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2022 तक भारत आसानी से प्राप्त कर लेगा 1,75,000 मेगावाट Renewable Energy उत्पादन का लक्ष्य

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2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के 1,75,000 मेगावाट के लक्ष्य  को प्राप्त  करने की दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक  मार्च 2014 तक देश की नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 34,000 मेगावाट थी, जो सितंबर 2019 में बढ़कर 82,580 मेगावाट हो गई है।

सितम्‍बर 2019 के अंत तक भारत में 82,580 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की स्‍थापना की जा चुकी है और 31,150 मेगावाट की क्षमता स्‍थापित करने के विभिन्‍न चरणों में है। 2021 की पहली तिमाही तक भारत 1,13,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की स्‍थापना कर चुका होगा। यह लक्षित क्षमता का लगभग 65 प्रतिशत होगा। इसके अतिरिक्‍त 49,000 मेगावाट क्षमता की विभिन्‍न परियोजनाएं बोली के विभिन्‍न चरणों में हैं जिन्‍हें सितम्‍बर 2021 तक स्‍थापित कर दिया जायेगा। इससे कुल लक्ष्‍य के 87 प्रतिशत से अधिक क्षमता की स्‍थापना हो सकेगी। वर्तमान में 23,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन की बोली बाकी बची है और भारत को विश्‍वास है कि भारत 1,75,000 मेगावाट की क्षमता न सिर्फ स्‍थापित करेगा बल्कि इससे अधिक अच्‍छा प्रदर्शन करेगा।

नवीकरणीय ऊर्जा में लगातार बढ़ोतरी से इसके दरों में काफी तेजी से कमी आ रही है। 2016 में जहां पवन ऊर्जा प्रति यूनिट की कीमत 4.18 थी, जो सितंबर 2019 में 2.75 रुपये प्रति यूनिट हो गई है। इसी तरह  सौर ऊर्जा की कीमत 2016 में 4.43 रुपये प्रति यूनिट से घटकर सिंतबर 2019 में 2.44 रुपये प्रति यूनिट हो गई है। 

पवन ऊर्जा
2016- 4.18 रुपये/ यूनिट
सितंबर 2019- 2.75 रुपये/ यूनिट

सौर ऊर्जा
2016- 4.43 रुपये/ यूनिट
सिंतबर 2019- 2.44 रुपये/ यूनिट

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मार्च, 2014 से भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 138 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 34,000 मेगावाट से बढ़कर 82,580 मेगावाट हो गई है। विश्‍वभर में भारत सौर ऊर्जा में पांचवें स्‍थान पर, पवन ऊर्जा में चौथे और कुल नवीकरणीय ऊर्जा स्‍थापित क्षमता में चौथे स्‍थान पर है।

मंत्रालय संबंधित राज्‍य सरकारों के साथ विचार-विमर्श कर गुजरात में भूमि के आवंटन और राजस्‍थान में भूमि सुधार शुल्‍क मे बदलाव संबंधी मुद्दों का समाधान करने के प्र‍ति तत्‍पर है। मंत्रालय भूमि आवंटन की समस्‍या से निपटने के लिए अल्‍ट्रा मेगा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क की स्‍थापना करने की प्रक्रिया में कार्यरत है। इन पार्क में निर्धारित वितरण सुविधा होगी। ऐसा पहला पार्क एसईसीआई द्वारा गुजरात के धोलेरा में स्‍थापित किया जायेगा।

मंत्रालय ने तीन नई योजनाओं की शुरूआत की है। इन योजनाओं से भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सौर सेल और मॉड्यूल निर्माण क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को विश्‍वास है कि भारत न सिर्फ 1,75,000 मेगावाट के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करेगा बल्कि 2022 तक इससे भी अधिक क्षमता स्‍थापित करेगा।

अभी हाल ही में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा था कि भारत की जीवन पद्धति दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण है। भारतीय मूल के लोग, सिद्धांततः इस बात को मानने वाले लोग हैं कि पृथ्वी हमारी माता है और हमें उसका शोषण करने का अधिकार नहीं है हमें सिर्फ़ उसके दोहन का ही अधिकार है। भारत मूलतः उस चिंतन से जुड़ा हुआ है, जहाँ आवश्यकता समझ सकते हैं परंतु लालच का कोई स्थान नहीं है। ये मूलभूत तत्व ज्ञान है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का सपना है कि भारत का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा से भरा हो। प्रधानमंत्री के इस सपने को साकार करने की दिशा में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय-Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) ने कई कदम उठाए हैं।

2022 तक 175 गीगावाट की अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य

भारत सरकार ने 2022 के आखिर तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा संस्‍थापित क्षमता का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। इसमें से 60 गीगावाट पवन ऊर्जा से, 100 गीगावाट सौर ऊर्जा से, 10 गीगावाट बायोमास ऊर्जा से एवं पांच गीगावाट लघु पनबिजली से शामिल है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पिछले वर्षों के दौरान सोलर पार्क, सोलर रूफटॉप योजना, सौर रक्षा योजना, नहर के बांधों तथा नहरों के ऊपर सीपीयू सोलर पीवी पॉवर प्‍लांट के लिए सौर योजना, सोलर पंप, सोलर रूफटॉप के लिए बड़े कार्यक्रम शुरू किये गए हैं।

