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मोदी सरकार की इस खास योजना से अब बढ़ेगी दाल की उपलब्धता

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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली मोदी सरकार समय-समय पर ऐसे कदम उठाती रहती है, जिससे सामान्य मानवी का जीवन आसान हो सके। इसी दिशा में मोदी सरकार अब दालों की आसान उपलब्धता की ओर कदम बढ़ा रही है।

मोदी सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत चालू सीजन 2019-20 में दालों के बफर स्टाक को 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाएगी। जहां पिछले साल दालों का बफर स्टाक 16.15 लाख टन था वहीं इस वर्ष इस चालू सीजन 2019-20 में इसे 19.50 लाख टन तक किया जाएगा। केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय में सचिव अविनाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली मूल्य स्थिरीकरण कोष प्रबंधन समिति (पीएसएपएमसी) ने इस साल दाल का बफर स्टाक बढ़ाने का फैसला लिया है। 

पीएसएफएमसी ने लिया फैसला 

मूल्य स्थिरीकरण कोष प्रबंधन समिति (पीएसएपएमसी) ने यह फैसला लिया है कि सरकार 2091-20 में 19.50 लाख टन दालों का बफर स्टाक बनाएगी। इसमें से सबसे अधिक तूर दाल का बफर स्टाक बनाया जाएगा जो करीब 10 लाख टन होगा। इसके अलावा उड़द का चार, मसूर का 1.5, मूंग का एक और चना का बफर स्टाक तीन लाख टन होगा।

दालों के दाम को स्थिर रखना है मकसद

केंद्र सरकार दालों के दामों को नियंत्रण में रखने के लिए पीएसएफ के जरिए दालों का बफर स्टाक बनाती है। जिससे बाजार में दाल के दाम बढ़ने की स्थिति में सरकार इस स्टाक से बाजार में माल पहुंचाकर कीमतों को स्थिर बनाए रखने का काम करती है। हाल ही में दालों के दाम में वृद्धि होने पर पिछले महीने उपभोक्ता मंत्रालय ने स्टाक से 8.47 लाख टन दाल राज्यों को बेंची थी। 

मानसून के आखिरी दौर में मध्यप्रदेश के साथ-साथ अन्य दलहन उत्पादक राज्यों में भारी बारिश की वजह से खरीफ सीजन की दलहन फसल उड़द एवं मूंग की फसल को नुकसान पहुंचा है, इसकी वजह से उत्पादन में कमी का भी अनुमान है। 

मोदी सरकार ने समय-समय पर कई ऐसी योजनाएं शुरू की है, जो सामन्य मानवी के जीवन को आसान बनाने में बेहद कारगर सिद्ध हुई हैं। आइए मोदी सरकार की ऐसी ही योजनओं पर एक नजर डालते हैं-

आयुष्मान भारत योजना
आयुष्मान भारत योजना अफॉर्डेबल हेल्थकेयर के क्षेत्र में सबसे क्रांतिकारी कदम है। दुनिया में मोदी केयर के नाम से विख्यात इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों यानी 50 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये के सालाना चिकित्सा बीमा की सुविधा मिल रही है। अगर उनके परिवार में कोई बीमार पड़ा तो एक साल में 5 लाख रुपये का खर्च भारत सरकार और इंश्योरेंस कंपनी मिलकर देती है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 69.69 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हो चुके हैं और 11.66 करोड़ से अधिक ई-कार्ड्स जारी किए गए हैं। बीमार लोगों के इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत देशभर में 19,752 अस्पतालों को शामिल किया गया है और लोग इसका फायदा उठा रहे हैं।

जन धन योजना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से देश में पहली बार उन गरीबों का बैंक खाता खुला जिन्होंने बैंक का कभी मुंह तक नहीं देखा था। इस योजना के तहत न सिर्फ 37 करोड़ 66 लाख से ज्यादा गरीबों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया, बल्कि 102,415 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इन जनधन खातों में जमा है। सरकारी स्कीमों के पैसे इनमें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से पहुंच रहे हैं जिससे लाभार्थियों के पैसे में होने वाले भ्रष्टाचार पर लगाम लग गई है।

जीवन ज्योति बीमा योजना और सुरक्षा बीमा योजना
यह सरकार के सहयोग से चलने वाली जीवन बीमा योजना है। इसमें 18 साल से 50 साल तक के भारतीय नागरिक को 2 लाख रुपये का बीमा कवर सिर्फ 330 रुपये के सलाना प्रीमियम पर उपलब्‍ध है। इस योजना के तहत अब तक 6 करोड़ 42 लाख लोग पंजीकरण करा चुके हैं।

