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लोकल से ग्लोबल: खादी मास्क ने दी विदेशी बाजारों में दस्तक

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर खादी लोकल से ग्लोबल बनने को तैयार है। कोरोना संकट काल में सभी प्रकार के मास्क के निर्यात पर से प्रतिबंध हटा लिए जाने के बाद, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) अब खादी कॉटन और रेशम फेस मास्क का निर्यात करने जा रहा है। यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को ध्यान में रखते हुए “लोकल से ग्लोबल” आह्वान के बाद उठाया गया है। केवीआईसी ने दो स्तरीय और तीन स्तरीय कॉटन के साथ-साथ सिल्क फेस मास्क को विकसित किया है। इन मास्क के निर्माण में विशेष रूप से डबल ट्विस्टेड खादी कपड़े का उपयोग किया जा रहा है क्योंकि यह नमी की मात्रा को अंदर तक बनाए रखने में मददगार साबित होता है और हवा को अंदर जाने देने के लिए एक आसान मार्ग प्रदान करता है। इन मास्क को जो बात विशेष रूप से खास बनाती है वह हाथ से बुने हुए कॉटन और सिल्क के कपड़े हैं। कॉटन एक मैकेनिकल अवरोधक के रूप में जबकि रेशम एक इलेक्ट्रोस्टैटिक अवरोधक के रूप में काम करता है। यह फेस मास्क पुरुषों के लिए दो रंगों में और महिलाओं के लिए कई रंगों में उपलब्ध है।

8 लाख फेस मास्क के ऑर्डर मिले
केवीआईसी को अब तक 8 लाख फेस मास्क के ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं और लॉकडाउन अवधि के दौरान 6 लाख से ज्यादा फेस मास्क की आपूर्ति की जा चुकी है। मास्क की बिक्री करने के अलावा, पूरे देश में 7.5 लाख से ज्यादा खादी के फेस मास्क मुफ्त में बांटे गए हैं। केवीआईसी की योजना दुबई, अमेरिका, मॉरीशस और कई यूरोपीय और मध्य पूर्व देशों में खादी फेस मास्क की आपूर्ति करने की है, जहां पर पिछले कुछ वर्षों में खादी की लोकप्रियता काफी बढ़ी है।

केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि खादी फेस मास्क का निर्यात, ‘लोकल से ग्लोबल’ होने का सबसे बढ़िया उदाहरण है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद हाल के वर्षों में खादी के कपड़े और अन्य उत्पादों की लोकप्रियता पूरी दुनिया में काफी बढ़ी है। खादी फेस मास्क के निर्यात से उत्पादन में गतिशीलता आएगी और अंतत भारत में कारीगरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।”

खादी ग्रामोद्योग ने किया 88,887 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड कारोबार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खादी का कायापलट कर दिया है। मोदी राज में खादी प्रोजक्ट की बिक्री आसमान छू रही है। खादी का उत्पादन पिछले 5 साल में दोगुना से अधिक हुआ है और इसी अवधि के दौरान खादी की बिक्री में लगभग तीन गुनी बढ़ोत्तरी देखी गई है। ग्रामोद्योग क्षेत्र के उत्पादन और बिक्री में भी पिछले पांच वर्षों में लगभग 100 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी देखी गई है। 

  • ग्रामोद्योग उत्पादों का कारोबार 2019-20 में 84,675.39 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 19% से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि 2018-19 में 71,077 करोड़ रुपये था। वर्ष 2019-20 में, खादी एवं ग्रामोद्योग का कुल कारोबार 88,887 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
  • 2015-16 में खादी का उत्पादन 1,066 करोड़ रुपये से 2019-20 में बढ़कर 2,292.44 करोड़ रुपये हो गया। खादी फैब्रिक उत्पादों की बिक्री 2015-16 में 1,510 करोड़ रुपये थी, जो कि 2019-20 में 179% बढ़कर 4,211.26 करोड़ रुपये हो गई।
  • 2015-16 में ग्रामोद्योगों के उत्पादों का उत्पादन 33,425 करोड़ रुपये का किया गया था और यह उत्पादन 2019-20 में 96% की बढ़ोत्तरी के साथ 65,393.40 करोड़ रुपये हो गया। 2015-16 में ग्रामोद्योगों के उत्पादों की बिक्री 40,385 करोड़ रुपये थी, जिसमें लगभग 110% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 2019-20 में 84,675.39 करोड़ रुपये हो गया।

5 साल में बिक्री में हुई जबरदस्त वृद्धि
मोदी सरकार द्वारा मिले बढ़ावे से देश भर में खादी वस्त्रों और कपड़े की बिक्री में जबरदस्त वृद्धि हुई है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना के अनुसार वर्ष 2014-15 में खादी की बिक्री 1,310.90 करोड़ रुपये थी, जो 2018-19 में बिक्री 3,215.13 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इसमें 31% की वृद्धि दर्ज करते हुए, खादी की बिक्री वित्त वर्ष 2019-20 में 4211.26 करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गई। 

वित्त वर्ष करोड़ रुपये
2013-14 1081
2014-15 1310
2015-16 1664
2016-17 2146
2017-18 2510
2018-19 3215
2019-20 4211.26

केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना के अनुसार खादी उद्योग को पुनर्जीवित करने के सरकार के निरंतर प्रयासों और खादी को दैनिक जीवन की आवश्यकता के रूप में अपनाने के लिए, प्रधानमंत्री द्वारा अपने रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” सहित विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से बार-बार अपील करने के परिणामस्वरूप, केवीआईसी विकास के पथ पर लगातार आगे बढ़ता चला जा रहा है।

