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MODI@72: पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई योजनाओं से समृद्ध हुआ भारत, लोगों के जीवन स्तर में आया सुधार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अब तक के कार्यकाल में देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने एवं इसकी तस्वीर बदलने के लिए व्यापक सुधार कार्य किए गए हैं और ये अब भी जारी हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान, भारत की छवि को बदल देने वाला मील का पत्थर सबित हो रहा है। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत, उज्जवला योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, गांवों में बिजली पहुंचाना, नल जल योजना, स्वच्छ भारत मिशन, सब्सिडी का डिजिटल ट्रांसफर, जन-धन योजना, आयुष्मान भारत, मुद्रा योजना, उड़ान आदि कुछ ऐसी योजनाएं हैं जिसने भारत की तस्वीर बदली है और प्रगति के द्वार खोले हैं। पीएम मोदी की इन योजनाओं से लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आया है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि बदलते भारत की तस्वीर को गढ़ते प्रधानमंत्री मोदी को भविष्य में भारत के नवयुग प्रणेता के रूप में देखा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सुधारवादी और परिवर्तनकारी कदमों के साथ ऐसी कई योजनाएं शुरू की हैं जो हर वर्ग और समाज के लिए लाभकारी है। खासकर किसानों, महिलाओं एवं गरीबों की तरक्की के लिए केंद्रित योजनाएं ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने वाली साबित हो रही है। ये योजनाएं गरीबों, वंचितों और आम लोगों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान में अहम भूमिका निभा रही हैं।

1. प्रधानमंत्री उज्जवला योजना

“स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन” के नारे के साथ मोदी सरकार ने 1 मई 2016 को प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की शुरूआत की। यह योजना एक धुआंरहित ग्रामीण भारत की परिकल्पना के साथ शुरू की गई, विशेषकर गरीबी रेखा से नीचे रह रही महिलाओं को रियायती एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करने वाले परिवारों को 9 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं। इस योजना से एलपीजी के उपयोग में वृद्धि होगी और स्वास्थ्य संबंधी विकार, वायु प्रदूषण एवं वनों की कटाई को कम करने में मदद मिलेगी। इससे सबसे बड़ा फायदा उन गरीब माताओं-बहनों को हुआ, जो धुएं में खाना बनाने को मजबूर थीं।

2. आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना

23 सितंबर 2018 को लॉन्च की गई यह स्वास्थ्य बीमा योजना है। इससे सीधे तौर पर गरीबों को लाभ हो रहा है। कैंसर और हार्ट संबंधी बीमारियों में भी 50 करोड़ भारतीयों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है। इस योजना के तहत उन लोगों को लाभ मिलेगा जो वर्तमान में किसी भी सरकारी या निजी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर नहीं हैं। इस तरह भारत दुनिया की पहली व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने की दिशा में बढ़ रहा है। वर्तमान में 50 करोड़ से अधिक लोग (10.74 करोड़ परिवार) पहले से ही आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत कवर्ड हैं। यह योजना हर परिवार को 5 लाख रुपये का मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है।

3. गांवों में बिजली- दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2015 को लाल किले की प्राचीर से 1,000 दिनों के अंदर अंधेरे में डूबे 18,452 गांवों में बिजली पहुंचाने की घोषणा की थी। आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के सैकड़ों घरों में बिजली नहीं पहुंची थी, जिसे पहुंचाने के लिए दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना शुरू की गई। तय समय से 12 दिन पहले 28 अप्रैल 2018 को यह संकल्प पूरा हुआ और देश के सभी गांव बिजली से रोशन हुए। सरकार ने इस योजना के लिए 75,893 करोड़ रुपये का आवंटन किया। इस लक्ष्य को पूरा करने में कई कठिनाइयां भी आई क्योंकि कई गांव दुर्गम इलाके में थे जहां बिजली के उपकरण पहुंचाना ही काफी कठिन था। यहां तक कि कई जगह बिजली विभाग के कर्मचारियों को सिर एवं कंधे पर बिजली उपकरण उठाकर ले जाना पड़ा और इसे इसे मिशन मोड में पूरा किया गया। मोदी सरकार ने सुदूर गांवों में हर घर बिजली पहुंचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। इससे पीएम मोदी की छवि गरीबों और वंचित लोगों के लिए सोचने वाले के तौर पर बनी।

4. पीएम किसान सम्मान निधि योजना

1 दिसम्बर 2018 से लागू यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किसानों पर खास ध्‍यान है। छोटे और सीमांत किसान परिवारों (जिनके पास 2 हेक्टेयर तक जमीन होगी) को इस योजना का लाभ मिलेगा। पीएम किसान योजना के तहत हर वित्त वर्ष में मोदी सरकार किसानों को 6000 रुपये देती है जो उनके खाते में 2000-2000 की तीन किस्तों में भेजा जाता है। इसके तहत हर साल की पहली किस्त एक अप्रैल से 31 जुलाई तक आती है, वहीं दूसरी किस्त एक अगस्त से 30 नवंबर और तीसरी किस्त एक दिसंबर से 31 मार्च के बीच किसानों के खाते में भेजी जाती है। किसान सम्मान निधि के तहत मार्च 2022 तक 11.3 करोड़ किसानों के खाते में 1.82 लाख करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किये जा चुके हैं। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत लगभग 12.53 करोड़ किसान रजिस्टर्ड हैं। पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ी अगर कोई दिक्कत है तो आपके पास हेल्पलाइन नंबर्स पर बात करके भी इसका समाधान लेने की सुविधा है। पीएम मोदी ने कहा है कि ‘‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि” और कृषि क्षेत्र से जुड़ी अन्य योजनाएं देश के करोड़ों किसानों को ताकत दे रही हैं। देश का किसान जितना सशक्त होगा, नया भारत उतना ही समृद्ध नजर आएगा।

5. स्वच्छ भारत मिशन- स्वच्छता और शौचालय

सार्वभौमिक स्वच्छता के प्रयासों में तेजी लाने और स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित करने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन का आरंभ किया था। मिशन के तहत, भारत में सभी गांवों, ग्राम पंचायतों, जिलों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ग्रामीण भारत में 10 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण करके 2 अक्टूबर 2019, महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती तक स्वयं को “खुले में शौच से मुक्त” (ओडीएफ) घोषित किया। इसका आशय यह है कि गांव के हर परिवार की शौचालय तक पहुंच हो गई है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि खुले में शौच न करने की प्रथा स्थायी रहे, यह मिशन अब अगले चरण यानी ओडीएफ-प्लस की ओर अग्रसर है। दुनिया में अपनी तरह के इस सबसे बड़े अभियान के तहत 50 करोड़ परिवारों को लाभ हुआ। इस योजना से माताओं और बहनों का खुले में शौच के लिए जाना बंद हुआ और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ। इस योजना के तहत पूरे देश में सफाई के लिए विशेष कार्य किए गए हैं, जिसमें शौचालय निर्माण से लेकर कचरा निस्तारण भी शामिल है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण के तहत ओडीएफ प्लस गतिविधियां ओडीएफ व्यवहार को सुदृढ़ करेंगी और गांवों में ठोस एवं तरल कचरे के सुरक्षित प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करेंगी। स्वच्छ भारत मिशन के ताजा आंकड़े के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में 16 करोड़ परिवारों के लिए शौचाालय तैयार किए गए हैं। अगर एक परिवार में सदस्यों की संख्या पांच मानी जाए तो इस हिसाब से लगभग 84 करोड़ लोग इन शौचाालयों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

