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प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रहार: मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक से मांगी हर कर्मचारी, लेनदेन की डिटेल्स

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महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना सरकार कांग्रेस के रंग में रंगती जा रही है। इमरजेंसी की याद ताजा करते हुए कांग्रेस-एनसीपी- शिवसेना की मिली जुली सरकार ने रिपब्लिक टीवी के 1000 पत्रकारों पर एफआईआर कर दिया है। पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की अगुवाई में मुंबई पुलिस ने प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रहार करते हुए रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क में हर एक कर्मचारी और हर एक पत्रकार की डिटेल्स मांगी है। रिपब्लिक टीवी की धारदार और खोजपरक रिपोर्ट से डरी-सहमी उद्धव ठाकरे सरकार की मुंबई पुलिस ने पिछले चार साल में किए गए हर एक लेनदेन की डिटेल्स देने के लिए सेक्शन 91 के तहत नोटिस जारी किया है। 22 अक्टूबर 2020 को रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के CFO को सीआरपीसी की धारा 91 के तहत जारी नोटिस में ‘मूल्यांकन रिपोर्ट’, ‘खाता बही’, ‘व्यापार प्राप्य’, ‘प्रसारण खर्च’, ‘कर्मचारी लाभ खर्च’ और ‘प्रचार खर्च’ जैसी चीजों की जानकारी मांगी गई। इसमें बिजली के बिल से लेकर एडिटिंग मशीन तक का खर्च, कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड से लेकर उन्हें मेडिकल इमरजेंसी के लिए दिए लोन तक, कैमरों की लागत से स्टूडियो रखरखाव के खर्चे तक, हैंड सेनिटाइज़र से ऑफिस की कारपेटिंग की लागत तक, हर एक खाता बही और खर्चे की डिटेल्स मांगी गई है।

पेन-कॉपी से लेकर टॉयलेट पेपर तक का मांगा हिसाब
यह एक न्यूज चैनल को परेशान करने, उसके काम में बाधा डालने और आपातकाल युग के कामकाज करने के तरीके को वापस लाने का एक बड़ा प्रयास है। मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क द्वारा किए गए हर एक लेन-देन का विवरण और प्रत्येक कर्मचारी और पत्रकार की सूची मांगी है। इसके अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की टीम ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क से टॉयलेट पेपर, टिश्यू पेपर, ए 4 पेपर समेत अन्य स्टेशनरी की लागत की जानकारी मांगी है। यहां तक की पुलिस द्वारा रिपब्लिक से एयर कंडीशनिंग उपकरण, फर्नीचर, बागवानी, मेकअप, सूट और हेयर ब्रश के लिए किए गए भुगतान के बारे में भी विवरण मांगे हैं। चौकानें वाली बात यह है कि मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क को इन सभी विवरणों को देने के लिए सिर्फ 12 घंटों का समय दिया है।

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