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मोदी सरकार की फिर आतंक पर सर्जिकल स्ट्राइक, पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों पर 5 साल का प्रतिबंध

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देश में पिछले कुछ समय से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसके सहयोगी संगठन देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे थे। देशभर में हिंसा और आतंक की साजिशें रचने वालों में पीएफआई का नाम आ रहा था। कर्नाटक से लेकर राजस्थान तक और दिल्ली से पटना तक कई वारदातों में पीएफआई का कनेक्शन सामने आया था। इसके बाद मोदी सरकार ने इन देश विरोधी संगठनों पर कार्रवाई के लिए सुरक्षा एजेंसियों को खुली छूट दी। देशभर में पीएफआई के ठिकानों पर 22 सितंबर और 27 सितंबर को छापेमारी की गई थी। इस दौरान करीब 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों को पीएफआई के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले थे। इसके आधार पर गृह मंत्रालय ने पीएफआई और उसके सहयोगी आठ संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाने का फैसला किया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार (28 सितंबर, 2022) की सुबह पीएफआई और उसके आठ सहयोगी संगठनों को गैर-कानूनी संगठन घोषित करते हुए उन्हें प्रतिबंधित करने का 27 सितंबर, 2022 का नोटिफिकेशन जारी किया। मोदी सरकार ने यह एक्शन (अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट) UAPA के तहत लिया है। उसने गजट नोटिफिकेशन में पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों के गुनाहों को भी एक-एक करके गिनाया है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इस संगठन के खिलाफ कई ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे साबित होता है कि पीएफआई देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त था। सरकार ने कहा कि पीएफआई और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियां देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इनकी गतिविधियां भी देश की शांति और धार्मिक सद्भाव के लिए खतरा बन सकती हैं। ये संगठन चुपके-चुपके देश के एक तबके में यह भावना जगा रहा था कि देश में असुरक्षा है और इसके जरिए वो कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहा था।

इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों से अंतरराष्ट्रीय संपर्क

नोटिफिकेशन के मुताबिक पीएफआई के कुछ संस्थापक सदस्य स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के नेता रहे हैं और पीएफआई का संबंध जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश से भी रहा है। ये दोनों संगठन प्रतिबंधित संगठन हैं। पीएफआई के वैश्विक आतंकवादी समूहों जैसे इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया के साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क के कई उदाहरण हैं। इसकी पुष्टि इससे होती है कि इसके कुछ सदस्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ चुके हैं। पीएफआई कई आपराधिक-आतंकी मामलों में शामिल रहा है। देश के संवैधानिक प्राधिकार का अनादर करता है। बाहरी स्त्रोतों से धन और वैचारिक समर्थन के साथ यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है। जांच से पता चला है कि पीएफआई और इसके काडर बार बार हिंसक कार्यो में संलिप्त रहे हैं। जिसमें एक प्रोफेसर का हाथ काटना, अन्य धर्मों का पालन करने वाले संगठनों से जुडे़ लोगों की हत्या करना, प्रमुख लोगों और स्थानों को निशाना बनाने के लिए विस्फोटक प्राप्त करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शामिल है।


PFI जुड़े इन संगठनों पर भी प्रतिबंध

1. रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF)

2. कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI)

3. ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC)

4. नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO)

5. नेशनल विमेन्स फ्रंट

6. जूनियर फ्रंट

7. एम्पावर इंडिया फाउंडेशन

8. रिहैब फाउंडेशन

27 सितंबर को सात राज्यों में पीएफआई के खिलाफ छापेमारी

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने मंगलवार (27 सितंबर, 2022) को दूसरी बार देश के सात राज्यों में छापेमारी की। इस दौरान पीएफआई से संबंध रखने वाले 170 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। छापेमारी की कार्रवाई उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, असम और मध्य प्रदेश की पुलिस ने की। छापेमारी में पीएफआई द्वारा देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और हवाला के जरिये पैसे जुटाकर उन्माद फैलाने के सबूत मिले हैं। दिल्ली के निजामुद्दीन, शाहीन बाग इलाके में पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी हुई। कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद शाहीन बाग में धारा 144 लगाई गई है। इसके तहत जामिया नगर इलाके में अगले दो महीने तक के लिए किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में दो से ज्यादा लोगों के एक साथ खड़े होने पर भी पाबंदी रहेगी।

22 सितंबर को NIA का PFI के खिलाफ सबसे बड़ा ‘ऑपरेशन मिडनाइट’

