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जैसी साजिश थी ‘वाजपेयी सरकार’ के खिलाफ, वैसी ही साजिश ‘मोदी सरकार’ के खिलाफ

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2004 में वाजपेयी सरकार के खिलाफ खतरनाक साजिश रची गई थी । ये साजिश कांग्रेस ने लुटियंस मीडिया और लेफ्टिस्ट पत्रकारों के साथ मिलकर रची थी। एक बार फिर 2019 के चुनाव से पहले मोदी सरकार के खिलाफ ये खतरनाक साजिश शुरू हो चुकी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मिलकर कई मीडिया संस्थान इसमें शामिल हो गए हैं। ये पेड मीडिया से भी ज्यादा भयावह है।

इस साजिश की कुछ खास बाते हैं..

2004 में वाजपेयी जी के खिलाफ कामयाब हुई साजिश के तार 2018 में मोदी सरकार से कैसे जुड़ रहे हैं आइए एक एक मुद्दे को लेकर आपको समझाते हैं

याद कीजिए वाजपेयी सरकार के समय किस तरफ ताबूत घोटाले का फर्जी आरोप लगाया गया।

देखिए The Hindu के इस आर्टिकल में किस प्रकार ताबूत घोटाले को हवा दी गई। इस फर्जी घोटाले पर पर कार्टून बनाए गए, संसद तक नहीं चलने दी गई। 

और अब ये न्यूज देखिए कि 2013 में सीबीआई ने ये कह दिया कि इसमें कोई घोटाला हुआ है–ऐसा कोई सबूत नहीं है। जबकि 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ताबूत घोटाला हुआ ही नहीं था।

ताबूत घोटाले की ही तरह कांग्रेस के इशारे पर कई अखबार और टीवी चैनल लगातार राफेल डील में घोटाले को मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भारत सरकार के अलावा फ्रांस सरकार, दसॉल्ट एविएशन और इंडियन एयरफोर्स के अलावा इससे जुडी सभी पार्टियां घोटाले से इनकार कर चुकी हैं

वाजपेयी सरकार के समय शुरू हुई स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने भारत में ‘हाईवे क्रांति’ की, लेकिन देखिये किस तरह लेफ्टिस्ट मीडिया ने इसे ‘The Great Highway Robbery’ बताने की कोशिश की।

इसी तरह दिल्ली मेट्रो की शुरुआत, पेट्रोल पंप आवंटन जैसे कार्यक्रमों में भी या तो भ्रष्टाचार के आरोप लगाए या इन्हें घातक बताया।

इसी तरह की साजिश मोदी सरकार के खिलाफ भी हो रही है। मीडिया का एक वर्ग उज्जवला योजना, स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं को नाकाम साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।

ये केवल भारत में ही संभव है कि एक पार्टी को निशाना बनाने के लिए विपक्ष सेना पर भी सवाल उठाता है। अटलजी की सरकार में सोनिया की अगुवाई में विपक्ष ने करगिल विजय का मजाक उड़ाया था। जिस तरह अटलजी के बारे में ये कहा गया कि करगिल वॉर का उन्होंने राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की, उसी तरह मोदी सरकार में हुई सर्जिकल स्ट्राइक को पहले तो झुठलाने की कोशिश की, उसके सबूत मांगे गए और बाद में ये आरोप लगाया कि इसका राजनीतिक फायदा उठाया जा रहा है।

वाजपेयी सरकार और मोदी सरकार पर बेरोजगारी, किसानों और दलितों के मुद्दे पर एक ही पैटर्न पर निशाना साधा गया। दोनों सरकारों को कभी नौकरियों के आकंड़े, कभी किसानों की खुदकुशी तो कभी उपज के दाम को लेकर घेराबंदी हुई। वाजपेयी सरकार से अलग मोदी सरकार को दलित विरोधी भी ठहराने की साजिश रची जा रही है। इसके लिए कभी रोहित वेमुला तो कभी एससी, एसटी एट्रोसिटी एक्ट का हौव्वा रचा गया।

मुसलमानों को वोटबैंक की तरह इस्तेमाल करने के लिए कांग्रेस हमेशा उन्हें बीजेपी से डराने की कोशिश करती है। The Wire का ये आर्टिकल देखिये, जिसमें ये कहा गया है कि अटलजी बेगुनाह मुसलमानों के कत्लेआम पर चुप्पी साधे रहे।

लेकिन मोदी सरकार पर तो मुसलमानों के खिलाफ होने के आरोपों की कोई इंतेहा ही नहीं रही। मोदी सरकार पर मॉब लिंचिंग से लेकर ट्रिपल तलाक जैसे न जाने कितने मुद्दों पर आरोप लगाए जा रहे हैं।

4 COMMENTS

  1. कांग्रेस सत्ता मे आने के लिए मोदीजी के बिरूद्ध षड्यंत्र से भरे सारे प्रयास करेंगी !
    कांग्रेस के चहेते अधिकारी, सुप्रीम कोठे मे
    बैठे जज भी साथ दे रहे है । पी चिदंबरम को
    भ्रष्टाचार के मामले मे 6बार अग्रिम जमानत
    मिलना यह भी न्यापालिका मे अनोखा रिकॉर्ड है ! जयहिंद !

  2. आपका आकलन एक दम सही है । मोदीजी के पिछे तो
    तमाम पार्टियां गुजरात दंगों से पिछे पड़ी है । मोदीजी को
    झुठे मुकदमे मे फसाने के लिए कांग्रेस ने क्या क्या षड्यंत्र
    नहीं किया । लेकिन भगवान का आशिर्वाद है कि ये मोदीजी
    का बाल बांका नहीं कर सके ! जब से मोदीजी प्रधानमंत्री
    बने है और इन बेईमान नेताओं अधिकारियों की मलाई
    खानी बंद करवा दी तब से सारे पिछे पड़े हाथ धोकर
    आज राहुल गधा मोदीजी पर आरोप लगा रहा है राफेल डिल पर ,अगर कोई कांग्रेसी गंगा मे डूबकी लगा कर बोले की मोदीजी भ्रष्टाचारी है एक भी आदमी विश्वास नहीं करेगा !

  3. Fack Informations/narratives are given by paid news & channels against Modi Govt .All Thagbandhan parties are united for defaming the Govt.These all chore gang single family parties are only interested to loot this country.Modi is only a dead honest P.M. so far in India.

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