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India-EU Summit 2026: भारत-यूरोपीय संघ ने रचा इतिहास, ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर लगी मुहर

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आज एक बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया। राजधानी दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुए 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों ने अपने इतिहास के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत के व्यापारिक इतिहास का सबसे बड़ा करार दिया। उन्होंने कहा कि यह डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-EU रिश्तों को एक नई दिशा देने वाली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में 27 जनवरी को इस महा-समझौते पर मुहर लगी। माना जा रहा है कि यह डील वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक नया मोड़ साबित होगी।

इस शिखर सम्मेलन की खास बात यह रही कि यहां सिर्फ FTA ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और रक्षा से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। अब भारत और EU सिर्फ सामानों का लेन-देन ही नहीं करेंगे, बल्कि सुरक्षा के मोर्चे पर भी एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को सिर्फ एक व्यापारिक डील नहीं, बल्कि साझा समृद्धि का एक ब्लूप्रिंट बताया। उन्होंने कहा कि यह एग्रीमेंट ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और इनोवेशन के नए रास्ते खोलेगा। पीएम मोदी ने इसे ‘Partnership for Global Good’ करार दिया। इस समझौते से भारत और 27 यूरोपीय देशों के बीच व्यापार, निवेश और इनोवेशन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

इस मौके पर भारत और EU के बीच तीन महत्वपूर्ण दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी हुआ। पहला समझौता ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स के गठन से जुड़ा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा के मानकों और सर्टिफिकेशन को एक जैसा किया जाएगा। दूसरा समझौता आरबीआई और यूरोपियन सिक्योरिटीज एंड मार्केट्स अथॉरिटी के बीच हुआ, जिससे वित्तीय निगरानी और नियमों में सहयोग बढ़ेगा। तीसरा समझौता एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक सील्स और डिजिटल सिग्नेचर से जुड़ा है, जो भारत-EU डिजिटल ट्रेड को सुरक्षित और आसान बनाएगा।

इस एफटीए में भारत ने अपने संवेदनशील सेक्टरों का खास ध्यान रखा है। कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में घरेलू हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। सरकार का कहना है कि इस समझौते से किसानों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि उन्हें यूरोप का बड़ा बाजार मिलने का रास्ता खुलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता- हमारे किसानों, हमारे छोटे उद्योगों की यूरोपियन मार्केट तक पहुंच आसान बनाएगा, मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा, और हमारे सर्विसेज सेक्टर्स के बीच सहयोग को और प्रबल करेगा।

भारत और EU के बीच FTA पर बातचीत की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। कई वजहों से यह प्रक्रिया बीच में अटक गई, लेकिन 2022 में इसे दोबारा शुरू किया गया। करीब 19 साल की बातचीत के बाद अब यह समझौता हकीकत बन सका है। 27 जनवरी की यह तारीख अब भारत और 27 यूरोपीय देशों के व्यापारिक रिश्तों के लिए मील का पत्थर बन गई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता लोकतंत्र, कानून के शासन और मल्टीलेट्रलिज्म के प्रति भारत और EU की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार जरूरी है।

पीएम मोदी ने कहा कि एक दिन पहले यूरोपीय नेताओं का गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होना और आज इस डील का साइन होना, भारत-EU संबंधों के स्वर्णिम युग की शुरुआत है। यह समझौता ब्रिटेन और EFTA देशों के साथ हुए व्यापारिक समझौतों का भी पूरक बनेगा।

इस समझौते के बाद भारत में यूरोपीय निवेश बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स और कंपनियों के लिए यूरोप के बाजार के दरवाजे और आसान हो जाएंगे। आने वाले वर्षों में इस डील का असर भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार में साफ तौर पर दिखाई देगा।

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