उज्ज्वला योजना
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना महिला सशक्तीकरण की दिशा में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष उदाहरण बना है। 1 मई 2016 को योजना शुरू होने के बाद से अब तक 8 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को गैस कनेक्शन दिये जा चुके हैं। उज्ज्वला योजना ने ग्रामीण और गरीब महिलाओं के जीवन के प्रति नजरिये को सकारात्मक रूप से बदलने का काम किया है।

सुकन्या समृद्धि योजना
बेटियों की पढ़ाई और उसकी शादी को लेकर पैसे से जुड़े अभिभावक के तनाव को दूर करने के लिए मोदी सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की। इस योजना के अंतर्गत आपको बैंक या पोस्ट ऑफिस में बेटी के नाम से खाते खुलवाने होते हैं। इस खाते की मैच्‍योरिटी खाता खोलने की तिथि से 21 वर्ष या फिर बेटी की शादी की तारीख जो भी पहले आ जाए वह होती है। खाते में शुरुआती जमा राशि महज 250 रुपये है जबकि एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक जमा किये जा सकते हैं। इस जमा पर 9.2 प्रतिशत की दर से ब्याज मिल रहा है साथ ही इनकम टैक्स की भी छूट है।

स्वच्छ भारत अभियान
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत अभियान स्वतंत्र भारत का बहुत बड़ा जन आंदोलन बन चुका है। शौचालयों की सुविधा को लेकर चली आ रही विसंगति खत्म हो रही है। देश में स्वच्छता का दायरा अब तक 90 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है।

प्रधानमंत्री आवास योजना
सभी देशवासियों के अपने घर का सपना पूरा हो इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक सबको घर देने का वादा किया। यह योजना पूरे मिशन मोड में चल रही है। सरकार लोगों को सस्ते घर बनवाकर भी दे रही है और सस्ते ब्याज पर लोन देकर घर खरीदने में भी लोगों की मदद को कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना की रफ्तार देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि यह योजना अपने तय समय से पहले ही पूरी हो जाएगी।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना
इस योजना के तहत 2022 तक हर गांव को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। रफ्तार की तेजी देखकर अब इस लक्ष्य की समयसीमा 2019 तक की कर दी गई है।

मुद्रा योजना
इस योजना ने छोटे और मझोले कारोबारियों की दुनिया रोशन कर दी है। देश में रोजगार के मायने बदलने वाली मुद्रा योजना के लगभग 70 प्रतिशत लाभार्थी दलित-पिछड़े और आदिवासी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई मुद्रा योजना के कारण युवा जॉब सीकर की जगह जॉब क्रिएटर बन रहे हैं। इस योजना के तहत वर्ष 2015-16 से अब तक अपना कारोबार शुरू करने के लिए 21 करोड़ से ज्यादा लोगों को बिना गारंटी का ऋण दिया गया है। इस योजना के लाभार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं, यानि महिलाओं की आर्थिक उन्नति में भी यह योजना क्रांतिकारी साबित हुई है। 

स्टैंड अप इंडिया
मौजूदा सरकार का जोर देश के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले दलित-पिछड़े तबके के लोगों को स्वरोजगार के लिए भी प्रोत्साहित करने पर है। स्टैंड अप इंडिया कार्यक्रम इसी मकसद से शुरू किया जिसमें ये तय किया गया कि इस योजना के माध्यम से हर बैंक ब्रांच कम से कम एक अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति को कर्ज जरूर देगी। इस योजना के तहत 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक के लोन मुहैया कराये जाते हैं।   

स्टार्ट अप इंडिया
प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास से भारत स्टार्टअप के मामले में अमेरिका और ब्रिटेन के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका है। स्टार्टअप पर नई नीति लागू होने के बाद देश में हजारों करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। बड़ी बात यह है कि इसमें महिलाओं की भी जबरदस्त भागीदारी है। इससे 2020 तक लाखों रोजगार मिलने का अनुमान है। क्योंकि अब नौकरी का मतलब आत्मनिर्भर होना है। 10 हजार करोड़ रुपये के कोष से खड़ा हुआ स्टार्टअप अब लोगों को आत्मनिर्भर बना रहा है।

मिशन इंद्रधनुष
मिशन इंद्रधनुष के तहत सरकार देश के उन इलाकों तक टीकाकरण अभियान को पहुंचा रही है, जहां पहले से चले आ रहे टीकाकरण अभियानों की पहुंच नहीं थी। इस वजह से लाखों बच्चे और गर्भवती महिलाएं टीकाकरण से छूट जाते थे।  पहले सरकार का लक्ष्य 2020 तक देश में पूर्ण टीकाकरण कवरेज को हासिल करना था अब इसे 2018 तक हासिल करने के लिए मिशन इंद्रधनुष के साथ ही ‘इंटेन्सिफाइड मिशन इंद्रधनुष’ की शुरुआत की गई है। 

