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संजय राउत के बायन पर सियासत गर्म, फडणवीस ने पूछा सवाल, क्या कांग्रेस को अंडरवर्ल्ड से मिलता था पैसा ?

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शिवसेना नेता संजय राउत ने एक मीडिया समूह को दिए साक्षात्कार में दावा किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी गैंगस्टर करीम लाला से मिलने पाइधोनी (दक्षिण मुंबई) आती थीं। इस दावे के बाद महाराष्‍ट्र के साथ ही राष्‍ट्रीय राजनीति भी गरमा गई। सियासी मैदान में बयानबाजी शुरू हो गई। हालांकि कांग्रेस के तेवर को देखते हुए राउत ने अपना बयान वापस ले लिया। लेकिन सियासी पारा फिलहाल उतरने का नाम नहीं ले रहा है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने संजय राउत के बहाने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संजय राउत ने बहुत बड़ा खुलासा किया है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर कई सवाल भी दागे। फडणवीस ने सवाल उठाया, ‘क्यों आती थीं इंदिरा गांधीजी मुंबई? क्या अंडरवर्ल्ड के सहारे कांग्रेस चुनाव जीतती थी? क्या कांग्रेस को अंडरवर्ल्ड की फंडिंग थी? 

पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी पूछा कि क्या उन दिनों कांग्रेस को चुनाव जीतने के लिए बाहुबल की जरूरत थी ? फडणवीस ने राउत का हवाला देते हुए कहा कि अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा शकील और दाऊद इब्राहिम तय करते थे कि ‘पुलिस आयुक्त कौन होगा, साथ ही ‘मंत्रालय’ (राज्य सचिवालय) में नियुक्ति भी…’

विवाद बढ़ते देख संजय राउत ने सफाई दी। लेकिन विवाद थमने की जगह और बढ़ गया। राउत ने अपनी सफाई में समझाने की कोशिश की कि इसमें कौन सी बड़ी बात है – जैसे हर कोई मिलता था, इंदिरा गांधी भी मिलती रहीं। इससे सवाल उठता है कि इंदिरा गांधी की तरह मुलाकात करने वालों में और कौन कौन थे ? कांग्रेस के किन-किन नेताओं का संपर्क अंडरवर्ल्ड से रहा है ?

कांग्रेस की ओर से जताई गई आपत्ति के बाद संजय राउत ने बयान भले ही वापस ले लिया हो लेकिन अब एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें इंदिरा गांधी और करीम लाला एक साथ दिख रहे हैं। तस्वीर में तीसरे शख्स ह्रदयनाथ चटोपाध्याय भी दिख रहे हैं। ये तस्वीर 1973 की है जब कवि ह्रदयनाथ चटोपाध्याय को भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।

करीम लाला के पोते ने बड़ा खुलासा किया कि करीम लाला के दफ्तर में इंदिरा गांधी की उनके साथ मुलाकात की तस्वीरें हैं। यही नहीं, करीम लाला के साथ एनसीपी चीफ शरद पवार और पूर्व शिवसेना चीफ बाल ठाकरे की तस्वीरें भी मौजूद हैं।

रॉ के एक पूर्व अधिकारी एनके सूद के अनुसार एनसीपी के मुखिया शरद पवार के दाऊद से करीबी संबंध थे। सूद ने एक साक्षात्कार में कहा कि जब दाऊद और मुंबई धमाकों के अन्य आरोपी देश से भागे, तब पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। उनके मुताबिक धमाकों के बाद दाऊद और उसके गुर्गों के खिलाफ कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने सख्ती नहीं की। इस सबसे संकेत मिलते हैं कि शरद पवार और दाऊद के बीच संबंध थे। इसके अलावा, सूद ने कहा कि जब जाँच एजेंसियों ने सरकार से दाऊद इब्राहिम की सम्पत्तियों को ज़ब्त करने के लिए कहा, तो पवार ने यह कहकर कि यहाँ दाऊद की कोई संपत्ति नहीं है इसमें अड़ंगा डाला।

सूद ने कहा कि दाऊद को पकड़ने में मनमोहन सरकार ने भी कोई रुचि नहीं दिखाई थी। रिटायर होने के बाद अजित डोभाल को उसे दुबई में गिरफ़्तार कर देश लाने के लिए बुलाया गया था। ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए दो अधिकारियों का चयन किया गया। जब डोभाल उन्हें हवाई अड्डे की ओर जाने वाली कार में ऑपरेशन के बारे में बता रहे थे, तो दिल्ली के डीएसपी ने उन्हें दुबई जाने और अपने ऑपरेशन को अंजाम देने से रोक दिया। इस तरह के एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन में, एक सरकारी कर्मचारी के अंतिम मिनट के हस्तक्षेप से पता चलता है कि कांग्रेस, एनसीपी और अन्य वरिष्ठ नेता नहीं चाहते थे कि दाऊद पकड़ा जाए।

पूर्व रॉ अधिकारी सूद ने बताया कि कई कांग्रेस नेताओं, विशेष रूप से सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल का भी दाऊद इब्राहिम के साथ संबंध था। सूद ने कहा कि उस समय खाड़ी देशों में रॉ की यूनिट को जानबूझकर बर्बाद किया गया। इसमें रतन सहगल और हामिद अंसारी की भूमिका होने की बात उन्होंने कही। सहगल बाद में सीआईए का एजेंट साबित हुआ। बकौल सूद ये तथ्य संदेह पैदा करते हैं।

जुलाई 2019 में एन के सूद समेत अन्य कई पूर्व रॉ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी लिखकर उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए उन पर रॉ के मिशन को नुकसान पहुंचाने के खिलाफ जांच की मांग की।

अक्टूबर 2019 में दाऊद के सहयोगी इकबाल मिर्ची और एनसीपी के प्रमुख नेता प्रफुल्ल पटेल की कंपनी के बीच मुंबई में एक जमीन के समझौते का मामला सामने आया। जिसकी जांच ईडी कर रही है। आरोप है कि प्रफुल्ल पटेल के परिवार द्वारा प्रमोटेड कंपनी मिलेनियम डेवलपर्स और मिर्ची के नाम से कुख्यात दिवंगत इकबाल मेमन के बीच सौदा हुआ था। इसमें मिर्ची और इस प्राइवेट कंपनी ने मिलकर 15 मंजिली इमारत सेजे हाउस बनाई थी। मिर्ची की जमीन थी और बदले में 2007 में इमारत बनाने वाली कंपनी ने उसे 14 हजार वर्गफुट के तीसरी-चौथी मंजिल के फ्लैट दिए थे।

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