6. प्रधानमंत्री पहल योजना – सब्सिडी का डिजिटल ट्रांसफर

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक बार कहा था कि केंद्र से भेजा गया 100 पैसा गरीब तक पहुंचते-पहुंचते 15 पैसा रह जाता है। ऐसे में बिचौलिये की भूमिका को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने सब्सिडी को सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाने की योजना शुरू की। डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर्स के रूप में सब्सिडी सीधे बैंक खातों में जमा कराए जाने को लेकर फैसला किया गया है। इससे लीकेज और किसी हेराफेरी की गुंजाइश खत्म हुई है। पहल योजना के तहत एलपीजी सब्सिडी सीधे बैंक खातों में जमा कराई जाती है, जिसका गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज है। इस योजना के तहत 14.62 करोड़ से अधिक लोगों को सीधे नकद सब्सिडी मिल रही है। इस योजना ने करीब 3.34 करोड़ नकली या निष्क्रिय खातों की पहचान करने और उन्हें बंद करने में भी मदद की, जिससे हजारों करोड़ रुपये की बचत हुई। सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में 783 करोड़ ट्रांजेक्शन डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के किए थे जो वित्त वर्ष 2020-21 में 603 करोड़ ट्रांजेक्‍शन था।

7. प्रधानमंत्री आवास योजना 

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत एक अप्रैल 2016 को हुई थी। इस स्कीम के तहत 2024 तक सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ 2.95 करोड़ घर उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। 21 फरवरी, 2022 तक, 2.62 करोड़ घरों के आवंटित कुल लक्ष्य के मुकाबले कुल 1.73 करोड़ घरों का निर्माण पूरा किया जा चुका था। सभी का सपना होता है कि उनका अपना घर हो। देश के नागरिकों के इसी सपने को पूरा करने के लिए पीएम मोदी की पहल पर केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awaas Yoajana) चला रही है। इस योजना के तहत सरकार उन लोगों को घर बनाने के लिए राशि प्रदान करती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। देश के लाखों लोग अब तक पीएम आवास योजना का लाभ उठा चुके हैं। इस स्कीम के तहत मैदानी इलाकों में घर बनाने के लिए एक लाख 20 हजार रुपये और पहाड़ी इलाके के लिए एक लाख 30 हजार रुपये की राशि सरकार की ओर से दी जाती है।

8. प्रधानमंत्री जन-धन योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में जन-धन योजना की घोषणा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की थी। इस योजना का मकसद देश के हर नागरिक को बैंकिंग सुविधा से जोड़ना है और इस योजना के तहत 31.31 करोड़ लोगों को फायदा मिल चुका है। आर्थिक जगत के क्षेत्र में ये दुनिया की सबसे बड़ी योजना है। इसने एक सप्ताह में सबसे अधिक 1,80,96,130 बैंक खाते खोलने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत अब तक 40.35 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं जिनमें 1.31 लाख करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इस योजना के तहत खोले गए कुल खातों में से 63.6 फीसदी ग्रामीण इलाकों में खोले गए हैं और 55.2 फीसदी खाताधारक महिलाएं हैं। इस योजना के ज़रिये बैंकिंग, बचत, जमा खाता, प्रेषण, ऋण, बीमा, पेंशन इत्यादि वित्तीय सेवाओं को प्रभावी ढंग से सभी तक पहुंचाना है। देश में आज भी बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपना बैंक अकाउंट नहीं खुलवा पाते हैं और बैंक द्वारा दी जा रही बैंकिंग सुविधा से अवगत नहीं हैं। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार की गरीब परिवारों के लिए एक बहुत ही अच्छी योजना है। इसके तहत देश के आर्थिक रूप से गरीब लोग, पिछड़े वर्ग के लोगों को जीरो बैलेंस पर बैंक में खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध कराना एवं बैंक की सुविधाओं से जोड़ना है।

9. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

मुद्रा योजना की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 अप्रैल 2015 को की थी। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) एक गैर-कार्पोरेट, गैर-कृषि, लघु उद्यमों को 10 लाख तक की ऋण प्रदान करने के लिए शुरू की गई योजना है। इस योजना के तहत केंद्र की मोदी सरकार लोगों को खुद का व्यवसाय खोलने के लिए लोन देती है। इससे देश के लोगों को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (MUDRA) लोन स्कीम भारत सरकार की एक पहल है जो व्यक्तियों, SME और MSME को लोन प्रदान करती है। MUDRA के तहत 3 लोन योजनाएं ऑफर की जाती हैं जिनका नाम शिशु, किशोर और तरुण है। मुद्रा लोन योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपए तक की लोन राशि प्रदान की जाती है। मुद्रा लोन लेने के लिए आवेदक को बैंकों या लोन संस्थानों को कोई सिक्योरिटी जमा कराने की ज़रूरत नहीं होती है। इस लोन का भुगतान 5 साल तक किया जा सकता है। देशभर में पिछले 8 सालों में सरकार ने कुल 8 लाख करोड़ का लोन मुद्रा योजना के तहत बांटा है। इससे कई एंटरप्रेन्योर (Entrepreneur) को अपना कारोबार शुरू करने में मदद मिली है। इस योजना के तहत 23 करोड़ महिला एंटरप्रेन्योर को लोन दिया गया है। इसके साथ ही देश में महिला एंटरप्रेन्योर को 500 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

10. उड़ान योजना- उड़े देश का आम नागरिक

‘उड़ान’ का फुल फॉर्म ‘उड़े देश का आम नागरिक’ है। यह मोदी सरकार की अहम योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य आम आदमी को हवाई सेवा उपलब्ध कराना है। यह एक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (RCS) है और इसे 21 अक्टूबर 2016 को लॉन्च किया गया था। इस योजना के तहत सरकार फ्लाइट फेयर कम करेगी तथा कई ऐसी जगहों पर हवाई अड्डों का निर्माण कराएगी, जहां फिलहाल हवाई अड्डे नहीं बन पाए हैं। इस योजना के तहत ग्राहकों को 500 किमी की दूरी एक घंटे में तय कराई जायेगी, जिसकी टिकट की क़ीमत 2500 रूपए होगी। इसकी शुरुआत 2016 में की गई और करीब 128 रूट पर सस्ती दरों पर फ्लाइट उपलब्ध करवाई जा रही है।

