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भारत में बने जेट विमानों का अब होगा निर्यात, मलेशिया को 18 लड़ाकू विमान बेचने की पेशकश, तेजस में रुचि दिखा रहे और कई देश

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के तहत अब विमानन से लेकर रक्षा क्षेत्र में भी मेक इन इंडिया धूम मचाने को तैयार है। भारत के स्‍वदेशी जेट विमान तेजस (Tejas) की डिमांड पूरी दुनिया में हो रही है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपीन समेत छह देशों ने भारत के तेजस विमान में रुचि दिखाई है, वहीं मलेशिया पहले ही इस विमान को खरीदने की तैयारी में है। भारत ने मलेशिया को 18 तेजस बेचने की पेशकश की है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित तेजस बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है जिसकी क्षमता अत्यधिक खतरे वाले माहौल में परिचालन की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार विदेशी रक्षा उपकरणों पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। इसके अलावा सरकार भारत में बने जेट विमानों के निर्यात के लिए राजनयिक प्रयास भी कर रही है।

मलेशिया को 18 विमान बेचने की पेशकश

रक्षा मंत्रालय ने संसद को बताया कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को पिछले साल अक्टूबर में रॉयल मलेशियाई वायु सेना से एक प्रस्ताव मिला था। इसका जवाब देते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स ने 18 जेट विमानों को बेचने का प्रस्ताव रखा था, जिसमें तेजस के दो सीटों वाले संस्करण को बेचने की पेशकश की गई थी।

अर्जेंटीना और मिस्र की भी तेजस विमान में दिलचस्पी

रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा में कहा कि तेजस विमान में दिलचस्पी दिखाने वाले अन्य दो देश अर्जेंटीना और मिस्र हैं। मलेशिया अपने पुराने रूसी मिग-29 लड़ाकू विमानों को बदलने के लिए तेजस विमान खरीद रहा है। भट्ट ने कहा कि एलसीए विमान में रुचि दिखाने वाले अन्य देशों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, अमेरिका, इंडोनेशिया और फिलीपीन हैं।

फिलीपीन्स भी खरीदना चाहता है तेजस

ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की तीन बैटरी की खरीद के लिए 30.75 करोड़ डॉलर के सौदे पर मुहर लगाने के कुछ महीने बाद फिलीपीन्स अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए भारत से उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर खरीदने पर विचार कर रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ दशकों से चल रहे क्षेत्रीय विवादों के साथ-साथ अन्य समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए फिलीपीन अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। रक्षा प्रतिष्ठान के अधिकारियों ने बताया कि फिलीपीन ने अपने पुराने हेलीकॉप्टर बेड़े को बदलने के लिए कई उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) की खरीद में दिलचस्पी दिखाई है।

तेजस विमानों की डिलीवरी 2023 से शुरू होगी

पीएम मोदी के विजन पर चलते हुए भारत ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का निर्माण शुरू किया है। अपनी हवाई क्षमता में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि के लिए भारत उन्नत सुविधाओं के साथ पांचवीं पीढ़ी के मध्यम वजन वाले लड़ाकू जेट विकसित करने की परियोजना पर काम कर रहा है। परियोजना पर प्रारंभिक अनुमानित खर्च 1500 करोड़ रुपये है। भारत सरकार ने पिछले साल सरकार के स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया था। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) खरीदने के वास्ते पिछले साल फरवरी में एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये का करार किया था। एचएएल को इन विमानों की 2023 से डिलीवरी शुरू करना है।

स्टील्थ फाइटर जेट के निर्माण पर भी काम कर रहा भारत

भट्ट ने कहा कि देश एक स्टील्थ फाइटर जेट के निर्माण पर भी काम कर रहा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए समयसीमा देने से इनकार कर दिया है। भारत के पास अभी रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के लड़ाकू विमान हैं। रूसी विमानों में मिग और सुखोई शामिल हैं जबकि जगुआर विमानों को ब्रिटेन से खरीदा गया था। फ्रांस से मिराज और हाल में राफेल विमानों को खरीदा गया है।