सबसे पहले 22 सितंबर, 2022 को नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने आधी रात में 13 राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 100 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की। टेरर फंडिंग केस में हुई इस कार्रवाई में इन राज्यों में PFI से जुड़े 100 से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार होने वालों में संगठन प्रमुख ओएमए सलाम भी शामिल थे। इन छापों को करीब 200 अधिकारियों-कर्मचारियों ने अंजाम दिया। पीएफआई का कई वारदातों में कनेक्शन मिलने की पुख्ता रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह बड़ा एक्शन लिया गया। जिन राज्यों में एनआईए ने छापेमारी की, उनमें केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, असम, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र शामिल था। पीएफआई और उससे जुड़े लोगों की ट्रेनिंग गतिविधियों, टेरर फंडिंग और लोगों को संगठन से जोड़ने के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई की।
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) क्या है…और क्या हैं इसकी काली करतूतें?
पॉपुलर फ्रट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई का गठन 17 फरवरी 2007 को हुआ था। ये संगठन दक्षिण भारत में तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके बना था। इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे। पीएफआई का दावा है कि इस वक्त देश के 23 राज्यों में यह संगठन सक्रिय है। देश में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट यानी सिमी पर बैन लगने के बाद पीएफआई का विस्तार तेजी से हुआ है। कर्नाटक, केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में इस संगठन की काफी पकड़ बताई जाती है। इसकी कई शाखाएं भी हैं। इसमें महिलाओं के लिए- नेशनल वीमेंस फ्रंट और विद्यार्थियों के लिए कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे संगठन शामिल हैं। यहां तक कि राजनीतिक पार्टियां चुनाव के वक्त एक दूसरे पर मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन पाने के लिए पीएफआई की मदद लेने का भी आरोप लगाती हैं।

पीएफआई पर गठन के बाद से ही देश और समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप लगते रहे हैं। कर्नाटक का हिजाब विवाद हो या राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल की तालिबानी तरीके से हत्या और करौली दंगा, इनका कनेक्शन पीएफआई से जुड़ा है। यहां तक कि पीएम मोदी के खिलाफ पटना के फुलवारी शरीफ में भी आतंकी साजिश रचने में पीएफआई का नाम आया था….

कर्नाटक:  शुरू किया हिजाब विवाद, सोशल मीडिया पर चलाया नफरत भरा कैंपेन
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने ही अपनी स्टुडेंट विंग की मदद से कर्नाटक के उडुपी में हिजाब विवाद शुरू किया था। इस बारे में सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि जिन छात्राओं ने हिजाब बैन के खिलाफ याचिका दायर की है, वे कट्‌टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के प्रभाव में ऐसा कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘2022 में PFI ने सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चलाया, जिसका मकसद था लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करके उपद्रव फैलाना। ऐसा नहीं है कि कुछ बच्चियों ने अचानक से तय किया कि वे हिजाब जरूर पहनेंगी। ये सब सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हुआ है। ये बच्चे वही कर रहे थे, जो PFI उनसे करवा रही थी।’ उन्होंने कहा कि हिजाब विवाद सामने आने से पहले कर्नाटक की छात्राएं शैक्षणिक संस्थाओं में ड्रेस कोड का पालन कर रही थीं। अगर राज्य सरकार ने 5 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी करके छात्राओं को ऐसे कपड़े पहनने से न रोका होता जो शांति, सौहार्द्र और कानून व्यवस्था को नुकसान होता।

राजस्थान: उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल का सिर तन से जुदा कर बनाया वीडियो
राजस्थान के उदयपुर में 28 जून (मंगलवार) की शाम को दो लोगों ने तालिबानी तरीके से गला काटकर दर्जी कन्हैयालाल की हत्या कर दी थी। कन्हैया ने 10 दिन पहले नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट डाला था। 2 हमलावर दिनदहाड़े दुकान में घुसे और धारदार हथियार से कई वार कर कन्हैया का सिर धड़ से जुदा कर दिया। इस मामले की जांच अब नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) कर रही है। आरोपियों ने हत्या का पूरा वीडियो भी बनाया था और इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर हत्या की जिम्मेदारी ली है। वीडियो में उन्होंने PM नरेंद्र मोदी तक को धमकी दे डाली।