11. पीएम अटल पेंशन योजना

‘अटल पेंशन योजना’ की शुरुआत 9 मई, 2015 को हुई थी। इस योजना को पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) द्वारा संचालित किया जाता है। अटल पेंशन स्कीम (Atal Pension Scheme) एक ऐसी सरकारी योजना है जिसमें आपके द्वारा किए गए निवेश आपकी उम्र पर निर्भर करती है। PFRDA के अनुसार इस योजना से अब तक 2.23 करोड़ लोग जुड़े हैं और इस स्कीम से जुड़ने वालों में पुरुषों और महिलाओं का अनुपात 57:43 का है। इस योजना के तहत आपको कम से कम 1,000 रुपये, 2000 रुपये, 3000 रुपये, 4000 रुपये और अधिकतम 5,000 रुपये मासिक पेंशन मिल सकती है। ये एक सुरक्षित निवेश है। अटल पेंशन योजना के तहत अंशधारकों की संख्या चार जून, 2022 तक बढ़कर 3.73 करोड़ हो गई है। किसी भी बैंक में जाकर अकाउंट ओपन करवाया जा सकता है।

12. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

“फसल बीमा योजना” को फसल की सुरक्षा के लिए आरंभ किया गया है। किसानों की फसल के संबंध में अनिश्चितताओं को दूर करने के लिए नरेन्द्र मोदी सरकार ने 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को आरंभ किया था। फसल बीमा योजना के तहत किसानों को किसी भी प्राकृतिक आपदा के कारण फसल में हुई हानि पर बीमा कवर देने का प्रावधान किया गया है, यानि किसानों की फसल को प्राकृतिक आपदाओं के कारण खराब होने पर प्रीमियम का भुगतान देकर एक सीमा तक हुई हानि कम करायेगी। प्रीमियम राशि को प्रत्येक किसान की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए काफी कम रखा गया है। खरीफ पर 5 फीसदी व रबी पर मात्र 1.5 फीसदी प्रीमियम राशि है। फसल बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच के समान है। बीमा कंपनी के पास फसाल बीमा योजना के तहत लगभग 5.5 करोड़ किसानों के आवेदन एक वर्ष में आते हैं और इस योजना के तहत अब तक 90000 करोड़ रुपये के दावे का भुगतान किया गया है। इन दावों को आधार सीडिंग के जरिए निपटाया जाता है। covid -19 लॉकडाउन के दौरान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 70 लाख किसानों को 8741.30 करोड़ रुपये दिए गए।

13. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को 15 जुलाई 2015 को विश्व युवा कौशल दिवस पर लांच किया गया था। इसका उद्देश्य भारत में रह रहे पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को नौकरी देना है और उन्हें औद्योगिक प्रशिक्षण देना है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना कौशल विकास एवं उद्यमता मंत्रालय की ओर चलाई जाती है। इस स्कीम का उद्देश्य देश के युवाओं को उद्योगों से जुड़ी ट्रेनिंग देना है जिससे उन्हें रोजगार पाने में मदद मिल सके। इसमें ट्रेनिंग की फीस सरकार खुद भुगतान करती है। सरकार इस स्कीम के जरिए कम पढ़े लिखे या 10वीं, 12वीं कक्षा ड्रॉप आउट युवाओं को कौशल प्रशिक्षिण देती है। वर्ष 2016 से 2020 तक 73 लाख 47 हजार युवाओं ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले इन युवाओं में से 16 लाख 61 हजार युवाओं को नौकरियां दी गई हैं। कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां कौशल विकास को प्रोत्साहित करने के लिए आगे आ रही हैं। टेक्नोलॉजी व संचार से जुड़ी यूरोप की कई कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है।

14. प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना

प्रधानमंत्री मोदी ने 24 अप्रैल 2020 को स्वामित्व योजना को लॉन्च किया। यह सरकारी योजना ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर शुरू की गई है। स्वामित्व योजना 2020 से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के प्रयासों को गति मिल रही है। इससे देश भर के पंचायती राज संस्थानों में ई गर्वनेंस को मजबूती मिली। पीएम स्वामित्व योजना लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति घर बैठे ही अपनी संपत्ति का ब्यौरा देख सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपनी गांव की संपत्ति के आधार पर बैंक से लोन ले सकते हैं। स्‍वामित्‍व योजना धुनिक सर्वेक्षण विधियों के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में आबाद भूमि का सीमांकन / मैपिंग किया जाएगा जिससे ग्रामीण लोगों को बैंक से लोन लेने में आसानी हो। यह योजना गांव के उन लोगों को अपने जमीन का मलिकाना हक दे रहा जिनकी जमीन किसी भी सरकारी आंकड़े में दर्ज नहीं है। गांव में कई ऐसे लोग हैं जिनकी जमीनें किसी भी सरकारी आंकड़े में दर्ज नहीं है। ऐसे में इन लोगों को जमीन छिनने का डर बना रहता है। ऐसे लोगों की मदद के लिए प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना (PM Swamitva Yojana) को शुरू किया गया है।

15. आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना मोदी सरकार की बेहद महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना को 1 अक्टूबर 2020 से 30 जून 2021 तक के लिए आरंभ किया गया था फिर बाद में इसे आगे बढ़ा दिया गया। आत्मनिर्भर भारत योजना कोरोना महामारी की वजह से नौकरी गंवा चुके लोगों के लिए वरदान साबित हुई है। इस योजना से देश के लाखों लोगों को रोजगार प्राप्त करने में मदद मिली है। इसके लिए सरकार कई तरह के अवसर की व्यवस्था करती है। सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक इस योजना के तहत 30 अप्रैल 2022 तक देश के 58.76 लाख लोगों को कुल 4,920.67 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मिली है। इस योजना का उद्देश्य महामारी के कारण नौकरियां गंवाने वाले लोगों को दोबारा से नौकरी दिलाने में मदद करना और प्रतिष्ठानों द्वारा अधिक से अधिक कर्मचारियों को भर्ती करने के लिए प्रोत्साहित करना है। आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत सरकार 15,000 रुपये से कम वेतन प्राप्त करने वाले लोगों की EFPO में कंपनी के 12 प्रतिशत सरकार द्वारा दिए जाते हैं। लेकिन, इस योजना का लाभ उठाने के लिए कंपनी को EPFO में रजिस्टर्ड होना जरूरी है। इसके साथ ही कंपनी में कम से कम 50 से अधिक कर्मचारी काम करते हों। इससे कंपनियों को कर्मचारियों को नई नौकरी देने में सुविधा मिलेगी।