‘प्रधानमंत्री जन-औषधि योजना’
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017) के तहत खोले गए प्रधानमंत्री जन-औषधि केंद्र के माध्यम से मामूली कीमतों पर जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध हो रही हैं। गरीबों को सस्ती और सुलभ दवाएं सुनिश्चित करना इस सरकार की प्राथमिकता में रही है। जन औषधि स्टोर से गरीबों के लिए सस्ती दवाओं के साथ उन्हें मुफ्त जांच करवाने की सुविधा भी दी जा रही है। गौर करने वाली बात है कि ह्रदय रोग के मरीजों की सहायता के लिए स्टेंट की कीमतों में 85% तक की कटौती भी की जा चुकी है।

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2015 को लालकिले से देश के उन 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाने का एलान किया था जहां स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी। समय से पहले ही इस लक्ष्य को पूरा कर लिया गया है

प्रधानमंत्री सहज हर घर बिजली योजना
इस योजना से पिछले 70 सालों से बिजली देने को लेकर चली आ रही असमानता खत्म हो रही है। धानमंत्री सहज हर घर बिजली योजना के अंतर्गत घरों में मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री सहज हर घर बिजली योजना यानी सौभाग्य के साथ ही देश के शत प्रतिशत घरों में बिजली पहुंच जाएगी जिससे देश भर में करीब 10.5 अरब डॉलर किलोवाट बिजली की बचत होगी।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
इस योजना ने खेती को लेकर देश के किसानों की राय बदल दी। साल 2022 तक देश के किसानों की आय दोगुनी करने के मोदी सरकार के संकल्प में यह योजना मददगार साबित होगी।इस योजना के तहत किसान अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं। यदि मौसम के प्रकोप से या किसी अन्‍य कारण से फसल को नुकसान पहुंचता है तो यह योजना किसानों की मदद करती है। अब तक 14 करोड़ 24 लाख किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पंजीकरण करा चुके हैं।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
इस योजना के तहत हर खेत में पानी पहुंचाने का प्रयास चल रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जुलाई 2015 में लॉन्च की गई थी और लक्ष्य रखा गया था कि बरसों से अटकी हुई देश की 99 सिंचाई परियोजनाओं को 2019 तक पूरा कर लिया। इस योजना की प्रगति भी तय लक्ष्य के दायरे में है।

Soil Health card
इस योजना से देश के किसानों की तरक्की के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता जाहिर होती है। देश की कृषि को नई शक्ति दी है Soil Health Card ने। फरवरी 2015 में शुरू की गई इस योजना में 21.94 करोड़ से ज्यादा किसानों को यह कार्ड दिए जा चुके हैं।  

E-NAM योजना
किसानों को उनकी फसल की उचित कीमत मिले, उन्हें फसल बेचने में आसानी हो, इसे ध्यान में रखते हुए E-नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट योजना (E-NAM योजना) अप्रैल 2016 में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत सरकार ने देश की 580 से ज्यादा मंडियों को ऑनलाइन जोड़ने का काम किया जा रहा है। 1.68 करोड़ किसान इसके लिए पंजीकरण करा चुके हैं।  

अल्पसंख्यकों का सम्मान के साथ विकास
इसके साथ यह जानना भी जरूरी है कि प्रधानमंत्री मोदी अल्पसंख्यकों के कल्याण और उनके विकास को लेकर कितने फिक्रमंद है। पिछले पांच सालों में मोदी सरकार ने ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ का मंत्र लेकर अल्पसंख्यकों की उन्नति के लिए लगातार प्रयास किया है।

सुगम हुई हज यात्रा
आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ, जब 2019 में रिकॉर्ड 2 लाख भारतीय मुसलमानों ने हज यात्रा की, जिनमें 48 प्रतिशत महिलाएं थीं। यह प्रधानमंत्री मोदी के कारण संभव हो सका। 2017 में मोदी सरकार ने बिना ‘मेहरम’ (पुरुष साथी) महिला के हज यात्रा पर जाने की रोक को हटाया। जिसके बाद 2018 में 1300 और 2019 में 2300 से अधिक मुस्लिम महिलाएं हज यात्रा पर गईं। सऊदी अरब में महिला हज यात्रियों के लिए अलग से सुविधाएं दी गईं। हज यात्रियों की सुविधा के लिए वेबसाइट और मोबाइल ऐप भी लॉन्च किए गए। यही नहीं मोदी सरकार ने हज यात्रा पर लगने वाली जीएसटी दर को 18% से घटाकर 5% कर दिया। अब मोदी सरकार ने समुद्री मार्ग से हज यात्रा के लिए सऊदी अरब से समझौता किया है।