पटना: फुलवारी शरीफ में आतंकी साजिश का खुलासा, पीएम मोदी थे निशाने पर
पटना में जुलाई में आतंकियों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था। आतंकियों ने पटना के फुलवारी शरीफ के अहमद पैलेस की दूसरी मंजिल को ट्रेनिंग सेंटर बनाया था। इसमें बिहार के बाहर के लोग भी आ रहे थे। अतहर ने पुलिस को बताया कि इस मुहिम में 26 लोग शामिल थे। इन सभी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। सभी पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से भी जुड़े थे। इनकी निशानदेही पर 3 संदिग्धों को पकड़ा। इनसे पूछताछ में पता चला है कि 12 जुलाई को यहां आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ये हमला करना चाहते थे। इसके लिए उन्हें 15 दिन से ट्रेनिंग दी जा रही थी। गिरफ्तार आतंकी बीजेपी नेता नूपुर शर्मा की तरह इस्लाम के खिलाफ बयानबाजी करने वालों को मारना चाहते थे। उनके नामों की लिस्ट भी तैयार थी।

केरल: ईशनिंदा के आरोप में प्रोफेसर का हाथ काटा गया, PFI से जुड़े थे आरोपी
केरल में कॉलेज के प्रोफेसर टीजे जोसेफ कट्‌टरपंथियों के निशाने पर आए थे। प्रोफेसर जोसेफ ने परीक्षा के लिए तैयार क्वेश्चन पेपर में ‘मोहम्मद’ नाम लिखा था। करीब एक दशक पहले जोसेफ पर धार्मिक भावनाएं आहत करने और ईशनिंदा का आरोप लगा। कट्‌टरपंथियों ने उनके दाएं हाथ को काटकर बोले- इस हाथ से तुमने पैगंबर का अपमान किया। इसलिए इस हाथ से अब तुम्हें दोबारा कभी नहीं लिखना चाहिए। यह पहली घटना थी जब भारत में PFI का नाम ईशनिंदा के खिलाफ किसी मामले में जुड़ा था।

उदयपुर, अमरावती और मंगलूरु के तीनों ही हत्याकांड में PFI का कनेक्शन
उदयपुर में 28 जून को दो लोगों ने तालिबानी तरीके से गला काटकर दर्जी कन्हैयालाल की हत्या कर दी थी। इन दोनों कालितों के अजमेर और अन्य स्थानों पर कट्टर इस्लामिक संगठनों से संबंध के सुराग मिले हैं। राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों को पता चला है कि उदयपुर, अमरावती और मंगलूरु में हुए तीनों ही हत्याकांड में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का कनेक्शन है। उदयपुर के कन्हैया के हत्यारों के न सिर्फ पीएफआई से जुड़े होने के प्रमाण हैं, बल्कि इनके पाकिस्तान के इस्लामिक संगठन दावत-ए-इस्लाम से कनेक्शन थे और इन्होंने कराची में ट्रेनिंग लेने के बाद राजस्थान के कई जिलों में स्लीपर सेल भी बनाए थे। एनआईए जांच कर रही है कि अमरावती और मंगलूरु में पीएफआई से जुड़े लोगों के उदयपुर के हत्यारों या इनके साथियों से कैसे संबंध थे।

‘आतंकियों’ को फंडिंग, ट्रेनिंग, इंटर-कनेक्शन की भी गहनता से हो जांच
एक महीने के दौरान इन हत्याओं ने कहीं न कहीं देश में क्राइम के एक नए पैटर्न की ओर इशारा किया है। अब मंगलुरु में हुआ यह हत्याकांड, उदयपुर और अमरावती में हुए मर्डर केस जैसा ही है। तीनों मामलों में आरोपी और पीड़ित भले ही अलग-अलग हों, लेकिन हत्या का तरीका, दिन और वजह लगभग एक जैसी ही हैं। इससे फिर साबित हुआ कि ऐसी वारदात को अंजाम देने वाले एक ही पैटर्न पर चल रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इनके इन्वेस्टिगेशन में फंडिंग, ट्रेनिंग, इंटर-कनेक्शन आदि की भी गहनता से जांच होनी चाहिए। ताकि इनके मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

अफगानिस्तान और दुनिया के कुछ देशों में दिखा है इस तरह का नया पैटर्न
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस तरह का पैटर्न भारत से पहले अफगानिस्तान में देखा गया है। इसके अलावा इंग्लैंड में एक मरीन ऑफिसर का सिर भी इसी पैटर्न पर काटा गया था। लंदन में भी एक स्टैबिंग इसी पैटर्न पर हुई थी। बेहद कट्टरपंथी लोग इस तरह की सजा की वकालत करते आए हैं। इन कट्टरवादी सोच वाले लोगों को यह समझाया जाता है कि इर्शनिंदा करने वालों की एक ही सजा- सिर तन से जुदा। यही वजह है कि इस तरह की घटनाएं और कट्टरवादी सोच के बयान सामने आ रही हैं। उदयपुर के मर्डर में तो बकायदा इस सोच का वीडियो तक जारी किया गया।

