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INSIDE STORY OF BHAGWANT MAAN : आम आदमी पार्टी की ‘डूबती नाव’ में सवारी करने कोई नहीं आया, तब जाकर लगी ‘शराबी’ मान की लॉटरी, सिद्धू से लेकर सूद तक केजरी ने ऐसे डाले डोरे

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अभी तक कहावत थी कि मजबूरी का नाम गांधी….पंजाब में इसे बदलकर मजबूरी का नाम मान…कर दिया है। वैसे भी यह गांधी से ज्यादा अलंकारिक लगती है। अब आपको बताते हैं कि यह मान कौन हैं और कब, किसकी मजबूरी बन गए ? दरअसल, हम बात कर रहे हैं आप नेता और सांसद भगवंत मान की…आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लाख कोशिश कर ली कि आप के लिए पंजाब में सीएम चेहरे के लिए कोई बड़ा और चर्चित चेहरा मिल जाए। केजरीवाल ने सिद्धू से लेकर सूद तक की मिन्नतें कीं। दुबई के होटल कारोबारी एसपीएस ओबेरॉय से लेकर किसान नेता बलबीर राजेवाल तक दस्तक दी। लेकिन कोई आप की डूबती नाव में सवारी करने के लिए राजी न हुआ।

केजरीवाल ने न चाहते हुए भरे मन से मान को ही सीएम का चेहरा बनाया
डूबते जहाज की सवारी वैसे भी कोई पसंद नहीं करता। चूहे तक उससे निकलकर भाग जाते हैं। ऐसे में पंजाब में केजरीवाल की टूटी नाव की सवारी भला कौन करता। केजरीवाल ने जहां-जहां हाथ जोड़े, वहां-वहां से हाथ जोड़कर इनकार आ गया कि भई और कुछ भी करा लो, लेकिन आप की सवारी नहीं करेंगे। हारकर केजरीवाल ने न चाहते हुए भी भरे मन से भगवंत मान को ही पंजाब में सीएम का चेहरा घोषित करना पड़ा। दरअसल, कोई और ऑप्शन न होने के कारण भगवंत मान ही केजरीवाल की मजबूरी बन गए। यही कारण रहा कि अकाली नेताओं द्वारा मान पर ‘शराबी’ के टैग लगाने के बावजूद मान को ही सीएम चेहरा बनाना पड़ा।

शराब के लिए उमड़ रहा केजरीवाल का प्रेम, अब ‘शराबी’ के टैग के नेता भी
वैसे इन दिनों दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के दिल में शराब के लिए जिस तरह से प्रेम उमड़ रहा है…दिल्ली में मोहल्ले-मोहल्ले पाठशाला तो नहीं खुल पाईं, अलबत्ता मधुशाला जरूर बेहताशा खुल रही हैं। ऐसे में यदि ‘शराबी’ के टैग के बावजूद मान को सीएम चेहरा बना दिया है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति भी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि किसी बड़े चेहरे की तलाश में पूरी जोड़तोड़ के बाद भी अंत में सांसद भगवंत मान आम आदमी के CM कैंडिडेट बन गए।केजरीवाल सबसे पहले नवजोत सिद्धू को पार्टी में लाना चाहते थे
आप के सीएम चेहरे के लिए सबसे बहले केजरीवाल ने कांग्रेस के पंजाब प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू पर डोरे डाले। दरअसल, आप के इस ऑफर के कारण ही सिद्धू कांग्रेस में मनचाहा घमासान मचाते रहे। जब चाहा सोनिया गांधी की मुखालफत कर दी। जब चाहा कांग्रेस प्रधानी से इस्तीफा दे दिया। उनकी जेब में केजरीवाल का ऑफर था। यदि कांग्रेस कोई एक्शन लेती तो तत्काल बाउंड्री फांदकर आप के पाले में चले जाते और सीएम का चेहरा बन जाते, लेकिन केजरीवाल और सिद्धू दोनों के सपने पूरे नहीं हुए। सिद्धू आप में नहीं गए और कांग्रेस ने सिद्धू को सीएम चेहरा घोषित नहीं किया।

सिद्धू से निराश होकर फिल्म अभिनेता सोनू सूद पर डाले डोरे
केजरीवाल ने सिद्धू से निराश होने के बाद फिल्म अभिनेता सोनू सूद पर डोरे डाले। सूद की पार्टी में शामिल होने के लिए खूब मन्नत की, लेकिन सूद की बहन ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और खुद सूद ने आप में जाने से मना कर दिया। इसके बाद केजरीवाल ने दुबई के होटल कारोबारी एसपीएस ओबेरॉय से लेकर किसान नेता बलबीर राजेवाल तक दस्तक दी। केजरीवाल को लगा कि किसान आंदोलन के चलते किसान नेता को सीएम चेहरा बनाना फिट बैठ सकता है। लेकिन टूटी नाव में सवारी को ये भी तैयार नहीं हुए।

फर्जी रायशुमारी के आधार पर मान को बनाया सीएम का चेहरा
दरअसल, पंजाब का सीएम बनने की ख्वाहिश दिल्ली वाले नेताओं की भी चर्चा में रही, लेकिन पंजाबी किसी बाहरी नेता को कबूल नहीं करते। इसलिए यह विकल्प पिट गया। तमाम कोशिश के बीच चुनाव सिर पर आ गए तो अरविंद केजरीवाल की मजबूरी बन गई और भगवंत मान के नाम की घोषणा करनी पड़ी। इसके लिए केजरीवाल ने एक फर्जी रायशुमारी करा डाली। इस रायशुमारी के बहाने केजरीवाल ने मान के चयन की जिम्मेदारी पंजाब की जनता पर डाल दी। इसके जरिए उन्होंने वोटरों पर भी दबाव बनाने की कोशिश की है।