अल्पसंख्यकों के लिए बजट में वृद्धि
जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की बगड़ोर संभाली, तो विपक्षी दलों ने अल्पसंख्यकों को लेकर अफवाहें फैलाने की कोशिश की, लेकिन पीएम मोदी ने सभी अटकलों को खारिज कर दिया। इतना ही नहीं अल्पसंख्यकों के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाला बजट भी कम नहीं हुआ बल्कि साल दर साल बढ़ता ही रहा। जहां 2013-14 के बजट में अल्पसंख्यकों के लिए 3511 करोड़ रुपये दिए गए, जो 2019-20 में बढ़कर 4700 करोड़ रुपये हो गया।

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रमों का विस्तार
प्रधानमंत्री जन विकास योजना अल्पसंख्यकों और समाज के अन्य वर्गों की सामाजिक,आर्थिक-शैक्षिक सशक्तीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई है। मुस्लिम बहुल जिलों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया गया। 2014 में पहचाने गए अल्पसंख्यक बहुल जिलों की संख्या 90 थी, जो 2019 में बढ़कर 308 हो गईं।

अल्पसंख्यकों का शैक्षणिक विकास
मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक विकास के लिए अगले 5 साल में 5 करोड़ छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्तियां देने का फैसला किया है। जबकि पिछले 5 साले में 3.8 करोड़ छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्तियां मिल चुकी हैं। ‘नई उड़ान’ योजना के तहत विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए फ्री कोचिंग की सुविधा दी जा रही है। पिछले 5 सालों में 59,988 छात्र-छात्राओं ने फ्री कोचिंग की सुविधा का लाभ उठाया है। मदरसों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के साथ ही ‘थ्री टी’ योजना यानी टॉयलेट, टिफिन और टीचर की शुरुआत की गई है। बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों के लिए ‘सेतु पाठ्यक्रम’ और विदेशों में पढ़ाई के लिए ‘पढ़ो प्रदेश’ योजना मददगार साबित हो रही है।  

कौशल, रोजगार और विकास
पूरे देश में करीब 100 गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र खोले गए, जिनमें पिछले 5 साल में 3.9 लाख युवाओं को प्रशिक्षण मिला और 5.6 लाख लाभार्थियों को लोन भी मिला। मोदी सरकार में 6 लाख से अधिक अल्पसंख्यक युवाओं को रोजगार मिला है। युवाओं के कौशल विकास के लिए सीखो और कमाओ योजना और 2015 में हस्तशिल्पियों और दस्तकारों के लिए उस्ताद योजना शुरू की गई।  मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों की समस्याओं को सुनने और समाधान के लिए प्रोग्रेस पंचायत की शुरूआत की।

रोजगार और बाजार का स्रोत ‘हुनर हाट’
दस्तकारों और शिल्पकारों के लिए रोजगार सृजन और बाजार से जोड़ने के लिए ‘हुनर हाट’ का आयोजन किया जा रहा है। पिछले चार वर्षों में एक दर्जन से अधिक ‘हुनर हाट’ का आयोजन किया गया। नवंबर, 2019 तक ‘हुनर हाट’ के माध्यम से 5 लाख शिल्‍पकारों और कारीगरों को रोजगार मिला।

डिजिटल इंडिया से आई पारदर्शिता
मोदी सरकार ने वक्फ बोर्ड एवं वक्फ संपत्तियों के दस्तावेजों का डिजिटलीकरण का काम शुरू किया है। मार्च 2019 तक 90 प्रतिशत दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। जिससे वक्फ बोर्ड एवं वक्फ संपत्तियों के दस्तावेजों में पारदर्शिता आई है। अब तक देशभर में 6 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण हुआ है। डीबीटी के माध्यम से छात्रों को छात्रवृत्तियां मिल रही हैं। डिजिटल साक्षरता के लिए ‘साइबर ग्राम’ परियोजना की शुरूआत की गई है।

