्यों नहीं करते। स्टार्टअप क्यों? लेकिन अब लोग कहते हैं कि नौकरी ठीक है परन्तु स्टार्टअप क्यों नहीं शुरू करते। उन्होंने कहा कि ये बदलाव बिम्सटेक देशों की बहुत बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया मूवमेंट अपने सफल 5 साल पूरे कर रहा है। आज ही भारत ने कोरोना के खिलाफ ऐतिहासिक सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू की है। ये दिन हमारे वैज्ञानिकों, युवाओं और हमारे उधमियों की क्षमताओं और हमारे डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों के परिश्रम और सेवाभाव का साक्षी है।

पीएम मोदी ने कहा कि ये समय की मांग है कि भविष्य की टेक्नोलॉजी एशिया की लैब से निकले। भविष्य के एंटरप्रिन्योर्स हमारे यहां तैयार हों। इसके लिए एशिया के उन देशों को आगे आकर ज़िम्मेदारी लेनी होगी जो एक दूसरे के साथ मिलकर काम कर सकते हैं, एक दूसरे के लिए काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। देश में 41,000 से अधिक स्टार्टअप हैं जिनमें आईटी क्षेत्र में लगभग 5,700 स्टार्टअप, स्वास्थ्य क्षेत्र में 3,600 और कृषि में 1,700 स्टार्टअप काम में लगे हुए हैं। ये स्टार्टअप व्यवसाय के जनसांख्यिकीय चित्र को बदल रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमारा देश कहता है कि ‘हम यह करेंगे’। डिजिटल भुगतान, एआई क्रांति या सौर ऊर्जा क्षेत्र हो हम आज परिणाम देख सकते हैं।उन्होंने कहा कि कि हम देश में नए स्टार्टअप को विकसित करने में मदद करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड लॉन्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम एक स्टार्टअप प्रणाली बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो युवाओं द्वारा, युवाओं के लिए मंत्र पर आधारित है।

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