प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल इंडिया के विजन ने अब स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है। हाल ही में संपन्न हुए ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ ने यह साफ कर दिया है कि मोदी सरकार एआई को केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि गरीब से गरीब व्यक्ति तक बेहतर इलाज पहुंचाने का माध्यम मानती है। पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के मंत्र को अब स्वास्थ्य तकनीक में भी उतारा जा रहा है। इसी कड़ी में जारी की गई ‘SAHI’ (स्वास्थ्य सेवा में एआई रणनीति) भारत को इस क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनाने की ओर एक बड़ा कदम है।

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर कहते हैं कि तकनीक का असली लाभ तब है जब वह अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के काम आए। इसी सोच के साथ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 860 मिलियन से अधिक डिजिटल हेल्थ आईडी बनाई जा चुकी हैं। यह विशाल डेटाबेस एआई के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है। अब एआई की मदद से टीबी जैसी बीमारियों की पहचान एक्स-रे के जरिए पल भर में संभव हो रही है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में गेम-चेंजर साबित हो रही है।

मोदी सरकार की प्राथमिकता हमेशा ‘क्वालिटी’ और ‘ट्रस्ट’ रही है। इसीलिए सरकार ने IIT कानपुर के सहयोग से ‘बीओडीएच’ (BODH) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी एआई टूल भारतीय मरीजों पर इस्तेमाल होने से पहले कड़े परीक्षणों से गुजरे। यह प्लेटफॉर्म पीएम के उस वादे को पूरा करता है जिसमें उन्होंने तकनीक के सुरक्षित और Ethical AI पर जोर दिया था। अब डॉक्टर और मरीज, दोनों ही बिना किसी डर के इन आधुनिक मशीनों पर भरोसा कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 2018 में शुरू हुई एआई रणनीति अब हकीकत बन रही है। ‘स्कैडा ब्रेनसीटी’ जैसे एआई टूल्स ने टियर-2 और टियर-3 शहरों में विशेषज्ञों की कमी को दूर कर दिया है। अब छोटे शहरों के मरीजों को भी मुंबई या दिल्ली जैसे बड़े शहरों के स्तर का न्यूरो-डायग्नोसिस मिल रहा है। यह तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं का लोकतंत्रीकरण कर रही है, जिससे भौगोलिक दूरियां अब इलाज के आड़े नहीं आतीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने ही ‘विकलांग’ शब्द की जगह ‘दिव्यांग’ शब्द देकर उनके प्रति समाज का नजरिया बदला था। अब उनकी सरकार एआई के जरिए उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। ‘स्मार्टॉन’ जैसे वॉइस-फर्स्ट प्लेटफॉर्म 10 भारतीय भाषाओं में काम कर रहे हैं। यह एआई टूल दृष्टिबाधित भाई-बहनों के लिए ‘डिजिटल आंख’ का काम कर रहा है। चाहे पाठ्यपुस्तकें पढ़नी हों या सरकारी दस्तावेज, एआई अब उनके जीवन को सुगम बना रहा है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की ओर एक ठोस कदम है।

मोदी सरकार का लक्ष्य भारत को दुनिया की ‘हेल्थ लैब’ बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ वर्षों में एआई और जीनोमिक्स मिलकर लाइलाज बीमारियों का सटीक समाधान ढूंढ लेंगे। 100 मिलियन लोगों के जीनोमिक डेटा का लक्ष्य भारत को चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बना देगा। यह डेटा विविधता से भरा होगा, जिससे हर भारतीय की विशेष शारीरिक बनावट के हिसाब से दवाइयां तैयार की जा सकेंगी।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बन चुका है। मेड इन इंडिया एआई समाधान आज पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा में एआई का यह एकीकरण न केवल लागत कम करेगा, बल्कि हर नागरिक के लिए राइट टू हेल्थ को वास्तव में सफल बनाएगा।