16. प्रधानमंत्री निक्षय पोषण योजना

केंद्र सरकार ने क्षय रोग जैसे की टीबी जैसी बीमारी की रोकथाम के लिए निक्षय पोषण योजना 1 अप्रैल 2018 को लांच किया। इस योजना के तहत टीबी मरीजों को 500 रुपए प्रतिमाह सहायता राशि दी जाती है। यह सरकारी योजना उन लोगों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई है जो क्षय रोग से ग्रसित है। निक्षय पोषण योजना टीबी मरीजों के लिए एक तरह की पोषण सहायता योजना है जिसमें रोगियों व प्रत्येक लाभार्थी को हर महीने 500 रूपये उपचार के साथ-साथ दिये जाएंगे। निक्षय पोषण योजना के लिए आप स्वास्थ्य केंद्रों पर पंजीकरण व नामांकन कर सकते हैं जहां से वे अपना इलाज ले रहे हैं। टीबी एक खतरनाक और गंभीर बीमारी है जिससे हर साल लगभग हजारों लोगों की मौत हो जाती है। टीबी के मरीजों की मौत का कारण आज के समय में पोषण से भरपूर खाने की कमी है क्यूंकि टीबी की बीमारी से लड़ने वाली दवाइयां तो बहुत है पर कहीं न कहीं अच्छे पौष्टिक भोजन की कमी है। डॉक्टरों के अनुसार टीबी की दवाइयों के साथ मरीज को अच्छे भोजन की भी बहुत जरूरत होती है और ऐसा ना होने पर कुछ परिस्थितियों में रोगी की मृत्यु तक हो जाती है।

17. प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना

यह योजना 31 मई, 2019 को शुरू की गई थी। पीएम मानधन योजना के तहत असंगठित क्षेत्र के कामगारों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर हर महीने 3000 रुपये की पेंशन दी जाती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में सहारा देना है ताकि असंगठित क्षेत्र के मजदूर वर्ग भी 60 साल की उम्र पार करने पर अपने जीवन यापन अच्छे से कर सकें। वह अपने बुढ़ापे को स्वाभिमान के साथ जी सकें और किसी दूसरे पर निर्भर न रहना पड़े। पेंशन से प्राप्त राशि का प्रयोग वह अपने खाने, पीने, कपड़ो, दवाई, इत्यादि की जरुरी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद पा सकता है। इस योजना का लाभ असंगठित क्षेत्रों के श्रमिक जैसे कि ड्राइवर, रिक्शा चालक, मोची, दर्जी, मजदूर, घरों में काम करने वाले, भट्टा कर्मकार आदि द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। इस योजना के तहत आपको 55 रुपये से लेकर 200 रुपये प्रति माह निवेश करने होते हैं। 60 वर्ष की उम्र के बाद श्रमिक को 3,000 रुपये मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पेंशन योजना के तहत वर्ष 2021 तक असंगठित क्षेत्र के करीब 46 लाख कामगारों ने पंजीकरण कराया लिया था।

18. पीएम वाणी योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 दिसंबर 2021 को नागरिकों को फ्री वाई-फाई सुविधा प्रदान करने के लिए पीएम वाणी योजना की शुरुआत की। इस योजना के माध्यम से अब आवेदक को किसी भी महंगे डाटा प्लान लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी क्यूंकि सरकार ने पीएम वाणी फ्री इंटरनेट योजना को शुरू कर लिया है जिसके माध्यम से नागरिक वाई फाई के माध्यम से इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगे। डिजिटल इंडिया रिवॉल्यूशन के बाद, अब सरकार फ्री वाई-फाई क्रांति ला रही है। आज के समय में Internet अधिक महत्वपूर्ण जरूरत बन गया है। इसी कारण अब देश के नागरिकों के लिए सरकार PM Free WIFI Scheme की सुविधा उपलब्ध करवाएगी। यह एक ऐसी स्कीम है जो वाई फाई में क्रांति लेकर आएगी जिससे नागरिक आसानी से अपने मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप, कंप्यूटर के जरिये भी वाई फाई कनेक्ट कर सकते है। इससे लोगों को ज्यादा स्पीड वाला नेटवर्क भी मिलेगा। PDO (पब्लिक डाटा ऑफिस) के माध्यम से ही नागरिक को मुफ्त में इंटरनेट की सुविधा प्रदान की जाएगी। आपके क्षेत्र में जितने भी नागरिकों को इंटरनेट चाहिए होगा उसमे हर प्रकार के प्लान शामिल होंगे। पीएम-वाणी योजना के तहत देश भर में अब तक 56,000 से अधिक वाई-फाई हॉटस्पॉट लगाए जा चुके हैं।

19. प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना

प्रधानमंत्री गर्भावस्था सहायता योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा 6000 रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। गर्भवस्था सहायता योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 1 जनवरी 2017 को की गयी थी। प्रधानमंत्री गर्भावस्था सहायता योजना 2021 के अंतर्गत पहली बार गर्भधारण करने वाली तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओ को यह आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। गर्भावस्था सहायता योजना को Matritva Vandana Yojana 2022 के नाम से भी जाना जाता है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत महिलाओं को बच्चे का जन्म होने पर 6000 रुपए की राशि प्रदान की जाती है। यदि परिवार में दूसरी बेटी जन्म लेती है तो उस स्थिति में भी अब सरकार 6000 रुपए की राशि प्रदान करेगी। सरकार द्वारा पहले यह राशि 3 किस्तों में प्रदान की जाती थी अब इसे 2 किस्तों में प्रदान की जाएगी। यह योजना देश की महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार करने में कारगर साबित हो रही है, इसके अलावा महिलाओं के जीवन स्तर में भी सुधार आया है।

20. उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना

उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना का आरंभ 11 नवंबर 2020 को किया गया था। इस योजना के अंतर्गत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना में दवाएं, ऑटोकॉम्पोनेंट्स, ऑटोमोबाइल सहित 14 प्रमुख क्षेत्र शामिल किए गए हैं। उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना के माध्यम से विनिर्माण में बढ़ोतरी हो रही है तथा देश में आयात पर निर्भरता कम हो रही है। इस योजना के माध्यम से निर्यात में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है जिससे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन की पेशकश करके प्रमुख क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। PLI scheme यानी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से सालाना आधार पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई पीएलआई योजना के तहत अगले पांच सालों में लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन की पेशकश करके प्रमुख क्षेत्रों में मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत अगले 5 साल में 6 लाख से ज्‍यादा नौकरियां पैदा होंगी।

21. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना

वर्ष 2011 की जनगणना में कन्या लिंगानुपात में कमी को ध्यान में रखते हुए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी 2015 को की गई थी। केंद्र सरकार का उद्देश्य इस योजना द्वारा बेटियों के प्रति समाज में होने वाले नकारात्मक रवैये के प्रति जागरूकता फैलाना और विभिन्न योजनाओं के जरिए उनका कल्याण करना है। इसके अलावा बच्चियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित कर महिला सशक्तिकरण की ओर अग्रसर करना भी इस योजना का मकसद है। यह योजना उन महिलाओं की काफी मदद करती है, जो घरेलू या किसी भी तरह की हिंसा से पीड़ित हैं। इसमें महिलाओं को यह सुविधा दी गई है कि मदद के समय वे कभी भी पुलिस, कानून और चिकित्सा जैसी सुविधाएं ले सकती हैं। इसके लिए महिलाओं को टोल फ्री नंबर 181 पर फोन करना होगा। जिसके बाद उन्हें सभी तरह की मदद प्रदान कराई जाएगी।

22. सुकन्या समृद्धि योजना

मोदी सरकार की तरफ से लागू इस योजना की शुरुआत देश के साथ उत्तर प्रदेश में 22 जनवरी 2015 को की गई थी। यह स्कीम 10 साल से कम उम्र की बच्चियों को उच्च शिक्षा देने और उनका भविष्य सुरक्षित करने के लिए शुरू की गई थी। भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही सुकन्या समृद्धि योजना एक खास तरह की स्कीम है और इसका उद्देश्य देश में बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करना है। देश में बड़े पैमाने पर अभिभावक अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इस स्कीम में निवेश करना पसंद करते हैं। सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के लिए चलाया जा रहा एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट प्लान है। वर्तमान समय में इस स्कीम में निवेश किए गए पैसों पर आपको सालाना 7.6 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है। वहीं सुकन्या समृद्धि योजना में कई बड़े बदलाव हो रहे हैं। नियमों में हुए बदलाव के अंतर्गत खाते में गलत ब्याज डलने पर उसको पलटने के प्रावधान को हटाया गया है। इससे पहले नियम था कि बेटी 10 साल में ही खाते को ऑपरेट कर सकती थी। वहीं बदले गए नियमों के आधार पर बेटी 18 साल की होने से पहले खाते को ऑपरेट नहीं कर सकेगी। बेटी के 18 साल होने से पहले अभिभावक ही उसके सुकन्या समृद्धि योजना में खाते को ऑपरेट कर सकेंगे। सुकन्या समृद्धि योजना के खाते में हर साल 250 रुपये जमा करना जरूरी है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो इस स्थिति में आपके खाते को डिफॉल्ट माना जाता है। आप बैंक और पोस्ट ऑफिस की किसी भी ब्रांच में जाकर अपनी 10 साल तक की बेटी के लिए खाता खुलवाकर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

23. फ्री सिलाई मशीन योजना

फ्री सिलाई मशीन योजना का शुभारंभ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की महिलाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए किया गया है। देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनके इरादों को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मुफ्त सिलाई मशीन योजना चलाई है जिसके तहत महिलाओं को मुफ्त सिलाई मशीन दी जा रही है। सरकार का यह प्रयास है कि देश की महिलाओं को सशक्त बनाया जाए। प्रधानमंत्री ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुफ्त सिलाई मशीन परियोजना शुरू की है। जिन महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई के काम में रुचि है और इसको अपना प्रोफेशन बनाना चाहती हैं। उनके लिए यह योजना काफी फायदेमंद है। इस फ्री सिलाई मशीन योजना से महिलाएं सिलाई मशीन प्राप्त करके घर बैठे अपना काम शुरू कर सकती हैं और अच्छी आमदनी अर्जित कर सकती हैं। इस योजना का लाभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रो की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं उठा सकती हैं। 20 साल से 40 साल तक की महिलाएं इस योजना का लाभ उठा सकती हैं। मोदी सरकार की तरफ से उत्तर प्रदेश में भी 50 हजार से ज्यादा महिलाओं को फ्री में सिलाई मशीनें दी जा रही हैं।

24. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान

देश भर में गर्भवती महिलाओं को व्‍यापक एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व जांच सुनिश्चित करने के लिये ही प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को 2016 में शुरू किया गया था। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान भारत सरकार की पहल है, जिसके तहत प्रत्येक माह की निश्चित नौ तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को व्यापक और गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करना सुनिश्चित किया गया है। इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उनकी गर्भावस्था के दूसरी और तीसरी तिमाही की अवधि (गर्भावस्था के चार महीने के बाद) के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं का न्यूनतम पैकेज प्रदान किया जाएगा। इसके तहत चिकित्सकों व विशेषज्ञों द्वारा दूसरी या तीसरी तिमाही की सभी गर्भवती महिलाओं को कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) देश में तीन करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है।

25. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व आश्वासन सुमन योजना

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व आश्वासन सुमन योजना को केंद्र सरकार द्वारा 10 अक्टूबर 2019 को आरंभ किया गया था। इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला तथा उनके शिशु को विभिन्न प्रकार की निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती है जिससे कि गर्भवती महिलाएं एवं उनके बच्चों की मृत्यु दर में गिरावट लाई जा सके। सुरक्षित मातृत्व आश्वासन सुमन योजना के तहत वह परिवार जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपने परिवार की गर्भवती महिला की सही से देखभाल नहीं कर पाते या जिनके परिवार वाले हॉस्पिटल्स का खर्चा तक नहीं उठा पाते हैं उन महिलाओं को इस योजना के अंतर्गत पूरी देखभाल की जाएगी, जिसमे महिला के गर्भवती होने के 6 महीने से लेकर बच्चे के जन्म के 6 महीने तक मुफ्त इलाज, दवाइयां और स्वास्थ्य से सम्बंधित अन्य सेवाएं सरकार द्वारा प्रदान की जाएंगी और इसके अलावा महिला की डिलीवरी के समय घर से हॉस्पिटल तक ले जाने का खर्चा भी मुफ्त में होगा। इस योजना के तहत प्रसव से पहले गर्भवती महिला चार बार अपना फ्री में चेकअप करवा सकती हैं जिससे उन्हें अपने होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में पता चलता रहेगा। योजना का लाभ देश की सभी गर्भवती महिला ले सकेंगी इसके लिए उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आवेदन फॉर्म व इससे सम्बंधित जानकारी प्राप्त करनी होगी।

26. प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना

प्रधानमंत्री गर्भावस्था सहायता योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा 6000 रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। गर्भवस्था सहायता योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 1 जनवरी 2017 को की गयी थी। प्रधानमंत्री गर्भावस्था सहायता योजना 2021 के अंतर्गत पहली बार गर्भधारण करने वाली तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओ को यह आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। गर्भावस्था सहायता योजना को Matritva Vandana Yojana 2022 के नाम से भी जाना जाता है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत महिलाओं को बच्चे का जन्म होने पर 6000 रुपए की राशि प्रदान की जाती है। यदि परिवार में दूसरी बेटी जन्म लेती है तो उस स्थिति में भी अब सरकार 6000 रुपए की राशि प्रदान करेगी। सरकार द्वारा पहले यह राशि 3 किस्तों में प्रदान की जाती थी अब इसे 2 किस्तों में प्रदान की जाएगी। यह योजना देश की महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार करने में कारगर साबित हो रही है, इसके अलावा महिलाओं के जीवन स्तर में भी सुधार आया है।

