Home समाचार लगातार तीसरे महीने विनिर्माण गतिविधियों में आई तेजी, मांग बढ़ने से सितंबर...

लगातार तीसरे महीने विनिर्माण गतिविधियों में आई तेजी, मांग बढ़ने से सितंबर में 53.7 रहा पीएमआई

309
SHARE

भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी के असर से अब बाहर निकल चुकी है। आज अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर में सुधार दिखाई दे रहा है। मांग बढ़ने से विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई है। यही वजह है कि आईएचएस मार्किट इंडिया का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) सितंबर में बढ़कर 53.7 हो गया। यह व्यापक रूप से व्यावसायिक गतिविधियों में मजबूत विस्तार का संकेत है।

आईएचएस मार्किट की शुक्रवार को जारी सर्वे के मुताबिक, यह लगातार तीसरा महीना है, जब विनिर्माण गतिविधियों में तेजी रही है। पीएमआई का 50 से अधिक रहना तेजी और इससे नीचे का आंकड़ा संकुचन दिखाता है। अगस्त, 2021 में विनिर्माण पीएमआई 52.3 रहा था। आईएचएस मार्किट की संयुक्त निदेशक पोलियाना डी लीमा ने कहा कि मांग में बढ़ोतरी के साथ ही भारतीय विनिर्माताओं ने सितंबर में उत्पादन काफी हद तक बढ़ाया। अंतरराष्ट्रीय बिक्री में भी तेजी आई और कारोबारी विश्वास में सुधार हुआ।

एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है।

अगस्त में कोर सेक्टर का उत्पादन 11.6 प्रतिशत बढ़ा

कोरोना संकट के कारण औद्योगिक गतिविधियों पर असर जरूर हुआ है, लेकिन भारतीय अर्थव्यस्था में रिकवरी की रफ्तार जोर पकड़ती जा रही है। इस साल अगस्त में पिछले साल की तुलना में आठ कोर सेक्टर का उत्पादन 11.6 प्रतिशत बढ़ा है। आठ कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्‍पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल है। औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी) में आठों कोर सेक्टर की हिस्सेदारी 40.27 प्रतिशत है। सरकारी आंकड़े के अनुसार इस साल अगस्त में पिछले साल की तुलना में कोयला और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 20.6 प्रतिशत, रिफाइनरी उत्पाद में 9.1 प्रतिशत, इस्पात उत्पादन में 5.1 प्रतिशत, सीमेंट उत्पादन में 36.3 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में 15.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

शेयर बाजार ने रचा इतिहास, सेंसेक्स पहली बार 60 हजार के पार

भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। 24 सितंबर, 2021 को नया रिकॉर्ड कायम करते हुए बंबई स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स ने पहली बार 60 हजार का आंकड़ा पार किया। शुक्रवार सुबह शेयर मार्केट खुलते ही सेंसेक्स 273 प्वाइंट उछलकर 60 हजार के पार 60,158.76 पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 17,947 पर पहुंच गया। जल्द ही निफ्टी भी 18,000 के पार होगा। इसके पहले 16 सितंबर, 2021 को सेंसेक्स 59,000 के पार, 03 सितंबर, 2021 को 58,000 और 31 अगस्त, 2021 को 57,000 के पार गया था।

वित्त वर्ष 2021-22 में 10 प्रतिशत की ग्रोथ की उम्मीद

इकोनॉमिक थिंक टैंक NCAER ने देश की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। एनसीएईआर की महानिदेशक पूनम गुप्ता के अनुसार देश में सप्लाई सामान्य होने लगी है। सेवाओं में मांग बढ़ने के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था भी पटरी पर है। इससे वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 10 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। पूनम गुप्ता के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था में उछाल और कोविड-19 की वजह से आपूर्ति संबंधी दिक्कतें कम होने से चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छी वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है।

चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में एफडीआई में 62 प्रतिशत की वृद्धि

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में भारत निवेश के लिए वैश्विक निवेशकों का पसंदीदा देश बना हुआ है। मोदी सरकार बनने के बाद एफडीआई नीति में सुधार, निवेश के लिए बेहतर माहौल और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे कदम उठाने का परिणाम है कि वे कोरोना काल में भी भारत में जमकर निवेश कर रहे हैं। मोदी सरकार की नीतियों का ही परिणाम है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 के पहले चार महीनों के दौरान भारत ने कुल 27.37 बिलियन अमेरिकी डॉलर का विदेशी निवेश भारत में आया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2020-21 में इसी अवधि की 16.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की तुलना में यह 62 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही पिछले साल की इसी अवधि में 9.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के पहले चार महीनों में 20.42 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 112 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। 

विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने सितंबर में किया 16,305 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश

विदेशी निवेशकों ने कोरोना काल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया। मोदी सरकार बनने के बाद एफडीआई नीति में सुधार, निवेश के लिए बेहतर माहौल और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे कदम उठाने का परिणाम है कि वे कोरोना काल में भी भारत में जमकर निवेश कर रहे हैं। विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने सितम्‍बर महीने में अभी तक भारतीय पूंजी बाजार में 16,305 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किए। बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने 11,287 करोड रुपये इक्विटी और 5,018 करोड़ रुपये ऋण सेगमेंट में निवेश किए। सितंबर महीने की 17 तारीख तक कुल मिलाकर 16,305 करोड रुपये भारतीय पूंजी बाजार में निवेश किये गए। पिछले महीने अगस्त में विदेशी निवेशकों ने 16,459 करोड़ रुपये भारतीय पूंजी बाजार में डाले थे।

एफपीआई ने अगस्त में किया 7,245 करोड़ रुपये का निवेश

कोरोना महामारी के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अगस्त में भारतीय बाजारों में 7,245 करोड़ रुपये डाले। डिपॉजिटरी के आंकड़े के अनुसार, एफपीआई ने 2 से 20 अगस्त के बीच शेयरों में 5001 करोड़ रुपये का निवेश किया और बांड बाजार से 2244 करोड़ रुपये डाले। इस तरह इस अवधि में उनकी ओर से कुल 7,245 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव के अनुसार निवेशक धीरे-धीरे अपने सतर्क रुख को छोड़ रहे हैं और भारतीय बाजारों की तरफ उनका भरोसा बढ़ रहा है।

विदेशी मुद्रा भंडार 642 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर

कोरोना संकट काल में भी मोदी सरकार की नीतियों के कारण विदेशी मुद्रा भंडार ने एक बार फिर रिकॉर्ड बनाया। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 642 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर के पार पहुंच गया। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 3 सितंबर को खत्म हफ्ते में 8.895 अरब डॉलर बढ़कर 642.453 अरब डॉलर को पार कर गया। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार यह अबतक का सबसे ऊंचा स्तर है। इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा यानी विदेशी मुद्रा एसेट्स 8.213 अरब डॉलर बढ़कर 579.813 अरब डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

जीएसटी कलेक्शन 33 प्रतिशत बढ़कर 1.16 लाख करोड़ रुपये 

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह जुलाई में 33 प्रतिशत बढ़कर 1.16 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। जुलाई, 2021 में कुल जीएसटी कलेक्शन 1,16,393 करोड़ रुपये रहा जिसमें सीजीएसटी 22,197 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 28,541 करोड़ रुपये, आईजीएसटी 57,864 करोड़ रुपये और सेस 7,790 करोड़ रुपये शामिल हैं। यह राजस्व संग्रह पिछले साल के इसी महीने के जीएसटी कलेक्शन के मुकाबले 33 प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि आने वाले महीनों में भी जीएसटी राजस्व संग्रह के दमदार बने रहने की संभावना है।

 

Leave a Reply