पवन ऊर्जा क्षमता-स्थापना में भारत दुनिया में चौथे नंबर पर
भारत में पवन ऊर्जा उपकरण निर्माण का मजबूत आधार है। भारत में बनाई जाने वाली पवन टर्बाइन विश्‍व गुणवत्‍ता मानको के अनुरूप है और यूरोप, अमेरिका तथा अन्‍य देशों से आयातीत टर्बाइनों में सबसे कम लागत की है। वर्ष 2016-17 के दौरान पवन ऊर्जा में 5.5 गीगावाट की क्षमता जोड़ी गई जो देश में अब तक एक वर्ष में जोड़ी गई क्षमता में सबसे अधिक है। पवन ऊर्जा क्षमता की स्‍थापना में भारत विश्‍व में चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद चौथे स्‍थान पर है।

पहली बार बिजली निर्यातक बना देश
पांच साल पहले देश अभूतपूर्व बिजली संकट झेल रहा था, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि अब देश में खपत से अधिक बिजली उत्पाद होने लगा है। केंद्रीय विधुत प्राधिकरण के अनुसार भारत ने पहली बार वर्ष 2016-17 ( फरवरी 2017 तक) के दौरान नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार को 579.8 करोड़ यूनिट बिजली निर्यात की, जो भूटान से आयात की जाने वाली करीब 558.5 करोड़ यूनिटों की तुलना में 21.3 करोड़ यूनिट अधिक है। 2016 में 400 केवी लाइन क्षमता (132 केवी क्षमता के साथ संचालित) मुजफ्फरपुर – धालखेबर (नेपाल) के चालू हो जाने के बाद नेपाल को बिजली निर्यात में करीब 145 मेगावाट की बढ़ोत्तरी हुई है।

बिजली उत्पादन बढ़ा, बर्बादी रुकी

मोदी सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का असर है कि देश में लगातार बिजली उत्पादन में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसकी दो बड़ी वजहें हैं। एक तरफ वितरण में होने वाला नुकसान कम हुआ है। दूसरी ओर सफल कोयला एवं उदय नीति से उत्पादन बढ़ा है। जैसे- 2013-14 में बिजली उत्पादन 96,700 करोड़ यूनिट हुआ था, जो 2014-15 में बढ़कर 1,04,800 करोड़ यूनिट हो गया। ये दौर आगे भी जारी रहा और 2015-16 में बिजली उत्पादन 1,10,700 करोड़ यूनिट हो गया, जिसकी वजह ऊर्जा नुकसान में 2.1 प्रतिशत की कमी रही। ऊर्जा नुकसान 2015-16 में जहां 2.1 प्रतिशत थी जो अब घटकर 0.7 प्रतिशत (अप्रैल-अक्टूबर, 2016) रह गई है। 2015-16 की तुलना में अब राष्ट्रीय पीक पावर डिफिसिट घटकर आधा यानि 1.6 प्रतिशत रह गया है।

परमाणु बिजली उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता

मोदी सरकार ने 10 नए Pressurized Heavy-Water Reactors (PHWR) के निर्माण का फैसला किया है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये काम अपने वैज्ञानिक करेंगे और कोई भी विदेशी मदद नहीं ली जाएगी। इन दस नए स्वदेशी न्यूक्लियर पावर प्लांट से 7,000 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकेगी। इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि भारत भी विश्व के अन्य देशों को Pressurized Heavy-Water Reactors की तकनीक देने वाला देश बन जायेगा, जो मेक इन इंडिया योजना को बहुत अधिक सशक्त करेगा। इसके अतिरिक्त 2021-22 तक 6,700 मेगावाट परमाणु ऊर्जा पैदा करने के लिए अन्य न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण का भी काम चल रहा है। इस समय देश में कुल 22 न्यूक्लियर पावर प्लांट बिजली पैदा कर रहे हैं जिनसे कुल 6,780 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है।

सड़कें हो रही हैं ‘उजाला’
प्रधानमंत्री मोदी ने 5 जनवरी 2015 को 100 शहरों में पारंपरिक स्ट्रीट और घरेलू लाइट के स्थान पर LED लाइट लगाने के कार्यक्रम की शुरूआत की थी। इस राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइटिंग कार्यक्रम (NSLP) का उद्देश्य 1.34 करोड़ स्ट्रीट लाइट के स्थान पर LED लाइट लगाना है।

हमारी सरकार में करीब 35 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किए गए हैं। जिससे लगभग 18,341 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत हो रही है। हमारे आने से पहले एलईडी बल्ब की कीमत 350-400 रुपए थी अब इसकी कीमत अब 45-70 रुपये तक आ गई है।

रीयल टाइम मिलेगी पॉवरकट की सूचना
केंद्र सरकार ने 24×7 किफायती और बिना बाधा के देश को बिजली देने के लिए ‘ऊर्जा मित्र एप’ लांच किया है। ऐसी सुविधा बिजली उपभोक्ताओं को पहली बार मुहैया कराई जा रही है। लोग www.urjamitra.com तथा ‘ऊर्जा मित्र एप’ पर देश के शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटने की सूचना पा सकते हैं। ये जानकारी उपभोक्ताओं तक रीयल टाइम में पहुंच जाती है और वो इससे जुड़ी शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।

 

 

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