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राममंदिर शिलान्यास को लेकर मीडिया और सेक्युलर गिरोह में बेचैनी

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अयोध्या में राम मंदिर शिलान्यास को लेकर देश के साथ साथ विदेश में भी खुशी की लहर हैं वहीं दूसरी ओर मीडिया गिरोह, तथाकथित सेक्लुयर लोगों और कट्टरपंथियों में मातम पसरा हुआ है और यही कारण है कि ये लोग राममंदिर शिलान्यास कार्यक्रम की निंदा और अफवाह फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। आइए, एक-एक देखते हैं कि ये कौन लोग हैं जो करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ रहे हैं और उन्हें आहत पहुंचा रहे हैं। 

सबसे पहले बात करते हैं कि बीबीसी की। बीबीसी ने कार्टून बनाकर राममंदिर शिलान्यास का माखौल उड़ाय है। बीबीसी  ने लिखा है कि आयोजन पूर्ण हुआ, श्रद्धा, भक्ति और टीआरपी का अद्भूत संगम था प्रभु। बीबीसी से सवाल है कि क्या क्रिश्चिन और पोप के बारे में कभी ऐसा कार्टून बनाने की हिमाकत कर सकता है।  

 

ऑल इंडिया मुस्लिम बोर्ड तो अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करके धमकियाने अंदाज में बोल ही चुका है कि बाबरी मस्जिद थी और हमेशा मस्जिद ही रहेगी। हागिया सोफिया इसका एक बड़ा उदाहरण है। अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टिकरण निर्णय द्वारा जमीन पर पुनर्निमाण इसे बदल नहीं सकता है। दुखी होने की जरूरत नहीं है। कोई स्थिति हमेशा के लिए नहीं रहती है।

 

इसी तरह जनसत्ता अखबार ने करोड़ों लोगों की भावना के साथ खिलवाड़ करते हुए पूछा कि कोरोना काल में मंदिर पहले बने या अस्‍पताल? 

वहीं तथाकथित सेक्युलर और मीडिया गिरोह की सक्रिय सदस्य राणा अय्यूब लिखा है कि 5 अगस्त को भारत में मुसलमानों के लिए एक और कुख्यात तारीख बन जाएगी – कश्मीर में बढ़े दमन का एक दिन, अयोध्या शहर में एक भव्य समारोह के अतिरिक्त अपमान के साथ, जहां बाबरी मस्जिद के विनाश ने 1992 में मुसलमानों पर देशव्यापी हमला किया।

इसी तरह आरफा खान्नम शेरवानी लिखती हैं कि ये क्या वही देश है, जिसके लिए मेरे पूर्वजों ने लड़ाई लड़ी। मैं अब अपने देश को नहीं पहचान पा रही। 

पूर्व सांसद व नई दुनिया के मैनेजिंग एडिटर शाहिद सिद्दकी ने ट्वीट कर लिखा है कि आज महात्मा गांधी की विचारधारा की फिर से हत्या की जा रही है। 

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