पंजाब के सिख स्टेट होने की वजह से बाहरी को लोग स्वीकार नहीं
दिल्ली के बाद केजरीवाल को पंजाब के सपने आ रहे हैं। ऐसे में आप की कोशिश थी कि कोई बड़ा चेहरा सीएम की रेस में हो। लेकिन कोई साथ नहीं आया। आम आदमी पार्टी से सारे बड़े चेहरे पहले ही निकाले जा चुके हैं या छोड़कर चले गए। अकेले अरविंद केजरीवाल बचे हैं, लेकिन पंजाब के सिख स्टेट होने की वजह से बाहरी को लोग स्वीकार नहीं करते। 2017 में आप ने इसका खामियाजा भी भुगता। जब किसान आंदोलन चला तो आप की नजर किसान नेता बलबीर राजेवाल पर जा टिकी। हालांकि किसान अलग चुनाव लड़ने के हक में थे और आप उन्हें पार्टी में शामिल होकर लड़वाना चाहती थी। इसलिए बात टूट गई।

केजरीवाल को पंजाब की सियासत में पटखनी दे गए मान
वैसे पंजाब में एक चर्चा और भी है। आप नेता मान रहे हैं कि भगवंत मान ने अपना चुनाव कराकर केजरी को पटखनी दे दी। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवंत मान पंजाब में आप के चेहरे तो हैं, लेकिन सीएम के दावेदार होंगे, ऐसा पार्टी के भीतर माहौल नहीं था। हालांकि चुनाव नजदीक आते भगवंत मान ने माहौल बनाना शुरू कर दिया। जब बाहर के किसी दूसरे दिग्गज की बात न बनी तो मान ने दिल्ली जाकर दावा ठोक दिया। उससे पहले करीबी विधायकों को भी भरोसे में लिया। केजरीवाल ने बात न सुनी तो नाराज होकर घर बैठ गए। पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाकर केजरी के आगे सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। आप के वालंटियर नाराज होने लगे और बठिंडा देहाती से विधायक रहीं रूपिंदर रूबी तो यही बात कहकर पार्टी छोड़ गईं। नतीजा केजरीवाल पर दबाव बढ़ता चला गया। पंजाब में केजरीवाल की सभाओं में भगवंत मान के नारे लगने लगे। इसका असर खीझ के तौर पर अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर साफ दिखता था।

भगवंत मान और शराब के विवादों का खूब रहा है नाता
भगवंत मान का नाम विवादों से भी जुड़ा रहा है। 2016 में उन्होंने संसद भवन परिसर में वीडियो शूट कर सोशल मीडिया पर डाल दिया। इससे वह खूब विवाद में रहे। लोकसभा स्पीकर ने जांच के लिए कमेटी बनाई तो मान ने माफी मांग ली। इसी दौरान AAP से निलंबित सांसद हरिंदर खालसा ने मान के शराब पीकर आने का मुद्दा उठा दिया। खालसा ने तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को इसकी शिकायत कर दी थी। पंजाब में अब भी विरोधी अक्सर उन पर शराब पीने को लेकर आरोप लगाते रहते हैं। शिरोमणि अकाली नेता सुखवीर बादल आरोप लगाते हैं कि मान मां की कसम खाने के बाद भी शराब पीते हैं।

मान ने स्टेज पर मां की कसम खाई थी, शराब छोड़ दी है
साल 2019 में आम आदमी के सांसद भगवंत मान पर शराब पीने के आरोप ज्यादा लगने लगे तो अरविंद केजरीवाल की रैली के दौरान मान अपनी मां के साथ मंच पर आए। उन्होंने कहा कि वे पहले कभी-कभी शराब पी लिया करते थे लेकिन उन्हें शराबी कहकर बदनाम किया जा रहा था। भगवंत मान ने मां की कसम खाई कि मैंने 1 जनवरी से शराब पूरी तरह छोड़ दी है, अब इसे कभी हाथ भी नहीं लगाऊंगा। मान ने कहा था कि मां ने उन्हें कहा मैं शराब तो कम पीता हूं, लेकिन बदनाम ज्यादा हो रहा हूं। तुम्हें लोग इतना बोलते हैं तो शराब छोड़ क्यों नहीं देते? इसके बाद मैंने मां की बात मानते हुए शराब छोड़ दी। मैंने मां से वादा किया कि अब मैं शराब को कभी हाथ नहीं लगाऊंगा।

कॉमेडियन मान एक दशक पहले सियासत में आए, आप से बने सांसद
आम आदमी पार्टी में आने से पहले भगवंत मान पंजाब में सफल कॉमेडियन थे। 2011 में मान सियासत में आए। उन्होंने कांग्रेस सरकार में वित्तमंत्री मनप्रीत बादल की पंजाब पीपुल्स पार्टी जॉइन की। 2012 में लेहरागागा से चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 2014 में भगवंत मान ने मनप्रीत का साथ छोड़ आम आदमी पार्टी जॉइन कर ली। इसी साल चुनाव लड़े और संगरूर से सांसद बन गए। तब मान के साथ 3 और उम्मीदवार जीते। उस वक्त कहा गया कि पंजाब में आप की लहर थी, इसलिए मान जीते। लेकिन वे 2019 में दूसरी बार लोकसभा चुनाव में जीत गए। आप की थोड़ी बहुत इज्जत मान ने ही ही बचाई।

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