पुलिस और जांच एजेंसियों को तीनों हत्याकांड में PFI कनेक्शन मिला

  1. तीनों हत्याओं को करने से पहले तीनों को ही अज्ञात लोगों ने धमकी दी थी।
  2. तीनों मामलों में हमला करके मौत के घाट उतारने से पहले रैकी की गई थी।
  3.  तीनों ही हत्याएं करने के लिए आतंकियों ने मंगलवार का दिन चुना।
  4.  तीनों की हत्या नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट लिखने की वजह के हुई थी।
  5.  तीनों हत्याकांड में शामिल आरोपी बेहद कट्टर विचारधारा को मानने वाले थे।
  6.  तीनों ही वारदातों में हत्यारों ने निर्ममता के साथ धारदार हथियार का प्रयोग किया।
  7.  तीनों की ही हत्या पूरी तरह सुनियोजित थी और इसमें एक से ज्यादा हत्यारे शामिल थे।
  8.  तीनों ही निर्दोष हिंदुओं का बिजनेस था. एक दर्जी, दूसरा दवा विक्रेता और तीसरा अपनी शॉप चलाता था।
  9.  तीनों ही हत्याकांड में इस्लामिक संगठन PFI का कनेक्शन मिला है और तीनों मामलों की जांच एनआईए कर रही है।
  10.  तीनों की हत्याओं को शाम के वक्त अंजाम दिया गया। कुछ साल पहले जयपुर में बम विस्फोट मंगलवार के दिन शाम को हुए थे।

राजस्थान: उदयपुर में तालिबानी मर्डर से शुरू हुआ रिलीजियस हेट क्राइम
राजस्थान के उदयपुर के टेलर कन्हैयालाल की निर्मम हत्या से शुरू हुआ रिलीजियस हेट क्राइम अमरावती होते हुए मंगलूरु तक जा पहुंचा है। हिंदुओं की हत्या के केस की पड़ताल में एनआईए (NIA) को पता चला है कि इनके कई फैक्ट क़ॉमन हैं। जिस तरह कन्हैयालाल ने बीजेपी की निलंबित प्रवक्ता नुपूर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, वैसा ही दोनों अन्य पीड़ितों ने भी किया था। राष्ट्रीय इंवेस्टिगेशन एजेंसी अब यह जांच रही है कि तीनों हत्याओं का आपस में कोई कनेक्शन तो नही है। अमरावती और मंगलूरु के हत्यारों के तार उदयपुर के गिरोह के साथ तो नहीं जुड़े हुए हैं, क्योंकि तीनों में ही पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का कनेक्शन आ रहा है।

महाराष्ट्र: अमरावती के केमिस्ट उमेश के गले पर चाकुओं से वार कर मौत के घाट उतारा
महाराष्ट्र के अमरावती में दवा व्यापारी उमेश कोल्हे की हत्या उनकी शॉप से कुछ दूर पर हुई थी। रात तकरीबन 10 बजे घात लगाकर बैठे तीन आरोपियों ने उन्हें बीच सड़क पर रोका और फिर चाकू से गले पर वार कर मौत के घात उतार दिया। उमेश ने भी सोशल मीडिया पर BJP की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट लिखी थी। इस मामले की जांच भी NIA कर रही है और फिलहाल अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।कर्नाटक: दुकान के पास ही भाजयुमो नेता प्रवीण को कुल्हाड़ी से काट डाला
अब 26 जुलाई को मंगलुरु के बेल्लारे में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के शहर अध्यक्ष प्रवीण नेट्टारू (32) की उनकी पोल्ट्री शॉप के बाहर धारदार हथियार से काट कर हत्या हुई थी। वे दुकान बंद कर सिर्फ 50 कदम ही आगे बढ़े थे कि एक बाइक पर सवार तीन लोग वहां पहुंचे और प्रवीण पर हमला बोल दिया। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने हत्या के लिए कुल्हाड़ी का भी इस्तेमाल किया था। प्रवीण ने 29 जून को टेलर कन्हैया लाल की हत्या के विरोध में सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी। इसमें उन्होंने एक स्केच भी शेयर किया था। वहीं, प्रवीण नेट्टारू मर्डर केस NIA को सौंपने की संस्तुति राज्य सरकार की ओर से की जा चुकी है। माना जा रहा है कि जल्द केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में भी केस दर्ज कर सकती है।

 

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