खादी उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला
खादी परिधानों के अलावा, ग्राम उद्योग उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला जैसे सौंदर्य प्रसाधन, साबुन और शैंपू, आयुर्वेदिक दवाएं, शहद, तेल, चाय, अचार, पापड़, हैंड सैनिटाइजर, मिष्ठान्न, खाद्य पदार्थ और चमड़े की वस्तुओं ने भी बड़ी संख्या में देश-विदेश के उपभोक्ताओं को आकर्षित किया है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले पांच वर्षों में ग्रामोद्योग उत्पादों के उत्पादन और बिक्री में लगभग दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है।

एक दिन में बिक्री का नया रिकॉर्ड बना
खादी पहले सिर्फ राजनीतिक वर्ग की पसंद थी लेकिन आजकल आम उपभोक्ता भी प्राकृतिक उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिससे ये उद्योग विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। खादी उत्पादों की बिक्री में जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है। पिछले साल 2019 में गांधी जयंती पर नई दिल्ली में खादी इंडिया के स्टोर में खादी की बिक्री का एक नया रिकॉर्ड बना। गांधी जयंती पर खादी इंडिया ग्रामोद्योग भवन कनॉट प्लेस ने 1 करोड़ 27 लाख 57 हज़ार की रिकॉर्ड बिक्री की। खादी के अब तक के इतिहास में एक दिन के भीतर इतनी बिक्री कभी नहीं हुई। इससे पहले 17 नवंबर, 2018 को 1 करोड़ 02 लाख 72 हजार की बिक्री हुई थी।

‘मोदी जैकेट और कुर्ता’ के दीवाने हुए युवा
प्रधानमंत्री मोदी का अंदाज हमेशा ही चर्चा का विषय बना रहा है, फिर चाहे उनका कुर्ता हो या फिर जैकेट। युवाओं में ‘मोदी जैकेट और कुर्ता’ को लेकर खासी दीवानगी देखी जा रही है। मोदी स्टाइल का खादी ‘कुर्ता-जैकेट’ युवाओं के फैशन का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी हमेशा खादी से बने परिधानों के अधिक से अधिक इस्तेमाल के पक्षधर रहे हैं। सत्ता में आने के बाद से ही पीएम मोदी ने खादी के प्रति लोगों का लगाव बढ़ाने के लिए हर मंच से अपील की है। चाहे वो मन की बात हो या फिर लाल किले से भाषण, हर जगह से प्रधानमंत्री ने देशवासियों से खादी से बने वस्त्रों और दूसरे उत्पादों को अपनाने का आग्रह किया है। इसी का असर है आज खादी जितनी अधिक लोकप्रिय है, उतनी पहले कभी नहीं रही।

मोदी जैकेट की भारी मांग
नरेन्द्र मोदी सरकार आने के बाद मोदी जैकेट की मांग तेजी से बढ़ी है। खासकर युवाओं में मोदी जैकेट का क्रेज काफी देखा जा रहा है। खादी ग्रामोद्योग आयोग के अनुसार खादी के दिल्ली, जयपुर, जोधपुर, मुंबई, कोलकाता, एर्नाकुलम और गोवा स्थित सात बिक्री केन्द्रों पर मोदी जैकेट और मोदी कुर्ते की भारी मांग है। यहां सूती और रेशमी के बाद अब ऊनी कपड़े में भी मोदी जैकेट बेची जा रही है।

खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन
खादी एक ऐसा वस्त्र है, जो आज भी ग्रामीण भारत को चेहरा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से लोगों से खादी का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से खादी के उपयोग की अपील की और फैशन के लिए खादी पर बल दिया। उन्होंने नारा दिया ‘खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन’। प्रधानमंत्री के इस नारे ने गजब का कमाल दिखाया। लोगों में खादी को लेकर जबरदस्त क्रेज सामने आया। परिणाम यह रहा कि देश में खादी की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची।

खादी फॉर ट्रांसफॉर्मेशन
प्रधानमंत्री मोदी ने खादी फॉर ट्रांसफॉर्मेशन से इसे नया स्वरूप दे दिया है। मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही ग्रामीण इकाइयों के उत्थान की दिशा में प्रयास तेज कर दिए। इन लघु इकाइयों को अनेक योजनाओं की सहायता से हर जरूरी साधन-संसाधन उपलब्ध कराए, इकाई आरंभ करने के लिए ऋण उपलब्ध कराया। उन्होंने इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की आवश्यकताओं और परेशानियों को समझा। उसे दूर करने के लिए आवश्यक प्रावधान किए। प्रधानमंत्री का यह सपना है कि जल्दी ही खादी इतनी ऊंचाइयों को छुए कि यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा भारतीय ब्रांड बन जाए।

विदेशी भी हुए मोदी जैकेट के दीवाने 
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून इस ‘मोदी जैकेट’ से इस तरह प्रभावित हैं कि अब वह अपने दफ्तर भी मोदी जैकेट ही पहनकर जा रहे हैं। ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए मून ने बताया कि भारत दौरे पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के जैकेट की तारीफ की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उनके लिए उसी तरह की जैकेट भेज दीं। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने ट्वीट किया कि, ‘मैंने अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि वे इस जैकेट में शानदार दिखते हैं। उन्होंने मुझे ये जैकेट भेजे हैं। सारे मेरी साइज के हिसाब से तैयार किये गये हैं। इस सद्‌भाव के लिए मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं।’ ब्रिक्स समिट 2016 में दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जुमा, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजील राष्ट्रपति माइकेल टेमर ने डिनर के दौरान मोदी जैकेट में नजर आए थे।

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