कुरीतियों से मुक्ति और विकास
सदियों से सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न का सामना कर रही मुस्लिम महिलाओं को मोदी राज में ही बड़ी राहत मिली, जब मोदी सरकार ने तीन तलाक को कानूनी रूप से अपराध घोषित कर दिया। नई रोशनी योजना के तहत महिलाओं में नेतृत्‍व क्षमता का विकास किया जा रहा है। बालिकाओं की शिक्षा के लिए पढ़ो-बढ़ो अभियान और लड़कियों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शादी शगुन योजना की शुरूआत की गई है। शादी शगुन योजना के तहत मुस्लिम लड़कियों को स्नातक करने के बाद 51,000 रुपये दिए जाते हैं। छात्राओं के लिए बेगम हजरत महल नेशनल स्कॉलरशिप दी जा रही है।

गुरुवाणी का प्रसार
मोदी सरकार ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में गुरुवाणी के प्रकाशन का फैसला किया है। मोदी सरकार के अनुरोध पर ही यूनेस्को गुरु नानक देवजी की शिक्षा को विश्व भाषाओं में प्रकाशित करने जा रहा है। वहीं केंद्र सरकार के सहयोग से पंजाब के गुरुनानक देव विश्वविद्यालय में अंत: पंथ केंद्र की स्थापना की जा रही है। अमृतसर में गुरु नानक जी के नाम पर यूनिवर्सिटी का निर्माण किया जा रहा है, जिसका टाइ-अप अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से किया जाएगा। मोदी सरकार के सहयोग से ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय में गुरु नानक पीठ की स्थापना की गई है। इसी तरह की एक पीठ कनाडा के एक विश्वविद्यालय में भी स्थापित की जाएगी।

सिखों को मिला इंसाफ और सम्मान
मोदी सरकार ने 2015 में सिखों को इंसाफ दिलाने के लिए एसआईटी बनाई और सजा भी दिलाई। पीएम मोदी ने 2018 में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी और 9 नवंबर, 2019 को कॉरिडोर को देश को समर्पित किया। इस दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पीएम मोदी को ‘कौमी सेवा पुरस्‍कार’ से सम्मानित किया। ऐतिहासिक शहर सुल्तानपुर लोढ़ा को हेरिटेज टाउन के रूप में विकसित किया जा रहा है। पीएम मोदी ने 13 जनवरी, 2019 को गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पर स्मारक सिक्का जारी किया। 5 जनवरी, 2017 को पटना में गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती मनायी गई, जिसमें पीएम मोदी भी शामिल हुए। सिख श्रद्धालु अब देश के पांचों पवित्र तख्त स्थलों के दर्शन पंज तख्त एक्सप्रेस से कर सकेंगे। देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में कई सिखों को ब्लैक लिस्ट किया गया था, जिसमें से 312 सिखों के नाम ब्लैक लिस्ट से हटाए गए।  अब वे भारत स्थित अपने रिश्तेदारों से मिल सकेंगे। बीते 5 वर्ष में करीब 27 लाख सिख विद्यार्थियों को स्‍कॉलरशिप दी गईं।

पीएम मोदी की ‘बुद्ध नीति’
पीएम मोदी ने अपनी विदेश नीति में ‘बुद्ध नीति’ को महत्व दिया है। जो दक्षिण पूर्व एशिया के लिए सांस्कृतिक पुल बनीं है। इससे दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से भारत के संबंधों में मजबूती आ रही है, वहीं चीन से भी मुकाबला करने में भी मदद मिल रही है। साथ ही पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिला है। 

मोदी राज में बौद्ध विस्तार
पीएम मोदी ने 2015 में बुद्ध जयंती को राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाए जाने की घोषणा की। देश में भगवान बुद्ध से जुड़ी जगहों को जोड़ने के लिए ‘बौद्ध सर्किट’ परियोजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत सड़कों का विकास किया जा रहा है,जिसका काम 2020 तक पूरा हो जायेगा। मोदी सरकार म्‍यांमार, अफगानिस्तान, कंबोडिया, लाओस, वियतनाम में बौद्ध मंदिरों के संरक्षण में मदद कर रही है। मंगोलिया के Ganden Monastery की सारी पांडुलिपियों के संरक्षण और उनके डिजिटलीकरण का काम भी किया जा रहा है।

पारसियों की जनसांख्यिकी वृद्धि
जुलाई 2017 में “जियो पारसी पब्लिसिटी फेज-2” की शुरुआत की गई थी। इसके तहत पारसियों की घटती जनसंख्या को रोकने में सफलता मिली है। मार्च 2019 तक पारसी समुदाय के 184 बच्चों का जन्म हुआ। पारसियों की घटती जनसंख्या को रोकने के लिए मोदी सरकार उन्हें परामर्श एवं चिकित्सा सहायता दे रही है। 

 

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