अब भारत के पास भी अरेस्टेड लैंडिंग की तकनीक

अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और चीन के बाद अब भारत के पास भी अरेस्टेड लैंडिंग की तकनीक आ गई है। छोटे रनवे पर लैंड करने के लिए अरेस्टेड लैंडिंग की जरुरत पड़ती है। अरेस्टेड लैंडिंग के लिए प्लेन्स के पीछे के हिस्से में मजबूत स्टील के वायर से जोड़कर एक हुक लगाई जाती है। लैंडिंग के दौरान पायलट को यह हुक युद्धपोत या शिप में लगे स्टील के मजबूत केबल्स में फंसानी होती है, ताकि जैसे ही प्लेन डेक पर उतरे वैसे ही हुक तारों में पकड़कर उसे थोड़ी दूरी पर रोक ले।

सबसे उन्नत व हल्का लड़ाकू विमान है तेजस

एचएएल की ओर से विकसित तेजस को सबसे उन्नत और सबसे हल्के लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। ये अपने मूल वैरिएंट में 43 बदलावों के बाद अप्रूव हुई है। एलसीए-तेजस कम ऊंचाई पर उड़ते हुए सुपरसोनिक स्पीड से दुश्मन पर हमला करने में सक्षम है। ऊंचाई कम होने की वजह से ये कई बार दुश्मन के रडार को भी चमका देने में कामयाब रहता है। तेजस मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसका इस्तेमाल एयर टू एयर, एयर टू ग्राउंड स्ट्राइक में किया जाता है। भारतीय वायुसेना में तेजस से लैस दो स्क्वॉड्रन हैं। पिछले साल स्क्वॉड्रन नंबर 45 विशेष रूप से तेजस के साथ बनाया गया था, जिसका नाम Flying Daggers रखा गया है। हालांकि नए तेजस विमान पहले मिल चुके तेजस से और भी ज्यादा बेहतर होंगे। स्वदेशी रूप से विकसित नयी पीढ़ी का एएलएच हेलीकॉप्टर 5.5 टन भार वर्ग में दो इंजन वाला बहु-उद्देश्यीय हेलीकॉप्टर है और इसे विभिन्न सैन्य अभियानों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

ग्रिपेन और एफ-16 के मुकाबले तेजस

अगर तेजस, ग्रिपेन और एफ-16 की तुलना करें तो तेजस इनमें सबसे हल्का और छोटा लड़ाकू विमान है लेकिन आधुनिकता के मामले में यह इन दोनों से कई मोर्चों पर आगे नजर आता है क्योंकि यह बाकी दोनों की अपेक्षा नया है। इसके साथ ही तेजस में लगातार सुधार किया जा रहा है। तेजस के साथ भी ऐसा ही है इसकी रेंज, कलाबाजी करने की काबिलियित और सटीक हमला व घातक हथियार ले जाने की क्षमता में इजाफा हो रहा है और आईओसी से एफओसी तक के तेजस में ही काफी बदलाव आ चुका है।

लगातार दुरुस्त होता स्वदेशी लड़ाकू विमान

सबसे महत्वपूर्ण बात जो किसी दूसरे देश के बजाय स्वदेशी फाइटर जेट को खरीदने पर जोर देती है वह है कि जब स्वदेशी प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया जाता है तो इसमें जरूरत के मुताबिक बदलाव और लगातार सुधार किए जा सकते हैं जबकि विदेशी फाइटर जेट में निर्धारित क्षमता मिलती है जिसकी मरम्मत और अपग्रेड के लिए लगातार दूसरे देश पर निर्भर रहना पड़ता है।