27. प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र योजना

नवम्बर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला शक्ति केंद्र योजना की शुरुआत की। महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत 640 जिलों में महिला शक्ति केन्द्र बनाने का लक्ष्य रखा गया। ये केंद्र महिला केन्द्रित योजनाओं को महिलाओ तक सुविधा पूर्ण तरीकों से पहुंचाने के लिए गाँव, ब्लॉक और राज्य स्तर के बीच कड़ी का काम और जिला स्तर पर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजनाओं को भी मजबूती प्रदान करेगी। इस योजना की शुरुआत देश के 115 अति पिछड़े जिलों के ब्लॉकों से की गई। स्वयंसेवक छात्र व एनजीओ परिवर्तन एजेंट के रूप में आंगनवाड़ी की महिला सदस्यों के साथ मिलकर ग्रामीण महिलाओं को सरकार द्वारा चलायी जाने वाली महिलाओं के हित की योजनाओं, बच्चों के पोषण, लिंग समानता, महिलाओं के अधिकार आदि के बारे में जागरूकता लाने का काम करेंगे जिससे महिलाओं को स्वावलंबी और सशक्त बनाया जा सके और नवजात बच्चों को कुपोषण की समस्या से निजात पाया जा सके तथा बच्चियों की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

28. पीएम किसान मानधन योजना

पीएम नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2019 को झारखंड के रांची से प्रधान मंत्री किसान मानधन योजना की शुरुआत की। इस स्कीम के तहत किसान के 60 वर्ष के होने के बाद उन्हें 3,000 रुपये मासिक पेंशन का मिलता है। इस योजना के तहत आपको 18 से 40 वर्ष की उम्र के बीच में आवेदन करना पड़ता है। 18 वर्ष की उम्र में आपको हर महीने 55 रुपये का प्रीमियम देना पड़ता है। इस योजना के अंतर्गत देश के छोटे और सीमांत किसानो को बुढ़ापे में जीवन व्यतीत करने के लिए सरकार की तरफ से पेंशन प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अंतर्गत देश के किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद बुढ़ापे में अच्छे से जीवन यापन करने के लिए सरकार द्वारा प्रतिमाह 3000 रूपये की पेंशन धनराशि प्रदान की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों द्वारा 50 % प्रीमियम का अनुदान किया जायेगा और बाकि 50% प्रीमियम का अनुदान सरकार द्वारा किया जायेगा। देश के जो इच्छुक लाभार्थी इस योजना के तहत आवेदन करना चाहते है तो वह ऑनलाइन ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं तथा ऑफलाइन जनसेवा केंद्र आदि दोनों तरीके से आवेदन कर सकते हैं।

29. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का अनावरण किया। यह योजना उन किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम करने में मदद करेगी जो अपनी खेती के लिए ऋण लेते हैं और खराब मौसम से उनकी रक्षा भी करेगी। किसानों की फसल का बीमा करने के लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के जरिए किसानों की फसल को बारिश, बाढ़, आंधी, तूफान, भूकंप आदि प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान पर बीमा कवर मिलता है। इस योजना के तहत देश के किसानो की फसलों को सूखा और बाढ़ आने पर होने वाले नुकसान का बीमा केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किया जायेगा। PMFBY Yojana में प्राकृतिक आपदाओं के कारण बर्बाद हुई फसलों का बीमा किसानों को उनके सीधा बैंक अकाउंट में पंहुचा दिया जायेगा। इस योजना के अंतर्गत देश के किसानो 2 लाख रूपये तक का फसल बीमा प्रदना किया जायेगा। देश के जो इच्छुक किसान इस योजना के तहत आवेदन करना चाहते हैं तो उन्हें योजना की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाना होगा। केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के तहत 8800 करोड़ रूपये का खर्च किया जायेगा।

30. प्रधानमंत्री कुसुम योजना(फ्री सोलर पैनल योजना)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री सोलर पैनल योजना की शुरुआत किसानों के लिए 1 फ़रवरी 2020 को शुरू करने की घोषणा की। इस योजना के माध्यम से पूरे देश में 20 लाख किसान भाइयों तक फ्री सोलर पैनल योजना का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। भारत सरकार द्वारा इस योजना के ज़रिये देश के किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए सोलर पैनल से चलने वाले सिचाई पम्प उपलब्ध कराये जायेंगे। इस योजना के तहत किसानों को खेती करने में आसानी होगी और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। इन सोलर पैनल की सहायता से किसान खेत में लगे सोलर प्लांट से उत्पन्न बिजली को विभिन्न बिजली कंपनियों को बेच कर अतिरिक्त आय के रूप में रु 6000 तक पा सकेंगे। Free Solar Penal Scheme को कुसुम योजना के नाम से भी जाना जाता है। किसान सोलर सिंचाई पंप स्थापित करके पेट्रोलियम ईंधन की लागत को समाप्त कर सकते हैं। इस योजना के तहत सरकार ने आने वाले 10 साल की अवधि के लिए 48000 करोड़ रूपये का बजट आवंटित किया है। देश के जो किसान सिंचाई पम्पों को डीज़ल या पेट्रोल की मदद से चलाते हैं अब उन पंपों को इस योजना के तहत सौर ऊर्जा से चलाया जायेगा। इस योजना के पहले चरण में देश के 1 .75 लाख पंप जो डीजल और पेट्रोल से चलते हैं उन्हें सोलर पैनल की सहायता से चलाने का लक्ष्य ऱखा गया है।