वायुसेना को मिलेंगे 83 तेजस लड़ाकू विमान

आसमान में भारत की ताकत को बढ़ाने के लिए सरकार ने भारतीय वायुसेना के लिए 83 तेजस लड़ाकू विमान की खरीद को मंजूरी प्रदान कर दी थी। 48 हजार करोड़ रुपये की यह डील हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को दी गई है। इस डील को स्वदेशी मिलिट्री एविएशन सेक्टर की सबसे बड़ी डील माना जा रहा है। बेंगलुरु में एशिया के सबसे बड़े एयर शो एयरो इंडिया-2021 के उद्घाटन अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति मे रक्षा मंत्रालय में महानिदेशक रक्षा खरीद ने एचएएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आर माधवन को अनुबंध से संबंधित दस्तावेज प्रदान किए। डील के तहत एचएएल वायु सेना के लिए 83 मार्क 1ए लड़कू विमान बनाएगा और इन पर करीब 48 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह मेक इन इंडिया के तहत अब तक का सबसे बड़ा सौदा है। विमानों के दो संस्करण होंगे, जिनमें 73 तेजस मार्क 1 ए होंगे और 10 तेजस मार्क 1 होंगे।

तेजस परियोजना 2003 में शुरू हुई थी

तेजस परियोजना 2003 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय शुरू हुई थी। तेजस विमान ने अब तक विभिन्न आयोजनों और मौकों पर अपने करतब तथा जौहर दिखाए हैं और यह विमान 6000 सफल उड़ान भर चुका है। भारतीय वायु सेना पहले 40 लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट की डील कर चुकी है। इसी के साथ भारतीय वायु सेना के लिए कुल 123 तेजस विमानों की डील हुई है। जहां तक Mk-1A वैरिएंट की बात है तो यह डिजिटल रडार वार्निंग, सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर पॉड्स जैसी कई सुविधाओं के साथ आने की उम्मीद है।

वायुसेना में मिग-21 का स्थान तेजस ने लिया

तेजस दुनिया के खतरनाक युद्धक विमानों में शामिल हैं, यह बेहद हल्का है, विमान की खासियत है इसकी रफ्तार और क्षमता है, देश में तैयार किए गए तेजस की गिनती दुनिया के खतरनाक लड़ाकू विमानों में होती है। इस लड़ाकू विमान का नाम तेजस मई 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था। वायुसेना से रिटायर हुए मिग-21 का स्थान इसी विमान ने लिया है। तेजस में डेल्टा बैंक आर्किटेक्चर है। इसे ह्यूमन मशीन इंटरफ़ेस कंसेप्ट के आधार पर तैयार किया गया है। यह हवा से जमीन तक मार करने में सक्षम है, तेजस की श्रृंखला में इसका उत्पादन कार्य 2007 में शुरू हुआ फिर इसे नौसेना के लिए भी बनाया गया ताकि से विमान वाहन पोतों से भी उड़ान भर सके। आज पूरे विश्व में सबसे खतरनाक और तेज लड़ाकू विमानों में तेजस की गिनती होती है।

तेजस की ये है खासियत

एलसीए तेजस स्वदेशी 4.5 जनरेशन का लड़ाकू विमान है। इसे भारत में हीहिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है। एलसीए तेजस, डसॉल्ट राफेल, सुखोई थर्टी, एमकेआई डसॉल्ट, मिराज mig-21 बायसन जैसे प्रमुख लड़ाकू विमानों के साथ भारतीय वायुसेना का हिस्सा बन चुकी है। खास बात ये है कि ये एयरक्राफ्ट पलक झपकते ही आसमान की ऊंचाइयों पर पहुंच जाता है।

50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम

तेजस2376 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से उड़ान भर सकता है, यह45.4 फीट लंबा 14.9 फीट ऊंचा है, इसका कुल वजन 13500 किलो ग्राम है। यह 50 हजार फीट तक ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है, खास बात ये है कि ये बेहद कम महज 460 मीटर के रनवे से भी टेकऑफ कर सकता है। यह एक सुपर सोनिक फाइटर जेट है, जो सबसे खतरनाक ब्रह्मोस मिसाइल को कैरी कर सकता है।

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