31. ऑपरेशन ग्रीन योजना

किसानों के हित में ऑपरेशन ग्रीन का शुभारंभ उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई 2001 को किया गया। कोरोना के बाद अर्थव्यवस्था में सुस्ती और खाने पीने से लेकर सभी चीजों के दाम बढ़ने के कारण दिन भर मेहनत करके खेती करने वाले किसानों को उनके फल, सब्जी की सही कीमत नहीं मिल पा रही है। सरकार ने किसानों को आर्थिक मंदी से बचाने के लिए ऑपरेशन ग्रीन शुरू किया। शुरू में ऑपरेशन ग्रीन में टमाटर (Tomato), प्याज (Onion) एवं आलू (Potato) को रखा गया था। अब इसमें 18 फल और सब्जी को जोड़ दिया गया है। फलों में केला, कीवी, अमरुद, आम, संतरा, पपीता, लीची, अनार, कटहल एवं अनानास को शामिल किया गया। इस योजना का लाभ बृहद पैमाने पर किसानों को दिया जा रहा है जिसमें 22 नए कृषि उत्पादों को शामिल करने का ऐलान किया गया है। मॉनसून या फिर प्राकृतिक आपदा की वजह से जिन किसानों की फसल खराब हो गई है या उन्हें किसी तरह की क्षति पहुंची है तो उन्हें इस योजना के तहत सहायता दी जाएगी। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ किसानों को यह प्राप्त होगा कि उन्हें अपनी कोई भी फसल कम कीमत पर बेचना नहीं पड़ेगा। देश में आलू, टमाटर और प्याज के उत्पादन को बढ़ाने के लिए और किसानों की आय में दुगनी बढ़ोतरी करने के लिए सरकार ने इस योजना को साल 2022 तक के दिशा निर्देशों पर लागू कर दिया है। ऑपरेशन ग्रीन के तहत अब सरकार किसानों को सब्जी, फल के परिवहन और भंडारण के लिए 50 प्रतिशन की सब्सिडी देगी। किसान अब अपनी फसल, फल, सब्जी को एक जगह से दूसरे जगह बेचने के लिए अगर लेकर जाते हैं तो किसान अब अपनी फसल को कम खर्चे में दूसरी जगह बेचने ले जा सकते हैं, जिससे उन्हें अधिक मुनाफा होगा। इसके साथ ही जिन फसलों का भंडारण करना है उन्हें शीतगृह भण्डारण में फसल रखने के लिए 50 प्रतिशत का भी अनुदान दिया जायेगा। शीतगृह भण्डारण बनाने के लिए 50 % का खर्चा सरकार उठाएगी।

32. पीएम मत्स्य सम्पदा योजना

सितंबर 2020 को पीएम मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की गई थी। इसे मछली पालन के क्षेत्र में अब तक की चलाई जाने वाली योजनाओं में सबसे बड़ी योजनाओं में गिना जाता है। इसके तहत किसानों को मछलीपालन के लिए ऋण और निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। भारत में किसानों के बीच मछली पालन का व्यवसाय बेहद तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सरकार भी किसानों को इस क्षेत्र की तरफ रुख करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर पीएम मत्स्य संपदा योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति और महिलाओं को मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है वहीं अन्य सभी को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत देश के सभी मत्स्य पालक और किसान आवेदन कर सकते हैं। पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली पालक क्रेडिट कार्ड बनवा कर इससे 1.60 लाख का लोन बिना गारंटी के ले सकते हैं। इसके अलावा इस क्रेडिट कार्ड से अधिकतम 3 लाख रुपए तक ऋण लिया जा सकता है। किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने पर अन्य ऋणों के मुकाबले कम ब्याज देना होता है। मछली पालन को हमेशा फायदे का व्यवसाय माना जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस योजना के तहत कम लागत में किसान अधिक मुनाफा कमा सकता है। जितने बड़े हेक्टेयर में आप इस व्यवसाय की शुरुआत करेंगे मुनाफा उतना ही ज्यादा होगा।

33. e-NAM – राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना

इस योजना की शुरुआत मोदी सरकार ने 14 अप्रैल, 2016 को की थी। इसके तहत रजिस्टर्ड होकर किसान अपनी उपज अच्छी कीमत पर कहीं भी बेच सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की आय बढ़ाने उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए इस योजना की शुरुआत की। ई-नाम एक इलेक्ट्रॉनिक कृषि पोर्टल है जो पूरे भारत में मौजूद एग्री प्रोडक्ट मार्केटिंग कमेटी को एक नेटवर्क में जोड़ने का काम करती है। इसका मकसद एग्रीकल्चर प्रोडक्ट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बाजार उपलब्ध करवाना है। इससे फायदे को देखते हुए किसान तेजी से इसके साथ जुड़ रहे हैं। किसानों की आय दोगुनी करने में ये योजना लाभकारी सिद्ध हो रही है। किसान अब ई-नाम (eNAM) प्लेटफॉर्म पर अपनी उपज बाजार के प्रतिस्पर्धी मूल्य पर बेच सकते हैं, जो उनके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो रहा है। किसान ई-नाम साइट पर अपनी उपज को पंजीकृत करने और बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। 18 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 1000 मंडियां ई-नाम प्लेटफॉर्म से जुड़ गई हैं, जिससे एक करोड़ 72 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं।

34. राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना

28 जुलाई, 2014 को स्वदेशी गायों के संरक्षण और नस्लों के विकास को वैज्ञानिक विधि से प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत की गई। भारतीय किसानों के पास खेती के अलावा आमदनी का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत पशुपालन है। इसे बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की पशुपालन और डेयरी विभाग की तरफ से कई सारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। केंद्र सरकार ने साल 2014 में 2025 करोड़ रुपये के बजट के साथ राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य था कि स्वदेशी गोजातीय नस्लों का विकास और संरक्षण किया जा सके और किसानों की आमदनी में इजाफा किया जा सके। किसान पशुपालन में अधिक से अधिक देशी नस्लों को तरजीह दें। इसके लिए सरकार की तरफ से परियोजनाओं के अलावा पुरस्कार दिए जाने का भी प्रावधान है। पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा हर साल पहले, दूसरे और तीसरे स्थान के लिए गोपाल रत्न और कामधेनु पुरस्कार दिया जाता है। जहां गोपाल रत्न पुरस्कार स्वदेशी नस्लों के गोजातीय पशुओं के पालन में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए किसानों को दिया जाता है तो कामधेनु पुरस्कार गोशालाओं और सर्वोत्तम प्रबंधित ब्रीडर्स सोसायटी को दिया जाता है। इस मिशन के तहत 2017-18 से वर्ष 2021 तक 22 गोपाल रत्न और 21 कामधेनु पुरस्कार दिए जा चुके हैं।

35. प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना को अगस्त 2017 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत कृषि आधारित कामों को बढ़ावा दिया जाता है। इस योजना का मकसद है कि बड़े पैमाने पर किसानों को इसका लाभ पहुंचाया जाए। सरकार ने इस योजना के तहत 4,600 करोड़ रुपये आवंटित कर इसकी अवधि को मार्च 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत सरकार खेती में हुए अनाज को सही तरीके से दुकानों तक पहुंचाने के प्रबंधन और आधुनिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure for Farming) के निर्माण में मदद करती है। इस योजना के द्वारा सरकार किसानों को अपने पैदावार को सही तरीके से बेचने का प्रबंधन देती है। इस योजना की मदद से भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास को तेजी मिली है। इससे किसानों को अपनी पैदावार बेचने का सही मौका और दाम मिलेगा। इससे किसानों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। सरकार प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत एक ऐसा डायरेक्ट रिटेल आउटलेट यानी फसल फार्म गेट (Faisal Farm Gate) बनाना चाहती है, जिससे किसानों के खेत से अनाज जल्द से जल्द दुकानों तक पहुंच जाए। इससे फसल का सही मूल्य किसानों को मिलता है साथ ही इससे कृषि सेक्टर में होने वाली फसल की बर्बादी को कम करना है। इससे जहां खाने की चीजों की प्रोसेसिंग की स्पीड बढ़ जाती है वहीं खाने की चीजों के निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलती है।

36. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

1 जुलाई, 2015 को “हर खेत कोई पानी” के आदर्श के साथ शुरू की गई, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) को सुनिश्चित सिंचाई के साथ खेती के क्षेत्र का विस्तार करने, पानी की बर्बादी कम करने और पानी में सुधार करने के लिए लागू किया जा रहा है। अब इस योजना को बढ़ाकर वर्ष 2026 तक के लिए कर दिया गया है। इस पर कुल लागत 93,068 करोड़ रूपये आने का अनुमान है। इससे करीब 22 लाख किसानों को फायदा होगा जिसमें 2.5 लाख अनुसूचित जाति और 2 लाख अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसान शामिल हैं। इस पर कुल लागत 93,068 करोड़ रूपये आने का अनुमान है जिसमें राज्यों के लिये 37,454 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। योजना के तहत 30.23 लाख हेक्टेयर कमान क्षेत्र विकास सहित 60 जारी परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान देने के अलावा अतिरिक्त परियोजनाओं को भी शुरू किया जा सकता है। इसमें जनजातीय इलाकों और सूखे का सामना करने वाले इलाकों की परियोजनाओं को शामिल करने के मानदंडों में ढील दी गई है। हर खेत को पानी खंड के तहत सतही जल स्रोतों के माध्यम से जल स्रोतों के पुनर्जीवन के तहत 4.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई तथा उपयुक्त ब्लॉक में भूजल सिंचाई के तहत 1.5 लाख हेक्टेयर की सिंचाई हो सकेगी।

37. परंपरागत कृषि विकास योजना

आधुनिक खेती की तकनीकों के साथ जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये ही साल 2015-2016 में परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत की गई। इस योजना का उद्देश्य जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण और विपणन को प्रोत्साहन करना है। खेती में रसायनों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण मिट्टी अपनी उपजाऊ शक्ति (Soil Health) खोती जा रही है। इससे साल दर साल फसलों का उत्पादन तो कम हो ही रहा है साथ ही इसका सबसे बड़ा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों को इस समस्या के चंगुल से बाहर निकालने के लिये केंद्र सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत की, जिसके तहत किसानों को जैविक खेती (Organic Farming) करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना के जरिये किसानों को आर्थिक अनुदान देने का भी प्रावधान है, ताकि जैविक खेती करके मिट्टी की सेहत और फसल का बेहतर उत्पादन हासिल हो सके। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत पात्रता रखने वाले किसानों को केंद्र सरकार कुल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करती है। यह अनुदान किसानों को बेहतर उपज और मार्केटिंग के लिए दिया जाता है। इसमें किसानों को तीन साल तक अलग-अलग चरणों में अनुदान राशि का भुगतान उनके खातों में किया जाता है। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पहाड़ी, कबीलाई और वर्षा सिंचित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है। इसमें किसानों को जैव उर्वरक (Organic Fertilizer) , जैव-कीटनाशक (Organic Pesticides), जैविक खाद, वर्मी-कंपोस्ट (Vermi-Compost ), वानस्पतिक अर्क का प्रयोग करके खेती की जाती है, ताकि खर्च को कम करके उपज और आमदनी को बढ़ाया जा सके। इन उत्पादों का इस्तेमाल करने पर मिट्टी ज्यादा उपजाऊ बनती है और फसल की उपज भी हाथों-हाथ बाजार में बिक जाता है।

38. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा देने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 29 मई 2017 को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का शुभारंभ किया गया। इस योजना के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में विकास लाने के लिए अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सरकार ऐसे युवाओं और किसानों को 25 लाख रुपये दे रही है जो खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। इन लोगों को सरकार ने एग्रीप्रेन्योर (Agripreneur) की संज्ञा दी है। यानी ऐसे लोग जो खेती-किसानी के क्षेत्र में उद्यमिता करें, खुद के बिजनेस आइडिया पर काम करें उन्हें सरकार की ओर से तय शर्तों को पूरा करने पर 25 लाख रुपये मिलेंगे। आर्थिक मदद मिलने के बाद युवा और किसान और पहले एग्रीकल्चर स्टार्टअप, फिर यूनिकॉर्न तक का प्रेरक और सफल सफर तय कर सकते हैं। युवाओं के पास अगर खेती-किसानी से जुड़े कुछ इनोवेटिव विचार हैं, तो RKVY स्कीम के तहत सरकार आपकी मदद करेगी। भारत की जैविक और प्राकृतिक खेती की पद्धति विदेश में भी अपनाई जा रही है। ऐसे में सरकार ने संभावनाओं को भांपते हुए कृषि स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण और आर्थिक मदद देने का फैसला लिया है। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत बने इसके लिए किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है एवं इसमें केंद्र और राज्य सरकार आर्थिक मदद कर रहे हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत केंद्र सरकार खेती में तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है।

39. हर घर नल से जल योजना

हर घर नल से जल योजना की शुरुआत 2019 में की गई थी। पिछले दो साल में सरकार ने 5.5 करोड़ घरों तक नल का जल पहुंचाया है। अब इसमें और लोगों को लाभ देने की योजना बनाई है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2022-23 में देश भर के 3.8 करोड़ परिवारों तक साफ पीने का पानी पहुंचाने की योजना बनाई है। इसके लिए बजट में 60 हजार करोड़ रूपये ‘हर घर नल’ योजना को आवंटित किए हैं। जिससे हर ‘घर तक नल’ का साफ पानी पहुंच सके। हर घर नल से जल योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में रहने वाले लोगों को साफ पानी देने से है।

40. प्रधानमंत्री वय वंदना योजना

प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को 4 मई, 2017 को भारत सरकार द्वारा देश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू किया गया था। इस योजना के तहत निवेश करने की अधिकतम सीमा पहले साढ़े सात लाख थी जिसे बढ़ा कर 15 लाख रुपये कर दिया गया है। प्रधानमंत्री वय वंदना योजना एक सामाजिक सुरक्षा योजना और पेंशन प्लान है और इसे केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया है, लेकिन इसका संचालन भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) करता है। प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के तहत अधिकतम निवेश की सीमा 15 लाख रुपए तय की गई है। इस योजना के तहत सीनियर सिटीजन को निवेश पर अन्य योजनाओं के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिलता है। इस योजना में 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोग मासिक या सालाना पेंशन प्लान चुन सकते हैं। अगर आप मासिक पेंशन प्लान का चुनाव करते हैं तो आपको 10 साल तक 8 परसेंट का ब्याज मिलेगा। वहीं अगर आप सालाना पेंशन का चुनाव करते हैं तो आपको 10 साल के लिए 8.3% का ब्याज मिलेगा।

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